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राहा, असम के नगांव जिले में स्थित एक छोटा सा कस्बा है और यह असम के पहले मुख्यमंत्री, गोपीनाथ बोरदोलोई के जन्मस्थान के रूप में प्रसिद्ध है. वे एक महान और अत्यंत सम्मानित नेता थे. उनका पुश्तैनी घर अब एक संग्रहालय के रूप में काम करता है. 1962 में स्थापित, राहा एक अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित निर्वाचन क्षेत्र है. यह नगांव लोकसभा सीट के आठ विधानसभा क्षेत्रों में से एक है.
अपनी स्थापना के बाद से, राहा में 13 विधानसभा चुनाव हो चुके हैं. शुरुआती दशकों में यह कांग्रेस का गढ़ था, लेकिन हाल के वर्षों में, यहां विभिन्न पार्टियों ने जीत दर्ज करके इस स्थिति को बदल दिया है. कांग्रेस पार्टी ने राहा सीट सात बार जीती है, जिसके बाद 1990 के दशक में AGP ने लगातार दो बार जीत हासिल की. जनता पार्टी, एक निर्दलीय उम्मीदवार, असम यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (जिसका नाम अब बदलकर ऑल इंडिया यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट हो गया है) और BJP ने इस सीट पर एक-एक बार जीत दर्ज की है. गौरतलब है कि 1996 के बाद से, कोई भी पार्टी यहाँ लगातार दो बार जीत हासिल नहीं कर पाई है.
कांग्रेस पार्टी के पीयूष हज़ारिका ने 2011 में यह सीट जीती थी. उन्होंने AIUDF के मौजूदा विधायक गुनेश्वर दास को 17,983 वोटों से हराया था. 2011 में तीसरे स्थान पर रहने के बाद, BJP ने अपने प्रतिद्वंद्वियों को पीछे छोड़ते हुए 2016 में राहा सीट जीत ली. इस चुनाव में BJP के उम्मीदवार दिंबेश्वर दास ने कांग्रेस के शशि कांत दास को 33,074 वोटों से हराया था. गठबंधन की मजबूरियों के चलते BJP ने 2021 में इस सीट पर चुनाव नहीं लड़ा, और यह सीट उसके छोटे सहयोगी दल AGP के खाते में चली गई. शशि कांत दास ने इस अवसर का लाभ उठाते हुए 2021 में कांग्रेस पार्टी के लिए यह सीट जीत ली. उन्होंने AGP के उम्मीदवार बिष्णु दास को 13,058 वोटों से हराया था.
विधानसभा चुनावों में अपने औसत प्रदर्शन के विपरीत, BJP ने 2009 से शुरू हुए लोकसभा चुनावों के दौरान राहा क्षेत्र में अपनी मजबूत पकड़ साबित की. उस समय उसने कांग्रेस पार्टी पर 3,464 वोटों की बढ़त हासिल की थी. 2014 में AIUDF के मुकाबले इसकी बढ़त बढ़कर 18,739 वोटों की हो गई. 2019 में कांग्रेस पार्टी ने BJP पर बढ़त बना ली, हालांकि यह बढ़त 1,640 वोटों के छोटे अंतर से ही थी. 2024 में BJP ने कांग्रेस से यह बढ़त वापस छीन ली. इस बार BJP ने 42,780 वोटों के अंतर से जीत हासिल की, जिसमें BJP को 104,534 वोट मिले, जबकि कांग्रेस को 61,754 वोट मिले. AIUDF 17,021 वोटों के साथ तीसरे स्थान पर रही. राहा सीट की 2026 के विधानसभा चुनावों के लिए अंतिम वोटर लिस्ट में 244,469 योग्य वोटर थे. SIR 2025 के बाद, 2024 के 238,081 वोटरों की तुलना में इसमें 6,388 वोटरों की बढ़ोतरी हुई. 2023 में हुए परिसीमन के दौरान, 2021 के 220,889 वोटरों में 17,192 वोटरों का और इजाफा हुआ. इससे पहले, 2019 में यह संख्या 206,171, 2016 में 188,650, 2014 में 174,660 और 2011 में 171,091 थी. राहा में वोटरों की भागीदारी हमेशा मजबूत रही है- 2024 में 79.47%, 2021 में 81.63%, 2019 में 83.69%, 2016 में 85.54%, 2014 में 80.05% और 2011 में 75.77%.
