पाकिस्तान सरकार के आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक मार्च से जुलाई के बीच खाड़ी सहयोग परिषद (GCC) के छह देशों से 20 हजार से ज्यादा पाकिस्तानी नागरिकों को अपने मुल्क से बाहर भगा दिया. इनमें सबसे बड़ी संख्या सऊदी अरब से निकाले गए पाकिस्तानियों की है. खास बात यह है कि कुछ पाकिस्तानी नागरिकों पर ईरानी हमलों से जुड़े वीडियो बनाने, उन्हें अपलोड करने और सोशल मीडिया पर प्रसारित करने के आरोप भी हैं.
खाड़ी सहयोग परिषद में 6 देश हैं. इनके नाम हैं सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात (UAE), ओमान, बहरीन, कतर और कुवैत. इन देशों में लाखों की संख्या पाकिस्तानी मजदूरों की संख्या है.
पाकिस्तान के नारकोटिक्स कंट्रोल मंत्रालय की ओर से नेशनल असेंबली में पेश किए गए आंकड़ों के मुताबिक 1 मार्च से 13 जुलाई के बीच सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात (UAE), ओमान, बहरीन, कतर और कुवैत से पाकिस्तानियों को डिपोर्ट किया गया. इन देशों में सऊदी अरब सबसे आगे रहा. यहां से 15,500 पाकिस्तानी नागरिकों को बाहर निकाला गया. इसके बाद UAE से 3,803, ओमान से 1,606, बहरीन से 521, कतर से 429 और कुवैत से 97 पाकिस्तानियों को देश से बाहर किया गया.
पाकिस्तानी अधिकारियों के मुताबिक इन लोगों को अलग-अलग कारणों से डिपोर्ट किया गया है. इनमें सुरक्षा संबंधी चिंताएं, वीजा अवधि खत्म होने के बाद भी रुकना, अवैध प्रवेश, भीख मांगना, ड्रग्स से जुड़े अपराध, शरण के आवेदन खारिज होना और फर्जी या अधूरे दस्तावेज शामिल हैं.
आंकड़ों के मुताबिक 4,628 ऐसे लोग थे जिन्हें 'भगोड़ा' यानी फरार घोषित किया गया था, जबकि 1,294 को जेल भेजा गया और 968 को ब्लैकलिस्ट किया गया. 689 मामलों में वीजा उल्लंघन और 342 मामलों में खाड़ी देशों में प्रवेश से इनकार किया गया.
ईरानी हमलों के वीडियो ने बढ़ाई मुश्किल
पाकिस्तानी गल्फ में रहने के बावजूद वहां की परेशानियों से सहानुभूति जताने के बजाए इन देशों के हितों के खिलाफ हरकतें कर रहे थे. स्थानीय प्रशासन ने कई ऐसे पाकिस्तानियों को पाया जो इन देशों में ईरान के हमले से हुए नकुसान का वीडियो सोशल मीडिया पर अपलोड कर रहे थे.
रिपोर्ट के मुताबिक मार्च में बहरीन ने छह लोगों को गिरफ्तार किया था. इनमें पांच पाकिस्तानी नागरिक थे. इन पर ईरानी हमलों के प्रभाव से जुड़े वीडियो को फिल्माने, प्रकाशित करने और दोबारा पोस्ट करने का आरोप था.
ईरान-अमेरिका संघर्ष के दौरान खाड़ी देशों में सुरक्षा व्यवस्था बेहद संवेदनशील मुद्दा था. ऐसे में ईरानी हमलों के वीडियो बनाना या उन्हें सोशल मीडिया पर प्रसारित करना स्थानीय प्रशासन के लिए सुरक्षा का मुद्दा बन गया. कुछ खाड़ी देशों में शिया समुदाय के लोगों पर भी अतिरिक्त निगरानी की खबरें सामने आईं.
पाकिस्तान के संसदीय मामलों के मंत्री तारिक फजल चौधरी ने स्पष्ट किया कि ये आंकड़े सिर्फ उन लोगों के हैं जिन्हें संबंधित देशों के अधिकारियों ने औपचारिक रूप से हिरासत में लेकर डिपोर्ट किया और जिनके लिए पाकिस्तानी मिशनों ने इमरजेंसी ट्रैवल डॉक्यूमेंट जारी किए. वैध पासपोर्ट पर स्वेच्छा से लौटने वाले लोग इसमें शामिल नहीं हैं.
खाड़ी देशों में लाखों पाकिस्तानी रहते और काम करते हैं और उनकी भेजी रकम पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था के लिए बेहद महत्वपूर्ण है. ऐसे में बड़े पैमाने पर डिपोर्टेशन न केवल प्रवासी पाकिस्तानियों की सुरक्षा और रोजगार पर सवाल खड़े करता है, बल्कि पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था पर भी दबाव बढ़ा सकता है.