बॉलीवुड के दिग्गज एक्टर मुश्ताक खान का 24 सितंबर को उनका निधन हो गया था. 25 सितंबर को मुंबई में उनका अंतिम संस्कार किया गया. अब बॉलीवुड के दिग्गज एक्टर रजा मुराद ने अंतिम संस्कार में बॉलीवुड के बड़े सितारों के शामिल न होने पर नाराजगी जाहिर की है.
रजा मुराद ने कड़े शब्दों वाले एक वीडियो संदेश जारी कर सवाल किया कि फिल्म उद्योग से कोई भी 'बड़ा चेहरा' अभिनेता को अंतिम सम्मान देने क्यों नहीं आया, जिन्होंने हिंदी फिल्म उद्योग को लगभग पांच दशक समर्पित किए थे?
रजा मुराद ने क्या कहा?
बीते दिन मुश्ताक खान का अंतिम संस्कार 25 सितंबर को किया गया था. उनके कई सहयोगी और साथी कलाकार अंतिम संस्कार में शामिल हुए, लेकिन रजा ने निराशा व्यक्त की कि कोई भी बड़ा बॉलीवुड सितारा मौजूद नहीं था.
एक्टर ने कहा, 'दुख की बात ये है कि ऐसे मौके पर कोई भी स्टार, जिसे हम स्टार कहते हैं, उन्हें अपना आखिरी सलाम पेश करने नहीं आया. जबकी उनके बहुत सारे को-स्टार, एक्टर, सब आये.'
इसके बाद रजा ने तीखी तुलना करते हुए कहा कि बॉलीवुड सितारे प्रभावशाली लोगों से जुड़े भव्य समारोहों में आसानी से शामिल होंगे. 'हां, अगर किसी उद्योगपति के बेटे की शादी होती, तो ये सितारे ना सिर्फ वहां शामिल होते, बल्कि वहां मेहमानों की सेवा वेटर की तरह भी करते.'
इसके बाद एक्टर ने कहा, 'हां जब कोई राजनीतिक पार्टी अपनी लाठी दिखाती है, तो ये भीगी बिल्ली की तरह वहां पहुंच जाते हैं. लेकिन उस शख्स के अंतिम संस्कार में शामिल नहीं हुए, जिसने फिल्म इंडस्ट्री को अपने 50 साल दिए, अपनी पूरी जिंदगी दे दी और आप उसके लिए 50 मिनट भी नहीं निकाल सके.'
अंत में एक्टर ने कहा, 'ये मत भूलिए कि आज आपका ये रोशन चेहरा है, कल ये भी मुरझा जाएगा. कल ये अंधेरे में डूब जाएगा. अगर कोई चीज आपके काम आएगी, तो आपका अच्छा व्यवहार, आपके कर्म काम आएंगे और कुछ नहीं आएगा.'
मुश्ताक खान के लिए क्या कहा?
मुश्ताक खान की प्रशंसा करते हुए रजा ने कहा कि एक्टर ने अपने काम के जरिए अपनी पहचान बनाई है और उद्योग में अपनी जगह बनाने के लिए उन्होंने कभी भी चापलूसी या दूसरों को गुमराह करने पर भरोसा नहीं किया. उन्हें अपनी जिंदगी में कभी आपकी जरूरत नहीं पड़ी, ना उन्हें अपनी जिंदगी के बाद आपकी जरूरत पड़ेगी.'
उन्होंने इस बात पर भी अफसोस जताया कि खान के साथ काम कर चुके कई प्रमुख सितारे उन्हें अंतिम विदाई देने नहीं आए. 'हां, ये जरूर हम सबके लिए अफसोस की बात है कि ऐसा कोई स्टार नहीं है जिसके साथ मुश्ताक खान ने काम ना किया हो, और वो उनको कुछ पल के लिए सलाम करने भी नहीं आया.'
अंत में रजा मुराद, 'याद रखो एक बात, ये शोहरत, ये दौलत, ये इज्जत हमेशा नहीं रहती. शोहरत की बुलंदी भी एक लम्हें का तमाशा है. जिस शख्स पर आप बैठे हैं, वो भी टूट सकती है. याद रखो.'