BJP
AITC
CPM
नोटा
NOTA
INC
SUCI
IND
IND
IND
IND
IND
IND
IND
IND
Jadavpur Election Results Live: जादवपुर निर्वाचन क्षेत्र में BJP की जीत, जानिए पूरा रिजल्ट
West Bengal Assembly Election Results 2026 Live: दिग्गज उम्मीदवारों में कौन खुश होगा, किसे लगेगा झटका? जानें रुझानों में कौन आगे और कौन पीछे?
Jadavpur Vidhan Sabha Result 2026 Live: जादवपुर सीट पर सबसे आगे निकले BJP उम्मीदवार Sarbori Mukherjee
Jadavpur Vidhan Sabha Result Live: पश्चिम बंगाल इलेक्शन रिजल्ट अपडेट्स कैसे चेक करें?
West Bengal Assembly Election Results 2026 Live: दिग्गज उम्मीदवारों में कौन खुश होगा, किसे लगेगा झटका? जानें रुझानों में कौन आगे और कौन पीछे?
West Bengal Election Results 2026 Live: पश्चिम बंगाल चुनाव में राजनीतिक गठबंधनों का प्रदर्शन कैसा है?
जादवपुर विधानसभा क्षेत्र सामान्य श्रेणी की सीट है, जो मुख्य रूप से कोलकाता में स्थित है. इसका एक छोटा हिस्सा दक्षिण 24 परगना जिले में आता है. यह क्षेत्र कोलकाता नगर निगम के 10 वार्डों से मिलकर बना है. जादवपुर लोकसभा सीट के सात खंडों में से एक है. राजनीतिक महत्व के साथ-साथ यह क्षेत्र शिक्षा और संस्कृति का भी केंद्र है. यहां जादवपुर विश्वविद्यालय, इंडियन एसोसिएशन फॉर द कल्टिवेशन ऑफ साइंस और सेंट्रल ग्लास एंड सिरेमिक रिसर्च इंस्टीट्यूट जैसे प्रमुख संस्थान मौजूद हैं.
यह सीट 1967 में बनी थी और लंबे समय तक माकपा (CPI-M) का गढ़ रही. अब तक यहां 1983 का उपचुनाव समेत 15 चुनाव हुए हैं, जिनमें से 13 बार माकपा ने जीत दर्ज की. यह सीट पूर्व मुख्यमंत्री बुद्धदेव भट्टाचार्य से खास तौर पर जुड़ी रही है. उन्होंने 1987 से 2006 तक लगातार पांच बार यहां से जीत हासिल की. लेकिन 2011 में टीएमसी के मनीष गुप्ता ने उन्हें 16,684 वोटों से हरा दिया, जिसने बंगाल की राजनीति में बड़ा बदलाव ला दिया और 34 साल बाद वाममोर्चे की सत्ता का अंत हुआ.
2021 में टीएमसी के देबब्रत मजूमदार ने माकपा के सुजन चक्रवर्ती को 38,869 वोटों से हराया. इसके बाद 2024 के लोकसभा चुनावों में भी टीएमसी ने जादवपुर विधानसभा क्षेत्र में बढ़त बनाए रखी. टीएमसी का यह बढ़त 2019 के 12,155 वोट से बढ़कर 17,849 वोट तक पहुंच गया. खास बात यह रही कि 2024 में भाजपा माकपा को पीछे छोड़ते हुए दूसरे स्थान पर आ गई, जो उसके बढ़ते असर को दर्शाता है.
2021 के विधानसभा चुनाव में यहां 2,79,828 पंजीकृत मतदाता थे, जो 2024 के लोकसभा चुनाव में बढ़कर 2,94,186 हो गए. इनमें लगभग 11.68% अनुसूचित जाति (SC) और करीब 8% मुस्लिम मतदाता हैं. पूरा क्षेत्र शहरी है, यहां ग्रामीण मतदाता नहीं हैं. मतदान प्रतिशत हमेशा 80% से अधिक रहा है.
जादवपुर लंबे समय से बौद्धिक और औद्योगिक गतिविधियों का केंद्र रहा है. 1955 में स्थापित जादवपुर विश्वविद्यालय देश के प्रमुख शोध संस्थानों में गिना जाता है. यहां विज्ञान, इंजीनियरिंग, मानविकी और सामाजिक विज्ञान में महत्वपूर्ण योगदान दिए जाते हैं. इसके अलावा एस.एन. बोस नेशनल सेंटर फॉर बेसिक साइंसेज और इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ केमिकल बायोलॉजी जैसे राष्ट्रीय शोध केंद्र भी यहीं स्थित हैं.
वाममोर्चे के शासनकाल में यहां कई छोटे और मझोले उद्योग बंद हो गए थे, जिससे रोजगार पर असर पड़ा. वर्तमान में यहां की अर्थव्यवस्था मुख्य रूप से शिक्षा, स्वास्थ्य सेवा, खुदरा व्यापार और सर्विस सेक्टर पर आधारित है.
जादवपुर का भूभाग पूरी तरह शहरी और सपाट है, जैसा कि कोलकाता के दक्षिणी उपनगरों में देखा जाता है. यह इलाका सड़क और रेल मार्ग से अच्छी तरह जुड़ा हुआ है. जादवपुर रेलवे स्टेशन यहां की एक प्रमुख कड़ी है. कोलकाता के केंद्र से यह क्षेत्र महज 12 किलोमीटर दूर है और इसके आसपास गरिया, टॉलीगंज और ढाकुरिया जैसे इलाके हैं.
