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कौन रोकता रहा रातभर अशोक सिद्धार्थ का संन्यास? मायावती ने सपा-कांग्रेस को लिया निशाने पर

बहुजन समाज पार्टी की प्रमुख मायावती ने अपने भतीजे आकाश आनंद के ससुर अशोक सिद्धार्थ को निशाने पर लेते हुए सपा और कांग्रेस पर तीखा हमला बोला है. उन्होंने विपक्षी दलों द्वारा नीले रंग और अंबेडकरवादी सोच के दिखावे पर सवाल उठाते हुए बसपा से निकाले गए नेताओं को पनाह देने और राजनीतिक षड्यंत्र रचने का आरोप लगाया.

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मायावती के साथ अशोक सिद्धार्थ (Photo-ITG)
मायावती के साथ अशोक सिद्धार्थ (Photo-ITG)

बहुजन समाज पार्टी की प्रमुख मायावती ने अपने भतीजे आकाश आनंद के ससुर अशोक सिद्धार्थ को लेकर आक्रामक रुख अख्तियार कर रखा है. अशोक सिद्धार्थ और आकाश आनंद को बसपा से बाहर का रास्ता दिखा चुकीं मायावती ने सपा, कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों पर तीखा हमला बोलते हुए उनके नीला रंग अपनाने को लेकर सवाल उठाए हैं. इसके साथ ही अशोक सिद्धार्थ को फिर से सियासी निशाने पर लेते हुए उन्होंने कांग्रेस और सपा को कठघरे में खड़ा किया.

मायावती ने बसपा से निष्कासित नेताओं के दूसरी पार्टियों में जाने और अलग संगठन बनाने को लेकर भी विपक्षी दलों को घेरा. साथ ही अशोक सिद्धार्थ के राजनीति से संन्यास के मामले पर भी उन्होंने कई गंभीर आरोप लगाए.

बसपा प्रमुख ने कहा कि रातभर सियासी साजिश चलती रही और जब बात नहीं बनी, तब संन्यास लेने का ऐलान किया गया. उन्होंने कहा कि सही समय आने पर इसका खुलासा किया जाएगा और पार्टी के लोगों को और भी बहुत कुछ बताया जाएगा. सवाल उठता है कि अशोक सिद्धार्थ को कौन रोक रहा था?

नीला रंग अपनाने पर मायावती ने सपा को घेरा

मायावती ने सोशल मीडिया मंच 'एक्स' पर पोस्ट के माध्यम से लिखा कि सपा, कांग्रेस व अन्य विरोधी पार्टियों के नेताओं व कार्यकर्ताओं द्वारा बसपा का शुरू से चला आ रहा नीला रंग अपनाने, गले में नीला गमछा व कपड़े पहनने तथा मंच आदि पर नीला कपड़ा इस्तेमाल करने से उनकी सर्वसमाज, खासकर गरीबों, दलितों, आदिवासियों, पिछड़ों व अन्य उपेक्षित वर्गों के प्रति वर्षों से चली आ रही जातिवादी, संकीर्ण, सामंतवादी एवं पूंजीवादी सोच नहीं बदल सकती.

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उन्होंने कहा कि ना ही ये लोग दिल से आंबेडकरवादी होने और कहलाने वाले हैं. इसलिए 'बहुजन समाज' के वास्तविक हित और कल्याण के प्रति पहले वे अपना दिल व दिमाग साफ करें.

मायावती ने आगे लिखा कि वैसे भी ये लोग इन वर्गों के मामले में आए दिन गिरगिट की तरह रंग बदलते रहते हैं, अर्थात ये कहते कुछ हैं और करते उसके ठीक विपरीत हैं. खासकर सपा के 'पीडीए' (PDA) के मामले में तो उनकी सोच, चाल, चरित्र व चेहरा हमेशा दोगला व बेईमान ही रहा है, जिसके अनेक उदाहरण हैं और यह सब जानते हैं. इन वर्गों की सच्ची हितैषी और आंबेडकरवादी पार्टी केवल बसपा ही है.

बसपा से निकाले नेताओं को लेने पर उठाए सवाल

मायावती ने आगे कहा कि यहां यह भी उल्लेखनीय है कि अन्य पार्टियों की तरह बीएसपी के जो भी लोग अनुशासनहीनता आदि के कारण समय-समय पर निष्कासित कर दिए जाते हैं, वे अधिकतर इन्हीं सब कारणों से अब तक कई पार्टियां बदल चुके हैं, जो किसी से छिपा नहीं है. इसी से अंदाजा लगा लेना चाहिए कि ये लोग पूरी तरह स्वार्थी और अवसरवादी हैं. वे किसी भी पार्टी के हित में नहीं हो सकते.

उन्होंने कहा कि इतना ही नहीं, बल्कि जिनको पार्टी से निकाल दिया जाता है, उनमें से कुछ लोग दूसरी पार्टियों के हाथों में खेलकर छोटी-छोटी पार्टियां व संगठन आदि भी बना लेते हैं, जिनसे 'बहुजन समाज' का सामूहिक हित नहीं हो सकता.

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कांग्रेस पर मायावती ने लगाए गंभीर आरोप

मायावती ने कहा कि ऐसी पार्टियां बिना किसी गठबंधन के चुनाव भी नहीं लड़ सकतीं और किसी भी पार्टी की सरकार बनने पर उसमें शामिल हुए बिना नहीं रह सकतीं, जो पार्टियां बसपा से निकाले हुए लोगों को अपनी पार्टी में शामिल करने की बात करती हैं या उन्हें नई पार्टी बनाने की सलाह देती हैं, वे पहले अपने गिरेबान में झांककर जरूर देख लें.

उन्होंने कहा कि खासकर कांग्रेस पार्टी, जो निकाले गए लोगों को अपनी पार्टी में शामिल करने की बात कर रही है, तो ऐसी पार्टी जो खुद डूबते जहाज की तरह है, उसमें भला कौन शामिल होकर अपने सियासी भविष्य को अंधकार में डालेगा? खासकर इस पार्टी से दूरी बनाने के लिए बाबा साहेब डॉ. भीमराव आंबेडकर जी ने अपने जीते-जी बहुजन समाज के लोगों को आगाह भी किया था. इसलिए वर्तमान हालात में, पार्टी व मूवमेंट के हित में बसपा के लोगों के लिए यह सब जानना और समझना बहुत जरूरी और उचित होगा.

अशोक सिद्धार्थ को कौन रातभर रोकता रहा?

मायावती ने कहा कि यहां यह भी बताना बहुत जरूरी है कि जिस दिन बीएसपी ने अशोक सिद्धार्थ को राजनीति से संन्यास लेने की सलाह दी थी, उस दिन उन पर काफी दबाव पड़ने के बावजूद उन्होंने अपने संन्यास की घोषणा तत्काल नहीं की थी.

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बसपा प्रमुख ने कहा कि उस दिन वे पूरी रात इसे रुकवाने के लिए किस्म-किस्म के हथकंडे इस्तेमाल करते रहे. इसमें कामयाबी नहीं मिलने पर मजबूरी में अगले दिन यह सोचकर उन्हें लगभग सुबह साढ़े छह बजे अपने संन्यास की 'किंतु-परंतु' वाली घोषणा करनी पड़ी कि कहीं ज्यादा देरी होने पर और भी बड़ा नुकसान न हो जाए. इसके बारे में सही समय आने पर पार्टी के लोगों को और भी बहुत कुछ जरूर बताया जाएगा.

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