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Punjab Elections 2027 Amirtsar: लस्सी-कुलचे और चुनाव… इलेक्शन में किस करवट बैठेगा अमृतसर जिला?

पंजाब का वो शहर जिसे गुरुओं ने बसाया. यानी अमृतसर, जहां पूरी दुनिया स्वर्ण मंदिर में माथा टेकने आती है. राजनीतिक रूप से भी काफी ज़रूरी है, कांग्रेस से लेकर भाजपा और अकाली, अब आम आदमी पार्टी भी इस जिले पर दबदबा बनाना चाहती है. इस जिले का इतिहास क्या रहा है, कैसा इसका कल्चर रहा है, ज़रूर जानिए...

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अमृतसर सांस्कृतिक और राजनीतिक रूप से काफी ज़रूरी जिला है. (Photo: AI Generated)
अमृतसर सांस्कृतिक और राजनीतिक रूप से काफी ज़रूरी जिला है. (Photo: AI Generated)

पंजाब में 2027 में विधानसभा का चुनाव है. चुनाव के दौरान होने वाली राजनीतिक लड़ाईयों से तो हर कोई वाकिफ है, लेकिन चुनावों का दौर आते ही हर बार उस राज्य, जिले, शहर, गांव-कस्बे की पहचान दुनियाभर में चर्चा का विषय बनती है. और बात जब पंजाब की हो, तो सबसे पहला नाम ही अमृतसर का याद आता है. 

पंजाब के उत्तर-पश्चिम में स्थित अमृतसर जिला इतिहास, अध्यात्म, संस्कृति, राजनीति और वीरता के लिए दुनिया भर में जाना जाता है. भारत-पाकिस्तान की अंतरराष्ट्रीय सीमा के पास बसा यह जिला पंजाब के माझा क्षेत्र का मुख्य केंद्र है.

अमृतसर में श्री हरिमंदिर साहिब, जलियांवाला बाग और वाघा बॉर्डर जैसे प्रमुख स्थल हैं. जिले में 11 विधानसभा सीटें हैं और अमृतसर लोकसभा सीट पर कांग्रेस, भारतीय जनता पार्टी, शिरोमणि अकाली दल और आम आदमी पार्टी के बीच मुकाबला रहता है. यहां के खानपान, बाजार, शिक्षण संस्थानों और कला, खेल व सिनेमा से जुड़ी हस्तियों ने भी अमृतसर को अलग पहचान दी है.

किसने बसाया था इस शहर को?

अमृतसर शहर को सिखों के चौथे गुरु, गुरु राम दास जी ने बसाया था. यहां मौजूद अमृत सरोवर के नाम पर शहर का नाम अमृतसर पड़ा. यह जिला वाघा बॉर्डर के बेहद करीब है. इस जिले से जुड़ी कुछ और दिलचस्प बातें भी आपको जानना ज़रूरी हो जाता है:

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आबादी और साक्षरता: 2011 की जनगणना के अनुसार, अमृतसर जिले की कुल आबादी लगभग 24,90,656 यानी करीब 25 लाख थी. इसमें शहरी और ग्रामीण आबादी का अच्छा संतुलन है. जिले का औसत जनसंख्या घनत्व लगभग 930 व्यक्ति प्रति वर्ग किलोमीटर है, जिससे यह पंजाब के घनी आबादी वाले जिलों में शामिल है. जिले की कुल साक्षरता दर लगभग 76.27% है. पुरुष और महिला साक्षरता में लगातार सुधार देखा जा रहा है. यहां प्रति हजार पुरुषों पर लगभग 889 महिलाएं हैं. 

विधानसभा सीटें: राजनीतिक और प्रशासनिक नजरिए से अमृतसर जिला अहम है. इसके तहत कुल 11 विधानसभा सीटें आती हैं. इनके नाम अजनाला, राजा सांसी, मजीठा, जंडियाला (एससी), अमृतसर उत्तर, अमृतसर पश्चिम (एससी), अमृतसर सेंट्रल, अमृतसर पूर्व, अमृतसर दक्षिण, बाबा बकाला (एससी) और अटारी (एससी)  हैं.

लोकसभा सीट: अमृतसर लोकसभा क्षेत्र को देश की वीवीआईपी सीटों में गिना जाता है. इसके तहत जिले की ऊपर बताई गई सभी विधानसभा सीटें आती हैं. यहां कांग्रेस, भारतीय जनता पार्टी, शिरोमणि अकाली दल और आम आदमी पार्टी के बीच कड़ा मुकाबला रहता है.

नवजोत सिंह सिद्धू, अरुण जेटली, कैप्टन अमरिंदर सिंह और मौजूदा सांसद गुरजीत सिंह औजला इस सीट से जुड़े प्रमुख नामों में शामिल हैं. गुरजीत सिंह औजला कांग्रेस से हैं. बीजेपी के दिग्गज रहे अरुण जेटली तो 2014 में यहां से लोकसभा का चुनाव हार भी चुके हैं. 

