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दृश्यम ने चला बॉक्स ऑफिस पर पुराना दांव! लगेगी हैट्रिक? अजय देवगन बोले- किरदार चलते हैं सीक्वल नहीं

‘दृश्यम 3’ की रिलीज के बीच अजय देवगन ने बताया कि सीक्वल की सफलता में फिल्म से ज्यादा किरदारों का जुड़ाव मायने रखता है. जानें विजय सलगांवकर, गोपाल और सिंघम पर उन्होंने क्या कहा और किरदारों से अटैचमेंट को लेकर उनका नजरिया क्या है.

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दृश्यम 3 के रिलीज पर बोले अजय देवगन (Photo: Screengrab)
दृश्यम 3 के रिलीज पर बोले अजय देवगन (Photo: Screengrab)

अजय देवगन की ‘दृश्यम 3’ 2 अक्टूबर को सिनेमाघरों में रिलीज हो चुकी है और फिल्म को लेकर दर्शकों के बीच एक बार फिर विजय सलगांवकर की चर्चा है. आखिर इस किरदार में ऐसा क्या है कि लोग सालों बाद भी इसकी कहानी और इसके अगले कदम का इंतजार करते हैं? अब अजय देवगन ने सीक्वल की सफलता का फॉर्मूला बताया है. उनके मुताबिक, फिल्म का नाम या उसका पिछला रिकॉर्ड नहीं, बल्कि उसके किरदार दर्शकों को वापस सिनेमाघरों तक खींचकर लाते हैं.

‘सीक्वल नहीं, किरदार चलते हैं’

अजय देवगन का मानना है कि किसी फिल्म का सीक्वल सिर्फ इसलिए नहीं बन सकता कि उसका पहला पार्ट हिट रहा था. दर्शकों का उस फिल्म के किरदारों से जुड़ाव होना सबसे जरूरी है. उन्होंने ‘गोलमाल’, ‘दृश्यम’ और ‘सिंघम’ का उदाहरण देते हुए कहा कि इन फिल्मों में कहानी के साथ-साथ गोपाल, विजय सलगांवकर और सिंघम जैसे किरदारों ने दर्शकों के दिल में जगह बनाई है.

एनबीटी से बातचीत में अजय ने कहा- मेरा मानना है कि सीक्वल नहीं, किरदार चलते हैं. आप किसी भी सीक्वल को उठाकर देख लो, चाहे वह ‘गोलमाल’ हो या ‘दृश्यम’, वहां विजय सलगांवकर, गोपाल या सिंघम चला है. जब लोग इन किरदारों से जुड़ते हैं, तभी आप सीक्वल बना सकते हैं. आप किसी फिल्म का सीक्वल सिर्फ इसलिए नहीं बना सकते कि वह कमाल की थी और लोगों ने उसे खूब पसंद किया. लोगों को उन किरदारों से प्यार होना चाहिए.

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अजय के हिसाब से सीक्वल की असली ताकत पुरानी फिल्म की लोकप्रियता नहीं, बल्कि उन किरदारों से दर्शकों का रिश्ता है. यही वजह है कि विजय सलगांवकर की वापसी को लेकर भी दर्शकों में उत्सुकता बनी रहती है.

किरदार से ज्यादा जुड़ गए तो ‘पागल’ हो जाएंगे!

अजय देवगन ने बातचीत में यह भी बताया कि लंबे समय तक एक ही किरदार को बार-बार निभाने के बावजूद वह उससे भावनात्मक रूप से जुड़कर नहीं रहते. वह किरदार को पसंद जरूर करते हैं, लेकिन उसे अपनी असल जिंदगी का हिस्सा नहीं बनने देते.

जब उनसे पूछा गया कि क्या किसी किरदार को लंबे समय तक निभाते हुए उनसे अटैचमेंट हो जाता है, तो अजय ने कहा- नहीं, मैं किरदार के साथ अटैच नहीं होता हूं. हां, आप उस किरदार को पसंद करने लगते हैं, लेकिन अगर ऐक्टर्स अपने किरदारों से अटैच होने लगेंगे तो वे पागल हो जाएंगे. आपको पता ही नहीं चलेगा कि आप असल जिंदगी में कौन हैं. आप अपनी असल जिंदगी में भी किरदार निभाने लगेंगे. इसलिए उससे डिटैच होना जरूरी है.

अजय की बात से साफ है कि पर्दे पर विजय सलगांवकर या सिंघम बनकर दर्शकों को बांधना एक बात है, लेकिन शूटिंग खत्म होने के बाद उस किरदार से बाहर निकलना भी उतना ही जरूरी है.

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2 अक्टूबर को रिलीज हुई ‘दृश्यम 3’ में अजय देवगन एक बार फिर विजय सलगांवकर के किरदार में नजर आ रहे हैं. इस फ्रेंचाइजी की खासियत यही रही है कि दर्शक सिर्फ मर्डर मिस्ट्री या सस्पेंस के लिए नहीं, बल्कि विजय की सूझबूझ और अपने परिवार को बचाने की जिद से भी जुड़ते हैं.

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