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रविदास जयंती पर समरसता यात्रा... काशी से पंजाब तक दलित वोट साधने का BJP प्लान

संत रविदास की जयंती यानि गुरु पुर्णिमा के दिन बीजेपी समरसता संकल्प अभियान यात्रा की शुरुआत कर रही है. बीजेपी ने इस यात्रा के जरिए उत्तर प्रदेश से लेकर पंजाब, उत्तराखंड सहित इस साल होने वाले सात राज्यों में दलित समुदाय को साधने का दांव चला है.

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संत रविदास जयंती के सहारे बीजेपी का मेगा प्लान (Photo-ITG)
संत रविदास जयंती के सहारे बीजेपी का मेगा प्लान (Photo-ITG)

गुरु पूर्णिमा के दिन संत रविदास की 650वीं जयंती के मौके पर बीजेपी ने मिशन-2027 को फतह करने की मजबूत इबारत लिखती नजर आई है. बीजेपी ने बुधवार को संत रविदास की जन्मस्थली सीर गोवर्धनपुर से 'समरसता संकल्प अभियान' की शुरुआत कर एक बड़ा राजनीतिक और सामाजिक संदेश देने का प्लान बनाया है. 

रविदास जयंती पर सात महीने के लिए समरसता संकल्प यात्रा शुरू कर रही है.  बीजेपी अध्यक्ष नितिन नवीन और सीएम योगी आदित्यनाथ और प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी की मौजूदगी में बीजेपी नेता वाराणसी में जुटेंगे और संत रविदास के जन्मस्थान की मिट्टी को 131 कलशों में भरकर पूरे देश में ले जाएंगे.

बीजेपी की इस 'समरसता संकल्प यात्रा' का समापन बीस फरवरी 2027 को होगा, जब यूपी और पंजाब समेत पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव का बिगुल बज चुका होगा. माना जा रहा है कि संत रविदास के जरिए बीजेपी ने दलित  समुदाय तक पहुंचने के लिए सात महीने का अभियान तैयार किया है. इस तरह बीजेपी का फोकस यूपी और पंजाब सहित 2027 में होने वाले सात राज्यों के चुनाव में साधने का प्लान है. 

संत रविदास के जरिए बीजेपी का मेगा प्लान
संत रविदास की जन्मस्थली सीर गोवर्धनपुर से शुरू हो रही संकल्प अभियान में रविदासी सन्त भी शामिल होंगे. 27 राज्यों से आए प्रतिनिधियों का महासंगम भी होगा. बीजेपी अध्यक्ष नितिन नबीन संत रविदास मंदिर में मत्था टेकने और कांस्य प्रतिमा पर पुष्पार्चन के बाद शुरू हुई सभा से 131 पवित्र कलशों के माध्यम से 'समरसता संकल्प अभियान' की शुरुआत करेंगे, जिसका मकसद संत रविदास जी के समानता, सामाजिक न्याय और मानवीय गरिमा के संदेश को देश के कोने-कोने तक पहुंचाना है. 

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वाराणसी के कार्यक्रम में 27 राज्यों के प्रतिनिधियों को जन्मस्थली की पवित्र माटी से तैयार 131 कलश सौंपने की योजना है. राजनीतिक जानकार इसे केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि 2027 में उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, पंजाब, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, गोवा और मणिपुर में होने वाले विधानसभा चुनावों से पहले दलित समाज तक पहुंच बनाने की भाजपा की रणनीति के रूप में भी देख रहे हैं. 

संत रविदास की जन्मस्थली से शुरू होने वाले अभियान का पहला चरण 30 जुलाई से 10 सितंबर के बीच पूरा होगा. इस दौरान पार्टी के नेता रविदास जन्मस्थली की मिट्टी कलशों में लेकर विभिन्न मंदिरों और मठों में जाएंगे. साधु-संतों और महंतों से इस अभियान में शामिल होने की अपील की जाएगी. इसके बाद दूसरे चरण में 5 अक्टूबर से शुरू होने वाली समरसता यात्रा खास होगी, जिसके तहत पंजाब से यूपी के बीच दलित बाहुल्य इलाकों को साधा जाएगा. 5 नवंबर को वाराणसी पहुंचने से पहले यात्रा गांवों और कस्बों में रुकेगी.
 
