AITC
BJP
CPM
INC
नोटा
NOTA
IND
IND
BSP
SUCI
IND
IUML
AJUP
West Bengal Election Result 2026 Live: मेटियाबुरूज विधानसभा सीट पर AITC ने दोबारा चखा जीत का स्वाद
West Bengal Election Result 2026 Live: मेटियाबुरूज विधानसभा सीट पर AITC ने दोबारा चखा जीत का स्वाद
Metiaburuz Vidhan Sabha Result 2026 Live: मेटियाबुरूज सीट पर सबसे आगे निकले AITC उम्मीदवार Abdul Khaleque Molla
Metiaburuz Election Results 2026 Live: मेटियाबुरूज सीट पर यह क्या हो गया! BJP बड़े अंतर से पीछे
Metiaburuz Election Results Live 2026: पश्चिम बंगाल के PRESIDENCY क्षेत्र में किस पार्टी या गठबंधन का दबदबा? देखें पश्चिम बंगाल रिजल्ट से जुड़े ताजा अपडेट
West Bengal Assembly Election Results 2026 Live: दिग्गज उम्मीदवारों में कौन खुश होगा, किसे लगेगा झटका? जानें रुझानों में कौन आगे और कौन पीछे?
कोलकाता का एक ऐतिहासिक इलाका, मेटियाबुरूज, अपनी सांस्कृतिक विरासत की वजह से “मिनी लखनऊ” के नाम से मशहूर है, जो अवध के देश निकाला, आखिरी नवाब वाजिद अली शाह से जुड़ी है. वाजिद अली शाह ने अपनी जिंदगी के अंतिम 31 साल यहीं बिताए और यहीं दफन हुए. अपने परिवार के अलावा, वह 1856 में लखनऊ से रसोइयों, कलाकारों, कारीगरों वगैरह को अपने साथ लाए और हुगली नदी के किनारे एक नई बस्ती बसाई, जो अब अवधी विरासत और बंगाली संस्कृति का एक अनोखा मेल दिखाती है. पिछले कुछ सालों में, यह अपनी गारमेंट इंडस्ट्री, टेलरिंग और होलसेल कपड़ों के बाजारों की वजह से एक टेक्सटाइल हब बन गया है.
मेटियाबुरूज, एक मुस्लिम-बहुल जनरल कैटेगरी विधानसभा सीट है, जो साउथ 24 परगना जिले में है और डायमंड हार्बर लोकसभा सीट का एक हिस्सा है. इसमें कोलकाता म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन के छह वार्ड, 136 से 141 और महेशतला म्युनिसिपैलिटी के 10 वार्ड, 1 से 10 शामिल हैं, जो इसे पूरी तरह से शहरी लुक देते हैं.
2011 में बनी मेटियाबुरूज सीट ने तीन असेंबली चुनाव लड़े हैं और तीनों असेंबली चुनाव जीतकर और चार लोकसभा चुनावों में आगे रहकर यह तृणमूल कांग्रेस का गढ़ बन गई है, और अभी तक इसे कोई चुनौती देने वाला नज़र नहीं आ रहा है.
2011 के पहले चुनाव में तृणमूल कांग्रेस का मेटियाबुरूज से रिश्ता ठीक नहीं रहा, जब उसकी उम्मीदवार मुमताज बेगम ने CPI(M) के बदरुद्दोजा मोल्ला को 6,594 वोटों से हराया था. पार्टी ने 2016 में उनकी जगह अब्दुल खालिक मोल्ला को उतारा और तृणमूल कांग्रेस को मनचाहा नतीजा मिला, क्योंकि खालिक मोल्ला ने अपने CPI(M) के विरोधी मोमिनुल इस्लाम को 17,976 वोटों के अंतर से हराया. तृणमूल कांग्रेस ने 2021 में यह सीट बड़े अंतर से बरकरार रखी, जब अब्दुल खालिक मोल्ला ने BJP के रामजीत प्रसाद को 119,604 वोटों से हराया.
मेटियाबुरूज विधानसभा क्षेत्र में लोकसभा चुनाव के दौरान वोटिंग के रुझान से यही पता चलता है कि तृणमूल कांग्रेस की शुरुआत कमजोर रही है, माकपा उसे कड़ी टक्कर दे रही है, वाम मोर्चे के अचानक कमजोर होने के बाद भाजपा चुनौती देने वाली भूमिका में आ गई है और तृणमूल कांग्रेस अपनी पकड़ मजबूत कर रही है. 2009 में यह CPI(M) से 8,404 वोटों और 2014 में 2,511 वोटों से आगे था. CPI(M) के अचानक गिरने के बाद मुकाबला एकतरफा हो गया क्योंकि 2019 में तृणमूल कांग्रेस ने BJP को 97,176 वोटों से आगे बढ़ाया, जो 2024 में और बढ़कर 1,15,740 वोटों तक पहुंच गया.
