BJP
AITC
CPM
INC
नोटा
NOTA
BSP
IND
SUCI
IND
West Bengal Election Result 2026 Live: राणाघाट दक्षिण विधानसभा सीट पर BJP ने दोबारा चखा जीत का स्वाद
West Bengal Assembly Election Results 2026 Live: दिग्गज उम्मीदवारों में कौन खुश होगा, किसे लगेगा झटका? जानें रुझानों में कौन आगे और कौन पीछे?
West Bengal Election Results 2026 Live: पश्चिम बंगाल चुनाव में राजनीतिक गठबंधनों का प्रदर्शन कैसा है?
West Bengal Assembly Election Results 2026 Live: दिग्गज उम्मीदवारों में कौन खुश होगा, किसे लगेगा झटका? जानें रुझानों में कौन आगे और कौन पीछे?
Ranaghat Dakshin Vidhan Sabha Chunav Result Live: पश्चिम बंगाल के PRESIDENCY क्षेत्र में पार्टियों/गठबंधनों का प्रदर्शन कैसा है?
Ranaghat Dakshin Election Result 2026 Live: राणाघाट दक्षिण का रिजल्ट जानना है? यहां मिलेगा हर अपडेट
रानाघाट दक्षिण एक अनुसूचित जाति आरक्षित विधानसभा क्षेत्र है, जो पश्चिम बंगाल के नादिया जिले में स्थित है. यह रानाघाट (एससी) लोकसभा क्षेत्र के अंतर्गत आता है. यह विधानसभा क्षेत्र 2008 में डिलिमिटेशन कमीशन की सिफारिशों के बाद अस्तित्व में आया था. रानाघाट का चुनावी इतिहास बहुत दिलचस्प है. 1951 से 1962 के बीच केवल एक रानाघाट सीट थी. 1962 में इसे रानाघाट ईस्ट और रानाघाट वेस्ट में बांट दिया गया. ये दोनों सीटें 2008 तक चलीं, फिर तीन नए निर्वाचन क्षेत्रों में बदल दी गईं- रानाघाट उत्तर पश्चिम, रानाघाट उत्तर पूर्व और रानाघाट दक्षिण.
यह विधानसभा क्षेत्र रानाघाट I ब्लॉक के छह ग्राम पंचायतों, रानाघाट II ब्लॉक के आठ ग्राम पंचायतों और कूपर्स कैंप नोटिफाइड एरिया से मिलकर बना है.
तृणमूल कांग्रेस ने 2011 में पहले चुनाव में जीत हासिल की थी. अभिरंजन बिस्वास ने सीपीआई(एम) के आलोक कुमार दास को 19,608 वोटों से हराया था. 2016 में सीपीआई(एम) ने सीट पर कब्जा किया और रामा बिस्वास ने मौजूदा विधायक अभिरंजन बिस्वास को 17,253 वोटों से हराया. भाजपा ने 2021 में बढ़त बनाई, मुकुट मणि अधिकारी ने तृणमूल कांग्रेस की बार्नाली डे रॉय को 16,515 वोटों से हराया. बाद में अधिकारी तृणमूल कांग्रेस में शामिल हो गए, जिससे 2024 में बायपोल हुआ. इस बायपोल में उन्होंने भाजपा के मनोज कुमार बिस्वास को 39,048 वोटों से हराया.
हालांकि बायपोल का नतीजा पूरे राजनीतिक माहौल को नहीं दर्शाता क्योंकि शासक दल को इनमें फायदा मिलता है. 2024 के लोकसभा चुनाव में भाजपा ने रानाघाट दक्षिण क्षेत्र में 36,936 वोटों से बढ़त बनाई, जो 2019 में मिली 44,931 वोट की बढ़त से थोड़ी कम थी. यह लगातार अच्छा प्रदर्शन भाजपा की मजबूत पकड़ को दिखाता है.
