BJP
AAP
AIUDF
ASMJTYP
IND
Nota
NOTA
बरहमपुर असम के नगांव जिले में स्थित एक ग्राम पंचायत है और 1972 में अपनी स्थापना के बाद से ही यह एक सामान्य (अनारक्षित) विधानसभा क्षेत्र रहा है. यह काजीरंगा लोकसभा सीट के 10 हिस्सों में से एक है. असम के दो बार मुख्यमंत्री रहे प्रफुल्ल कुमार महंता के पसंदीदा क्षेत्र के तौर पर इसे खास पहचान मिली. महंता ने 1991 से 2016 के बीच बरहमपुर से लगातार छह बार जीत हासिल की.
बरहमपुर में अब तक 12 विधानसभा चुनाव हो चुके हैं, जिनमें 9 अप्रैल, 2026 के चुनाव भी शामिल हैं. पिछले 11 चुनावों में, AGP ने छह बार जीत हासिल की और हर बार उसके उम्मीदवार महंता ही थे, जबकि CPI (1972), जनता पार्टी (1978), कांग्रेस पार्टी (1983), एक निर्दलीय उम्मीदवार (1985), और BJP (2021) ने एक-एक बार इस सीट पर कब्जा जमाया.
महंता ने 2011 में लगातार पांचवीं बार जीत हासिल की, जिसमें उन्होंने कांग्रेस पार्टी के सुरेश बोरा को 15,956 वोटों से हराया. बरहमपुर में BJP और AIUDF क्रमशः तीसरे और चौथे स्थान पर रहीं. 2016 में महंता की जीत का अंतर काफी कम हो गया. उन्होंने एक बार फिर कांग्रेस के सुरेश बोरा को हराया तो सही, लेकिन इस बार जीत का अंतर सिर्फ 5,169 वोटों का था. महंता ने 2021 के चुनाव न लड़ने का फैसला किया. इसका आधिकारिक कारण यह बताया गया कि जिस पार्टी की स्थापना उन्होंने 1985 में की थी, उसी के साथ उनके मतभेद चल रहे थे. हालांकि, यह भी कहा गया कि उन्होंने स्वास्थ्य कारणों से चुनाव नहीं लड़ा, क्योंकि वे शारीरिक रूप से चुनाव प्रचार करने की स्थिति में नहीं थे और 2016 के चुनाव में मिली कड़ी टक्कर (जब वे बहुत कम वोटों के अंतर से जीते थे) को देखते हुए वे इस बार हार का सामना नहीं करना चाहते थे. AGP के साथ हुए सीट-बंटवारे के समझौते के तहत, 2021 में बरहमपुर की सीट BJP के खाते में चली गई. 2021 में कड़ी टक्कर होने का महंता का अंदेशा सही साबित हुआ, क्योंकि BJP के उम्मीदवार जीतू गोस्वामी ने कांग्रेस के सुरेश बोरा को महज 751 वोटों के अंतर से हरा दिया. विधानसभा चुनावों की तुलना में, जहां BJP का प्रदर्शन पहले कमजोर रहा था और 2021 में उसने AGP के सहयोगी के तौर पर जीत हासिल की थी. लोकसभा चुनावों में बरहमपुर विधानसभा क्षेत्र में BJP का रिकॉर्ड बेदाग रहा है, क्योंकि 2009 से हुए चारों संसदीय चुनावों में वह बढ़त बनाए हुए है. 2009 में उसने कांग्रेस पर 23,253 वोटों की बढ़त बनाई, 2014 में 28,524 वोटों की, 2019 में 29,363 वोटों की और 2024 में 33,939 वोटों की. इस चुनाव में BJP को 102,625 वोट मिले, जबकि कांग्रेस पार्टी को 68,686 वोट प्राप्त हुए.
