भारत और अमेरिका सितंबर 2026 में अपने ज्वाइंट मिलिट्री एक्सरसाइज 'युद्ध अभ्यास' का 22वां संस्करण करने जा रहे हैं. यह अभ्यास दो अलग-अलग जगहों पर होगा- उत्तराखंड के औली और राजस्थान के महाजन फील्ड फायरिंग रेंज में. दोनों देशों से करीब 350-350 सैनिक तीन सप्ताह तक इसमें भाग लेंगे.
यह अभ्यास भारत की दो सबसे संवेदनशील सैन्य सीमाओं- चीन के साथ वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) और पाकिस्तान की ओर पश्चिमी मोर्चे- के नजदीक होगा. इससे ज्वाइंट ट्रेनिंग की जटिलता और वास्तविक परिस्थितियों के करीब होने का अंदाजा लगता है.
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औली में एलएसी से करीब 95 किलोमीटर दूर है. यहां ऊंचाई वाले क्षेत्रों में युद्ध की तैयारियां की जाएंगी. हाल के हिमालयी तैनातियों और पहाड़ी मुकाबले के अनुभवों से सीख लेकर यहां हाई-अल्टीट्यूड वॉरफेयर ड्रिल्स होंगी.
राजस्थान का महाजन रेंज पाकिस्तान सीमा के नजदीक भारत के प्रमुख सैन्य प्रशिक्षण क्षेत्रों में से एक है. यहां लाइव-फायर अभ्यास, मैकेनाइज्ड ऑपरेशंस, आर्टिलरी फायरिंग और एयर-ग्राउंड इंटीग्रेशन ड्रिल्स होंगी.
दोनों जगहों पर सैनिक सटीक हमलों, क्लोज-एयर सपोर्ट, युद्धक्षेत्र समन्वय और तेज प्रतिक्रिया वाले अभियानों का अभ्यास करेंगे. पहाड़ी और रेगिस्तानी दोनों तरह की चुनौतीपूर्ण जमीनों पर काम होगा.
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पहली बार अपाचे हेलीकॉप्टर और लंबी दूरी के हथियार
इस मिलिट्री ड्रिल में पहली बार एएच-64 अपाचे अटैक हेलीकॉप्टर और लंबी दूरी के सटीक हथियारों को शामिल किया जाएगा. इससे संयुक्त हथियार युद्ध क्षमता मजबूत होगी. सैनिक मिलकर सटीक हमले, करीबी हवाई सहायता और तेज प्रतिक्रिया वाले अभियानों का अभ्यास करेंगे. यह अभ्यास ऑपरेशन सिंदूर के बाद भारत में होने वाला पहला बड़ा भारत-अमेरिका सैन्य अभ्यास है. इससे पहले 2025 का संस्करण अलास्का में हुआ था.
2004 में शुरू हुए युद्ध अभ्यास ने अब काफी विकास कर लिया है. शुरू में यह मुख्य रूप से आतंकवाद विरोधी अभ्यास था, लेकिन अब इसमें ऊंचाई वाले युद्ध, पारंपरिक ऑपरेशंस, मानवीय सहायता और आपदा राहत जैसे कई पहलू शामिल हो गए हैं. यह अभ्यास भारत और अमेरिका के बीच बढ़ते सैन्य सहयोग को दर्शाता है.

दोनों देश इंटरऑपरेबिलिटी यानी साथ मिलकर काम करने की क्षमता, ऑपरेशनल समन्वय और तैयारियों को लगातार बढ़ा रहे हैं. इसका उद्देश्य भारत-प्रशांत क्षेत्र और उससे आगे की उभरती सुरक्षा चुनौतियों से निपटना है.
युद्ध अभ्यास 2026 का दो संवेदनशील मोर्चों के पास होना सिर्फ प्रशिक्षण नहीं बल्कि एक स्पष्ट संदेश भी है. चीन और पाकिस्तान दोनों सीमाओं के नजदीक अभ्यास करके भारत अपनी तैयारियों और सहयोगियों के साथ तालमेल को मजबूत कर रहा है. अपाचे हेलीकॉप्टर और सटीक हथियारों का पहली बार शामिल होना आधुनिक युद्ध की जरूरतों को दर्शाता है.
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ऑपरेशन सिंदूर के बाद यह अभ्यास भारत की रक्षा तैयारियों और अमेरिका के साथ रणनीतिक साझेदारी को और मजबूती देता है. लंबे समय में इससे दोनों सेनाओं के बीच विश्वास बढ़ेगा और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में स्थिरता बनाए रखने में मदद मिलेगी. कुल मिलाकर यह अभ्यास भारत की बहुआयामी सुरक्षा रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा बनकर उभर रहा है.