
दिल्ली में सोमवार का दिन काफी हंगामे से भरा रहा. कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के 'संसद चलो' प्रदर्शन के दौरान नई दिल्ली इलाके में भड़की हिंसा ने पूरे देश का ध्यान अपनी ओर खींच लिया. संसद के मानसून सत्र के पहले ही दिन हुए इस उग्र प्रदर्शन के दौरान जंतर-मंतर, जनपथ और रायसीना रोड समेत कई इलाके मैदान-ए-जंग बन गए.
दिनभर चले इस प्रदर्शन में एक तरफ सड़कों पर पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच हिंसक झड़पें होती रहीं, वहीं दूसरी तरफ सरकार और CJP प्रतिनिधियों के बीच बैठकों का दौर भी चलता रहा. आखिर में पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को जंतर-मंतर से हटा दिया. लेकिन रात होते-होते प्रदर्शनकारी वापस लौट आए.
दिल्ली पुलिस के मुताबिक, सोमवार को CJP के 'संसद चलो' मार्च के दौरान प्रदर्शनकारियों का रवैया बेहद हिंसक हो गया. पुलिस की कानूनी हिदायतों और चेतावनियों को नजरअंदाज करते हुए भीड़ ने लागू धारा 163 का उल्लंघन किया.

अभिजीत दिपके ने खत्म किया अनशन
CJP के संस्थापक अभिजीत दिपके ने सोमवार को ढाई दिन बाद अपनी भूख हड़ताल भी खत्म की. 18 जुलाई को सोनम वांगचुक को जंतर-मंतर से अस्पताल शिफ्ट करने के बाद से ही वो अनशन पर थे.

15-20 सरकारी गाड़ियों को नुकसान
पुलिस की मानें तो प्रदर्शन के दौरान सुरक्षा बलों पर पथराव किए गए और पुलिस बैरिकेड्स तोड़ने की कोशिश की गई. प्रदर्शनकारियों ने उपद्रव करते हुए 15 से 20 सरकारी गाड़ियों को बुरी तरह नुकसान पहुंचाया और सार्वजनिक संपत्तियों को नुकसान पहुंचाया. जनपथ इलाके में कई दुकानों में तोड़फोड़ की भी खबरें सामने आईं.
इस हिंसा में स्पेशल कमिश्नर ऑफ पुलिस, जॉइंट कमिश्नर, एडिशनल कमिश्नर, डीसीपी, एडिशनल डीसीपी और एसीपी रैंक के 5 से ज्यादा आईपीएस (IPS) अधिकारियों समेत 118 से ज्यादा पुलिसकर्मी घायल हो गए. घायलों में कई महिला पुलिसकर्मी भी शामिल हैं. झड़प के दौरान करीब 60 प्रदर्शनकारियों के भी जख्मी होने की खबर है.

ड्यूटी पर तैनात एक घायल पुलिस अधिकारी ने बताया, 'मैं जनपथ के पास क्लैरिजेस होटल के सामने तैनात था. भीड़ की तरफ से अचानक पथराव शुरू हो गया. ऐसा लग रहा था जैसे पत्थर पहले से जुटाकर रखे गए थे और ये पूरी तरह से एक सोची-समझी कार्रवाई थी. प्रदर्शन खत्म होने के बाद बची हुई भीड़ अचानक जमा हुई और हिंसक प्रदर्शन करने लगी.'
70 लोग हिरासत में, BNS के तहत दर्ज की जा रही हैं FIR
हिंसा पर काबू पाने के लिए पुलिस ने सख्त रुख अपनाया और करीब 70 प्रदर्शनकारियों को हिरासत में ले लिया. पुलिस सूत्रों के मुताबिक, हिरासत में लिए गए कई लोग छात्र नहीं हैं, जिससे घटना के पीछे किसी सोची-समझी साजिश की आशंका भी जताई जा रही है. इनके खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) और दूसरी कानूनों की धाराओं में कई FIR दर्ज की जा रही हैं.
केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा से मिले CJP प्रतिनिधि, दो बार हुई बैठक
सड़कों पर मचे हंगामे के बीच बातचीत का दौर भी जारी रहा. CJP के प्रतिनिधि सौरव दास और आशुतोष रांका ने सोमवार को केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा से दो बार मुलाकात की. सरकारी सूत्रों के मुताबिक, पहली बैठक सुबह करीब 11:50 बजे हुई. जेपी नड्डा ने प्रतिनिधियों से उनकी मांगों के बारे में पूछा. जब CJP प्रतिनिधियों ने अपनी मांगें बताईं, तो केंद्रीय मंत्री ने उनसे लिखित ज्ञापन देने को कहा.

इसके बाद दोपहर करीब 4 बजे दोनों प्रतिनिधियों ने जेपी नड्डा को मांगों का लिखित ज्ञापन सौंपा. हालांकि, इस बैठक में जेपी नड्डा की ओर से CJP की तीनों मांगों में से किसी भी मांग पर कोई ठोस आश्वासन नहीं दिया गया. केंद्रीय मंत्री ने प्रतिनिधियों से अपील की कि वो अपने धरने को खत्म करें और शांति व्यवस्था बनाए रखने में प्रशासन की मदद करें.
सरकार का रुख
दिनभर चले इस घटनाक्रम पर सरकार की पैनी नजर बनी रही. केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह खुद पल-पल की निगरानी कर रहे थे और उच्च अधिकारियों के लगातार संपर्क में थे. पुलिस और पैरामिलिट्री बलों को निर्देश दिए गए थे कि वो बल प्रयोग से बचें और बहुत जरूरी होने पर ही कम से कम बल का इस्तेमाल करें.
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आज भी संसद तक मार्च करेगी CJP
दिनभर चले भारी हंगामे, पुलिस की लाठीचार्ज और आंसू गैस के इस्तेमाल के बाद प्रदर्शनकारी केरल हाउस पर प्रदर्शन करते रहे. इसके बाद वो रात तक वापस जंतर-मंतर पर जमा हो गए. कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दिपके ने सोमवार देर रात ऐलान किया कि संसद तक मार्च मंगलवार को भी जारी रहेगा. दिपके ने 'आजतक डिजिटल' को बताया की मंगलवार को भी प्रदर्शन जारी रहेगा. उन्होंने कहा, 'हम फिर से मार्च करेंगे. हम प्रदर्शन स्थल को नहीं छोड़ेंगे.'