मेटियाबुरूज विधानसभा क्षेत्र में 2025 के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन के बाद ड्राफ्ट इलेक्टोरल रोल में 276,926 वोटर थे, जिससे वोटरों की संख्या में लगातार बढ़ोतरी का ट्रेंड बना रहा, जो 2024 में 2,61,821, 2021 में 2,56,315, 2019 में 2,33,636, 2016 में 2,23,690 और 2011 में 1,82,250 था. 69.20 परसेंट के साथ मुसलमान सबसे ज्यादा असरदार ताकत हैं. मेटियाबुरूज के कुल वोटरों में से 3.39 परसेंट अनुसूचित जाति के हैं. यह पूरी तरह से शहरी सीट है और इसकी लिस्ट में कोई ग्रामीण वोटर नहीं है. शहरी सीट के लिए वोटर टर्नआउट शानदार रहा है, 2011 में 72.64 परसेंट, 2016 में 73.39 परसेंट, 2019 में 71.70 परसेंट, 2021 में 76.76 परसेंट और 2024 में 75.76 परसेंट रहा.
मेटियाबुरूज कोलकाता के दक्षिण-पश्चिमी किनारे पर, हुगली नदी के पूर्वी किनारे पर, दक्षिण 24 परगना जिले के घनी आबादी वाले शहरी इलाके में है, जहां निचले गंगा डेल्टा की खास समतल जमीन है. यहां की इकॉनमी गारमेंट और टेक्सटाइल सेक्टर पर चलती है, जिसमें कई टेलरिंग यूनिट, कपड़ों के थोक बाजार और छोटे पैमाने पर मैन्युफैक्चरिंग के साथ-साथ रिटेल व्यापार और सर्विस भी हैं. सिब्तैनाबाद इमामबाड़ा, वाजिद अली शाह और उनके परिवार का मकबरा और दफनाने की जगह, जिसमें सजावटी आर्किटेक्चर, ताजिया, फारसी आर्टिफैक्ट और शाही कब्र जैसी जगहें हैं. अवधी असर में विरासत और संस्कृति झलकती है. दूसरी जगहों में बंगाली माहौल के बीच लखनवी परंपराओं को बनाए रखने वाले छोटे इमामबाड़े और मस्जिदें शामिल हैं. इंफ्रास्ट्रक्चर पूरी तरह से शहरी है जिसमें बिजली, पानी की सप्लाई, बाजार, अस्पताल और स्कूल हैं, जबकि रोड नेटवर्क और आस-पास के सबअर्बन रेलवे स्टेशनों जैसे ब्रेस ब्रिज या सियालदह साउथ सेक्शन पर संतोषपुर, जो लगभग 3 से 5 km दूर है, सियालदह और हावड़ा से जुड़ता है, के जरिए कनेक्टिविटी बहुत अच्छी है.
आस-पास के शहरों में महेशतला लगभग 5 से 10 km दूर, बरुईपुर, जो जिला हेडक्वार्टर है, 20 से 25 km दूर, डायमंड हार्बर लगभग 40 से 50 km दूर, बज बज 10 से 15 km दूर, सोनारपुर 15 km दूर, हावड़ा 15 से 20 km दूर, कोलकाता के सेंट्रल इलाके जैसे एस्प्लेनेड 10 से 15 km दूर, और नॉर्थ 24 परगना में दम दम जैसी जगहें 25 से 30 km दूर हैं. हुगली के शहर जैसे चिनसुराह लगभग 40 km उत्तर-पश्चिम में हैं.
मेटियाबुरूज पश्चिम बंगाल के उन कुछ चुनाव क्षेत्रों में से है जहां SIR चर्चा, अवैध घुसपैठियों के वोटर बनने के आरोप, या चुनाव आयोग के BJP को राजनीतिक फायदा पहुंचाने के लिए एक खास समुदाय को टारगेट करने के जवाबी आरोप को पैदा करने में नाकाम रहा. यहां मुस्लिम वोटरों की इतनी बड़ी संख्या है कि 2026 के विधानसभा चुनावों में यहां का नतीजा पहले से तय है, जब तक कि कोई अजीब बात न हो जाए, जैसे कि लेफ्ट फ्रंट-कांग्रेस गठबंधन का अचानक फीनिक्स की तरह किनारे से उठना, या मेटियाबुरूज के मुस्लिम वोटरों का तृणमूल कांग्रेस को छोड़कर BJP में चले जाना. और अगर ये अजीब घटनाएं नहीं होती हैं, तो मेटियाबुरूज को तृणमूल कांग्रेस के लिए एक सुरक्षित सीट माना जा सकता है.
(अजय झा)
Ramjit Prasad
BJP
Nuruzaman Molla
RSSCMJP
Nota
NOTA
Pranati Paul
AMB
Krishnendu Sengupta
IND
Samsad Alam
BSP
Md. Imtiyaz Alam
IND
Sabnam Bibi
AIMF
Firoza Khatun
JSTDVPMTP
Anwar Raza
IND
क्रिकेट के बाद राजनीति में भी अशोक डिंडा का यह प्रदर्शन उनके बढ़ते प्रभाव को दर्शाता है. उनकी इस जीत ने यह साफ कर दिया है कि मैदान चाहे क्रिकेट का हो या राजनीति का, अशोक डिंडा दोनों जगह अपनी छाप छोड़ने में सक्षम हैं.