उपलब्ध डेटा के आधार पर जनसांख्यिकी (जो ज्यादातर 2011 की जनगणना के आंकड़ों और इलाके व परिसीमन में हुए बदलावों पर आधारित है) से पता चलता है कि हालांकि राहा एक अनुसूचित जाति (SC) के लिए आरक्षित सीट है, फिर भी यहां मुसलमानों की आबादी (लगभग 38.40%; परिसीमन से पहले के आंकड़ों में इनकी संख्या और भी ज्यादा थी) SC वोटरों से ज्यादा है, जिनकी आबादी 14.55% है. अनुसूचित जनजातियों (ST) की आबादी 12.72% है. परिसीमन के बाद अब इन आंकड़ों में बदलाव आने की उम्मीद है, क्योंकि कई मुस्लिम-बहुल गांवों को हटाकर आस-पास की दूसरी सीटों में शामिल कर दिया गया है, जबकि कुछ ऐसे गांवों को इस सीट में जोड़ा गया है जहां मुसलमानों की आबादी कम है. माना जा रहा है कि इस बदलाव से अब इस सीट पर मुसलमानों की आबादी का अनुपात कम हो जाएगा. यह मुख्य रूप से एक ग्रामीण सीट है, जहां असमिया हिंदू समुदायों के साथ-साथ SC और मुस्लिम समुदायों की भी अच्छी-खासी आबादी रहती है.
राहा सीट मध्य असम के नगांव जिले के कुछ हिस्सों में फैली हुई है. यह सीट कोलंग और कपिली नदियों से घिरी हुई है. ये दोनों नदियां ब्रह्मपुत्र नदी की सहायक नदियां हैं. यहां का इलाका समतल जलोढ़ मैदानों से बना है, जिसमें आर्द्रभूमि और 'बील' (झीलें) भी शामिल हैं. यह धान की खेती, मछली पालन और कृषि के लिए बहुत उपयुक्त है. इस क्षेत्र में मौसमी बाढ़ आने का खतरा बना रहता है. यहां के लोगों की आजीविका मुख्य रूप से कृषि, छोटे-मोटे व्यापार, मछली पालन और इनसे जुड़े अन्य कामों पर निर्भर करती है. यहां की उपजाऊ जलोढ़ मिट्टी और भरपूर बारिश इन गतिविधियों को बनाए रखने में मदद करती है. बुनियादी सुविधाओं में सड़कों का जाल और ग्रामीण सड़कों व सिंचाई व्यवस्था में चल रहे विकास कार्य शामिल हैं.
राहा, जिला मुख्यालय नगांव से लगभग 18-20 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है. इसके आस-पास के अन्य कस्बों में मोरीगांव (लगभग 38 किलोमीटर दूर), कामपुर और होजाई की ओर पड़ने वाले इलाके शामिल हैं. राज्य की राजधानी, दिसपुर, यहां से लगभग 120-130 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है. रेल यात्रा की सुविधा राहा रेलवे स्टेशन पर उपलब्ध है. यह स्टेशन 'नॉर्थईस्ट फ्रंटियर रेलवे' की लुमडिंग-गुवाहाटी रेल लाइन पर पड़ता है, जिससे यहां अच्छी रेल कनेक्टिविटी बनी हुई है. स्थानीय स्तर पर आवागमन मुख्य रूप से सड़क मार्ग से होता है, जिसके लिए बसों, ऑटो-रिक्शा और निजी वाहनों का इस्तेमाल किया जाता है.
राहा और नगांव जिले के इसके आस-पास के इलाकों की एक समृद्ध ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत है, जो ब्रह्मपुत्र घाटी की संस्कृति से गहराई से जुड़ी हुई है. इस क्षेत्र में असमिया परंपराओं, वैष्णव संप्रदाय के प्रभावों और विभिन्न सामुदायिक संस्थाओं का एक अनूठा मेल देखने को मिलता है. यहां के समाज पर हिंदू, मुस्लिम और अनुसूचित जाति (SC) समुदायों के मेल-जोल का गहरा प्रभाव दिखाई देता है.
