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सहारनपुर का काजी परिवार और चौथी पीढ़ी... बंद कमरों से सड़क तक आया सियासी संग्राम

दशकों तक सहारनपुर की राजनीति पर एकछत्र राज करने वाले काज़ी परिवार के बंद कमरों के फैसले अब सार्वजनिक हो चुके हैं. चाचा-भतीजे और ससुर-दामाद के बीच उपजी राजनीतिक महत्वाकांक्षाओं ने इस रसूखदार घराने की आपसी कलह को खुले चौराहे पर लाकर खड़ा कर दिया है.

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सहारनपुर के काजी परिवार में छिड़ा संग्राम (Photo-ITG)
सहारनपुर के काजी परिवार में छिड़ा संग्राम (Photo-ITG)

पश्चिमी उत्तर प्रदेश की राजनीति का एक बड़ा केंद्र सहारनपुर रहा है, जहां की सियासत कई दशकों से काज़ी परिवार के इर्द-गिर्द घूमती रही है. काज़ी मसूद से शुरू हुई इस राजनीतिक यात्रा को आगे चलकर पूर्व केंद्रीय मंत्री काज़ी रशीद मसूद ने पंख दिए और बाद में इस विरासत की कमान उनके भतीजे इमरान मसूद ने संभाली.

अब तक काजी परिवार के अंदरूनी मतभेद और राजनीतिक फैसले बंद कमरों में ही तय हुआ करते थे, लेकिन अब यह सियासी जंग सोशल मीडिया और सार्वजनिक बयानों के ज़रिए सड़क पर आ गई है. एक तरफ इमरान मसूद और उनके भतीजे हमजा हैं तो दूसरी तरफ शायान मसूद और शादान मसूद हैं. 

शायान मसूद ने खुले तौर पर इमरान मसूद से विचारधारा के मतभेद होने की बात कही, जिससे परिवार के अंदरूनी मतभेद सार्वजनिक हो गए. शायान के इस बात पर इमरान मसूद तो खामोश रहे, लेकिन उनके भतीजे हमजा नोमान आक्रामक तेवर अपना लिया और शायान पर जमकर निशाना साधा. 

कैसे छिड़ी काजी परिवार में राजनीतिक रार?

काज़ी परिवार में दरार तब पैदा हुई जब कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने यह ऐलान किया कि आगामी विधानसभा चुनाव में उनके परिवार का कोई भी सदस्य मैदान में नहीं उतरेगाय. इसके तुरंत बाद, उनके दामाद शायान मसूद और चचेरे भाई शादान मसूद ने लखनऊ जाकर समाजवादी पार्टी (सपा) का दामन थाम लिया.

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शायान मसूद ने खुले तौर पर इमरान मसूद के साथ वैचारिक मतभेद होने की बात स्वीकार की, जिससे पारिवारिक कलह खुलकर सार्वजनिक हो गई. इस बयान पर इमरान मसूद ने तो चुप्पी साधे रखी, लेकिन उनके भतीजे हमजा नोमान ने आक्रामक रुख अपनाते हुए शायान पर तीखे हमले किए. इसके बाद काज़ी परिवार की अंदरूनी बातें घर की चारदीवारी से निकलकर खुले सियासी अखाड़े में तब्दील हो गईं. अब एक तरफ इमरान मसूद और उनके भतीजे हमजा हैं, तो दूसरी तरफ शादान और शायान खड़े नज़र आ रहे हैं.

काज़ी परिवार का सियासी ताना-बाना

सहारनपुर में काज़ी परिवार की राजनीतिक पहचान काज़ी मसूद और उनके ताया काजी हनीफ से शुरू होती है. काजी हनीफ ने राजनीति में कदम रखकर गंगोह के प्रधान और फिर चेयरमैन का पद संभाला. उनके नक्शेकदम पर चलते हुए बाद में काजी मसूद पहले चेयरमैन बने और 1969 में निर्दलीय विधायक चुने गए.