आज देश के पांच राज्यों में चुनावी परिणाम आने वाले है. पश्चिम बंगाल, असम, केरल, तमिलनाडु और पुडुचेरी में जनता अपना फैसला सुनाएगी. दहां असम में हिमंता बिस्व सरमा की सरकार पूर्ण बहुमत के साथ आती दिख रहीं है वहीं बंगाल में टीएमसी और बीजेपी के बीच काटे की टक्कर का अंदेशा लगाया जा रहा है.
बंगाल की राजारहाट न्यू टाउन सीट का नतीजा अब बड़े राजनीतिक विवाद का केंद्र बन गया है. मुस्लिम-बहुल मुसलमान पाड़ा के एक बूथ पर BJP को 97% वोट मिलने के बाद TMC ने चुनावी प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े किए हैं. अब EVM से लेकर काउंटिंग प्रक्रिया तक पर बहस छिड़ गई है.
बंगाल चुनाव में करारी हार के बाद TMC की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं. अब कोलकाता में पार्टी के मौजूदा मुख्यालय वाली बिल्डिंग के मालिक ने TMC नेतृत्व से दो महीने के भीतर जगह खाली करने को कहा है. मालिक ने लीज खत्म होने और प्रॉपर्टी की सुरक्षा को लेकर चिंता जताई है.
पुलिस ऑब्जर्वर अजय पाल शर्मा की कार्रवाई से नाराज टीएमसी उम्मीदवार जहांगीर खान ने उन्हें खुली चुनौती दी है. उन्होंने कहा कि खेल उन्होंने शुरू किया है, लेकिन खत्म टीएमसी करेगी. टीएमसी ने आरोप लगाया है कि पुलिस अधिकारी रात में छापेमारी कर रहे हैं और महिलाओं के साथ बदसलूकी कर रहे हैं.
पश्चिम बंगाल के फाल्टा में दूसरे चरण के मतदान से पहले राजनीतिक विवाद तेज हो गया. निर्वाचन आयोग के पर्यवेक्षक और उत्तर प्रदेश कैडर के आईपीएस अजय पाल शर्मा के दौरे पर तृणमूल कांग्रेस समर्थकों ने विरोध जताया. आयोग को मतदाताओं को धमकाने और पहचान पत्र जमा कराने की शिकायत मिली थी. तृणमूल उम्मीदवार जहांगीर खान ने कहा, 'अगर वह सिंघम हैं, तो मैं पुष्पा हूं.' वहीं तृणमूल नेताओं ने शर्मा पर अधिकार सीमा लांघने का आरोप लगाया, जिससे चुनावी माहौल और गरमा गया.
पश्चिम बंगाल की फाल्टा सीट पर मतदान से पहले बड़ा विवाद सामने आया है. निर्वाचन आयोग ने संयुक्त बीडीओ और सहायक रिटर्निंग अधिकारी सौरव हाजरा का तत्काल तबादला कर दिया. यह कदम आईपीएस अजय पाल शर्मा के दौरे, तृणमूल उम्मीदवार जहांगीर खान के आरोपों और एक महिला की शिकायत के बाद उठाया गया. महिला ने केंद्रीय बलों पर घर में घुसकर मारपीट, छेड़छाड़ और भाजपा के पक्ष में वोट डालने का दबाव बनाने का आरोप लगाया है. मामले ने चुनावी निष्पक्षता पर सवाल खड़े कर दिए हैं.
चुनाव आयोग ने बंगाल की फलता विधानसभा सीट पर भी दोबारा मतदान कराने का फैसला लिया है. गड़बड़ी की शिकायतों के बाद यहां के सभी 285 बूथों पर फिर से वोटिंग होगी.
संघ ने ऑटो ड्राइवरों, चाय की दुकानों और ब्यूटी पार्लर की 'दीदियों' के जरिए एक ऐसा अदृश्य 'विस्पर कैंपेन' चलाया जिसने घर-घर तक पैठ बना ली. यह कहानी उसी माइक्रो-रणनीति की है, जिसने जन-आक्रोश की दबी हुई लहर को एक प्रचंड चुनावी सुनामी में बदल दिया.
बंगाल चुनाव खत्म हो गया, लेकिन SIR पर सियासी और कानूनी संग्राम जारी है. टीएमसी इसे वोटरों की ‘सफाई’ नहीं, लोकतंत्र की ‘छंटनी’ बता रही है, जबकि चुनाव आयोग नियमों का हवाला दे रहा है. ये लड़ाई जीतना टीएमसी के लिए सिर्फ नैरेटिव ही नहीं, अस्तित्व की खातिर भी जरूरी है.