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कितना वजन होने पर पड़ सकती है सर्जरी की जरूरत? AIIMS के डॉक्टर ने बताया कितना BMI है 'आउट ऑफ कंट्रोल'

भारत में मोटापे की समस्या तेजी से बढ़ रही है, जिससे 13.5 करोड़ से अधिक लोग प्रभावित हैं, वजन घटाने के लिए दवाओं और बैरिएट्रिक सर्जरी दोनों विकल्प उपलब्ध हैं, लेकिन सही इलाज क्या है इस बारे में दिल्ली AIIMS के सर्जरी विभाग में मेटाबॉलिक, बैरिएट्रिक और किडनी ट्रांसप्लांट सर्जरी विशेषज्ञ प्रोफेसर डॉ. मंजूनाथ मारूति पोल ने बताया है.

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वजन कैसे घटाएं ( PHOTO-ITGD)
वजन कैसे घटाएं ( PHOTO-ITGD)

मोटापा बढ़ने पर कई लोग अब अलग- अलग तरह की दवाएं लेना शुरू कर रहे हैं. इनमें अधिकतर दवाएं इंजेक्शन ( GLP-1 दवाएं) के रूप में आ रही हैं. बीते कुछ सालों में इनको लेने का चलन काफी बढ़ा भी है. इनसे लोगों का वजन कम भी हुआ है. दूसरी तरफ, वजन घटाने के लिए बड़ी संख्या में लोग सर्जरी भी करा रहे हैं. इसके लिए बैरिएट्रिक सर्जरी सबसे आम है, लेकिन क्या सर्जरी सभी लोगों के लिए सही है? कब दवाएं काफी हैं और कब सर्जरी की जरूरत, ये जानना मोटापे से पीड़ित लोगों के लिए बहुत जरूरी है.

इसके बारे में आपको बताएं उससे पहले देश में मोटापे से पीड़ित लोगों के आकड़ों पर बात कर लेते हैं. PUbMED Central की रिपोर्ट बताती है कि भारत में मोटापा तेजी से बढ़ता हुआ स्वास्थ्य संकट है, जिससे 13.5 करोड़ से ज्यादा लोग प्रभावित हैं. शहरों में रहने वाले लोगों, महिलाओं और बुज़ुर्गों में इसकी दर ज्यादा देखी जाती है, पश्चिमी देशों के लोगों की तुलना में, भारतीयों में कम बॉडी मास इंडेक्स (BMI) लेवल पर भी पेट की चर्बी और उससे जुड़ी बीमारियों का जोखिम है. ऐसे में मोटापे से पीड़ित लोगों को सही ट्रीटमेंट की जरूरत है.

मोटापा कम करने के लिए कब है सर्जरी की जरूरत

इस बारे में दिल्ली AIIMS के सर्जरी विभाग में मेटाबॉलिक, बैरिएट्रिक और किडनी ट्रांसप्लांट सर्जरी विशेषज्ञ प्रोफेसर डॉ. मंजूनाथ मारूति पोल ने Aajtak.in को बताया है. डॉ. मंजूनाथ कहते हैं कि इस मामले में फैसला वजन घटाने वाली दवाएं बनाम सर्जरी का नहीं, बल्कि बीमारी के रिस्क और मरीज को जो इलाज मिल रहा है उसके फायदे से संबंधित होना चाहिए. कोशिश ये हो कि मोटापे का ऐसा इलाज हो जिससे लंबे समय तक मरीज की सेहत अच्छी रहे. 

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डॉ. मारूति कहते हैं कि वजन घटाने वाली दवाएं असरदार तो हैं और मोटापे व डायबिटीज के इलाज में इस्तेमाल भी हो रही हैं. कुछ मरीजो के लिए ये एक अहम विकल्प जरूर हैं, लेकिन इनसे मेटाबोलिक सर्जरी की जरूरत खत्म नहीं हो जाती. फैसला हर मरीज की स्थिति के हिसाब से लिया जाता है. कुछ फैक्टर देखे जाते हैं तब सर्जरी जरूरी हो जाती है. 

