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'...तो DIG और DM के बच्चों संग पढ़ेंगे गरीब के बच्चे' संभल में चंद्रशेखर आजाद का चुनावी ऐलान

आजाद समाज पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष चंद्रशेखर आजाद रावण ने संभल के चंदौसी में कार्यकर्ता सम्मेलन में बड़े चुनावी वादे किए. उन्होंने कहा कि 2027 में सरकार बनने पर गरीबों के बच्चे DM और DIG के बच्चों के साथ पढ़ेंगे. वहीं, सभा के दौरान बैरिकेडिंग टूटने से भगदड़ जैसी स्थिति बन गई.

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चंद्रशेखर आजाद. (Photo-ANI)
चंद्रशेखर आजाद. (Photo-ANI)

आजाद समाज पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और नगीना से सांसद चंद्रशेखर आजाद ने संभल के चंदौसी स्थित मौलागढ़ मैदान में बूथ कार्यकर्ता सम्मेलन को संबोधित किया.  आगामी 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव को लेकर उन्होंने चंदौसी 31 विधानसभा सीट से पार्टी प्रत्याशी को जिताने की अपील की. चंद्रशेखर ने घोषणा की कि राज्य में उनकी सरकार बनने पर गरीबों को समान शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाएं दी जाएंगी और सरकारी स्कूलों में  DIG और DM जैसे अफसरों व गरीबों के बच्चे साथ पढ़ेंगे. उन्होंने पुलिस भर्ती, 8 घंटे की ड्यूटी, जाति जनगणना और न्यूनतम मजदूरी 765 रुपये करने जैसे वादे किए.

मंच के पास उमड़ी बेकाबू भीड़, टूटी बैरिकेडिंग

सम्मेलन के दौरान भारी भीड़ उमड़ पड़ी। चंद्रशेखर द्वारा लोगों को मंच के पास बुलाने पर भीड़ बेकाबू हो गई और लोगों ने बैरिकेडिंग तोड़ दी. इससे मौके पर भगदड़ मच गई और लोग नीचे गिरे लोगों को कुचलते हुए आगे बढ़े. गनीमत रही कि कोई बड़ा हादसा नहीं हुआ.

विपक्ष पर तीखा हमला और MLC चुनाव की चुनौती

पत्रकारों से बात करते हुए चंद्रशेखर ने कहा कि आगामी विधान परिषद (MLC) चुनाव से साफ हो जाएगा कि बीजेपी को हराने के लिए विपक्ष में कितना दम है. उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्ष आपस में लड़ रहा है और बीजेपी को हराना नहीं चाहता बल्कि उसका रास्ता आसान कर रहा है.

मायावती के 'B टीम' वाले आरोप पर जवाब

बसपा सुप्रीमो मायावती द्वारा 'B टीम' कहे जाने पर चंद्रशेखर ने कहा कि पढ़े-लिखे बुद्धिजीवी और पीड़ित समाज की इच्छा है कि बहन जी और हम मिलकर काम करें. उन्होंने इसके लिए कई प्रयास किए लेकिन ताली दोनों हाथों से बजती है. ईवीएम धांधली पर उन्होंने मायावती को पीएम से बात कर चुनाव निरस्त कराने की चुनौती दी.

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संभल हिंसा पर फैसले और चुनाव आयोग पर बयान

संभल हिंसा में सुप्रीम कोर्ट द्वारा यूपी सरकार पर लगाए गए 10 लाख रुपये के जुर्माने को चंद्रशेखर ने बेहद कम बताया और कहा कि सरकार पर 10 करोड़ रुपये का जुर्माना लगना चाहिए था. उन्होंने चुनाव आयोग के रवैये और सुप्रीम कोर्ट द्वारा स्वतः संज्ञान न लेने पर भी चिंता जताई.

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