2021 के विधानसभा चुनावों में भाजपा तीसरे स्थान पर रही थी और माकपा से बहुत पीछे नहीं थी. यह संकेत था कि भाजपा यहां मजबूत विपक्ष के रूप में उभर रही है. 2026 का चुनाव बेहद रोचक होने वाला है. संभावना है कि यह सीट त्रिकोणीय मुकाबले में बदल जाएगी, जहां थोड़े से वोटों का अंतर ही किसी भी पार्टी की जीत या हार तय कर सकता है.
(अजय झा)
Dr. Sujan Chakraborty
CPI(M)
Rinku Naskar
BJP
Nota
NOTA
Sujoy Naskar
BSP
Megha Chatterjee
IND
Monalisa Gupta (debroy)
PDS
Mistoo Das
IND
Nripendra Krishna Roy
IND
Tanujit Das
IND
Atanu Chatterjee
IND
Ashutosh Dey
IND
संघ ने ऑटो ड्राइवरों, चाय की दुकानों और ब्यूटी पार्लर की 'दीदियों' के जरिए एक ऐसा अदृश्य 'विस्पर कैंपेन' चलाया जिसने घर-घर तक पैठ बना ली. यह कहानी उसी माइक्रो-रणनीति की है, जिसने जन-आक्रोश की दबी हुई लहर को एक प्रचंड चुनावी सुनामी में बदल दिया.
बंगाल चुनाव खत्म हो गया, लेकिन SIR पर सियासी और कानूनी संग्राम जारी है. टीएमसी इसे वोटरों की ‘सफाई’ नहीं, लोकतंत्र की ‘छंटनी’ बता रही है, जबकि चुनाव आयोग नियमों का हवाला दे रहा है. ये लड़ाई जीतना टीएमसी के लिए सिर्फ नैरेटिव ही नहीं, अस्तित्व की खातिर भी जरूरी है.
पश्चिम बंगाल के पूर्व खेल मंत्री मनोज तिवारी ने TMC सरकार, ममता बनर्जी और अरूप बिस्वास पर गंभीर आरोप लगाए हैं. उन्होंने कहा कि पांच साल तक उन्हें खेल विभाग में काम नहीं करने दिया गया और सिर्फ 'चाय-बिस्किट' तक सीमित रखा गया. तिवारी ने दावा किया कि उन्हें खेल आयोजनों से दूर रखा गया और सरकार जनता नहीं, बल्कि अपने हितों के लिए काम करती रही.
कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने बुधवार को केंद्र की भाजपा सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए आरोप लगाया कि पश्चिम बंगाल और असम में बड़े पैमाने पर चुनावी हेरफेर किया गया है. उन्होंने कहा, 'अबकी बार लोकतंत्र का अंतिम संस्कार हो रहा है.'
नंदीग्राम, जिसे अधिकारी अपना गढ़ मानते हैं, उनके राजनीतिक करियर का केंद्र रहा है. 2021 में भाजपा में शामिल होने के बाद अधिकारी ने नंदीग्राम से ममता बनर्जी को हराया था. 2026 में भवानीपुर में उनकी जीत ने बंगाल की राजनीति में नई दिशा तय की है.
बंगाल चुनाव में निष्पक्षता पर उठे सवालों के बीच ममता के इस्तीफे को लेकर चर्चा तेज है. हालांकि कानूनी जानकार साफ कर रहे हैं कि कोर्ट में चल रहे किसी भी मामले का मुख्यमंत्री के पद छोड़ने की संवैधानिक प्रक्रिया से कोई लेना-देना नहीं है.
पश्चिम बंगाल के चुनावी माहौल में 'गंगा जमुना' की एक कालजयी धुन ने नया राजनीतिक अर्थ ग्रहण कर लिया. एक्ट्रेस-नेता सयोनी घोष द्वारा गाया गया सूफियाना ‘मुर्शिद’ संस्करण पहले सोशल मीडिया पर छाया, लेकिन चुनाव नतीजों के बाद उसी धुन को ‘मोदी’ के समर्थन वाले नारे में बदल दिया गया. नौशाद के संगीत और लता मंगेशकर की आवाज से अमर हुई यह धुन अब यह दिखाती है कि भारत में संगीत समय के साथ नए अर्थ ग्रहण कर राजनीति के प्रभावी माध्यम में बदल सकता है.
यूनुस सरकार के दौर में बांग्लादेशी हिंदुओं के साथ हुई बर्बरता के जो वीडियो बंगाल तक पहुंचे, उसने वोटरों में भय पैदा कर दिया. हमले, हत्याएं, रेप और न जाने क्या-क्या. माना जाने लगा कि ममता के मुस्लिम तुष्टिकरण के चलते बंगाल में भी ढाका और चटगांव जैसे भयावह हालात हो सकते हैं.
पश्चिम बंगाल चुनाव में हार के बाद ममता बनर्जी के इस्तीफा न देने वाले बयान ने राजनीतिक बहस तेज कर दी है. हालांकि संवैधानिक जानकारों का कहना है कि विधानसभा का कार्यकाल खत्म होने के बाद नई सरकार के गठन की प्रक्रिया स्वतः शुरू हो जाती है. चुनाव आयोग अधिसूचना जारी कर चुका है और राज्यपाल नई सरकार बनाने की प्रक्रिया आगे बढ़ा सकते हैं. इस पूरे घटनाक्रम पर देशभर की नजर बनी हुई है.
पश्चिम बंगाल में चुनाव के बाद भी राजनीतिक हलचल जारी है. राजारहाट-न्यू टाउन सीट पर दोबारा गिनती के बाद बीजेपी की सीटें बढ़कर 207 हो गई हैं. इस जीत ने पार्टी की स्थिति और मजबूत कर दी है. यह नतीजा न सिर्फ सत्ता परिवर्तन का संकेत है, बल्कि राज्य की राजनीति में बड़े बदलाव और नए समीकरणों की शुरुआत भी माना जा रहा है.