सहारनपुर, उत्तर प्रदेश के सहारनपुर जिले का एक अर्ध-शहरी निर्वाचन क्षेत्र है, जो सहारनपुर शहर के आस-पास के ग्रामीण और उप-शहरी इलाकों का प्रतिनिधित्व करता है. इसका एक लंबा ऐतिहासिक गौरव रहा है, लेकिन इसे अभी भी असमान विकास और अपर्याप्त बुनियादी ढांचे जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है.
सहारनपुर एक सामान्य, अनारक्षित विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र है और सहारनपुर लोकसभा सीट के पांच हिस्सों में से एक है. यह निर्वाचन क्षेत्र 1955 से अस्तित्व में है, और इसकी मौजूदा सीमाएं 2008 के परिसीमन आदेश के तहत तय की गई थीं, जब सहारनपुर नगर को एक अलग शहरी सीट के तौर पर अलग किया गया था.
सहारनपुर विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र में अब तक 17 विधानसभा चुनाव हो चुके हैं. इस निर्वाचन क्षेत्र में बेहद कड़ा मुकाबला देखने को मिला है, जिसमें जीतने वाली पार्टी अक्सर बदलती रही है. यहां के मतदाताओं ने किसी एक पार्टी के साथ टिके रहने के बजाय, मुख्य पार्टियों के बीच बारी-बारी से चुनने को ज्यादा पसंद किया है. कांग्रेस पार्टी ने यहां सबसे ज्यादा छह बार जीत हासिल की है, जबकि BJP ने चार बार जीत दर्ज की है. इसमें भारतीय जनसंघ की एकमात्र जीत भी शामिल है, जो BJP का पुराना रूप था. जनता पार्टी और जनता दल ने मिलकर तीन बार यह सीट जीती है, समाजवादी पार्टी ने दो बार, और बहुजन समाज पार्टी तथा एक निर्दलीय उम्मीदवार ने एक-एक बार जीत हासिल की है.
2012 में, बहुजन समाज पार्टी (BSP) के जगपाल सिंह ने कांग्रेस पार्टी के अब्दुल वाहिद को 17,113 वोटों से हराकर यह सीट जीती थी. 2017 में, कांग्रेस के मसूद अख्तर ने BSP के मौजूदा विधायक जगपाल सिंह को 12,324 वोटों के बड़े अंतर से हराया था. 2022 में, समाजवादी पार्टी के आशु मलिक ने जगपाल सिंह को हराकर जीत हासिल की. जगपाल सिंह BSP छोड़कर BJP में शामिल हो गए थे, और उन्हें 30,745 वोटों के अंतर से हार का सामना करना पड़ा.
सहारनपुर विधानसभा क्षेत्र में लोकसभा चुनावों में देखने को मिले उतार-चढ़ाव वाले रुझानों की ही झलक मिली है. राजनीतिक माहौल और गठबंधनों के आधार पर, मुख्य पार्टियों ने बारी-बारी से बढ़त हासिल की है. 2009 में, BSP ने समाजवादी पार्टी पर 15,012 वोटों की बढ़त बनाई थी. 2014 में, इन दोनों पार्टियों को पीछे छोड़ते हुए, कांग्रेस पार्टी ने BJP पर 16,200 वोटों की बढ़त हासिल की थी. 2019 में BSP फिर से मुकाबले में आ गई, जब उसने BJP पर 51,364 वोटों की बड़ी बढ़त बना ली. वहीं 2024 में कांग्रेस पार्टी ने BJP पर 44,626 वोटों की बढ़त बनाकर फिर से बढ़त हासिल कर ली. इसमें कांग्रेस के इमरान मसूद को 121,409 वोट मिले, जबकि BJP के राघव लखनपाल को 76,783 वोट मिले.
