पश्चिमी उत्तर प्रदेश के रामपुर जिले में 'सुआर' (जिसे 'स्वार' भी लिखा जाता है) एक सब-डिविजन लेवल का शहर है, जिसका अपना म्युनिसिपल बोर्ड है. यह एक शांत शहर है जो मुख्य रूप से खेती और स्थानीय व्यापार के लिए जाना जाता है.
1957 में बना स्वार, एक सामान्य (अनरिजर्व्ड) विधानसभा क्षेत्र है और रामपुर लोकसभा क्षेत्र के पांच हिस्सों में से एक है. इसमें स्वार और टांडा म्युनिसिपल बोर्ड, मसवासी नगर पालिका के साथ-साथ टांडा, सुआर और फॉरेस्ट रुद्रपुर रेंज के कानूनगो सर्कल के गांव शामिल हैं.
स्वार में अब तक 19 विधानसभा चुनाव हुए हैं, जिनमें 2007 और 2023 में हुए दो उपचुनाव भी शामिल हैं. यहां के लोग आम तौर पर राजनीतिक पार्टियों के बजाय व्यक्तिगत नेताओं को ज्यादा वोट देते रहे हैं. नतीजे मिले-जुले रहे हैं और कोई भी पार्टी सुआर को अपना गढ़ नहीं कह सकती. इसका सबसे अच्छा उदाहरण नवाब काजिम अली खान का रिकॉर्ड है, जो रामपुर के पुराने शाही परिवार से हैं. उन्होंने लगातार चार बार सुआर सीट जीती, दो बार कांग्रेस पार्टी से और एक-एक बार समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी से.
यहां कांग्रेस पार्टी ने सबसे ज्यादा सात बार जीत हासिल की है, इसके बाद बीजेपी की छह जीतें हैं (जिसमें भारतीय जनसंघ की उसके पुराने रूप में जीती गई एक जीत भी शामिल है). समाजवादी पार्टी ने यह सीट तीन बार जीती है, जबकि स्वतंत्र पार्टी, बहुजन समाज पार्टी और अपना दल (एस) ने एक-एक बार यह सीट जीती है.
2012 में, नवाब काजिम अली खान ने कांग्रेस पार्टी के सदस्य के तौर पर लगातार चौथी बार जीत हासिल की. उन्होंने बीजेपी की लक्ष्मी सैनी को 13,715 वोटों से हराया. 2017 में नवाब बीएसपी के टिकट पर चुनाव लड़े और तीसरे स्थान पर रहे. समाजवादी पार्टी के अब्दुल्ला आजम खान 53,096 वोटों से जीते और बीजेपी की लक्ष्मी सैनी एक बार फिर दूसरे स्थान पर रहीं. 2022 में अब्दुल्ला आजम खान ने बीजेपी की सहयोगी पार्टी अपना दल (एस) के हैदर अली खान को 61,103 वोटों से हराकर समाजवादी पार्टी के लिए यह सीट बरकरार रखी. हालांकि, 2023 में कोर्ट के आदेश से अब्दुल्ला आजम खान के अयोग्य घोषित होने के बाद स्वार सीट खाली हो गई, जिससे उसी साल उपचुनाव हुआ. अपना दल (एस) के शफीक अहमद अंसारी ने समाजवादी पार्टी की अनुराधा चौहान को 8,724 वोटों से हराकर उपचुनाव जीता.
लोकसभा चुनावों के दौरान स्वार विधानसभा क्षेत्र में समाजवादी पार्टी का दबदबा रहा है. 2009 में कांग्रेस पार्टी, समाजवादी पार्टी से 13,240 वोटों से आगे थी. इस उतार-चढ़ाव के बाद, समाजवादी पार्टी ने बाद के सभी लोकसभा चुनावों में लगातार बढ़त बनाए रखी है. यह 2014 में बीजेपी से 10,073 वोटों, 2019 में 63,759 वोटों और 2024 में 50,692 वोटों से आगे रही.
पिछले कुछ वर्षों में सुआर में मतदाताओं की संख्या में लगातार और ठीक-ठाक बढ़ोतरी हुई है. 2012 में यहां 268,889, 2017 में 295,945, 2019 में 302,337, 2022 में 307,421 और 2024 में 311,702 रजिस्टर्ड मतदाता थे.
