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क्या हर जानकारी फोन में सेव करने से दिमाग याद रखना छोड़ देता है? डॉक्टर से जानें

भूलने के कई कारण हो सकते हैं जैसे तनाव, खराब नींद और मानसिक दबाव. ऐसे में बेहतर याददाश्त के लिए स्क्रीनशॉट लेने से पहले जानकारी समझना, बार-बार फोन चेक करने से बचना और पर्याप्त नींद लेना जरूरी है. अगर भूलने की समस्या बढ़े तो डॉक्टर से सलाह लें.

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स्क्रीनशॉट लेना क्या कोई दिमागी बीमारी है?
स्क्रीनशॉट लेना क्या कोई दिमागी बीमारी है?

कोई फोटो हो, जानकारी या जरूरी मैसेज आया हो, अब लोगों को इनका स्क्रीनशॉट लेने की आदत हो गई है. किसी का फोन नंबर भी अब याद नहीं रहता है. इसको भी फोन में सेव कर लेते हैं. कोई जरूरी मीटिंग हो तो उसका अलर्ट लगा लेते हैं. ऐसा इसलिए किया जाता है क्योंकि हम सोचते हैं कि कौन हर चीज को याद रखे, सबसे बढ़िया तरीका है स्क्रीनशॉट ले लें या फोन में सेव कर लें. लेकिन क्या हर तरह की जानकारी को याद न करके फोन में सेव करने की आदत कहीं कमजोर याददाश्त की निशानी तो नहीं है? 

मेमोरी एंड कॉग्निशन जर्नल में प्रकाशित एक रिसर्च में स्क्रीनशॉट लेने और याददाश्त के बीच संबंध पर रिसर्च की गई है. इसमें पाया गया कि जो लोग स्क्रीनशॉट नहीं लेते हैं वह किसी तस्वीर को बेहतर तरीके से याद रखते हैं. जबकि स्क्रीनशॉट लेने वालों में न लेने वालों की तुलना में मेमोरी उतनी अच्छी नहीं मिली. मेदांता हॉस्टिल में इंस्टीट्यूट ऑफ न्यूरोसाइंस की डायरेक्टर डॉ. नमिता कौल ने इस बारे  में Aajtak.in को बताया है. वह कहती हैं कि  डिजिटल डिवाइस का जरूरत से ज्यादा यूज हमारे किसी चीज पर ध्यान देने और जानकारी को याद रखने के तरीके पर असर डाल रहा है.

हर चीज फोन में सेव करने से क्या दिमाग याद रखना छोड़ देता है?

डॉ नमिता बताती हैं कि अगर हम किसी जानकारी को याद न रहने के डर से उसको स्क्रीनशॉट के रूप में फोन में सेव करते हैं तो इसको डिजिटल फॉरगेटफुलनेस कहा जाता है. इसमें हम किसी भी जानकारी को याद करने के लिए किसी डिवाइस पर डिपेंड हो जाते हैं. इससे परेशानी तब हो सकती है,जब हम किसी जानकारी को  याद रखने के बजाय सिर्फ उसे सेव करने पर ध्यान देने लगते हैं. आजकल ऐसा हो भी रहा है. लोग कुछ याद करने पर ध्यान नहीं देते हैं. उनका लगता है कि फोन में स्क्रीनशॉट ले लिया है, या जरूरी जानकारी नोट कर ली है तो याद रखना ज्यादा आसान रहेगा. 

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जानकारी याद रखने के लिए क्या ये तरीका सही है?

जब हम कोई बात ध्यान से सुनते हैं, उसे समझते हैं और पहले से सीखी हुई बातों से जोड़ते हैं, तो उसे याद रखना आसान हो जाता है, लेकिन आजकर इंफोर्मेशन इतनी ज्यादा है कि लोग सब याद भी रखना चाहते हैं. मनोविज्ञान में इस प्रक्रिया से जुड़ा एक शब्द है कॉग्निटिव ऑफलोडिंग. इसका मतलब है दिमाग पर याद रखने का बोझ कम करने के लिए बाहरी साधनों की मदद लेना, जैसे कैलेंडर में तारीख लिखना, फोन में नंबर सेव करना या जरूरी काम के लिए रिमाइंडर लगाना और स्क्रीनशॉट लेना. हालांकि ये उतना बेहतर तरीका नहीं है.

यह भी पढ़ें: बैठे-बैठे बूढ़ा हो रहा है दिमाग? आज ही बदलें ये एक आदत, भूलने की बीमारी का खतरा होगा कम

क्या भूलने की वजह सिर्फ मोबाइल है?

डॉ नमिता बताती हैं कि ऐसा बिल्कुल नहीं है. किसी बात को भूलने के पीछे कई वजहें हो सकती हैं. खराब नींद, तनाव, घबराहट और डिप्रेशन का असर भी ध्यान लगाने और जानकारी याद रखने की क्षमता पर पड़ सकता है.इसके अलावा, बार-बार मोबाइल पर नोटिफिकेशन देखना, एक ऐप से दूसरे ऐप पर जाना और एक साथ कई काम करने की कोशिश करना भी इसमें बाधा डाल सकता है.
ऐसे में कई बार परेशानी याददाश्त की नहीं, बल्कि जानकारी पर ठीक से ध्यान न दे पाने की होती है. इसलिए हर छोटी-बड़ी बात भूलने पर यह मान लेना सही नहीं है कि मोबाइल की वजह से दिमाग कमजोर हो रहा है.

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याददाश्त अच्छी रखनी है तो क्या करें

स्क्रीनशॉट लेने से पहले बात समझें

 फोन देखने से पहले खुद याद करें

 पढ़ने के बाद खुद को दोहराएं: 

बार-बार फोन चेक करने से बचें

नींद पूरी करें और तनाव कम करें

कब डॉक्टर को दिखाना जरूरी है?

कभी-कभार चीजें भूल जाना सामान्य है, लेकिन अगर बार-बार भूलने की समस्या बनी रहती है, धीरे-धीरे बढ़ रही है या इसका असर आपके काम, रिश्तों और रोजमर्रा की जिंदगी पर पड़ने लगा है, तो डॉक्टर से सलाह लें.

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