सहारनपुर में पिछले कुछ सालों में वोटरों की संख्या में लगातार बढ़ोतरी दर्ज की गई है. 2012 में इस विधानसभा क्षेत्र में 203,915 रजिस्टर्ड वोटर थे, जो बढ़कर 2017 में 317,413, 2019 में 332,832, 2022 में 359,546 और 2024 में 368,838 हो गए. वोटिंग का प्रतिशत भी काफी अच्छा रहा है- 2012 में 73.80 प्रतिशत, 2017 में 74.81 प्रतिशत, 2022 में 72.27 प्रतिशत; हालांकि, 2024 के लोकसभा चुनावों में यह घटकर 67.26 प्रतिशत रह गया.
2011 की जनगणना के अनुसार, सहारनपुर विधानसभा क्षेत्र की आबादी का ढांचा मिला-जुला है, जिसमें हिंदू बहुसंख्यक होने के साथ-साथ मुसलमानों की भी अच्छी-खासी आबादी है. अनुसूचित जाति के लोग वोटरों का एक बड़ा हिस्सा हैं, जो कुल वोटरों का 30.30 प्रतिशत हैं. ज्यादातर वोटर गांवों और कस्बों में रहते हैं जिसमें 74.18 प्रतिशत वोटर गांवों के हैं और 25.82 प्रतिशत शहरों के. इस सामाजिक बनावट की वजह से चुनावों के दौरान जाति और समुदाय को एकजुट करना बहुत जरूरी हो जाता है.
सहारनपुर का इतिहास बहुत पुराना है और यह पूरे सहारनपुर इलाके के इतिहास से जुड़ा हुआ है, जो कई सदियों पुराना है. मुगल काल में यह इलाका एक अहम केंद्र था, और बाद में ब्रिटिश राज के दौरान यह व्यापार और प्रशासन का एक बड़ा केंद्र बन गया. इस इलाके ने दिल्ली सल्तनत से लेकर मुगलों और ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी तक, कई साम्राज्यों और शासकों का प्रभाव देखा है. आजादी की लड़ाई में भी इस इलाके ने अहम भूमिका निभाई थी. आजादी के बाद, उपजाऊ जमीन और शिवालिक की तलहटी के पास रणनीतिक जगह होने के बावजूद, इस निर्वाचन क्षेत्र को सीमित औद्योगिक विकास की समस्या से जूझना पड़ा. दिल्ली-NCR और दूसरे शहरी केंद्रों की ओर युवाओं का पलायन एक लगातार बनी रहने वाली चुनौती है.
भौगोलिक रूप से, यह निर्वाचन क्षेत्र शिवालिक की तलहटी के पास, उपजाऊ ऊपरी दोआब के मैदानों में स्थित है. इसे नहर सिंचाई प्रणालियों से बहुत फायदा मिलता है, जिससे कृषि यहाँ की स्थानीय अर्थव्यवस्था की रीढ़ बन गई है. यहां की मुख्य फसलों में गन्ना, गेहूं, धान और आम व अमरूद जैसे कई तरह के बागवानी उत्पाद शामिल हैं. पारंपरिक हस्तशिल्प, लकड़ी का काम और छोटे पैमाने के उद्योग भी स्थानीय अर्थव्यवस्था को सहारा देते हैं. हालांकि, किसान अक्सर मार्केटिंग की अपर्याप्त सुविधाओं, गन्ने की कीमतों में उतार-चढ़ाव और निचले इलाकों में जलभराव की शिकायत करते हैं.
इस निर्वाचन क्षेत्र के बुनियादी ढांचे में जिला और राज्य राजमार्गों के जरिए सड़कों की ठीक-ठाक कनेक्टिविटी शामिल है. यह इलाका सहारनपुर रेलवे डिवीजन के अंतर्गत आता है, जिससे बड़े शहरों तक रेल से पहुंचने की अच्छी सुविधा मिलती है. हालांकि बुनियादी सुविधाएं मौजूद हैं, फिर भी यहां के निवासी अक्सर बेहतर स्वास्थ्य सेवा, शिक्षा और नागरिक सुविधाओं की जरूरत पर जोर देते हैं, खासकर आस-पास के गांवों में. जल निकासी की खराब व्यवस्था, पीक सीजन के दौरान बिजली की अनियमित आपूर्ति और रोजगार के सीमित अवसर जैसे मुद्दे यहां की स्थानीय चर्चाओं में हावी रहते हैं.
