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'मेरे आंसू बहने लगे', मां बनने के बाद पोस्टपार्टम से गुजरीं कियारा आडवाणी, बदल गई पूरी जिंदगी

एक्ट्रेस कियारा आडवाणी ने पहली बार मदरहुड फेज पर बात की है. उन्होंने ये भी बताया कि बेटी के जन्म के बाद वो पोस्टपार्टम डिप्रेशन से गुजर रही थीं. वो वक्त उनके लिए काफी मुश्किल था. उन्हें हर बात पर चिढ़ होती थी और उनके आंसू बहने लगते थे.

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कियारा आडवाणी ने पोस्टपार्टम पर की बात (Photo: Social Media)
कियारा आडवाणी ने पोस्टपार्टम पर की बात (Photo: Social Media)

बॉलीवुड एक्ट्रेस कियारा आडवाणी ने पहली बार अपनी मदरहुड जर्नी पर बात की है. एक्ट्रेस ने 2025 में बेटी को जन्म दिया था. कियारा और सिद्धार्थ अपनी लिटिल प्रिंसेस संग अपने हर मोमेंट को यादगार बना रहे हैं. लेकिन मां बनने के बाद कियारा की जिंदगी काफी ज्यादा बदल गई है.

पोस्टपार्टम डिप्रेशन पर बोलीं कियारा

राज शमानी संग लेटेस्ट पॉडकास्ट में कियारा ने इस बदलाव को अपना लिया है, लेकिन उनके मन में लगातार यह ख्याल आता है कि उनके फैसलों का उनकी बेटी पर क्या असर होगा और वो उसके सामने कैसा उदाहरण पेश कर रही हैं. उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि हर महिला इस दौर से अलग तरह से गुजरती है और इसका उन पर कई तरह से प्रभाव पड़ता है. 

कियारा ने अपनी इमोशनल पोस्टपार्टम जर्नी और पति सिद्धार्थ मल्होत्रा से मिले सपोर्ट पर भी खुलकर बात की. एक्ट्रेस ने बताया कि उनके मूड स्विंग्स होते थे, इमोशनल ब्रेकडाउन हो जाता था. इससे बाहर निकलने में उन्हें करीब 6 महीने लगे. उन्होंने ये भी बताया कि कैसे कभी-कभी नई मांओं को बस एक ऐसे इंसान की जरूरत होती है जो उनकी बातों को सुन सके. 

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कियारा ने यह भी बताया कि बच्चे के जन्म के बाद सभी का ध्यान बच्चे पर ही लगा रहता है, जबकि एक मां की भावनात्मक जरूरतों पर किसी का ध्यान नहीं जाता. कियारा बोलीं- मुझे लगता है कि सब लोग बच्चे के बारे में ही ज्यादा सोचते हैं. बच्चा सो रहा है, बच्चा ठीक है. डायपर बदलना है या बच्चे को नहलाना और मालिश करना है. बच्चे के जन्म के शुरुआती महीनों का रूटीन बस इसी के इर्द-गिर्द सिमट कर रह जाता है. 

रो पड़ती थीं कियारा

कियारा ने आगे कहा कि पोस्टपार्टम के शुरुआती दिनों में छोटी-छोटी बातें भी उन्हें रुला देती थीं. कियारा बोलीं- उस वक्त, मुझे नहीं पता था कि क्या मैं बस सिद्धार्थ को मिस कर रही थी या कुछ और, लेकिन मैं एक ऐसे दौर से गुजर रही थी जहां हर छोटी चीज मुझे ट्रिगर कर रही थी. मतलब कुछ भी... आप कोई ऐसी बात कह दें जिस पर आज हम शायद हंसें, लेकिन उन शुरुआती दिनों में किसी भी बात पर बस... पट-पट-पट-पट... मेरे आंसू निकल जाते थे. 

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