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आमिर की फिल्म में ईशान बनकर दिलों में बनाई जगह, लेकिन खोया बचपन, दर्शील सफारी का छलका दर्द

दर्शील सफारी, जो तारे जमीन पर फिल्म से मशहूर हुए थे उनका कहना है कि पॉपुलैरिटी मिलने के बाद उनका बचपन काफी मुश्किल हो चुका था. वो अपने घर से बाहर नहीं निकल पाते थे क्योंकि उन्हें देखते ही भीड़ इकट्ठा हो जाती थी.

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दर्शील को मिली तारे जमीन पर से पहचान (Photo: ITGD)
दर्शील को मिली तारे जमीन पर से पहचान (Photo: ITGD)

आमिर खान साल 2007 में समाज के अंदर एक बेहद अहम फिल्म तारे जमीन पर लेकर आए थे, जिसने सभी की आंखों को नम कर दिया था. इसमें ईशान नाम का एक डिस्लेक्सिस बच्चा दिखा, जिसने अपनी मासूमियत से लोगों का दिल जीता. ये रोल दर्शील सफारी ने निभाया, जिन्हें आज भी इसी रोल के लिए जाना जाता है. 

दर्शील को 10 साल की उम्र में ही वो पॉपुलैरिटी मिल गई थी, जिसका सपना हर एक्टर देखता है. वो जहां जाते थे, लोगों की भीड़ उनसे मिलने के लिए जमा हो जाती थी. लेकिन इतनी कम उम्र में इतना स्टारडम मिलना दर्शील के लिए कई मुश्किलें खड़ी कर गया था. एक्टर ने अपने हालिया इंटरव्यू में बताया कि एक वक्त के बाद उनका घर से बाहर निकलना मुश्किल हो गया था. 

ईशान के किरदार ने दर्शील पर डाला कैसा असर?

डिजिटल कमेंट्री संग बातचीत में दर्शील से पूछा गया कि क्या ईशान का किरदार उनके करियर में रुकावट लेकर आया? तो इसपर एक्टर ने कहा- मैं अपनी जिंदगी में इस बारे में कभी सोचा नहीं, कभी-कभी ना सोचना भी सही है. मैंने कभी नहीं सोचा कि लोग मुझे कैसे देखते हैं. मैं बस उस समय अपनी मस्ती में था, एक फ्लो चल रहा था क्योंकि मैं तब बच्चा ही था. उस फिल्म के बाद मैंने एक सुपरहीरो फिल्म करने की इच्छा जाहिर की, जो पूरी भी हुई. 

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'लेकिन क्या होता है कि जब आप 100 फिल्में भी कर लेते हो, तब भी लोग आपको पहले काम के लिए ही याद रखते हैं. तो मैंने हमेशा यही सोचा है कि मैं ऐसा काम करता रहूं जिससे लोग मुझे याद रखे. उम्मीद है कि लोग मेरे बाकी काम को भी नोटिस करेंगे.'

 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 

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दर्शील पर लगी थी रोक

दर्शील से आगे फेम मिलने के बाद उनके बचपन पर क्या असर पड़ा, इसके बारे में भी पूछा. जिसके जवाब में एक्टर ने कहा- मेरे ऊपर काफी सारी रोक लगा दी गई थीं. मैं बाहर अपने दोस्तों के साथ उतना घूम नहीं पाता था क्योंकि लोगों की भीड़ आ जाती थी. मैं उस उम्र में सिक्योरिटी लेकर भी नहीं घूम सकता था क्योंकि वो काफी अजीब लगता. मुझे बाहर घूमने-फिरने का बहुत शौक था. जब घर पर कोई सामान लाना हो, तो मैं मम्मी से कहता था कि मैं लेकर आऊंगा, लेकिन वो बंद हुआ. कोई भीड़ वाली जगह जाता था, तो मुंह छिपाकर या कैप-चश्मे पहनकर जाता था.

दर्शील आगे कहते हैं कि उन्हें उस दौरान उन लोगों की पहचान भी हुई कि कौन अपना है और कौन पराया. ये उनकी लाइफ का सबसे सरप्राइजिंग फेज था. एक्टर ने बताया कि उन्हें इस पूरे फेज के साथ जीना पड़ा, और वो अपनी जिंदगी में काफी कुछ सीख भी गए. 

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अब कहां हैं दर्शील सफारी?

बात करें दर्शील सफारी की, तो कई लोगों के मन में ये सवाल उमड़ता है कि वो आजकल आखिर कहां हैं और क्या कर रहे हैं. दर्शील लगातार कैमरा के सामने काम कर रहे हैं, लेकिन उन्हें 'तारे जमीन पर' के जैसी कोई फिल्म के लेवल वाला काम नहीं मिल रहा है. हालांकि वो जल्द टीवी के राम यानी अरुण गोविल संग एक फिल्म कृष्णा और चिट्ठी में नजर आएंगे. ये 29 मई को सिनेमाघरों में रिलीज होगी. 

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