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राजनीतिक पृष्ठभूमि: अमृतसर की राजनीति पंजाब की मुख्यधारा की राजनीति का केंद्र रही है. यहां शिरोमणि अकाली दल की पंथिक राजनीति, कांग्रेस और भाजपा जैसे राष्ट्रीय दलों तथा क्षेत्रीय मुद्दों का मिश्रण दिखाई देता है. ऐतिहासिक रूप से अकाली दल और कांग्रेस का यहां मजबूत जनाधार रहा है. हाल के वर्षों में आम आदमी पार्टी ने भी शहरी और ग्रामीण इलाकों में अपनी पकड़ मजबूत की है.

क्यूंकि अमृतसर बॉर्डर से जुड़ा हुआ जिला है, इसलिए राष्ट्रीय सुरक्षा, भारत-पाकिस्तान सीमा से जुड़े व्यापार के मुद्दे, स्थानीय व्यापार नीतियां और खेती से जुड़े विषय यहां के चुनावों में अहम भूमिका निभाते हैं. ना सिर्फ मौजूदा दौर में बल्कि आज़ादी से पहले भी अमृतसर ही पंजाब प्रांत की पॉलिटिक्स को तय करता था.

अमृतसर की असली पहचान हैं उसकी ये जगह

श्री हरिमंदिर साहिब: श्री हरिमंदिर साहिब, जिसे स्वर्ण मंदिर भी कहा जाता है, सिखों का सर्वोच्च आध्यात्मिक स्थल है. इसकी वास्तुकला, सोने की परत और शांति देश-विदेश के पर्यटकों को आकर्षित करती है. यहां हर दिन लाखों श्रद्धालु लंगर छकते हैं.

जलियांवाला बाग: यह स्थान 13 अप्रैल 1919 को हुए नरसंहार का गवाह है. यहां जनरल डायर की गोलियों से सैकड़ों बेगुनाह भारतीय शहीद हुए थे. बाग की दीवारों पर आज भी गोलियों के निशान मौजूद हैं.

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वाघा बॉर्डर: अमृतसर शहर से लगभग 30 किमी दूर भारत-पाकिस्तान सीमा पर वाघा बॉर्डर मौजूद है. यहां हर शाम दोनों देशों के सुरक्षा बलों, बीएसएफ और पाकिस्तानी रेंजर्स, की ओर से बीटिंग रिट्रीट समारोह आयोजित किया जाता है. इसे देखने हजारों सैलानी आते हैं.

दुर्ग्याणा मंदिर: देवी दुर्गा को समर्पित यह मंदिर वास्तुकला में स्वर्ण मंदिर जैसा दिखाई देता है. इसे सिल्वर टेंपल भी कहा जाता है.

प्रमुख शिक्षण संस्थान: अमृतसर में गुरु नानक देव विश्वविद्यालय, आईआईएम अमृतसर और श्री गुरु राम दास इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज एंड रिसर्च जैसे उच्च शिक्षा संस्थान स्थित हैं.

अमृतसर का खानपान:  अमृतसर अपने पंजाबी खाने के लिए भी मशहूर है. यहां का अमृतसरी कुलचा मक्खन और छोले के साथ परोसा जाता है. मक्खन-लस्सी, मक्की की रोटी और सरसों का साग तथा अमृतसरी मच्छी भी दुनिया भर में प्रसिद्ध हैं. यहां का स्ट्रीट फूड अपनी भरपूर और पारंपरिक रेसिपी के लिए जाना जाता है.

संस्कृति: भांगड़ा और गिद्दा यहां के प्रमुख लोक नृत्य हैं और पंजाबी संस्कृति का अहम हिस्सा हैं. बैसाखी और गुरु पर्व अमृतसर में भव्य तरीके से मनाए जाते हैं.

पर्यटन और बाजार: पर्यटन अमृतसर की अर्थव्यवस्था की रीढ़ है. हर साल करोड़ों देशी और विदेशी पर्यटक स्वर्ण मंदिर, जलियांवाला बाग, गोबिंदगढ़ किला और पार्टीशन म्यूजियम, यानी विभाजन संग्रहालय, देखने आते हैं. कतरा जालियांवाला और हॉल बाजार पंजाबी जूती, फुलकारी सूट और पापड़-बड़ियों की खरीदारी के लिए पर्यटकों के बीच लोकप्रिय हैं.

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प्रमुख हस्तियां: अमृतसर ने कला, साहित्य, खेल और राजनीति के क्षेत्र में देश को कई बड़े नाम दिए हैं. हिंदी सिनेमा के पहले सुपरस्टार कहे जाने वाले राजेश खन्ना का जन्म इसी शहर में हुआ था. कॉमेडी किंग और अभिनेता कपिल शर्मा भी अमृतसर से हैं. पहलवान और अभिनेता दारा सिंह का संबंध भी इसी क्षेत्र से रहा है. अक्षय कुमार, प्रेम चोपड़ा और गुरदास मान की जड़ें या शुरुआती जीवन अमृतसर से जुड़ा रहा है. भारतीय हॉकी और क्रिकेट के कई नामचीन खिलाड़ी भी इस क्षेत्र से निकले हैं.

इस तरह अमृतसर की पहचान उसके धार्मिक और ऐतिहासिक स्थलों के साथ राजनीति, पर्यटन, शिक्षा, खानपान और पंजाबी संस्कृति से जुड़ी है. 24,90,656 की आबादी वाले इस जिले की 11 विधानसभा सीटें और अमृतसर लोकसभा क्षेत्र इसकी राजनीतिक अहमियत को दिखाते हैं. 

 

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