सहारनपुर विधानसभा क्षेत्र रणनीतिक रूप से एक महत्वपूर्ण स्थान पर स्थित है, जहां से अन्य महत्वपूर्ण केंद्रों तक पहुंच आसान है. सहारनपुर शहर से सटा होने के कारण, यह जिला मुख्यालय के काफी करीब है. उत्तराखंड के देहरादून और हरिद्वार यहां से लगभग 70 से 85 किलोमीटर की दूरी पर हैं. नई दिल्ली इस क्षेत्र से लगभग 180 से 200 किलोमीटर दूर है. आस-पास के अन्य शहरों में हरियाणा का यमुनानगर, मुजफ्फरनगर, रुड़की, देवबंद और रामपुर मनिहारन शामिल हैं. ये शहर व्यापार, रोजगार और परिवहन के महत्वपूर्ण केंद्र हैं. राज्य की राजधानी लखनऊ यहां से 500 किलोमीटर से भी अधिक दूरी पर स्थित है.
राज्य की सत्ताधारी पार्टी, BJP, अब तक सहारनपुर विधानसभा क्षेत्र में अपना पूर्ण वर्चस्व स्थापित नहीं कर पाई है, हालांकि वह यहां एक मजबूत दावेदार बनी हुई है. यहां की मिश्रित जनसंख्या, पार्टियों के बदलने के इतिहास और मतदाताओं की तीव्र विकास की चाह को देखते हुए, यह उम्मीद की जा रही है कि 2027 के चुनावों में इस सीट पर कड़ा मुकाबला देखने को मिलेगा. SP और कांग्रेस का लक्ष्य अपने जनाधार को मजबूत करना होगा, विशेष रूप से मुस्लिम और यादव मतदाताओं के बीच, जबकि BJP अपनी संगठनात्मक शक्ति, जन-कल्याणकारी योजनाओं और विकास के वादों का लाभ उठाने का प्रयास करेगी. कृषि संकट, बेरोजगारी और बुनियादी ढांचे की कमी जैसे स्थानीय मुद्दे चुनावों में निर्णायक भूमिका निभा सकते हैं. कुल मिलाकर, 2027 के विधानसभा चुनावों से पहले, सहारनपुर पश्चिमी उत्तर प्रदेश के उन विधानसभा क्षेत्रों में से एक बना हुआ है, जहां के चुनावी परिणाम सबसे अधिक अप्रत्याशित माने जाते हैं और जिन पर सबकी पैनी नज़र रहती है.
Jagpal Singh
BJP
Ajab Singh
BSP
Margoob
AIMIM
Qurban
ASPKR
Sandeep Kumar
INC
Nota
NOTA
Yogesh Dahiya
AAAP
Shabrej
IND
Lokesh Kumar
IND
Riyasat
AEP
Rajita
IND
Vahid Ali Khan
LGP
Pinki Kumari
IND
Mewa Lal
BDPty
उत्तर प्रदेश में चुनाव से पहले बीजेपी ने संगठन में बदलाव किया है. अनुसूचित जाति मोर्चा के नए जिलाध्यक्षों की घोषणा की गई है. किसे मिली नई जिम्मेदारी, पूरी लिस्ट खबर में देखें.
यूपी विधानसभा चुनाव 2027 से पहले समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के बीच सीट शेयरिंग को लेकर सबसे बड़ा पेच पांच जिलों में फंस गया है सहारनपुर, रायबरेली, अमेठी, बाराबंकी और सीतापुर की सीटों पर दोनों दल अपनी-अपनी मजबूत दावेदारी कर रहे हैं कांग्रेस 105-115 सीटों की मांग कर रही है, जबकि सपा 85-90 सीटों के फॉर्मूले पर अड़ी बताई जा रही है आखिर गठबंधन में कुर्बानी कौन देगा?
भारतीय जनता पार्टी ने उत्तर प्रदेश में साल 2027 के विधानसभा चुनावों के लिए अभी से कमर कस ली है. पार्टी के राष्ट्रीय स्तर के नेतृत्व ने हाल ही में पश्चिमी उत्तर प्रदेश के मेरठ और सहारनपुर जिलों का दो दिवसीय दौरा किया. इस दौरे के दौरान बीजेपी नेता नितिन नवीन ने सांगठनिक मजबूती और चुनावी रणनीति को लेकर गहन मंथन किया.
