मुंबई के गोरेगांव में एक 24 महीने की बच्ची की मौत हो गई थी. अब इस मामले में उसकी 10 साल की पड़ोसी बच्ची पर हत्या का आरोप लगा है. पुलिस को शक है कि 10 साल की बच्ची ने मासूम को अपनी बिल्डिंग की 6 वीं मंजिल से धक्का दे दिया था. जिससे उसकी मौत हो गई. सीसीटीवी में भी ये पूरी घटना कैद हो गई है. शुरुआती तौर पर तो इसे दुर्घटना मानकर जांच की जा रही थी, लेकिन अब हत्या के एंगल से मामले की छानबीन की जा रही है. मुंबई पुलिस ने पूछताछ के लिए मां और बेटी को हिरासत में लिया. फिलहाल इस केस में एक्सीडेंटल डेथ रिपोर्ट दर्ज की गई है. किशोर न्याय बोर्ड ने बच्ची की काउंसलिंग कराने के निर्देश भी दिए हैं.
मुंबई की इस घटना के बाद ये सवाल उठता है कि इतने छोटे बच्चे हिंसक कैसे हो रहे हैं? महज 10 साल की उम्र में क्या इतना गुस्सा आ सकता है जो किसी की जान ले ले. अगर हां, तो इसकी वजह क्या हो सकती है? क्या इसके पीछे कोई मनोवैज्ञानिक कारण होता है.
बच्चों में हिंसक व्यवहार के पीछे क्या हो सकते हैं कारण?
नई दिल्ली के AIIMS ( Capfims) में साइकेट्री विभाग में असिसटेंट प्रोफेसर डॉ. हर्षा बताती हैं कि बच्चे अपने आसपास के लोगों को देखकर बहुत कुछ सीखते हैं. अगर वे बार-बार मारपीट, धमकी या हिंसा देखते हैं, तो कुछ परिस्थितियों में वे भी समस्याओं को सुलझाने के लिए इसी तरह के व्यवहार को अपना सकते हैं. कभी-कभी बच्चों में इतने गुस्से के पीछे ये वजह भी होती है कि उनके माता- पिता बच्चे को पर्याप्त समय नहीं देते हैं. ऐसे में बच्चा टीवी देखने में समय बिताता है अगर वह ऐसी चीजें देखता है जिसमें हिंसा ज्यादा है तो उसका असर व्यवहार में दिखाई दे सकता है. इससे बच्चा ज्यादा गुस्से वाले और आक्रामक हो सकता है.
कुछ बच्चों में व्यवहार संबंधी समस्याएं और न्यूरोडेवलपमेंटल डिसऑर्डर के कारण भी ऐसा हो सकता है. अगर बच्चा मंदबुद्धि है तो भी ऐसी घटना होने का रिस्क रहता है. ऐसे में वह अनजाने में किसी दूसरे को नुकसान कर सकते हैं. कुछ मामलों में बचपन में किसी हिंसा के हादसे या पुराने ट्रॉमा के कारण भी मानसिक स्थिति खराब हो सकती है. जिससे ऐसी घटनाएं हो जाती हैं.
डिप्रेशन भी इसका एक कारण हो सकता है, जो गुस्से के रूप में बाहर आता है. अगर कोई बच्चा किसी कारण से डिप्रेशन में है तो वह सामने वाले को नुकसान पहुंचा सकता है. बड़े लोगों को तो वह कुछ कर नहीं पाता है तो अपना गुस्सा किसी छोटे बच्चे पर निकाल सकता है.
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जेनेटिक कारणों से भी ये होता है
डॉ. हर्षा बताती हैं कि जेनेटिक कारणों से भी ऐसा होता है. वैज्ञानिकों ने मोनोएमीन ऑक्सीडेज ए नाम के जीन का अध्ययन किया है. यह जीन दिमाग में सेरोटोनिन और डोपामाइन जैसे हार्मोन को कंट्रोल करता है इस जीन का कम होना बच्चे को गु्स्सैल और हिंसक बना सकता है, लेकिन ऐसे मामले कम होते हैं.
माता-पिता किन संकेतों को नजरअंदाज न करें?
अगर बच्चा बार-बार दूसरे बच्चों को चोट पहुंचाता है. छोटी बात पर बेहद गुस्सा हो जाता है या दूसरों को नुकसान पहुंचाने की कोशिश करता है, तो माता-पिता को इसे केवल शरारत समझकर टालना नहीं चाहिए. ऐसी स्थिति में बच्चे को डांटने के बजाय शांत तरीके से उससे बात करें और जरूर पड़ने पर उसकी काउंसलिंग कराएं.
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कैसे होता है इलाज
डॉ. हर्षा बताती हैं कि ऐसे मामलों में पहले बच्चे की काउंसलिंग की जाती है. देखा जाता है कि उसको क्या मानसकि समस्या है. फिर इलाज शुरू किया जाता है. इसमें थेरेपी दी जाती है और कुछ मामलों में दवाओं से भी इलाज किया जाता है.