काज़ी मसूद के चार बेटे थे. अरशद, इरशाद, राशिद और रशीद मसूद. बड़े बेटे अरशद और इरशाद प्रोफ़ेसर बन गए, जबकि राशिद मसूद और रशीद मसूद ने राजनीति चुनी. रशीद मसूद जब अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी से पढ़कर लौटे, तो उन्होंने खुद को काज़ी मसूद के मुख्य सियासी वारिस के रूप में स्थापित किया.

1974 में नकुड़ विधानसभा सीट से पहला चुनाव जीतकर विधायक बने रशीद मसूद आगे चलकर सांसद और केंद्र सरकार में मंत्री बने, जिससे काज़ी परिवार को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिली. सहारनपुर की ही नहीं बल्कि पश्चिमी यूपी में मुस्लिम राजनीति के चेहरा बनकर उभरे. 

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1977 से 2004 तक पांच बार सहारनपुर लोकसभा क्षेत्र से सांसद चुने गए और तीन बार राज्यसभा सदस्य रहे. 2012 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव तक काजी रशीद मसूद और उनके भतीजे इमरान मसूद एक साथ थे. लेकिन उसके बाद दोनों की सियासी राहें अलग हो गई थीं. रशीद मसूद और इमरान मसूद अलग ही पार्टी में रहे, जिसका खामियाजा खुद इस परिवार को भुगतना पड़ा. 
 

कैसे रिश्तों का उलझा हुआ सारा गणित

राशिद मसूद के दो बेटे, इमरान मसूद और नोमान मसूद हैं. वहीं, पूर्व केंद्रीय मंत्री रशीद मसूद के इकलौते बेटे शादान मसूद हैं. राशिद मसूद के निधन के बाद इमरान और नोमान पूरी तरह राजनीति में सक्रिय हो गए. इमरान मसूद की पांच बेटियां हैं, जबकि नोमान मसूद के बेटे का नाम हमजा नोमान (जो गंगोह के चेयरमैन रहे) है.

दूसरी ओर, रशीद मसूद के बेटे शादान मसूद के दो बेटे हैं, शायान मसूद और आयान मसूद. इमरान मसूद ने अपनी एक बेटी का निकाह अपने चचेरे भाई शादान के बेटे शायान मसूद से कराय.. इस नाते शायान, इमरान मसूद के दामाद भी हैं.

मौजूदा जौर में सहारनपुर की राजनीति की मुख्य कमान इमरान मसूद के हाथों में है, जो 2024 के चुनाव में जीत दर्ज कर सांसद बने हैं. वहीं शादान मसूद राजनीति में उतने सफल नहीं रहे और 2014 में इमरान के खिलाफ चुनाव लड़ने के बावजूद हार गए थे. 

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हमजा खुद को इमरान मसूद के सियासी वारिस के तौर पर खुद को स्थापित करना चाहते हैं तो दूसरी तरफ शायान खुद को सियासी वारिस के तौर पर मजूबत करना चाहते हैं. इसके चलते ही सियासी संग्राम छिड़ा है.

काजी परिवार की लड़ाई सड़क पर आई

सपा में शामिल होने के बाद जब दामाद शायान मसूद ने बयानबाज़ी की, तो हमजा मसूद ने उन पर गंभीर आरोप लगाए. हमजा का कहना है कि राजनीतिक स्वार्थ और टिकट की होड़ के चलते उनकी बहन (सुबिया मसूद) को प्रताड़ित कर घर से निकाला गया.

हमजा ने यह भी आरोप लगाया कि उनके बीमार पिता (नोमान मसूद) का ध्यान रखे बिना राजनीति की जा रही है और सांसद ताऊ इमरान मसूद की राजनीति को खत्म करने के लिए गुप्त बैठकें की जा रही हैं. इन आरोपों का जवाब देते हुए शायान मसूद ने अफ़सोस जताया कि राजनीतिक मतभेदों के चलते पारिवारिक विवादों को सड़क पर उछाला जा रहा है.