बरहमपुर सीट के लिए 2026 के विधानसभा चुनावों की अंतिम मतदाता सूची में 232,576 योग्य मतदाता थे. SIR 2025 के बाद, 2024 के 228,876 मतदाताओं के आधार में 3,700 मतदाताओं की मामूली वृद्धि देखी गई. हालांकि, 2023 के परिसीमन अभ्यास का इस निर्वाचन क्षेत्र पर कहीं अधिक बड़ा प्रभाव पड़ा, क्योंकि इसके मतदाताओं की संख्या 2021 के 179,107 मतदाताओं से बढ़कर 49,769 की भारी वृद्धि के साथ बढ़ गई. इससे पहले, यह संख्या 2019 में 173,847, 2016 में 161,592, 2014 में 152,520 और 2011 में 149,133 थी. मतदाताओं की भागीदारी का प्रतिशत काफी ऊंचा रहा है- 2011 में 72.37 प्रतिशत, 2014 में 77.01 प्रतिशत, 2016 में 83.87 प्रतिशत, 2019 में 79.75 प्रतिशत, 2021 में 80.05 प्रतिशत और 2024 में 78.31 प्रतिशत. 2026 के चुनावों में मतदाताओं की भारी भागीदारी देखी गई, 9 अप्रैल को शाम 5 बजे तक मतदान का प्रतिशत 82.85 था, हालांकि अंतिम आंकड़ा बदल सकता है और इसमें और वृद्धि हो सकती है.
उपलब्ध आंकड़ों के आधार पर जनसांख्यिकी (जो मुख्य रूप से 2011 की जनगणना के अनुपातों पर आधारित है और जिसमें क्षेत्र तथा परिसीमन परिवर्तनों के अनुसार समायोजन किया गया है) यह दर्शाती है कि परिसीमन-पूर्व काल में, बरहमपुर निर्वाचन क्षेत्र में 27.20 प्रतिशत मुस्लिम मतदाता थे, जबकि अनुसूचित जातियों का प्रतिशत 7.79 और अनुसूचित जनजातियों का प्रतिशत 6.07 था. ये आंकड़े निश्चित रूप से बदल गए होंगे, क्योंकि परिसीमन और SIR के संयुक्त प्रभाव के परिणामस्वरूप, 2021 के बाद से बरहमपुर की मतदाता सूची में 53,469 नए मतदाता जोड़े गए हैं. परिसीमन और SIR के बाद बरहमपुर में मुस्लिम वोटों का हिस्सा कम हो गया है. इस निर्वाचन क्षेत्र में नए इलाके और मतदाता शामिल हुए हैं, जिनमें से ज्यादातर गैर-मुस्लिम हैं, जिससे संतुलन बदल गया है. मुस्लिम मतदाताओं का प्रतिशत हिस्सा घटकर 24-25 प्रतिशत रह गया है, जबकि SC मतदाताओं की संख्या बढ़ी है और अब वे 8-9 प्रतिशत के दायरे में हैं. ST मतदाताओं का हिस्सा भी थोड़ा बढ़ा है, और अब यह लगभग 6.5-7 प्रतिशत है. बरहमपुर मुख्य रूप से एक ग्रामीण निर्वाचन क्षेत्र बना हुआ है. परिसीमन से पहले के चरण में इसके लगभग 86.87 प्रतिशत मतदाता ग्रामीण इलाकों में रहते थे, जिसमें ज्यादा बदलाव होने की उम्मीद नहीं है, जबकि इसके 13.13 प्रतिशत मतदाता शहरी के रूप में सूचीबद्ध थे.
बरहमपुर निर्वाचन क्षेत्र मध्य असम के नगांव जिले के कुछ हिस्सों को कवर करता है, जहां ब्रह्मपुत्र नदी और उसकी सहायक नदियों के किनारे समतल जलोढ़ मैदान हैं, जिनके बीच-बीच में आर्द्रभूमि, बील (झीलें) और हल्की ऊंची-नीची जमीनें हैं. यह इलाका धान की खेती, सरसों, जूट और कुछ बागवानी के लिए उपयुक्त है, लेकिन यहां मौसमी बाढ़ का खतरा बना रहता है. लोगों की आजीविका मुख्य रूप से कृषि, छोटे-मोटे व्यापार और उससे जुड़ी गतिविधियों पर निर्भर है. बुनियादी ढांचे में सड़क संपर्क और ग्रामीण सड़कों तथा सिंचाई के क्षेत्र में चल रहे विकास कार्य शामिल हैं.
