नदिया जिला (पश्चिम बंगाल) के अंतर्गत आने वाला कृष्णानगर दक्षिण विधानसभा क्षेत्र (Krishnanagar Dakshin Assembly Constituency) राज्य की राजनीति में तेजी से बदलते समीकरणों का गवाह बन रहा है. यह निर्वाचन क्षेत्र कृष्णानगर लोकसभा सीट के सात खंडों में से एक है. इसका गठन वर्ष 2011 में हुआ था, जब परिसीमन आयोग (Delimitation Commission) की सिफारिशों के बाद पुराने कृष्णानगर पूर्व और कृष्णानगर पश्चिम सीटों को भंग कर दिया गया.
कृष्णानगर दक्षिण ने अब तक तीन विधानसभा चुनाव देखे हैं- 2011, 2016 और 2021. तीनों बार तृणमूल कांग्रेस (TMC) ने इस सीट पर कब्जा बनाए रखा है और पार्टी के वरिष्ठ नेता उज्जल विश्वास (Ujjal Biswas) लगातार विजेता रहे हैं.
2011 में उज्जल विश्वास ने सीपीआई(एम) प्रत्याशी को 11,028 वोटों से हराया. 2016 में फिर से जीत दर्ज की और 12,814 वोटों से बढ़त बनाई. 2021 में भाजपा के महादेव सरकार दूसरे स्थान पर रहे, और इस बार अंतर घटकर 9,305 वोटों का रह गया. यह स्पष्ट संकेत था कि भाजपा ने इस क्षेत्र में अपनी पकड़ मजबूत करनी शुरू कर दी है.
2019 के लोकसभा चुनावों में पहली बार भाजपा ने इस क्षेत्र में तृणमूल को पीछे छोड़ दिया था, जब उसने 6,724 वोटों की बढ़त दर्ज की. 2024 में यह अंतर बढ़कर 8,938 वोटों तक पहुंच गया, जो टीएमसी के लिए एक चेतावनी साबित हुआ.
2021 के अनुसार, कृष्णानगर दक्षिण में कुल 2,25,118 पंजीकृत मतदाता हैं. मुस्लिम मतदाता 27.50%, अनुसूचित जाति मतदाता 24.22%, शहरी मतदाता केवल 10.91%, यानी यह क्षेत्र मुख्यतः ग्रामीण है.
मतदान दर हमेशा उच्च रही है. 2011 में (88.39%), 2016 में (87.80%), 2019 में (85.49%), और 2021 में (86.93%) रहा था.
कृष्णानगर, नदिया जिले का मुख्यालय, अपने समृद्ध इतिहास के लिए प्रसिद्ध है. 18वीं सदी में राजा कृष्ण चंद्र राय के शासनकाल में यह नगर प्रमुखता में आया. कृष्णानगर राजबाड़ी आज भी इस गौरवशाली अतीत की पहचान है. यह क्षेत्र विशेष रूप से घुर्णी गांव के प्रसिद्ध मिट्टी के शिल्पकारों के लिए जाना जाता है, जिनकी मूर्तियां पूरे बंगाल और भारत में प्रसिद्ध हैं.
यह क्षेत्र भागीरथी बेसिन की उपजाऊ जलोढ़ भूमि में स्थित है. जलंगी नदी यहां से बहती है, जो कृषि के लिए वरदान है. मुख्य फसलें धान, जूट और सब्जियां हैं. अधिकांश आबादी कृषि पर निर्भर है, जबकि कुछ लोग व्यापार और सेवा क्षेत्र से जुड़े हैं. औद्योगिक गतिविधियां सीमित हैं और कई लोग रोजगार के लिए कोलकाता या आसपास के शहरों में पलायन करते हैं.
कृष्णानगर सिटी जंक्शन रेलवे स्टेशन (सीलदह-लालगोला लाइन) क्षेत्र की प्रमुख रेल कड़ी है. यह शहर कोलकाता से लगभग 105 किमी उत्तर में स्थित है. शांतिपुर 25 किमी, राणाघाट 35 किमी, कल्याणी 40 किमी है. इसके अलावा, बांग्लादेश की सीमा भी यहां से कुछ ही दूरी पर है और मेहरपुर कस्बा इसके निकट है.
2026 के चुनावों में टीएमसी को अपनी चौथी जीत सुनिश्चित करना आसान नहीं होगा. भाजपा लगातार बढ़त बना रही है और सीपीआई(एम)-कांग्रेस गठबंधन भी सक्रिय है, जो वोटों का बिखराव रोक सकता है. घटते अंतर और बदलते जनमत को देखते हुए, कृष्णानगर दक्षिण एक रोमांचक और नजदीकी मुकाबले वाला निर्वाचन क्षेत्र बन चुका है.