शायान का कहना है कि राजनीतिक सवालों का जवाब न होने के कारण उन पर घटिया और निजी हमले किए जा रहे हैं. उन्होंने स्पष्ट किया कि वे घर की अंदरूनी बातों को सार्वजनिक करके राजनीति का स्तर नहीं गिराना चाहते.

नई पीढ़ी में वर्चस्व और विरासत का संघर्ष

काजी रशीद मसूद की राजनीतिक विरासत पर हक को लेकर परिवार की नई पीढ़ी आमने-सामने है और अब यह लड़ाई घर के दहलीज से निकलकर सड़क पर आ गई है. एक तरफ इमरान मसूद पश्चिमी यूपी में कांग्रेस का मुख्य चेहरा हैं, तो दूसरी तरफ परिवार के अन्य सदस्य सपा के साथ जाकर जिले में अपने अलग राजनीतिक वजूद की जमीन तैयार कर रहे हैं.  शायान मसूद खुद को स्थापित करना चाहते हैं तो हमजा अपने आपको चाचा इमरान मसूद के सियासी वारिस समझ रहे हैं. 

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राजनीतिक विरोधियों को कभी चुनौती देकर काजी परिवार 'इलाज' करने की बात करते, लेकिन वक्त ने उन्हें खुद इलाज के लिए सड़क पर लाकर खड़ा कर दिया है एक तरफ इमरान मसूद और उनके भतीजे हैं तो दूसरी तरफ रशीद के बेटे और पोते हैं.हमजा मसूद और शायान मसूद ने वीडियो जारी करके जिस तरह से आरोप-प्रत्यारोप एक दूसरे पर लगाए हैं, उससे सहारनपुर ही नहीं बल्कि पश्चिमी यूपी में उसकी चर्चा जारी है.

काज़ी परिवार की एक आवाज पर सहारनपुर का एक बड़ा वोट बैंक एकजुट हो जाता था, आज उसी परिवार के लोग एक-दूसरे के खिलाफ वीडियो और बयान जारी कर रहे हैं. इसी वजह से सहारनपुर में चर्चा है कि बंद कमरों का यह सियासी संग्राम अब चौराहे पर आ चुका है.

काजी परिवार में दूसरी बार मची सियासी कलह 

हालांकि, यह पहली बार नहीं है, इससे पहले भी 2014 में सियासी संग्राम छिड़ गया था. 2012 चुनाव के बाद ही इमरान मसूद और उनके चाचा रशीद मसूद के बीच दरार आ गई थी. इमरान मसूद ने अपना अलग राजनीतिक वजूद बनाने के लिए समाजवादी पार्टी ज्वाइन कर ली थी जबकि उनके चाचा कांग्रेस में थे. मुलायम सिंह ने रशीद मसूद को सपा में ले आए, जिसके बाद इमरान मसूद ने सपा छोड़कर कांग्रेस ज्वाइन कर ली.

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वर्ष 2014 के लोकसभा चुनाव में इमरान मसूद ने कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ा तो काजी रशीद मसूद के बेटे शाजान मसूद ने सपा के टिकट पर चुनाव लड़ा. उस चुनाव में इमरान मसूद दूसरे नंबर पर रहे थे, जबकि शाजान मसूद चौथे नंबर पर. अब फिर एक बार परिवार की कलह घर बाहर सबसे सामने आ गई है. 

हालांकि, इस बार परिवार के आपसी रिश्ते (चाचा-भतीजा, भाई-भाई और ससुर-दामाद) इस कदर उलझे हुए हैं कि यह लड़ाई केवल घरेलू न रहकर सीधे सहारनपुर के राजनीतिक समीकरणों को प्रभावित कर रही है, जिस परिवार की एक आवाज़ पर पूरा वोट बैंक एकजुट हो जाता था, आज उसी खानदान की दो तीसरी पीढ़ी आमने-सामने खड़ी है.

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