BJP ने राहा में भले ही सिर्फ एक विधानसभा चुनाव जीता हो, लेकिन इसे एक ऐसी सीट माना जाता है जहां BJP ने अपनी जड़ें बहुत गहरी और तेजी से जमा ली हैं, जो लोकसभा चुनावों में उसके प्रदर्शन से भी साफ दिखता है. गठबंधन के साथियों के बीच शुरुआती खींचतान के बाद, क्योंकि BJP और AGP दोनों ही इस सीट से चुनाव लड़ना चाहते थे, आखिरकार BJP ही राहा विधानसभा सीट से चुनाव लड़ेगी, क्योंकि उसका सांगठनिक आधार ज्यादा मजबूत है.
BJP का उम्मीदवार चुनना भी दिलचस्प है, क्योंकि उसने कांग्रेस के मौजूदा विधायक शशि कांता दास को मैदान में उतारा है. दास BJP के करीब आ गए थे, जिसकी वजह से उन्हें कांग्रेस पार्टी से निलंबित कर दिया गया था. उन्होंने मार्च 2026 में आधिकारिक तौर पर BJP में शामिल हो गए. कांग्रेस पार्टी का उम्मीदवार चुनना भी उतना ही दिलचस्प है. बताया जा रहा है कि पार्टी के एक धड़े को यह फैसला रास नहीं आया है. पार्टी ने अपने सहयोगी दल असम जातीय परिषद (AJP) से आए उत्पल बानिया को टिकट दिया है. बानिया ने 2021 का चुनाव AJP के उम्मीदवार के तौर पर लड़ा था और तीसरे स्थान पर रहे थे, जिससे उनकी जमानत भी जब्त हो गई थी. उनकी उम्मीदवारी को लेकर कांग्रेस के खेमे में काफी हंगामा मचा हुआ है. उन्हें आम आदमी पार्टी के बरुण विकास दास और AIUDF के मुकुट दास से चुनौती मिलेगी.
राहा विधानसभा सीट पर 2026 के चुनाव से यह तय है कि तीन दशक पुराना एक रिकॉर्ड जरूर टूटेगा, क्योंकि 1996 के बाद से कोई भी पार्टी या उम्मीदवार इस सीट पर दोबारा जीत हासिल नहीं कर पाया है. अगर BJP जीतती है, तो शशि कांता दास AGP के गहीन चंद्र दास के बाद इस सीट पर लगातार दूसरी बार जीतने वाले पहले मौजूदा विधायक बन जाएंगे. गहीन चंद्र दास ने 1991 और 1996 में यह सीट जीती थी और राहा के चुनावी इतिहास में ऐसा करने वाले वह एकमात्र नेता हैं. और अगर कांग्रेस पार्टी जीतती है, तो वह AGP के बाद इस सीट पर दोबारा जीत हासिल करने वाली पहली पार्टी बन जाएगी.
जमीनी हकीकत को देखते हुए, उम्मीद है कि BJP अपने प्रतिद्वंद्वियों पर भारी पड़ेगी, जबकि कांग्रेस पार्टी को चुनाव से पहले लगाए जा रहे सभी अनुमानों को गलत साबित करने के लिए अपनी पूरी ताकत झोंकनी पड़ेगी. चाहे जो भी हो, राहा विधानसभा सीट पर यह चुनाव काफी दिलचस्प होने वाला है.
(अजय झा)
Bishnu Das
AGP
Utpal Bania
ASMJTYP
Rubul Das
IND
Nota
NOTA
Guneswar Das
IND
Chitralekha Das
IND
Moni Das
JP
असम में हिमंता बिस्वा सरमा के दूसरे कार्यकाल की शुरुआत कूटनीतिक नजरिए से भी बेहद अहम रही. गुवाहाटी में हुए भव्य शपथ ग्रहण समारोह में भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर की मौजूदगी ने साफ संकेत दिया कि पूर्वोत्तर भारत अब वैश्विक साझेदारियों और व्यापारिक संभावनाओं के नए केंद्र के तौर पर देखा जा रहा है.