2016 के 2,57,811 मतदाता थे. 2021 विधानसभा चुनाव में 2,85,180 पंजीकृत मतदाता रहे. अनुसूचित जाति मतदाता कुल मतदाताओं का 38.56% थे. अनुसूचित जनजाति मतदाता 4.14% और मुस्लिम मतदाता 14.20% थे. मतदान प्रतिशत भी अच्छा रहा है, 2016 में 85.06% और 2019 लोकसभा चुनाव में 83% वोट डाले गए थे.
2011 की जनगणना के अनुसार, 63.88% मतदाता ग्रामीण थे, जबकि 36.13% शहरी थे.
रानाघाट दक्षिण का क्षेत्र समतल और उपजाऊ है. चूर्णी नदी इस क्षेत्र से होकर गुजरती है, जो खेती और दैनिक जीवन के लिए जरूरी है. यहां की मुख्य पेशा कृषि है, जिसमें धान सबसे ज्यादा उगाई जाती है. जूट, सरसों, और सब्जियां भी प्रमुख फसलें हैं. कूपर्स कैंप और रानाघाट टाउन में फूलों की खेती (फ्लोरिकल्चर) भी तेजी से बढ़ रही है. मत्स्य पालन और डेयरी फार्मिंग से भी आय का साधन है. हालांकि, इस क्षेत्र में औद्योगिक गतिविधियां बहुत कम हैं.
युवा पीढ़ी में रोजगार की तलाश में कोलकाता, बेंगलुरु, मुंबई और विदेशों की ओर पलायन बढ़ा है.
रानाघाट टाउन मुख्य शहरी केंद्र है, जो क्षेत्र के उत्तर में लगभग 5 किलोमीटर दूर है. कूपर्स कैंप लगभग 3 किलोमीटर दूर और शहरी क्षेत्र बनने को तैयार है. जिले का मुख्यालय कृष्णानगर 40 किलोमीटर दूर और कोलकाता लगभग 71 किलोमीटर दूर है. अन्य नजदीकी शहरों में चकदाहा (25 किमी), कल्याणी (30 किमी), बनगांव (45 किमी) दूर है.
रानाघाट दक्षिण में ऐतिहासिक तौर पर राज्य की सत्ता में रहने वाली पार्टी के खिलाफ वोटिंग का रुझान रहा है. 2011 में तृणमूल कांग्रेस ने लेफ्ट फ्रंट के खिलाफ जीत दर्ज की थी, 2016 में सीपीआई(एम) ने तृणमूल के खिलाफ जीत हासिल की थी और 2021 में भाजपा ने तृणमूल के खिलाफ अच्छा प्रदर्शन किया था. केवल 2024 का बायपोल इस रुझान को नहीं बदलता. आने वाला 2026 विधानसभा चुनाव काफी चुनौतीपूर्ण हो सकता है. भाजपा की बढ़ती पकड़ और लेफ्ट फ्रंट-कांग्रेस गठबंधन के संभावित पुनरुत्थान के चलते यह मुकाबला बहुत दिलचस्प रहने वाला है.
(अजय झा)
Barnali Dey Roy
AITC
Rama Biswas
CPI(M)
Prasanta Biswas
BSP
Nota
NOTA
Nanigopal Mistri
SUCI
क्रिकेट के बाद राजनीति में भी अशोक डिंडा का यह प्रदर्शन उनके बढ़ते प्रभाव को दर्शाता है. उनकी इस जीत ने यह साफ कर दिया है कि मैदान चाहे क्रिकेट का हो या राजनीति का, अशोक डिंडा दोनों जगह अपनी छाप छोड़ने में सक्षम हैं.
आज देश के पांच राज्यों में चुनावी परिणाम आने वाले है. पश्चिम बंगाल, असम, केरल, तमिलनाडु और पुडुचेरी में जनता अपना फैसला सुनाएगी. दहां असम में हिमंता बिस्व सरमा की सरकार पूर्ण बहुमत के साथ आती दिख रहीं है वहीं बंगाल में टीएमसी और बीजेपी के बीच काटे की टक्कर का अंदेशा लगाया जा रहा है.
