यूपी के चुनाव में अब मूंछें भी चुनावी मुद्दा बन गई हैं. सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने गुरुवार को अपने कार्यकर्ता की मूंछों पर ताव दिलाने के लिए मंच पर बुला लिया. पिछले दिनों मैनपुरी में यूपी पुलिस के अधिकारी अशोक सिंह ने मूंछों पर ताव देते हुए कहा था कि ये वीडियो अखिलेश यादव को दे देना.
गुरुवार प्रेस कॉन्फ्रेंस में अखिलेश यादव ने जवाब देते हुए कहा कि उसकी मूंछें बहुत छोटी थीं. अखिलेश ने ना सिर्फ कार्यकर्ता की मूंछों पर ताव दिलवाया, बल्कि मूंछों के मेंटेनेंस के लिए कुछ आर्थिक मदद भी की. इसके जवाब में अब बीजेपी सपा को घेर रही है. सोशल मीडिया पोस्ट के बाद भाजपा भी पलटवार करती नजर आई.
भाजपा प्रवक्ता राकेश त्रिपाठी ने माफिया अतीक और मुख्तार की मूंछों वाली फोटो पोस्ट करके लिखा है,'जब माफिया मूंछों पर देते थे ताव, फैलाते थे यूपी में सांप्रदायिक तनाव, सपा मुखिया खुद करते थे इनका बचाव, मंच पर कुत्ते से भी दिखाते थे पूरा लगाव.'
SP ने BJP पर किया पलटवार
सपा प्रवक्ता फखरुल हसन चांद ने कहा कि मूंछों पर ताव की जो राजनीति है, वो भारतीय जनता पार्टी ने शुरू की है. भारतीय जनता पार्टी में जो अधिकारी हैं, वो इतने बेलगाम हैं कि वो विपक्ष के नेताओं के नाम लेते हैं, क्योंकि वो इतने बेलगाम हैं कि माननीय उच्च न्यायालय को भी उन पर टिप्पणी करनी पड़ती है.
उन्होंने कहा कि चाहे वो आईएएस-पीसीएस हों या अन्य अधिकारी हों. जिस तरह से नोएडा की घटना सामने आई, जिस तरह से दुर्गा नागपाल का मामला सामने आया, जिस तरह से एक एटा का मामला सामने आया, जहां माननीय उच्च न्यायालय को पुलिस अधिकारियों पर टिप्पणी करनी पड़ी, उनके व्यवहार पर टिप्पणी करनी पड़ी. उन्होंने कहा कि मूंछों पर ताव देने वाली घटना तो एक छोटी घटना है. उत्तर प्रदेश में जो अधिकारी हैं, वो बेलगाम हैं. चाहे फिर वो आईएएस, पीसीएस, पुलिस या अन्य अधिकारी हों. जिस तरह से वो जनता के खिलाफ काम कर रहे हैं, जिस तरह से वो संविधान को ताक पर रखकर काम कर रहे हैं, उसको लेकर माननीय उच्च न्यायालय लगातार टिप्पणी कर रहा है.
उन्होंने कहा कि इसलिए भारतीय जनता पार्टी वो अतीक और मुख्तार का नाम लेकर अपना बचाव करना चाहती है, लेकिन माननीय उच्च न्यायालय के सवालों का जवाब भारतीय जनता पार्टी के पास नहीं है.