(अजय झा)
Mahadev Sarkar
BJP
Biswas Sumit
CPI(M)
Nota
NOTA
Swapan Kumar Sarkar
BSP
Ananda Modak
IND
Santu Bhattacharya
CPI(ML)(L)
Debasish Majhi
IND
बंगाल दौरे के दौरान पीएम मोदी ने कोलकाता में अपना संबोधन दिया और इस दौरान उन्होंने ममता सरकार पर तीखा हमला बोला. पीएम ने कहा कि हम सबका साथ सबका विकास का मंत्र लेकर आगे बढ़ेंगे लेकिन हर किसी का हिसाब भी लिया जाएगा. उन्होंने साफ कहा कि बीजेपी सरकार में हर अपराधी को भय रहेगा. साथ ही उन्होंने टीएमसी पर आरोप लगाया कि उन्होंने राष्ट्रपति का अपमान किया. देखें वीडियो.
बंगाल के दौरे के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कोलकाता में अपने संबोधन में ममता बनर्जी की सरकार पर कड़ी टिप्पणियां कीं. उन्होंने कहा कि बंगाल में जंगलराज का अंत होगा और वहां निर्मम सरकार नहीं चल पाएगी. बंगाल में कानून का राज फिर से स्थापित होगा. मोदी ने कहा कि टीएमसी सरकार बीमार लोगों की दुश्मन है और उन्होंने गरीबों को पक्का घर मिलने की गारंटी भी दी. देखें वीडियो.
पीएम मोदी ने कोलकाता में अपने संबोधन में बंगाल की ममता सरकार पर कड़ा हमला किया. उन्होंने कहा कि बंगाल में जंगलराज का पूरा अंत होगा और वहां फिर से कानून का शासन स्थापित होगा. पीएम मोदी ने टीएमसी सरकार की नीतियों की आलोचना की और जनता को बेहतर प्रशासन का भरोसा दिया. देखें वीडियो.
पीएम मोदी शनिवार को पश्चिम बंगाल के दौरे पर रहेंगे, जहां वे कोलकाता के ऐतिहासिक ब्रिगेड परेड ग्राउंड में एक बड़ी जनसभा को संबोधित करेंगे. इस दौरान पीएम मोदी राज्य को करीब ₹18,680 करोड़ की विकास परियोजनाओं की सौगात भी देंगे.
निर्वाचन आयोग के अनुसार, पहले राज्य सरकार तय मानकों से नीचे के अधिकारियों को भी रिटर्निंग अफसर नियुक्त कर उनकी सूची आयोग को भेज देती थी. लेकिन इस बार आयोग ने कानून के प्रावधानों के अनुसार सख्त रुख अपनाते हुए वरिष्ठ स्तर के अधिकारियों की नियुक्ति सुनिश्चित कराई है.
आगामी बंगाल विधानसभा चुनाव में बीजेपी कुछ पूर्व सांसदों को भी सियासी मैदान में उतारने की तैयारी में है. इस बार पार्टी ने मौजूदा सांसदों को विधानसभा चुनाव न लड़ाने का फैसला किया है.
प्रधानमंत्री मोदी शुक्रवार और शनिवार को दो चुनावी राज्यों में जाने वाले हैं. असम और पश्चिम बंगाल के दौरे पर प्रधानमंत्री रहेंगे. इस दौरान कई प्रोजेक्ट्स का शुभारंभ करेंगे. इस दोनों राज्यों में आने वाले में कुछ महीनों में चुनाव होने वाले हैं. हालांकि, अभी तक चुनाव आयोग ने तारीख का ऐलान नहीं किया है.
पश्चिम बंगाल में आगामी विधानसभा चुनावों को लेकर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने कोलकाता में प्रेस कॉन्फ्रेंस की. उन्होंने राज्य के सभी 80 हजार से अधिक मतदान केंद्रों पर शत-प्रतिशत वेबकास्टिंग और हिंसा मुक्त चुनाव का भरोसा दिलाते हुए बंगाल के लोकतंत्र और गौरवशाली इतिहास को याद किया.
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों को लेकर हलचल तेज हो गई है. निर्वाचन आयोग की पूर्ण पीठ के साथ बैठक में बीजेपी सहित अधिकतर दलों ने चुनाव को केवल दो से तीन चरणों में कराने का सुझाव दिया है. भाजपा ने सुरक्षा और निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए 17 सूत्री मांग पत्र सौंपा है.
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव की बढ़ती सियासी तपिश के बीच मुख्यमंत्री ममता बनर्जी फ्रंटफुट पर खेल रही है. ममता एक तरफ तो बीजेपी के खिलाफ मोर्चा खोल रखा है और दूसरी तरफ उन्होंने बंगाल का कानून मंत्रालय भी अपने हाथों में ले लिया है. ऐसे में सवाल उठता है कि क्या वजह है कि ममता बनर्जी को मंत्रियों के विभाग में फेरबदल करना पड़ा?