रविदास के जरिए दलितों तक पहुंचने का प्लान
संत रविदास जी का सामाजिक समरसता, समानता और मानव गरिमा का संदेश उत्तर भारत के दलित समाज में गहरी पहचान रखता है. ऐसे में भाजपा ने उनकी जन्मस्थली से राष्ट्रव्यापी अभियान शुरू कर यह संकेत दिया है कि आने वाले चुनावों में दलित मतदाताओं को पार्टी की रणनीति के केंद्र में रखा जाएगा. वाराणसी से शुरू हुआ यह अभियान आने वाले महीनों में विभिन्न राज्यों तक पहुंचेगा, जहां संत रविदास के विचारों और सामाजिक न्याय के संदेश को जन-जन तक ले जाने का प्रयास किया जाएगा, 

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राजनीतिक नजरिए से देखें तो सातों राज्यों में दलित मतदाता निर्णायक भूमिका निभाते हैं. उत्तर प्रदेश में अनुसूचित जाति की आबादी लगभग 21 फीसदी है, जो कई सीटों पर जीत-हार तय करती है. इसी तरह पंजाब में दलित समुदाय लगभग 32 फीसदी है,जो देश में सबसे अधिक माना जाता है. उत्तराखंड में करीब 19 फीसदी, हरियाणा में लगभग 21 फीसदी, हिमाचल प्रदेश में करीब 25 प्रतिशत, गोवा में लगभग 2 प्रतिशत और मणिपुर में लगभग 3 प्रतिशत अनुसूचित जाति की आबादी है, 

काशी से पंजाब तक को साधने में जुटी बीजेपी
उत्तर प्रदेश, पंजाब, हरियाणा और हिमाचल प्रदेश में बड़ी संख्या में विधानसभा सीटें ऐसी हैं, जहां दलित मतदाता किसी भी राजनीतिक दल की चुनावी दिशा बदल सकते हैं, यही कारण है कि भाजपा अभी से इस वर्ग तक अपनी पहुंच मजबूत करने में जुटी दिखाई दे रही है. समरसता संकल्प सभा में देशभर से आए संतों की मौजूदगी और 27 राज्यों के प्रतिनिधियों को कलश सौंपने की योजना भी इसी व्यापक रणनीति का हिस्सा मानी जा रही है. 

बीजेपी यह संदेश देना चाहती है कि संत रविदास के विचार किसी एक क्षेत्र तक सीमित नहीं, बल्कि पूरे देश के सामाजिक समरसता अभियान का आधार हैं. इससे पार्टी दलित समाज के साथ-साथ संत परंपरा से जुड़े वर्गों को भी जोड़ने का प्रयास कर रही है. इस महाअभियान का एक और अहम राजनीतिक पहलू है. 

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वाराणसी की पावन धरा से संत रविदास जी के विचारों के माध्यम से दिया गया समरसता का यह सशक्त हुंकार न केवल उत्तर प्रदेश, बल्कि पड़ोसी राज्य बिहार के पिछड़े और वंचित वर्गों तक सीधा और सकारात्मक राजनीतिक संदेश पहुंचाने की रणनीति का हिस्सा है. वाराणसी में रविदास जयंती के अवसर पर हर वर्ष बड़ी संख्या में देश-विदेश से श्रद्धालु और युवा भी पहुंचते.

बीजेपी का युवाओं को साधने का दांव
बीजेपी युवाओं तक भी अपना संदेश पहुंचाने का प्रयास कर रही है. हाल के महीनों में प्रतियोगी परीक्षाओं, विशेषकर NEET को लेकर हुए विरोध प्रदर्शनों, युवाओं की नाराजगी और शिक्षा से जुड़े मुद्दों ने राजनीतिक दलों की चिंता बढ़ाई है. ऐसे में सामाजिक समरसता, सांस्कृतिक पहचान और युवा सहभागिता को एक साथ जोड़कर भाजपा अपने पारंपरिक समर्थन आधार के साथ नए मतदाताओं, विशेषकर पहली बार वोट देने वाली पीढ़ी तक पहुंच बनाने की कोशिश करती दिखाई दे रही है.

वाराणसी से शुरू हुआ 'समरसता संकल्प अभियान' केवल एक धार्मिक या सांस्कृतिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि 2027 के विधानसभा चुनावों को ध्यान में रखते हुए भाजपा की व्यापक सामाजिक और राजनीतिक रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है. संत रविदास जी की जन्मस्थली से दिया गया समरसता का संदेश अब उन राज्यों तक पहुंचाने की तैयारी है, जहां दलित मतदाता चुनावी परिणामों में निर्णायक भूमिका निभाते हैं. आने वाले महीनों में यह अभियान भाजपा की चुनावी रणनीति का महत्वपूर्ण आधार बन सकता है.

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