यूपी चुनाव की तैयारियों के बीच पुराने कार्यकर्ताओं ने नितिन नबीन के सामने चुनौतियों की शिकायत की है. पश्चिमी यूपी के मेरठ और सहारनपुर में पार्टी के पुराने कार्यकर्ताओं ने नेतृत्व पर बाहरी चेहरों को ज्यादा तवज्जो देने और मूल कैडर की उपेक्षा करने के आरोप लगाए. संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने कार्यकर्ताओं से मतभेद भूलकर चुनाव की तैयारियों में जुटने की अपील की है.
उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 से पहले मेरठ और सहारनपुर में बीजेपी की बैठकों में पुराने कार्यकर्ताओं की नाराज़गी खुलकर सामने आई। आखिर "बाहरी बनाम मूल कैडर" का मुद्दा क्यों उठा और राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने क्या संदेश दिया? पूरी रिपोर्ट।
बीजेपी राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने सहारनपुर दौरे के दौरान दलित कार्यकर्ता अजब सिंह के घर जाकर सादा भोजन किया और हाथ से खाना खाया. इससे पहले वे रविदास मंदिर पहुंचे, जहां पूजा की और लोगों ने उनका स्वागत किया. अजब सिंह रविदास मंदिर समिति के अध्यक्ष और सेवानिवृत्त प्रवक्ता हैं, जो 1991 से संघ से जुड़े रहे हैं.
बीजेपी के अध्यक्ष नितिन नवीन पश्चिमी उत्तर प्रदेश के दो दिवसीय दौरे पर हैं. उनके इस दौरे को आगामी विधानसभा चुनाव की तैयारियों के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है. अपने इस दौरे के दौरान नितिन नवीन पश्चिमी उत्तर प्रदेश के सांसदों, विधायकों और पार्टी के वरिष्ठ पदाधिकारियों के साथ एक महत्वपूर्ण बैठक करेंगे. इस बैठक में वे चुनावी तैयारियों की समीक्षा करेंगे और कार्यकर्ताओं को जीत के लिए जरूरी दिशा-निर्देश देंगे.
उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों की तैयारियों को तेज करते हुए बीजेपी नेता नितिन नवीन का दो दिवसीय महत्वपूर्ण यूपी दौरा आज से शुरू हो रहा है. इस दौरे की शुरुआत मेरठ से होगी, जहां वे युवा सम्मेलन को संबोधित करेंगे. इसके अलावा वह पश्चिमी उत्तर प्रदेश के शक्ति केंद्रों की अहम बैठक में भी हिस्सा लेंगे. नितिन नवीन अपने इस प्रवास के दौरान पार्टी के पूर्व पदाधिकारियों, वर्तमान सांसदों, विधायकों और सक्रिय कार्यकर्ताओं के साथ चुनावी तैयारियों की समीक्षा करेंगे और आगे की रणनीतियों पर मंथन करेंगे.
उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2026 से पहले बीजेपी ने अपनी तैयारियां तेज कर दी हैं. राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन 21-22 सितंबर को पश्चिमी यूपी के दौरे पर रहेंगे, जहां वो पूर्व पदाधिकारियों, सांसदों, विधायकों और कार्यकर्ताओं के साथ चुनावी रणनीति पर बैठक करेंगे. वो मेरठ जाएंगे और हाई-लेवल मीटिंग में बूथ प्रबंधन पर भी मंथन करेंगे.
अखिलेश यादव ने बीजेपी नेता विनोद तावड़े के ‘पराया धन अपना’ बयान पर पलटवार किया. उन्होंने तावड़े को पागल तक कह दिया. अखिलेश ने बीजेपी पर धन के गलत इस्तेमाल का आरोप लगाया. उन्होंने 2027 के यूपी विधानसभा चुनाव में सपा और सहयोगियों की जीत का दावा किया.