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दिल्ली में प्रदूषण से जंग के लिए ₹8,300 करोड़ का मेगा प्लान, 65% फंड देगा वर्ल्ड बैंक

दिल्ली सरकार ने वर्ल्ड बैंक की साझेदारी से 8,300 करोड़ रुपये का सात वर्षीय प्रदूषण कंट्रोल प्रोग्राम शुरू करने का ऐलान किया है.

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दिल्ली प्रदूषण पर सरकार का मेगा प्लान (File Photo: PTI)
दिल्ली प्रदूषण पर सरकार का मेगा प्लान (File Photo: PTI)

दिल्ली सरकार ने शुक्रवार को राष्ट्रीय राजधानी में वायु प्रदूषण से निपटने के लिए 8,300 करोड़ रुपये के सात साल के प्रोग्राम का ऐलान किया है. इस प्रोग्राम के लिए 65 फीसदी धनराशि वर्ल्ड बैंक दे रही है और 35 फीसदी फंड दिल्ली सरकार से मिलेगा. 

मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि 'स्वच्छ वायु, स्वस्थ दिल्ली' टाइटल वाला प्रोजेक्ट सितंबर 2026 से अगस्त 2033 तक चलेगा. उन्होंने कहा कि इसका मकसद एयर क्वालिटी मैनेजमेंट को मजबूत करना और पूरे शहर में प्रमुख प्रदूषण स्रोतों से उत्सर्जन में कटौती करना है.

तैयारियों को अंतिम रूप देने और सभी स्टेकहोल्डर के बीच कोऑर्डिनेशन में सुधार के लिए 10 जुलाई को एक स्पेशल वर्कशॉप आयोजित किया जाएगा.

दिल्ली सरकार का क्या मकसद?

सीएम रेखा गुप्ता ने कहा, "वर्कशॉप में कई विभागों और एजेंसियों की भूमिकाओं को परिभाषित करेगी और परियोजना के प्रभावी और समय पर इम्प्लीमेंटेशन के लिए रोडमैप पर चर्चा होगी. यह कार्यक्रम दिल्ली के एयर पॉल्यूशन मिटिगेशन प्लान को गति देगा, राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम के टारगेट्स में मदद करेगा और विकसित भारत 2047 उद्देश्य की मदद करेगा.

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पर्यावरण विभाग के इस प्रोजेक्ट में प्रदूषण से जुड़े मुख्य क्षेत्रों को शामिल किया जाएगा, जैसे ट्रांसपोर्ट, सड़क की धूल, कंस्ट्रक्शन और तोड़-फोड़ से निकलने वाला कचरा, सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट, इंडस्ट्रीज, ग्रीन स्पेस और जल प्रदूषण.

रेखा गुप्ता ने कहा कि यह पहल 'सिर्फ प्रदूषण कंट्रोल प्रोग्राम नहीं, बल्कि एक लंबे वक्त का इन्वेस्टमेंट' है, जिसका मकसद दिल्ली के लोगों को साफ हवा, बेहतर पब्लिक हेल्थ और ज्यादा टिकाऊ शहरी माहौल देना है. उन्होंने कहा कि यह पहल दो मुख्य स्तंभों पर टिकी है: हवा की क्वालिटी मैनेजमेंट को मजबूत करना और प्रदूषण के मुख्य स्रोतों से होने वाले उत्सर्जन को कम करना.

पहले हिस्से के तहत, सरकार एक खास प्रोजेक्ट मैनेजमेंट यूनिट बनाएगी, एडवांस्ड एयर क्वालिटी मॉनिटरिंग सिस्टम विकसित करेगी, डेटा एनालिटिक्स क्षमताएं तैयार करेगी और इंटीग्रेटेड कमांड एंड कंट्रोल सेंटर पर आधारित मॉनिटरिंग सिस्टम बनाएगी. इस प्रोजेक्ट में इंडो-गैंगेटिक प्लेन के राज्यों के साथ बेहतर तालमेल, वैज्ञानिक प्लानिंग, जन-जागरूकता अभियान और नई टेक्नोलॉजी को अपनाने की योजना भी शामिल है.

दूसरा हिस्सा पुराने प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों को धीरे-धीरे हटाने, इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने, पब्लिक ट्रांसपोर्ट को मजबूत करने और वाहनों से होने वाले उत्सर्जन के लिए एडवांस्ड 'पॉल्यूशन अंडर कंट्रोल' मॉनिटरिंग सिस्टम विकसित करने पर ध्यान केंद्रित करेगा.

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यह भी पढ़ें: प्रदूषण अलर्ट: दिल्ली का AQI 200, देखें अपने शहर की एयर क्वालिटी

सीएम रेखा गुप्ता ने कहा कि इस प्रोग्राम को पर्यावरण विभाग, दिल्ली प्रदूषण कंट्रोल कमेटी, ट्रांसपोर्ट विभाग, पब्लिक वर्क्स विभाग, दिल्ली नगर निगम, दिल्ली जल बोर्ड, दिल्ली विकास प्राधिकरण, नई दिल्ली नगर परिषद और दिल्ली ट्रैफिक पुलिस मिलकर लागू करेंगे. आर्थिक मामलों का विभाग और वर्ल्ड बैंक भी इसमें मुख्य पार्टनर होंगे.

साफ हवा को हर नागरिक का अधिकार बताते हुए रेखा गुप्ता ने कहा कि यह प्रोजेक्ट राजधानी में हवा की क्वालिटी और पब्लिक हेल्थ को बेहतर बनाने के लिए वैज्ञानिक, समन्वित और टिकाऊ समाधानों के प्रति दिल्ली सरकार की प्रतिबद्धता को दिखाता है.

कुल मिलाकर, दिल्ली सरकार का नया प्रोग्राम हवा की गुणवत्ता को बेहतर बनाने, प्रदूषण के मुख्य स्रोतों से निपटने और शहर में पब्लिक हेल्थ के उपायों को मजबूत करने के लंबे वक्त के प्रयास के लिए अलग-अलग विभागों के बीच फंडिंग, टेक्नोलॉजी और तालमेल को एक साथ लाएगा.

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