
छत्तीसगढ़ के बस्तर संभाग से एक ऐसा मामला सामने आया है जिसने कानून, न्याय और सामाजिक रिश्तों को लेकर नई चर्चा शुरू कर दी है. जगदलपुर केंद्रीय जेल के इतिहास में पहली बार जेल परिसर विवाह मंडप में बदल गया. रेप और एससी/एसटी एक्ट के मामले में पिछले सात महीने से न्यायिक हिरासत में बंद एक आरोपी ने उसी युवती के साथ सात फेरे लिए, जिसने उसके खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई थी. अदालत की अनुमति, जेल प्रशासन की निगरानी और दोनों परिवारों की मौजूदगी में यह विवाह संपन्न हुआ. यह अनोखा मामला पूरे प्रदेश के साथ-साथ देशभर में चर्चा का विषय बना हुआ है.
यह मामला बस्तर जिले के परपा थाना क्षेत्र के राजूर गांव का है. सुरेश सेठिया और युवती, जिसकी पहचान गोपनीय रखी गई है, जगदलपुर के एक पेट्रोल पंप पर साथ काम करते थे. साथ काम करने के दौरान दोनों के बीच दोस्ती हुई. धीरे-धीरे यह दोस्ती प्रेम संबंध में बदल गई. दोनों ने शादी करने का फैसला भी किया था.
युवती का आरोप था कि सुरेश सेठिया ने शादी का वादा कर उसके साथ शारीरिक संबंध बनाए. बाद में उसने पारिवारिक और सामाजिक दबाव का हवाला देते हुए शादी से इनकार कर दिया. युवती का कहना था कि इससे उसकी सामाजिक प्रतिष्ठा प्रभावित हुई. इसके बाद उसने परपा थाने में शिकायत दर्ज कराई. पुलिस ने विवाह का झांसा देकर शारीरिक संबंध बनाने और एससी/एसटी एक्ट की धाराओं के तहत मामला दर्ज किया. इसके बाद सुरेश सेठिया को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में जगदलपुर केंद्रीय जेल भेज दिया गया.
पेट्रोल पंप पर साथ काम करते हुए हुई थी दोनों की मुलाकात
करीब सात महीने तक जेल में रहने के दौरान भी दोनों के बीच संपर्क पूरी तरह खत्म नहीं हुआ. युवती लगातार उससे मिलने जेल आती रही. समय के साथ दोनों के बीच फिर से बातचीत शुरू हुई. दोनों ने पुराने विवाद को पीछे छोड़कर साथ जीवन बिताने का फैसला किया. इसके बाद दोनों ने विशेष न्यायाधीश, एससी/एसटी एक्ट की अदालत में संयुक्त आवेदन देकर विवाह की अनुमति मांगी.
दोनों के बालिग होने और अपनी स्वतंत्र इच्छा से विवाह करने की सहमति जताने के बाद अदालत ने जेल नियमावली के तहत विवाह की अनुमति दे दी. न्यायालय के आदेश के बाद जेल प्रशासन ने विवाह की सभी तैयारियां शुरू कीं. सभी कानूनी औपचारिकताएं पूरी करने के बाद विवाह की तारीख तय की गई.

न्यायालय के आदेश के बाद जगदलपुर केंद्रीय जेल के भीतर विवाह मंडप सजाया गया. वैदिक मंत्रोच्चार के बीच हिंदू रीति-रिवाज से दोनों का विवाह संपन्न कराया गया. इस अवसर पर दोनों पक्षों के परिजन, अधिवक्ता, जेल अधिकारी, पुलिसकर्मी और जेल स्टाफ मौजूद रहे. जेल की ऊंची दीवारों के बीच पहली बार शहनाई गूंजी और विवाह की रस्में पूरी की गईं.
इस विवाह का सबसे भावुक क्षण तब सामने आया, जब जेल में पदस्थ एक आरक्षक ने कन्यादान की रस्म निभाई. इसके बाद दूल्हा और दुल्हन ने सात फेरे लिए और जीवनभर साथ निभाने का संकल्प लिया. जगदलपुर केंद्रीय जेल के इतिहास में यह पहला अवसर माना जा रहा है, जब जेल परिसर में इस तरह विवाह संपन्न कराया गया.
विवाह के बाद सुरेश सेठिया ने कहा कि दोनों एक-दूसरे से प्रेम करते थे, लेकिन परिवार के विरोध के कारण समय पर शादी नहीं हो सकी. मामला दर्ज होने के बाद वह जेल चला गया. अब दोनों ने अपनी इच्छा से विवाह कर लिया है. उन्होंने उम्मीद जताई कि न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद वह रिहा होकर अपनी पत्नी के साथ नया जीवन शुरू करेंगे.
वहीं युवती ने कहा कि शादी से इनकार किए जाने के बाद उसने शिकायत दर्ज कराई थी, क्योंकि उसकी सामाजिक प्रतिष्ठा प्रभावित हुई थी. जेल में लगातार मुलाकातों के दौरान दोनों के बीच फिर से विश्वास कायम हुआ. इसके बाद दोनों ने विवाह करने का फैसला किया. उसने कहा कि अब वह चाहती है कि कानूनी प्रक्रिया जल्द पूरी हो और उसका पति रिहा होकर उसके साथ वैवाहिक जीवन शुरू करे.
मामले के अधिवक्ता अवधेश झा ने बताया कि दोनों बालिग हैं और उन्होंने अपनी स्वतंत्र इच्छा से संयुक्त आवेदन दिया था. न्यायालय ने सभी तथ्यों पर विचार करने के बाद जेल नियमावली के अनुसार विवाह की अनुमति दी. उन्होंने स्पष्ट किया कि विवाह हो जाने से आरोपी के खिलाफ दर्ज आपराधिक मामला स्वतः समाप्त नहीं होता. इस मामले में आगे भी न्यायालय के समक्ष कानूनी प्रक्रिया पहले की तरह जारी रहेगी और अंतिम फैसला कानून के अनुसार ही होगा.
केंद्रीय जेल जगदलपुर के जेल अधीक्षक एस.एल. नायर ने बताया कि न्यायालय के आदेश का पूरी तरह पालन करते हुए सभी कानूनी औपचारिकताओं के बाद विवाह संपन्न कराया गया. उन्होंने कहा कि दोनों परिवारों की मौजूदगी में सभी धार्मिक और विधिक प्रक्रियाएं पूरी कराई गईं. उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि आरोपी की रिहाई केवल न्यायालय के आगामी आदेश और कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही संभव होगी.
दोस्ती प्यार में बदली, शादी का वादा बना विवाद की वजह
जगदलपुर केंद्रीय जेल में हुआ यह विवाह कई मायनों में अनोखा माना जा रहा है. एक ओर गंभीर धाराओं में दर्ज मुकदमे का आरोपी दूल्हा बना, तो दूसरी ओर उसी मामले की शिकायतकर्ता युवती दुल्हन के रूप में उसके साथ सात फेरे लेती नजर आई. अदालत की अनुमति, दोनों की सहमति और कानून के दायरे में संपन्न यह विवाह इस बात को भी सामने लाता है कि न्यायिक प्रक्रिया अपनी जगह चलती रहती है, जबकि व्यक्तिगत निर्णय और वैवाहिक संबंध अपनी अलग कानूनी प्रक्रिया के तहत स्थापित हो सकते हैं. फिलहाल यह अनोखी शादी पूरे बस्तर सहित देशभर में चर्चा का विषय बनी हुई है.