दिल्ली के जंतर-मंतर ने सिर्फ क्रांतियां और प्रोटेस्ट ही नहीं दिए हैं, बल्कि लुटियन जोन के इस इलाके ने नए-नए ट्रेंड भी दिए हैं. जंतर-मंतर पर चल रहा छात्र आंदोलन अब सिर्फ सीजेपी, अभिजीत दिपके या सोनम वांगचुक का नहीं रहा है. ये अब पूरी तरह छात्रों का एकजुट हुआ फोर्स है, जिसका कोई एक लीडर नहीं है. जिस तरफ की भीड़ से ज्यादा वाइब आ रही है, 'गर्ल्स और गाइज' का पूरा गैंग उसी ओर उमड़ पड़ रहा है.
आंदोलन में जेन-Z के दिलचस्प स्लैंग !
पुलिसिया एक्शन के जरिये सरकार भी इस हुजूम से इसीलिए ही नहीं निपट पा रही, क्योंकि वो न तो इनकी तरह फील करते हैं, न ही बोलते हैं, और उनकी तरह सोचते तो बिल्कुल भी नहीं हैं. इस प्रोटेस्ट में सिर्फ धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग नहीं है, सिर्फ जवाबदेही तय करने की इच्छा नहीं है, बल्कि क्रिएटिविटी है, नए तरीके का रॉ टैलेंट हैं और ढेर सारी अलग-अलग भाषाओं के स्लैंग हैं. ऐसे स्लैंग, जिनके शब्द, जिनके फ्रेज न तो पुलिसवालों ने सुन रखे हैं और न ही सरकार में बैठे लोगों ने.

ये 'लड़ाई' पहले हुए आंदोलनों से अलग क्यों है?
प्रोटेस्ट में मौजूद एक इन्फ्लूएंसर कहते हैं कि, 'आप सोचिए कि ये लड़ाई इतनी खतरनाक है कि कहां सत्ता में बैठे 'दादाजी' उम्र के लोग और कहां उनके खिलाफ प्रदर्शन के लिए जुटे 17, 18, 20-22 साल के लड़के-लड़कियां. जिन्हें आप ये कहकर नहीं नकार सकते कि 'अभी तुमने दुनिया कहां देखी है.' वो दुनिया देख रहे हैं, बस इसे देखने की उनके पास अपना नजरिया है और अपनी निगाहें हैं. फर्क ये है कि आप उस निगाह से दुनिया नहीं देख पा रहे हैं.
वैसे तो इस पीढ़ी को समझने के लिए इनके तौर-तरीकों और बात-व्यवहार पर गहरी रिसर्च करनी पड़ेगी, फिर भी प्रोटेस्ट के बीच से वायरल हो रहे इनके कुछ खास फ्रेज पर ही गौर कर लें तो शायद जेन-Z क्या कहना चाहते हैं, उनकी बात समझी जा सकती है.
युवाओं की बातचीत और उनकी लैंग्वेज चर्चा में
जंतर-मंतर पर जारी प्रोटेस्ट से सिर्फ दिलचस्प नारे और पोस्टर ही वायरल नहीं हो रहे हैं, न्यू यूथ की कॉमन लैंग्वेज भी चर्चा का विषय बन चुकी है. कैमरे के सामने, इंस्टाग्राम रील्स में, एक्स पोस्ट में और लाइव स्ट्रीमिंग के दौरान जैसे स्लैंग और जैसी भाषा सुनाई दे रही है, वह बताती है कि जेन-जी का विरोध दर्ज कराने का तरीका बेहद अलग है.

