scorecardresearch
 

सपा की 4 डिमांड, सीट बंटवारे पर अखिलेश का कड़ा रुख, कांग्रेस के सामने 'जीत' और 'मजबूत दावेदार' की शर्त

उत्तर प्रदेश में सपा और कांग्रेस गठबंधन के बीच सीट शेयरिंग को लेकर पेच फंसा हुआ है. ऐसे में दिल्ली में होने वाली 'इंडिया ब्लॉक' की बैठक में सपा प्रत्याशियों की जीत की संभावना के आधार पर चार शर्तें रख सकती है. देखते हैं कि सपा और कांग्रेस में कैसे गठबंधन की गांठ सुलझती है.

Advertisement
X
इंडिया गठबंधन की बैठक में क्या तय होगी सीट शेयरिंग (Photo-X)
इंडिया गठबंधन की बैठक में क्या तय होगी सीट शेयरिंग (Photo-X)

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में सपा और कांग्रेस का गठबंधन तय माना जा रहा है, लेकिन सीट शेयरिंग का फॉर्मूला अभी तक पूरी तरह हल नहीं हो पाया है. सपा और कांग्रेस नेताओं के बीच जारी बयानबाजी के बीच नई दिल्ली में 'इंडिया गठबंधन' की बैठक बुलाई गई है. माना जा रहा है कि इस दौरान सपा-कांग्रेस के बीच सीट बंटवारे पर विस्तार से चर्चा हो सकती है.

सूत्रों के मुताबिक, समाजवादी पार्टी ने गठबंधन की बैठक में सीट बंटवारे को लेकर अपना रुख मजबूती से रखने का प्लान बनाया है. बैठक में सपा, कांग्रेस से संभावित उम्मीदवारों के नामों के साथ-साथ पसंदीदा सीटों की सूची मांग सकती है.

बता दें कि अखिलेश यादव और राहुल गांधी के बीच पहले भी उच्च स्तरीय बैठकें हो चुकी हैं. आगामी बैठक में सपा प्रमुख अखिलेश यादव स्वयं मौजूद न रहकर पार्टी के वरिष्ठ नेताओं को भेज सकते हैं. इस दौरान सपा सीट शेयरिंग को लेकर कांग्रेस के सामने चार प्रमुख मांगें रख सकती है.

कांग्रेस के सामने सपा की चार अहम शर्तें

सपा प्रमुख अखिलेश यादव सीट शेयरिंग पर लगातार एक ही बात कहते आ रहे हैं कि गठबंधन में सीटों की संख्या नहीं, बल्कि जीत सबसे अहम होगी. जो प्रत्याशी जीत दर्ज कर सकता है, उसे ही सीट मिलनी चाहिए. 2024 के लोकसभा चुनाव की तर्ज पर ही 2027 के चुनाव के लिए भी सपा ने अपनी शर्तें रखी हैं.

Advertisement
  1. मजबूत प्रत्याशी का नाम: कांग्रेस को यूपी की जिन विधानसभा सीटों पर चुनाव लड़ना है, उन पर अपने संभावित उम्मीदवारों के नाम स्पष्ट करने होंगे.

  2. सीटों के नाम: सपा का साफ कहना है कि कांग्रेस जिन विशिष्ट सीटों पर चुनाव लड़ना चाहती है, उनकी सूची दे.

  3. क्षेत्रीय जनाधार: कांग्रेस जिन सीटों पर दावेदारी कर रही है, वहां उसका जनाधार और राजनीतिक आधार क्या है, यह स्पष्ट करना होगा.

  4. जीत की संभावना: सपा की मांग है कि कांग्रेस उम्मीदवार की जीत की कितनी संभावना है, इसका आकलन किया जाए. अखिलेश यादव का मानना है कि प्रत्याशी के चयन से ही चुनावी नतीजे तय होते हैं.

इंडिया ब्लॉक की बैठक में सपा की रणनीति

बैठक में सपा सीटों की दावेदारी के साथ कांग्रेस के संभावित उम्मीदवारों की जमीनी पकड़ का मुद्दा उठाएगी. सपा का मुख्य फोकस सीटों की संख्या के बजाय प्रत्याशी की जीतने की क्षमता पर रहेगा.

सपा का मानना है कि सिर्फ कागजी दावों या बयानबाजी के आधार पर सीटों की मांग करना गठबंधन के हित में नहीं है. सपा की ओर से यह बात प्रमुखता से रखी जाएगी कि गठबंधन का मुख्य लक्ष्य हर हाल में चुनाव जीतना है.

2027 चुनाव जीत के समीकरणों पर मंथन

Advertisement

यूपी विधानसभा चुनाव में सीट शेयरिंग के दौरान उम्मीदवारों के क्षेत्रीय समीकरण और जीत की क्षमता को ही मुख्य आधार बनाया जाएगा. अखिलेश यादव का पूरा ध्यान 2027 के चुनाव पर है, क्योंकि यह चुनाव पार्टी के राजनीतिक वजूद के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण है. इसीलिए सपा नेतृत्व किसी भी तरह की ढील नहीं देना चाहता है.

---- समाप्त ----
Live TV

Advertisement
Latest News in Hindi »
Advertisement