बरहमपुर जिला मुख्यालय, नगांव से लगभग 25-30 किमी दूर स्थित है। आस-पास के अन्य कस्बों में कामपुर और होजाई की ओर के इलाके शामिल हैं. बरहमपुर का सबसे नजदीकी रेलवे स्टेशन पुरानिगुदाम है, जो लगभग 6.0 किमी दूर स्थित है. नगांव रेलवे स्टेशन लगभग 8.5 किमी दूर है. राज्य की राजधानी, दिसपुर, लगभग 120-130 किमी दूर स्थित है. स्थानीय कनेक्टिविटी मुख्य रूप से सड़क परिवहन के जरिए होती है, जिसमें बसें, ऑटो और निजी वाहन शामिल हैं.
बरहमपुर और नगांव के आस-पास के इलाकों की एक समृद्ध ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत है, जो ब्रह्मपुत्र घाटी से जुड़ी है. यहां असमिया परंपराओं और सामुदायिक संस्थाओं का मेल देखने को मिलता है. इस क्षेत्र में स्थानीय बाजार, वैष्णव प्रभाव और हिंदू, मुस्लिम तथा अन्य समुदायों का मिश्रण मौजूद है.
अतीत में बरहमपुर से मिले संकेत कुछ विरोधाभासी रहे हैं, क्योंकि BJP लोकसभा चुनावों में मिलने वाले समर्थन को विधानसभा चुनावों में भुनाने में सफल नहीं हो पाई है. 2021 में मिली उसकी मामूली जीत में यह बात साफ झलकती है. BJP ने मौजूदा विधायक जीतू गोस्वामी पर ही अपना भरोसा जताया है, जिनका मुकाबला पांच अन्य उम्मीदवारों से है. कांग्रेस पार्टी ने बरहमपुर सीट अपने सहयोगी दल 'असम जातीय परिषद' (AJP) के लिए छोड़ दी है. AJP के उम्मीदवार राजन गोहेन ही उनके मुख्य प्रतिद्वंद्वी हैं. चुनावी मैदान में अन्य उम्मीदवारों में AIUDF के मुजीबुर रहमान, आम आदमी पार्टी की रानुमाई टेरोनपी और निर्दलीय उम्मीदवार नजरुल इस्लाम शामिल हैं. उम्मीद है कि दो मुस्लिम उम्मीदवार, विशेष रूप से AIUDF के उम्मीदवार मुस्लिम वोटों में सेंध लगा सकते हैं. ये वोट आमतौर पर कांग्रेस के नेतृत्व वाले विपक्षी गठबंधन के AJP उम्मीदवार को मिलते. बरहमपुर सीट के लिए यह मुकाबला काफी दिलचस्प और पेचीदा लग रहा है. इसका नतीजा जानने के लिए हमें 4 मई तक इंतजार करना होगा, जब वोटों की गिनती होगी.
(अजय झा)
Suresh Borah
INC
Dipika Saikia Keot
ASMJTYP
Nota
NOTA
Sonaram Bora
SUCI
Samsheddin Ahmed
IND
Parbin Choudhury
AJM
Assembly Election Exit Poll 2026: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के दूसरे और अंतिम चरण का मतदान 29 अप्रैल को खत्म होने के बाद सभी की नजरें एग्जिट पोल पर टिक रहेंगी. पांचों चुनावी राज्यों- पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, केरल, असम और पुडुचेरी में रिकॉर्ड मतदान ने मुकाबले को और रोचक बना दिया है, जिस कारण लोग एग्जिट पोल्स का उत्सुकता के साथ इंतजार कर रहे हैं.
असम चुनाव के बीच सियासी पारा और भी गरमा गया है. सवाल यह है कि इस बार असम में किसकी सरकार बनेगी? मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा या कांग्रेस नेता गौरव गोगोई?