असम चुनाव के बाद आई ADR रिपोर्ट ने चौंकाने वाली तस्वीर पेश की है. जहां एक तरफ आपराधिक मामलों वाले विधायकों की संख्या में कमी आई है, वहीं दूसरी तरफ विधायकों की संपत्ति में तेज उछाल दर्ज हुआ है. हिमंत बिस्वा सरमा 35 करोड़ की संपति के साथ तीसरे नंबर पर हैं.
पश्चिम बंगाल में चुनावी जीत के साथ ही, भारतीय जनता पार्टी ने 2024 के लोकसभा चुनाव में मिली अधूरी सफलता का चक्र पूरा कर लिया है. ब्रांड मोदी के जरिए तेजी से रफ्तार भर रही बीजेपी के लिए केरल और तमिलनाडु के नतीजों ने भी रास्ता आसान कर दिया है.
Election Results 2026 Updates: देश के चार राज्यों बंगाल, तमिलनाडु, केरल, असम और केंद्र शासित प्रदेश पुडुचेरी में हुए विधानसभा चुनाव के नतीजे सोमवार को घोषित हो गए. पश्चिम बंगाल और असम के साथ ही पुडुचेरी में बीजेपी एनडीए की जीत हुई है. तमिलनाडु में विजय की टीवीके ने डीएमके को सत्ता से बाहर का रास्ता दिखाया, वहीं केरलम में कांग्रेस ने लेफ्ट गठबंधन को हराकर 10 साल का सत्ता का वनवास खत्म किया.
भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने 90 सीटों पर चुनाव लड़ा और 82 सीटों पर जीत दर्ज की. उसके सहयोगी दलों में बोडोलैंड पीपुल्स फ्रंट (BPF), जिसने 11 सीटों पर चुनाव लड़ा, और असम गण परिषद (AGP), जिसने 26 सीटों पर उम्मीदवार उतारे, दोनों ने 10-10 सीटें जीतीं.
ममता बनर्जी ने कहा कि बीजेपी ने 100 से अधिक सीटों पर लूट की है. बीजेपी ने वोटों की चोरी की है. उन्होंने मेरा घेराव किया. यह बीजेपी की अनैतिक जीत है. मैंने बंगाल चुनाव आयुक्त से शिकायत की है.
Vidhan Sabha Chunav Parinam 2026 Live Updates: पश्चिम बंगाल, असम, तमिलनाडु, केरलम और पुडुचेरी में हुए विधानसभा चुनाव के नतीजे सोमवार को घोषित हो गए. पश्चिम बंगाल में जहां बीजेपी ने टीएमसी को पटखनी दे दी, तो वहीं असम में जीत की हैट्रिक लगाई. तमिलनाडु में अभिनेता से राजनेता बने विजय की पार्टी टीवीके ने डीएमके को सत्ता से उखाड़ फेंका, केरल में कांग्रेस ने 10 साल का सत्ता का वनवास खत्म किया और लेफ्ट को हराकर जीत दर्ज की.
असम विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को बड़ा झटका लगा है. राज्य के तीन पूर्व मुख्यमंत्रियों के बेटे अपनी-अपनी सीट बचाने में असफल रहे और उन्हें बीजेपी उम्मीदवारों के हाथों हार का सामना करना पड़ा. जनता ने वंशवादी राजनीति को साफ नकार दिया है.
हिमंता बिस्वा सरमा ने असम में BJP की प्रचंड जीत के बाद पवन खेड़ा पर तंज कसते हुए कहा कि जनता ने उनका पेड़ा बना दिया. उन्होंने कहा कि कांग्रेस के बयानों से लोग भावनात्मक रूप से आहत हुए और इसका असर नतीजों में दिखा. BJP गठबंधन ने 100 से अधिक सीटें जीतीं, जबकि पार्टी ने अपने दम पर बहुमत हासिल किया.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ऊपरी असम के चाय बागान इलाकों में विशेष जनसंपर्क और योजनाओं का असर चुनाव नतीजों में साफ दिख रहा है. चाय बागान वाले छह विधानसभा सीटों पर बीजेपी ने जीत हासिल कर ली है. पीएम मोदी के सीधे संपर्क और विकास योजनाओं ने कांग्रेस के परंपरागत गढ़ को बीजेपी के मजबूत किले में बदल दिया है.