 मोटापे से पीड़ित भारतीय मरीजो के लिए मेटाबोलिक सर्जरी की ज़रूरत इन मामलों में पड़ सकती है

1. मोटापा (BMI > 27.5) हो और अनकंट्रोल टाइप-2 डायबिटीज और अनकंट्रोल मेटाबोलिक बीमारियां हों तो सर्जरी की जरूरत हो सकती है. 

 
2. मोटापा (BMI > 32.5) + मेटाबोलिक बीमारियां

3.मरीज को अगर स्लीप एपनिया, खासकर जब यह काम और रोजमर्रा की एक्टिविटी पर असर डाल रहा हो हाई ब्लड प्रेशर, डिस्लिपिडेमिया, ऑस्टियोआर्थराइटिस और फैटी लिवर की बीमारी में भी सर्जरी की जरूरत है. 

यह भी पढ़ें: मोटापा बढ़ा सकता है कई तरह के कैंसर का खतरा, 15 लाख मरीजों पर हुई बड़ी स्टडी में खुलासा
 
 मोटापे के लिए दवाएं या सर्जरी क्या चुनें?

डॉ. मंजूनाथ बताते हैं कि इसके लिए हम मरीज का BMI, उसकी कमर का घेरा (या विसरल फ़ैट), डायबिटीज कब से है और कितनी गंभीर है, मेटाबोलिक परेशानियां कितनी है. पैंक्रियाटिक बीटा-सेल रिज़र्व, पोषण की स्थिति और मरीज की पसंद और लंबे समय तक फॉलो-अप के लिए तैयार रहने की क्षमता पर विचार करते हैं.

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डॉ मारूति कहते हैं कि वजन घटाने वाली दवाएं (GLP-1  दवाएं) आकर्षक हैं क्योंकि इनमें सर्जरी की जरूरत नहीं होती और डेढ़ साल तक दवा लेने पर 18% से 22% तक वजन कम हो सकता है. लेकिन आम तौर पर  इन दवाओं को लेते रहना पड़ता है, और कुछ मरीज़ों को दवा से परेशानी  या लंबे समय तक इलाज जारी रखने में मुश्किल हो सकती है, या दवा का असर ठीक से नहीं हो सकता है. दवा बंद करने पर उनका वजन वापस बढ़ सकता है.

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सर्जरी के क्या हैं फायदे

 सर्जरी एक इनवेसिव (शरीर के अंदर की जाने वाली) प्रक्रिया है, लेकिन सही मरीजो में इससे ज्यादा और लंबे समय तक चलने वाला वजन कम हो सकता है (एक साल के बाद 25 % से 35 % टोटल वेट कम होना) और 60 से 80 % एक्सेस वेट लॉस) और डायबिटीज के ठीक होने की संभावना ज्यादा होती है, साथ ही हाइपरटेंशन, स्लीप एपनिया और फैटी लिवर की बीमारी में भी सुधार होता है.


 लेकिन यहां सबसे जरूरी ये है कि किस इलाज से इस खास मरीज़ को लंबे समय तक मेटाबोलिक सेहत बनाए रखने का सबसे अच्छा मौका मिलेगा?

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कुछ मरीज़ों के लिए, जवाब लाइफस्टाइल में बदलाव और वजन घटाने वाली दवाएं हो सकता है, दूसरों के लिए सर्जरी बेहतर विकल्प हो सकती है. इसके लिए सबसे जरूरी है कि मरीज के शरीर की स्थिति के हिसाब से क्या ठीक है उसे ही देखकर फैसला लिया जाता है.  लेकिन जो चीजें बताई हैं अगर शरीर में वैसी परेशानियां हैं तो फिर सर्जरी करा सकते हैं. 

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