Assembly Election Updates: असम, केरल और पुडुचेरी में चुनाव के बाद अब पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु में विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक सरगर्मी तेज हैं. पश्चिम बंगाल की 294 सदस्यीय विधानसभा के लिए 23 अप्रैल और 29 अप्रैल को वोट डाले जाएंगे. जबकि तमिलनाडु की सभी 234 विधानसभा सीटों पर 23 अप्रैल को वोटिंग होगी. बंगाल में चुनावी पारा चढ़ने के बीच ममता बनर्जी की अगुवाई वाली तृणमूल कांग्रेस (TMC) को झटका लगा है. बंगाल के अल्पसंख्यक बहुल मुर्शिदाबाद जिले की जलांगी विधानसभा सीट से TMC विधायक अब्दुर रज्जाक ने गुरुवार को पार्टी छोड़ने का ऐलान किया है.
देश के चार राज्य और एक केंद्र शासित प्रदेश में हो रहे चुनावों में हर मुख्यमंत्री सत्ता में वापसी चाहता है. चुनौती तो केरलम में पी. विजयन के सामने भी है, लेकिन ममता बनर्जी की चुनौती सबसे बड़ी नजर आ रही है - हिमंता बिस्वा सरमा हों या एमके स्टालिन वे दोनों भी मुख्यमंत्री आगे भी बने रहना चाहते हैं.
असम के करीमगंज (नॉर्थ) विधानसभा क्षेत्र के एक बूथ पर झड़प के बाद चुनाव आयोग ने शनिवार को दोबारा मतदान कराने का आदेश दिया है. यह फैसला चुनावी गड़बड़ी के चलते लिया गया है. हिंसा के दौरान दर्जन भर से ज्यादा लोग घायल हो गए थे.
असम के सियासी इतिहास में पहली बार रिकॉर्ड वोटिंग हुई है. असम में इस बार 85.89 फीसदी मतदान हुआ है, जो पिछले चुनाव से करीब साढ़े तीन फीसदी ज्यादा है. असम में सत्ता का खेल सात से 8 फीसदी वोट बढ़ने या फिर घटने पर होता रहा है. इस बार का वोटिंग पैटर्न क्या संकेत दे रहा है?
असम, केरलम और पुडुचेरी में विधानसभा चुनाव के लिए मतदान समाप्त हो गया. पुडुचेरी में 89.87 फीसदी, असम में 85.91 फीसदी और केरलम में 78.27 फीसदी मतदान दर्ज किया गया. तीनों जगह बंपर वोटिंग हुई.
दक्षिण से लेकर पूरब तक 3 राज्यों में आज जनादेश का दिन है...और तीनों राज्यों में जबरदस्त वोटिंग हो रही है..असम में दोपहर 3 बजे तक 75.91 फीसदी मतदान हो चुका है..आप समझ सकते हैं कि यही ट्रेंड रहा तो वहां पोलिंग कितनी फीसदी तक हो सकती है..पुडुचेरी में भी 72.40 फीसदी मतदान दोपहर 3 बजे तक हुआ..केरल में दोपहर 3 बजे तक 62.71 फीसदी वोटिंग हुई है.
भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन ने अपने ताजा इंटरव्यू में चुनावी राज्यों बंगाल, असम, केरलम, तमिलनाडु और वहां के मुद्दों पर खुलकर चर्चा की. नबीन ने कहा कि बीजेपी शुरू से एक पॉलिसी पर काम करती आई है कि हम ‘राष्ट्र प्रथम’ की बात करते हैं. बीजेपी अध्यक्ष ने साथ ही कहा कि हम सांस्कृतिक विरासत को बढ़ाने वाले लोग हैं. देखें बातचीत.
Assam Assembly Election Voting: असम में आज विधानसभा चुनाव के लिए वोटिंग हो रही है. इस बीच मुख्यमंत्री और जालुकबारी से उम्मीदवार हिमंत बिस्वा सरमा ने गुवाहाटी के मां कामाख्या मंदिर में पूजा-अर्चना की. इस दौरान उनकी पत्नी भी उनके साथ मौजूद रहीं और दोनों ने मंदिर में विधिवत पूजा की.