क्या है 'Vasteguna Huiya'?
एक रील वायरल है, जिसमें जंतर-मंतर पर एक गैंग जोर-जोर से 'Vasteguna Huiya' कहते हुए अजीब आवाजें निकाल रहा है. एक लड़की कहती है, पुलिस अंकल-पुलिस अंकल... Vasteguna Huiya.... इसके बाद सभी जोर-जोर से हंसने लगते हैं.
पुलिस डंडे मारने के लिए दौड़ा रही है. लड़कों के गैंग चिल्ला रहे हैं, Vasteguna Huiya.... पुलिस भी समझ नहीं पा रही है कि वो ऐसी हरकतों पर क्या रिएक्शन दें. क्योंकि ये कोई गाली या अपशब्द नहीं है. इसमें कोई तोड़-फोड़ नहीं हुई तो ये राष्ट्र की संपत्ति के लिए खतरा नहीं है, इसका अर्थ 'टुकड़े-टुकड़़े' भी नहीं है तो देशद्रोह जैसे आरोप नहीं लग सकते. ऐसे में पुलिस करे तो क्या करे... जब तक पुलिस फोर्स इस पर कुछ सोचती है तो ये लड़के एक बार फिर अजीब आवाज करते हुए 'Vasteguna Huiya' कह कर निकल जाते हैं.
आप 'Vasteguna Huiya' का अर्थ खोजने जाएंगे तो खो जाएंगे क्योंकि इसका कोई अर्थ नहीं है. ये बस एग्जिस्ट करता है. वैसे ही जैसे एपांग-ओपांग-झपांग का कोई सटीक अर्थ नहीं है.
पुलिस को दिखा रहे कोरियन हार्ट
इसी तरह एक और एक्ट वायरल है. एक लड़की, कोरियन हार्ट बनाकर लाठी लेकर खड़े पुलिस वालों को दिखा रही है. कोरियन हार्ट पहली उंगली और अंगूठे को क्रॉस शेप में रखकर बनाया जाता है. वहीं, केंद्रीय शिक्षा मंत्री को एड्रेस करते हुए एक वीडियो भी वायरल हो रहा है, जिसमें उनसे कहा जा रहा है, 'कुचूपुचू! तुम कब इस्तीफा दोगे, दे दो ना इस्तीफा मेरे कुचूपुचू. ये सब कुछ प्रोटेस्ट के बीच बड़े-बड़े साउंड बॉक्स चलाया जा रहा है और लड़के-लड़कियों का ग्रुप इस पर फनी एक्ट कर रहा है. ये प्रोटेस्ट का ऐसा तरीका है कि इससे मौके पर मौजूद पुलिसकर्मी और RAF के जवान भी हंसने को मजबूर हो जा रहे हैं.
जेन-Z का अपनी बात कहने का तरीका है अलग
इस पीढ़ी का हर बात कहने का अपना तरीका है. भारी जमावड़े के बीच ये न्याय की मांग तो कर रहे हैं, लेकिन ये नहीं कहते ' वीं वांट जस्टिस' बजाय इसके ये कहते हैं, 'This is not giving democracy', 'System is cooked', 'We're done with this', 'Enough of this clownery' या फिर 'No more gaslighting.' गैसलाइटिंग तो इस प्रोटेस्ट का सबसे वायरल टर्म है.
जेन-Z की लैंग्वेज सोशल मीडिया से पैदा होती है और वहीं पलती-बढ़ती है. मीम, गेमिंग, के-पॉप, इंस्टाग्राम, रेडिट और टिकटॉक ने बीते डिकेड में उनके इस कल्चर को गढ़ा है और अब इस देशव्यापी प्रदर्शन के साथ ये शब्दावली, ये कल्चर मेन स्ट्रीम में घुलमिल जाने को तैयार है.
क्या-क्या है उनकी डिक्शनरी में?
सरकार की ओर से दिए गए बयान अगर उनकी समझ से परे हुए या हकीकत से दूर हुए तो इनके लिए वो 'Cringe' है.
इसी तरह "Delulu" यानी "Delusional" का छोटा रूप भी इनके स्लैंग लैग्वेज का हिस्सा है.
सिचुएशन बहुत बिगड़ चुकी है तो वे आपस में ही "Cooked" कह देंगे. इससे पूरा गैंग अलर्ट हो जाता है और ये बात उन्हें समझ नहीं आ सकती जो इनका बीच का नहीं है. खासतौर पर पुलिस और नेता तो इनसे बहुत दूर हैं.

जेन-Z की भाषा में सटायर ज्यादा
कुल मिलाकर जेन-Z की बातों और भाषा में सटायर का प्रपोशन ज्यादा है. उनके बीच कोई लंबी स्पीच देने वाला नहीं है, कोई उपदेशक या मैंटोर नहीं है, उन्हें किक मिलती है तो अपने ही बीच के लोगों के जरिये गढ़ी छोटी-छोटी लाइंस से. पहले जहां आंदोलनों में गंभीर नारे लगाए जाते थे, वहीं अब पोस्टर्स पर मीम छाए हैं. कहीं गहरा सटायर है तो कहीं अश्लीलता की हद पार किया लहजा है. पॉप कल्चर, फिल्में, एनीमे, के-पॉप या वायरल इंटरनेट टेम्पलेट्स भी इनकी डिक्शनरी है और इसीलिए ये थोड़े अलग हैं.
सिर्फ फैशन नहीं कम्युनिकेशन स्टाइल भी
जेन-z की ये भाषा सिर्फ फैशन नहीं है. ये उनका कम्युनिकेशन स्टाइल है. इसमें गुस्सा तो है लेकिन उन्होंने गुस्से की सामूहिक भावना को भी हंसी और व्यंग्य में बदल दिया है. ये तोड़फोड़ कर और हथियार चलाकर प्रदर्शन करने वाली पीढ़ी नहीं है. इसके शब्द इतने करारे हैं कि भीतर तक असर कर रहे हैं और तेजी से बड़ी संख्या में लोगों को अपने साथ जोड़ रहे हैं.
क्योंकि इन्होंने एक 'फोमो' (FOMO) क्रिएट कर दिया है. लगे हाथ फोमो मतलब भी जान लीजिए, फियर ऑफ मिसिंग आउट... यानी सभी के साथ शामिल न हो पाने का दुख... ये घबराहट इतनी बड़ी है कि जेन-Z इससे डरता है कि वह अकेला न पड़ जाए, इसलिए भी वह प्रोटेस्ट में शामिल हो रहा है. यही कमजोरी उनकी ताकत भी है.
कुल मिलाकर, जंतर-मंतर का इस बार का प्रोटेस्ट सिर्फ सिस्टम में बदलाव की मांग नहीं कर रहा है, बल्कि वह सीक्रेटली सोशल मीडिया और कम्यूनिकेशन का एल्गोरिदम भी बदल रहा है. उनका विरोध सिर्फ सड़कों पर नहीं, स्क्रीन पर भी दर्ज हो रहा है. देखते हैं कि इसका नतीजा क्या निकलेगा...