
महाराष्ट्र में खुले खाद्य तेल की बिक्री पर FDA ने रोक लगाई थी. इस कार्रवाई के बाद अब मुख्यमंत्री देवेंद्र फड़नवीस ने इस व्यवस्था के लिए SOP बनाने के निर्देश दिए हैं. सवाल है कि आखिर एक ही तेल, जो पैकेट में सुरक्षित माना जाता है, खुले में बिकने पर सेहत के लिए खतरा कैसे बन जाता है. इससे किन बीमारियों का खतरा रहता है.
बिना पैकेजिंग, बिना ब्रांड या खुले में बिकने वाला तेल इस्तेमाल करने से सेहत को गंभीर खतरा हो सकता है, क्योंकि इसमें मिलाव की आशंका होती है. खुले तेल में अक्सर सस्ते, घटिया या खाने लायक तेल और मिनरल ऑयल जैसे जहरीले इंडस्ट्रियल केमिकल मिला दिए जाते हैं. खुले में बिकने वाला तेल लगातार हवा और गर्मी में रहता है. इससे उसमें तेजी से ऑक्सीडेशन होता है, जिससे फ्री रेडिकल्स और जहरीले कंपाउंड बनते हैं जो लिवर और किडनी पर बुरा असर डालते हैं.
फूड पॉइजनिंग का खतरा
दिल्ली के डॉ. राम मनोहर लोहिया अस्पताल में मेडिसिन विभाग में डायरेक्टर प्रोफेसर डॉ सुभाष गिरि ने इस बारे में बताया है. वह कहते हैं कि खुले तेल में सबसे ज्यादा खतरा फूड पॉइजनिंग का होता है. सही सीलिंग, बैच ट्रैकिंग या एक्सपायरी डेट न होने के कारण, खुले तेल में आसानी से खतरनाक बैक्टीरिया चले जाते हैं, जिससे फूड पॉइजनिंग का खतरा रहता है. इससे पेट और आंतों में इंफेक्शन भी हो सकता है. जिससे उल्टी और दस्त जैसी समस्या होने का रिस्क होता है.

हार्ट पर पड़ सकता है असर
दिल्ली के मेदांता मूलचंद अस्पताल में कार्डियोलॉजी विभाग में प्रोफेसर डॉ तरुण कुमार बताते हैं कि अगर तेल में फ्री रेडिकल्स और जहरीले कंपाउंड है तो यह हार्ट हेल्थ पर असर डालता है. कुछ मामलों में इससे कोलेस्ट्रॉल बढ़ने का भी रिस्क रहता है, जो हार्ट अटैक का कारण बन सकता है. डॉ तरुण कहते हैं कि खुले तेल में इंडस्ट्रियल केमिकल होने की आशँका रहती है, ये केमिकल भी शरीर में हाई बीपी से से लेकर हार्ट फेल्यिर का कारण बन सकते हैं.
तेल की पहचान हो जाती है गायब
डॉ. तरुण बताते हैं कि पैकेट वाले तेल पर बैच नंबर, बनाने वाली कंपनी का नाम, लाइसेंस नंबर और एक्सपायर डेट दर्ज होती है. अगर किसी तेल को लेकर शिकायत आती है तो जांच एजेंसियां उसके सोर्स तक पहुंच सकती हैं, लेकिन खुले तेल में यह ट्रेसबिलिटी कमजोर हो जाती है. अगर तेल की क्लालिटी खराब निकली या उसमें मिलावट मिली तो ग्राहक के लिए यह जानना मुश्किल हो सकता है कि वह तेल आखिर आया कहां से था.
डॉ. तरुण कहते हैं कि खुले तेल को देखकर उसकी शुद्धता का अंदाजा लगाना आसान नहीं है. रंग या स्वाद सामान्य होने के बावजूद उसमें दूसरे सस्ते तेल मिलाए जा सकते हैं. तेल में मिलावट का पता कई मामलों में सिर्फ लैब जांच से ही चलता है. आम आदमी को इसका पता आसानी से नहीं चल पाता है.

आम आदमी क्या करे?
डॉ सुभाष ने कहा कि तेल खरीदते समय पैकेज पर निर्माता की जानकारी, FSSAI लाइसेंस नंबर, बैच नंबर और बेस्ट-बिफोर या एक्सपायरी की जानकारी जरूर देखें, घर में तेल को धूप और गर्मी से दूर रखें और बार-बार इस्तेमाल किए गए तेल में नया तेल मिलाकर लगातार यूज बिलकुल न करें.