बंगाल की राजारहाट न्यू टाउन सीट का नतीजा अब बड़े राजनीतिक विवाद का केंद्र बन गया है. मुस्लिम-बहुल मुसलमान पाड़ा के एक बूथ पर BJP को 97% वोट मिलने के बाद TMC ने चुनावी प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े किए हैं. अब EVM से लेकर काउंटिंग प्रक्रिया तक पर बहस छिड़ गई है.
बंगाल चुनाव में करारी हार के बाद TMC की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं. अब कोलकाता में पार्टी के मौजूदा मुख्यालय वाली बिल्डिंग के मालिक ने TMC नेतृत्व से दो महीने के भीतर जगह खाली करने को कहा है. मालिक ने लीज खत्म होने और प्रॉपर्टी की सुरक्षा को लेकर चिंता जताई है.
पुलिस ऑब्जर्वर अजय पाल शर्मा की कार्रवाई से नाराज टीएमसी उम्मीदवार जहांगीर खान ने उन्हें खुली चुनौती दी है. उन्होंने कहा कि खेल उन्होंने शुरू किया है, लेकिन खत्म टीएमसी करेगी. टीएमसी ने आरोप लगाया है कि पुलिस अधिकारी रात में छापेमारी कर रहे हैं और महिलाओं के साथ बदसलूकी कर रहे हैं.
पश्चिम बंगाल के फाल्टा में दूसरे चरण के मतदान से पहले राजनीतिक विवाद तेज हो गया. निर्वाचन आयोग के पर्यवेक्षक और उत्तर प्रदेश कैडर के आईपीएस अजय पाल शर्मा के दौरे पर तृणमूल कांग्रेस समर्थकों ने विरोध जताया. आयोग को मतदाताओं को धमकाने और पहचान पत्र जमा कराने की शिकायत मिली थी. तृणमूल उम्मीदवार जहांगीर खान ने कहा, 'अगर वह सिंघम हैं, तो मैं पुष्पा हूं.' वहीं तृणमूल नेताओं ने शर्मा पर अधिकार सीमा लांघने का आरोप लगाया, जिससे चुनावी माहौल और गरमा गया.
पश्चिम बंगाल की फाल्टा सीट पर मतदान से पहले बड़ा विवाद सामने आया है. निर्वाचन आयोग ने संयुक्त बीडीओ और सहायक रिटर्निंग अधिकारी सौरव हाजरा का तत्काल तबादला कर दिया. यह कदम आईपीएस अजय पाल शर्मा के दौरे, तृणमूल उम्मीदवार जहांगीर खान के आरोपों और एक महिला की शिकायत के बाद उठाया गया. महिला ने केंद्रीय बलों पर घर में घुसकर मारपीट, छेड़छाड़ और भाजपा के पक्ष में वोट डालने का दबाव बनाने का आरोप लगाया है. मामले ने चुनावी निष्पक्षता पर सवाल खड़े कर दिए हैं.
चुनाव आयोग ने बंगाल की फलता विधानसभा सीट पर भी दोबारा मतदान कराने का फैसला लिया है. गड़बड़ी की शिकायतों के बाद यहां के सभी 285 बूथों पर फिर से वोटिंग होगी.
संघ ने ऑटो ड्राइवरों, चाय की दुकानों और ब्यूटी पार्लर की 'दीदियों' के जरिए एक ऐसा अदृश्य 'विस्पर कैंपेन' चलाया जिसने घर-घर तक पैठ बना ली. यह कहानी उसी माइक्रो-रणनीति की है, जिसने जन-आक्रोश की दबी हुई लहर को एक प्रचंड चुनावी सुनामी में बदल दिया.
बंगाल चुनाव खत्म हो गया, लेकिन SIR पर सियासी और कानूनी संग्राम जारी है. टीएमसी इसे वोटरों की ‘सफाई’ नहीं, लोकतंत्र की ‘छंटनी’ बता रही है, जबकि चुनाव आयोग नियमों का हवाला दे रहा है. ये लड़ाई जीतना टीएमसी के लिए सिर्फ नैरेटिव ही नहीं, अस्तित्व की खातिर भी जरूरी है.