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क्या ब्लू-कट लेंस वाकई आंखों के लिए फायदेमंद है? ये स्क्रीन लाइट से बचाता है? डॉक्टर ने बताया

ब्लू-कट लेंस का प्रचार काफी ज्यादा किया जाता है. लेकिन क्या ये लेंस वास्तव में आंखों के लिए जरूरी है? क्या यह स्क्रीन से होने वाली आंखों की थकान, जलन और ड्राई आई को रोकता है? इस बारे में सर गंगाराम अस्पताल के डिपार्टमेंट ऑफ ऑप्थमोलॉजी की एसोसिएट कंसल्टेंट डॉ. इकेडा लाल ने बताया है.

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ब्लू- कट लेंस
ब्लू- कट लेंस

आप अपनी आंखों का चेकअप कराने गए, टेस्ट में पता चला कि नजर कमजोर हो गई है और चश्मा लगेगा. इसके लिए आप आई सेंटर पहुंचे, जहां ये कहा गया है कि आप ब्लू- कट लेंस बनवाएं, क्योंकि ये आंखों को स्क्रीन के खतरनाक असर से बचा लेता है. ये नॉर्मल लेंस से ज्यादा फायदेमंद है. ये बातें सुनकर आप इसको बनवा भी लेते है. इसकी कीमत भी ज्यादा होती है. लेकिन सवाल यह है कि क्या ब्लू-कट लेंस वास्तव में आंखों के लिए जरूरी है? क्या यह स्क्रीन से होने वाली आंखों की थकान, जलन और ड्राई आई को रोकता है? क्या इस लैंस से जिस ब्लू लाइट से बचाने का दावा किया जाता है वो वाकई उतनी खतरनाक है? 

सर गंगाराम अस्पताल के डिपार्टमेंट ऑफ ऑप्थमोलॉजी की एसोसिएट कंसल्टेंट डॉ. इकेडा लाल ने इस बारे में Aajtak.in को बताया है. वह कहती हैं कि ब्लू-कट लेंस का प्रचार काफी ज्यादा किया जाता है, लेकिन इसे आंखों के लिए बेहद फायदेमंद बताने के वैज्ञानिक प्रमाण नहीं हैं. डॉ. लाल के मुताबिक, मेडिकल साइंस में ऐसी पुख्ता रिसर्च नहीं है, जो यह साबित करती हो इनको आंखों पर पहनने से ड्राई आई, आंखों में जलन, स्क्रीन की रोशनी से होने वाली परेशानी या आंखों के दर्द में खास कमी आती है. 

क्या मोबाइल और कंप्यूटर की नीली रोशनी आंखों को नुकसान पहुंचाती है?

लंबे समय तक मोबाइल या कंप्यूटर चलाने वाले लोगों को लगता है कि स्क्रीन से निकलने वाली नीली रोशनी ही उनकी आंखों की थकान का मुख्य कारण है. डॉ लाल कहती हैं कि मोबाइल और कंप्यूटर स्क्रीन से निकलने वाली नीली रोशनी से आंखों के पर्दे यानी रेटिना को नुकसान होने का प्रमाण नहीं है. सूरज की रोशनी में मौजूद नीली रोशनी स्क्रीन की तुलना में कई गुना अधिक होती है. 

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तो फिर स्क्रीन देखने से आंखें थकती क्यों हैं? इस बारे में डॉ. लाल कहती हैं कि जब हम लंबे समय तक मोबाइल या कंप्यूटर स्क्रीन देखते हैं, तो हमारी पलकें कम झपकती हैं. इससे आंखों की सतह पर मौजूद नमी जल्दी सूख सकती है और आंखों में सूखापन, जलन या थकान महसूस हो सकती है. इसके अलावा, लंबे समय तक लगातार एक ही दूरी पर स्क्रीन देखने से आंखों पर तनाव भी पड़ सकता है. लोग स्क्रीन देखने के दौरान ब्रेक कम लेते हैं. जिससे आंखों पर प्रेशर पड़ता है और दर्द होने लगता है. 

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क्या ब्लू-कट लेंस पहनना जरूरी है?

अगर डॉक्टर ने चश्मे का नंबर दिया है, तो सही नंबर का चश्मा पहनना ज्यादा महत्वपूर्ण है, ब्लू-कट को आंखों की आखों की किसी समस्या या बीमारी का इलाज नहीं माना जा सकता. न ही ऐसा है कि इसको लगाएंगे तो आंखों में कोई परेशानी नहीं होगी, जरूरी ये है कि आप स्क्रीन देखते समय अपनी आंखों को समय समय पर आराम देते रहे. 

स्क्रीन से आंखों को बचाने के लिए क्या करें?

अगर आपका काम कंप्यूटर पर है या आप रोजाना कई घंटे मोबाइल चलाते हैं, तो सिर्फ लेंस पर निर्भर रहने के बजाय स्क्रीन इस्तेमाल करने की आदतों पर ध्यान देना ज्यादा जरूरी है. इसके लिए 20-20-20 नियम को फॉलो करें. 

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20-20-20 नियम अपनाएं

आंखों की थकान कम करने के लिए 20-20-20 नियम अपनाया जा सकता है. इसके लिए आप हर 20 मिनट बाद स्क्रीन से नजर हटाएं. करीब 20 सेकंड तक किसी दूर की चीज को देखें. कोशिश करें कि वह चीज आपसे करीब 20 फीट दूर हो. इससे आंखों को लगातार एक ही दूरी पर स्क्रीन देखने से थोड़ा आराम मिलता है. इस बात का भी ध्यान रखें कि लगातार कई घंटे स्क्रीन देखने के बजाय बीच-बीच में ब्रेक लें. स्क्रीन देखते समय पलकें झपकाना न भूलें.

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