कालीगंज पश्चिम बंगाल के नदिया जिले के कृष्णानगर सदर उप-जिले में स्थित एक ब्लॉक स्तरीय कस्बा है. यह एक सामान्य श्रेणी का विधानसभा क्षेत्र है, जिसमें कुल 13 ग्राम पंचायतें शामिल हैं. कालीगंज विधानसभा क्षेत्र कृष्णानगर लोकसभा क्षेत्र का हिस्सा है. कालीगंज विधानसभा का गठन 1951 में हुआ था और तब से अब तक यहां 18 बार चुनाव हुए हैं, जिसमें 2025 में एक उपचुनाव भी शामिल था. पहले के दशकों में कांग्रेस पार्टी ने यहां का दबदबा बनाया था और 1996 तक कुल 12 चुनावों में से 9 में जीत हासिल की थी. 2016 में कांग्रेस ने एक बार फिर जीत दर्ज की. वहीं, रिवोल्यूशनरी सोशलिस्ट पार्टी (RSP) ने कुल चार बार यह सीट जीती थी, जिनमें 1977, 1982, 2001 और 2006 के चुनाव शामिल हैं. 1971 में एक निर्दलीय प्रत्याशी भी विजयी रहा था.
हाल के वर्षों में तृणमूल कांग्रेस (TMC) का बोलबाला रहा है. तृणमूल ने लगातार दो बार 2021 और 2025 में उपचुनाव में जीत हासिल की. 2025 के उपचुनाव की वजह sitting विधायक नासिरुद्दीन अहमद का 2024 में निधन था. उनकी बेटी, अलिफा अहमद ने इस सीट को बड़ी मतों की बढ़त से जीता. इस बार बीजेपी के अभिजीत घोष दूसरे स्थान पर रहे, जबकि कांग्रेस तीसरे स्थान पर रही. यह स्पष्ट संकेत है कि बीजेपी यहां मुख्य विपक्षी पार्टी के रूप में उभर रही है, लेकिन अभी भी टीएमसी से काफी पीछे है.
लोकसभा चुनावों में भी यही प्रवृत्ति देखी गई. 2024 के लोकसभा चुनाव में कृष्णानगर से टीएमसी की महुआ मौत्रा ने कालीगंज क्षेत्र में बीजेपी से 30,773 मतों की बढ़त बनाई, जो 2019 में 37,228 थी. बीजेपी ने अपनी पकड़ मजबूत की है, लेकिन अभी भी टीएमसी के मुकाबले कमज़ोर स्थिति में है.
कालीगंज नाम का संबंध मां काली से है, लेकिन यह क्षेत्र मुस्लिम बहुल है. 2021 में यहां कुल 2,48,358 पंजीकृत मतदाता थे, जो 2019 में 2,33,352 और 2016 में 2,17,026 थे. 2011 की जनगणना के अनुसार, लगभग 54% मतदाता मुस्लिम समुदाय के हैं, जबकि अनुसूचित जाति का हिस्सा लगभग 14.43% है. यह क्षेत्र पूरी तरह से ग्रामीण है, केवल 9.33% मतदाता शहरी हैं. यहां मतदान प्रतिशत हमेशा 80% से ऊपर रहता है.
भौगोलिक रूप से कालीगंज नदिया जिले की उपजाऊ मैदानी भूमि में बसा है. यहां जलांगी और भागीरथी नदियां बहती हैं. इस क्षेत्र में काला मिट्टी वाला ‘कालंतर’ क्षेत्र भी है. इन नदियों के पानी से खेती और सिंचाई होती है, हालांकि कभी-कभी बाढ़ की समस्या भी होती रहती है. मुख्य फसलें धान, जूट और सरसों हैं. यहां की अर्थव्यवस्था मुख्यतः कृषि पर आधारित है, और औद्योगिक गतिविधियां सीमित हैं. लोग खेती, छोटे व्यापार और मौसमी रूप से शहरी क्षेत्रों में रोजगार के लिए जाते हैं.
कालीगंज जिला मुख्यालय कृष्णानगर से लगभग 53 किमी उत्तर में स्थित है. इसकी सीमा मुर्शिदाबाद जिले से उत्तर में, बर्धमान जिले से पश्चिम में और बांग्लादेश की सीमा से पूर्व में मिलती है. इसके नजदीकी प्रमुख शहरों में देबग्राम (10 किमी), जुरानपुर (6 किमी) और बहरामपुर (लगभग 40 किमी) शामिल हैं. राज्य राजधानी कोलकाता से दूरी लगभग 170 किमी है, जो सड़क और रेल मार्ग से जुड़ा हुआ है.
जैसे-जैसे 2026 के विधानसभा चुनाव नजदीक आ रहे हैं, तृणमूल कांग्रेस कलिगंज में मजबूती से आगे नजर आ रही है. कांग्रेस और लेफ्ट फ्रंट की लगातार गिरती स्थिति से टीएमसी को फायदा मिल रहा है. बीजेपी का ग्राफ बढ़ रहा है, लेकिन फिलहाल वह टीएमसी को चुनौती देने में सक्षम नहीं दिख रही. यदि चुनाव तक कोई बड़ा बदलाव नहीं आता, तो टीएमसी की जीत पक्की मानी जा रही है.