मतदान का प्रतिशत 2012 में 62.03%, 2017 में 68.33%, 2019 में 68.47%, 2022 में 69.34% और 2024 में 60.45% रहा.
स्वार मुस्लिम-बहुल निर्वाचन क्षेत्र है. यहां के मतदाताओं में अनुसूचित जातियों की हिस्सेदारी लगभग 11.56% है. यह मुख्य रूप से एक ग्रामीण निर्वाचन क्षेत्र है, जहां 77.86% मतदाता गांवों में रहते हैं, जबकि 22.14% शहरी इलाकों में रहते हैं.
स्वार की स्थानीय अर्थव्यवस्था मुख्य रूप से खेती, छोटे पैमाने के व्यापार और कृषि-आधारित उद्योगों पर टिकी है. यह इलाका गन्ने की खेती और चीनी से जुड़ी औद्योगिक गतिविधियों के लिए जाना जाता है, जिसमें बड़े सुआर क्षेत्र से जुड़ी इकाइयां भी शामिल हैं. आसपास के इलाकों में गन्ना, अनाज और बागवानी मुख्य फसलें हैं. यहां के कई निवासी खेती से जुड़ी गतिविधियों, छोटे व्यवसायों और पारंपरिक कामों में लगे हुए हैं. मतदाताओं के लिए मुख्य मुद्दों में गन्ने की कीमतें, सिंचाई की सुविधाएं, बिजली की आपूर्ति, रोजगार के अवसर और बुनियादी ढांचे का विकास शामिल हैं.
भौगोलिक रूप से, स्वार पश्चिमी उत्तर प्रदेश के उपजाऊ मैदानी इलाकों में स्थित है. यहां की जमीन ज्यादातर समतल है और इस इलाके से कोई बड़ी नदी नहीं बहती है. शहर में जिला और राज्य राजमार्गों के जरिए अच्छी सड़क कनेक्टिविटी है. स्वार का अपना कोई रेलवे स्टेशन नहीं है. सबसे नजदीकी बड़ा रेलवे स्टेशन रामपुर जंक्शन है, जो बड़े शहरों से अच्छी कनेक्टिविटी देता है. स्वार जिला मुख्यालय रामपुर से लगभग 25-28 किमी, मुरादाबाद से लगभग 50-55 किमी, बरेली से लगभग 65-70 किमी, दिल्ली से लगभग 160-170 किमी और राज्य की राजधानी लखनऊ से लगभग 340-350 किमी दूर है.
अब्दुल्ला आजम खान की अयोग्यता और उनके पिता आजम खान के साथ उनकी जेल की सजा का स्वार निर्वाचन क्षेत्र और पूरे रामपुर जिले पर गहरा असर पड़ा. पिता-पुत्र की जोड़ी के जेल में होने और 2025 में दोनों को मिली सात साल की सजा काटने के कारण, समाजवादी पार्टी सुआर में मुश्किल स्थिति में है. पार्टी 2023 का विधानसभा उपचुनाव हार गई थी, लेकिन 2024 के संसदीय चुनावों में अपनी बढ़त बनाए रखी. 2027 के विधानसभा चुनावों में यह बात बहुत मायने रखेगी कि स्वार सीट से बीजेपी या उसकी सहयोगी पार्टी अपना दल (एस) चुनाव लड़ती है और सत्ताधारी गठबंधन का उम्मीदवार कौन होता है, क्योंकि स्वार में आम तौर पर लोग राजनीतिक पार्टी के बजाय उम्मीदवार को वोट देते हैं. इसने एक कड़े और दिलचस्प मुकाबले की स्थिति बना दी है, जिसमें किसी भी पार्टी को चुनाव से पहले स्पष्ट बढ़त हासिल नहीं है.
(अजय झा)
Haidar Ali Khan Alias Hamza Mian
ADAL
Adhyapak Shanker Lal
BSP
Ikram Hussain
IND
Ram Raksha Pal Singh Alias Raja Thakur
INC
Nota
NOTA
Mohd Asif
AAAP
Monis Khan
IND
Jagpal Singh
PHSP
Shiv Prasad
IND
Arshad Warsi
MNDP
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