उत्तर प्रदेश की राजनीति में इन दिनों एक अनोखा और एक अलग सियासी बदलाव देखने को मिल रहा है. सूबे की मुस्लिम महिलाएं बीजेपी के कार्यक्रमों और मंचों पर प्रमुखता से दिखाई दे रही हैं. हाल ही में लखनऊ और अंबेडकरनगर में हुई दो प्रमुख घटनाओं ने इस बदलते सियासी और सामाजिक परिदृश्य को और भी स्पष्ट कर दिया है.
यूपी में दो कार्यक्रम पहला बीजेपी के वरिष्ठ नेता नितिन नवीन के स्वागत में मुस्लिम महिलाओं की गर्मजोशी दिखी, तो अब अंबेडकरनगर में पूर्व उप मुख्यमंत्री और बीजेपी नेता डॉ दिनेश शर्मा के साथ हाथ में तिरंगा थामे मुस्लिम महिलाओं ने देशभक्ति का एक बड़ा संदेश दिया.
उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव की सियासी सरगर्मी के बीच मुस्लिम महिलाओं को बीजेपी के मंच पर लाने का काम पार्टी का अल्पसंख्यक मोर्चा कर रहा है. ऐसे में सवाल उठते हैं कि क्या मुस्लिम महिलाओं के बीच बीजेपी अपनी सियासी पैठ मजबूत करने में कामयाब हो पाएगी.
नितिन नवीन का लखनऊ में गर्मजोशी से स्वागत
पहली महत्वपूर्ण झलक राज्य की राजधानी लखनऊ में देखने को मिली, जब पिछले महीने बीजेपी के वरिष्ठ नेता नितिन नवीन लखनऊ पहुंचे थे, तो बड़ी संख्या में मुस्लिम महिलाओं ने उनका बेहद गर्मजोशी और उत्साह के साथ स्वागत किया. इसके बाद राजनीति के गलियारों में हलचल मच गई. हालांकि, यह कार्यक्रम बीजेपी अल्पसंख्यक मोर्चा के द्वारा ही रखा गया था.
एक समय था जब बीजेपी के मंचों पर मुस्लिम समुदाय, खासकर महिलाओं की उपस्थिति न के बराबर मानी जाती थी, लेकिन इस दृश्य ने उस पुरानी धारणा को पूरी तरह बदला. यूपी बीजेपी अल्पसंख्यक मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष कुंवर बासित अली कहते हैं कि मुस्लिम महिलाओं का यह कदम सीधे तौर पर उस भरोसे को दर्शाता है, जो वे विकास और सुरक्षा के मुद्दों पर महसूस कर रही हैं.
अंबेडकरनगर में तिरंगे के साथ देशभक्ति की गूंज
दूसरी बड़ी घटना अंबेडकरनगर जिले की है. बीजेपी अल्पसंख्यक मोर्चा की अगुवाई में गुरुवार को आयोजित एक विशाल कार्यक्रम में पूर्व उप मुख्यमंत्री डॉ. दिनेश शर्मा मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए थे. इस कार्यक्रम में मुस्लिम महिलाओं ने न केवल बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया, बल्कि अपने हाथों में राष्ट्रीय ध्वज तिरंगा थामकर देशभक्ति का एक बुलंद संदेश भी दिया.

हाथों में तिरंगा लहराती मुस्लिम महिलाएं यह दृश्य केवल एक सियासी आयोजन तक सीमित नहीं था बल्कि यह राष्ट्रवाद और देश की मुख्यधारा के साथ उनके गहरे जुड़ाव का प्रतीक था. भारत माता की जय और राष्ट्रध्वज के साथ उनका यह प्रदर्शन केवल एक राजनीतिक बयान नहीं था, बल्कि यह राष्ट्रवाद और मुख्यधारा की राजनीति के साथ उनके जुड़ाव का प्रतीक था. तिरंगे के तले इस तरह का एकजुटता का संदेश समाज में एक सकारात्मक बदलाव का संकेत है.
यूपी में मुस्लिम महिलाओं का बदल रहा मिजाज?
अंबेडकरनगर की सड़कों से लेकर लखनऊ के मंचों तक, हाथों में तिरंगा थामे और बीजेपी नेताओं का स्वागत करती ये महिलाएं इस बात का प्रत्यक्ष प्रमाण हैं कि उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक नया अध्याय जुड़ रहा है. मुस्लिम महिलाएं क्या सपा, बसपा और कांग्रेस जैसी पारंपरिक राजनीतिक दलों से बाहर निकलकर बीजेपी के साथ मजबूती से जुड़ पाएंगी. मुस्लिम महिलाएं अब केवल एक पारंपरिक वोट बैंक तक सीमित रहने के बजाय क्या वो अपने अधिकारों के लिए बीजेपी से जुड़ पाएंगी.
राजनीतिक विश्लेषकों की माने तो देश और प्रदेश की राजनीतिक पैटर्न बदल रहे हैं. मोदी और योगी सरकार ने तमाम योजनाओं महिलाओं के केंद्रित शुरू की है, जिससे मुस्लिम महिलाएं बड़ी संख्या में फायदा उठा रही हैं. ऐसे में मुस्लिम महिलाओं का दृष्टिकोण बदला है और बीजेपी के प्रति उनके रुझान बढ़े हैं, जिसके राजनीतिक और आर्थिक दोनों ही कारण हैं.
बीजेपी मानती रही है कि ट्रिपल तलाक जैसी प्रथा के खिलाफ कानून बनने से मुस्लिम महिलाओं के मन में न्याय, सम्मान और सुरक्षा का भाव मजबूत हुआ है. इसके अलावा प्रधानमंत्री आवास योजना, उज्ज्वला योजना, मुफ्त राशन और आयुष्मान भारत जैसी योजनाओं का लाभ बिना किसी भेदभाव के सीधे जरूरतमंद परिवारों तक पहुंचा है. यूपी में कानून-व्यवस्था की स्थिति में हुए सुधार ने महिलाओं को अपनी बात खुलकर रखने और सार्वजनिक जीवन में सक्रिय होने का सुरक्षित वातावरण प्रदान किया है.