(अजय झा)
Abhijit Ghosh
BJP
Abul Kashem
INC
Nota
NOTA
Abhijit Ghosh
IND
Sujata Mandal
BSP
Jayanta Das
BNARP
Mohiuddin Mondal
SUCI
Kabil Uddin Shaikh
IND
बंगाल दौरे के दौरान पीएम मोदी ने कोलकाता में अपना संबोधन दिया और इस दौरान उन्होंने ममता सरकार पर तीखा हमला बोला. पीएम ने कहा कि हम सबका साथ सबका विकास का मंत्र लेकर आगे बढ़ेंगे लेकिन हर किसी का हिसाब भी लिया जाएगा. उन्होंने साफ कहा कि बीजेपी सरकार में हर अपराधी को भय रहेगा. साथ ही उन्होंने टीएमसी पर आरोप लगाया कि उन्होंने राष्ट्रपति का अपमान किया. देखें वीडियो.
बंगाल के दौरे के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कोलकाता में अपने संबोधन में ममता बनर्जी की सरकार पर कड़ी टिप्पणियां कीं. उन्होंने कहा कि बंगाल में जंगलराज का अंत होगा और वहां निर्मम सरकार नहीं चल पाएगी. बंगाल में कानून का राज फिर से स्थापित होगा. मोदी ने कहा कि टीएमसी सरकार बीमार लोगों की दुश्मन है और उन्होंने गरीबों को पक्का घर मिलने की गारंटी भी दी. देखें वीडियो.
पीएम मोदी ने कोलकाता में अपने संबोधन में बंगाल की ममता सरकार पर कड़ा हमला किया. उन्होंने कहा कि बंगाल में जंगलराज का पूरा अंत होगा और वहां फिर से कानून का शासन स्थापित होगा. पीएम मोदी ने टीएमसी सरकार की नीतियों की आलोचना की और जनता को बेहतर प्रशासन का भरोसा दिया. देखें वीडियो.
पीएम मोदी शनिवार को पश्चिम बंगाल के दौरे पर रहेंगे, जहां वे कोलकाता के ऐतिहासिक ब्रिगेड परेड ग्राउंड में एक बड़ी जनसभा को संबोधित करेंगे. इस दौरान पीएम मोदी राज्य को करीब ₹18,680 करोड़ की विकास परियोजनाओं की सौगात भी देंगे.
निर्वाचन आयोग के अनुसार, पहले राज्य सरकार तय मानकों से नीचे के अधिकारियों को भी रिटर्निंग अफसर नियुक्त कर उनकी सूची आयोग को भेज देती थी. लेकिन इस बार आयोग ने कानून के प्रावधानों के अनुसार सख्त रुख अपनाते हुए वरिष्ठ स्तर के अधिकारियों की नियुक्ति सुनिश्चित कराई है.
आगामी बंगाल विधानसभा चुनाव में बीजेपी कुछ पूर्व सांसदों को भी सियासी मैदान में उतारने की तैयारी में है. इस बार पार्टी ने मौजूदा सांसदों को विधानसभा चुनाव न लड़ाने का फैसला किया है.
प्रधानमंत्री मोदी शुक्रवार और शनिवार को दो चुनावी राज्यों में जाने वाले हैं. असम और पश्चिम बंगाल के दौरे पर प्रधानमंत्री रहेंगे. इस दौरान कई प्रोजेक्ट्स का शुभारंभ करेंगे. इस दोनों राज्यों में आने वाले में कुछ महीनों में चुनाव होने वाले हैं. हालांकि, अभी तक चुनाव आयोग ने तारीख का ऐलान नहीं किया है.
पश्चिम बंगाल में आगामी विधानसभा चुनावों को लेकर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने कोलकाता में प्रेस कॉन्फ्रेंस की. उन्होंने राज्य के सभी 80 हजार से अधिक मतदान केंद्रों पर शत-प्रतिशत वेबकास्टिंग और हिंसा मुक्त चुनाव का भरोसा दिलाते हुए बंगाल के लोकतंत्र और गौरवशाली इतिहास को याद किया.
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों को लेकर हलचल तेज हो गई है. निर्वाचन आयोग की पूर्ण पीठ के साथ बैठक में बीजेपी सहित अधिकतर दलों ने चुनाव को केवल दो से तीन चरणों में कराने का सुझाव दिया है. भाजपा ने सुरक्षा और निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए 17 सूत्री मांग पत्र सौंपा है.
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव की बढ़ती सियासी तपिश के बीच मुख्यमंत्री ममता बनर्जी फ्रंटफुट पर खेल रही है. ममता एक तरफ तो बीजेपी के खिलाफ मोर्चा खोल रखा है और दूसरी तरफ उन्होंने बंगाल का कानून मंत्रालय भी अपने हाथों में ले लिया है. ऐसे में सवाल उठता है कि क्या वजह है कि ममता बनर्जी को मंत्रियों के विभाग में फेरबदल करना पड़ा?