BJP
ASMJTYP
AIUDF
IND
AAP
नोटा
NOTA
Barhampur Vidhan Sabha Chunav Result: बरहमपुर सीट पर Jitu Goswami ने लहराया जीत का परचम
Barhampur Election Results 2026 Live: बरहमपुर विधानसभा सीट पर BJP ने फहराया जीत का परचम, जानें विजयी उम्मीदवार Jitu Goswami को मिली कितनी बड़ी जीत
Barhampur Vidhan Sabha Result 2026 Live: बरहमपुर सीट पर सबसे आगे निकले BJP उम्मीदवार Jitu Goswami
Assam Election Results 2026 Live: असम चुनाव में राजनीतिक गठबंधनों का प्रदर्शन कैसा है?
Assam Assembly Election Results 2026 Live: दिग्गज उम्मीदवारों में कौन खुश होगा, किसे लगेगा झटका? जानें रुझानों में कौन आगे और कौन पीछे?
Barhampur Vidhan Sabha Chunav Result Live: असम के CENTRAL ASSAM क्षेत्र में पार्टियों/गठबंधनों का प्रदर्शन कैसा है?
बरहमपुर असम के नगांव जिले में स्थित एक ग्राम पंचायत है और 1972 में अपनी स्थापना के बाद से ही यह एक सामान्य (अनारक्षित) विधानसभा क्षेत्र रहा है. यह काजीरंगा लोकसभा सीट के 10 हिस्सों में से एक है. असम के दो बार मुख्यमंत्री रहे प्रफुल्ल कुमार महंता के पसंदीदा क्षेत्र के तौर पर इसे खास पहचान मिली. महंता ने 1991 से 2016 के बीच बरहमपुर से लगातार छह बार जीत हासिल की.
बरहमपुर में अब तक 12 विधानसभा चुनाव हो चुके हैं, जिनमें 9 अप्रैल, 2026 के चुनाव भी शामिल हैं. पिछले 11 चुनावों में, AGP ने छह बार जीत हासिल की और हर बार उसके उम्मीदवार महंता ही थे, जबकि CPI (1972), जनता पार्टी (1978), कांग्रेस पार्टी (1983), एक निर्दलीय उम्मीदवार (1985), और BJP (2021) ने एक-एक बार इस सीट पर कब्जा जमाया.
महंता ने 2011 में लगातार पांचवीं बार जीत हासिल की, जिसमें उन्होंने कांग्रेस पार्टी के सुरेश बोरा को 15,956 वोटों से हराया. बरहमपुर में BJP और AIUDF क्रमशः तीसरे और चौथे स्थान पर रहीं. 2016 में महंता की जीत का अंतर काफी कम हो गया. उन्होंने एक बार फिर कांग्रेस के सुरेश बोरा को हराया तो सही, लेकिन इस बार जीत का अंतर सिर्फ 5,169 वोटों का था. महंता ने 2021 के चुनाव न लड़ने का फैसला किया. इसका आधिकारिक कारण यह बताया गया कि जिस पार्टी की स्थापना उन्होंने 1985 में की थी, उसी के साथ उनके मतभेद चल रहे थे. हालांकि, यह भी कहा गया कि उन्होंने स्वास्थ्य कारणों से चुनाव नहीं लड़ा, क्योंकि वे शारीरिक रूप से चुनाव प्रचार करने की स्थिति में नहीं थे और 2016 के चुनाव में मिली कड़ी टक्कर (जब वे बहुत कम वोटों के अंतर से जीते थे) को देखते हुए वे इस बार हार का सामना नहीं करना चाहते थे. AGP के साथ हुए सीट-बंटवारे के समझौते के तहत, 2021 में बरहमपुर की सीट BJP के खाते में चली गई. 2021 में कड़ी टक्कर होने का महंता का अंदेशा सही साबित हुआ, क्योंकि BJP के उम्मीदवार जीतू गोस्वामी ने कांग्रेस के सुरेश बोरा को महज 751 वोटों के अंतर से हरा दिया. विधानसभा चुनावों की तुलना में, जहां BJP का प्रदर्शन पहले कमजोर रहा था और 2021 में उसने AGP के सहयोगी के तौर पर जीत हासिल की थी. लोकसभा चुनावों में बरहमपुर विधानसभा क्षेत्र में BJP का रिकॉर्ड बेदाग रहा है, क्योंकि 2009 से हुए चारों संसदीय चुनावों में वह बढ़त बनाए हुए है. 2009 में उसने कांग्रेस पर 23,253 वोटों की बढ़त बनाई, 2014 में 28,524 वोटों की, 2019 में 29,363 वोटों की और 2024 में 33,939 वोटों की. इस चुनाव में BJP को 102,625 वोट मिले, जबकि कांग्रेस पार्टी को 68,686 वोट प्राप्त हुए.
बरहमपुर सीट के लिए 2026 के विधानसभा चुनावों की अंतिम मतदाता सूची में 232,576 योग्य मतदाता थे. SIR 2025 के बाद, 2024 के 228,876 मतदाताओं के आधार में 3,700 मतदाताओं की मामूली वृद्धि देखी गई. हालांकि, 2023 के परिसीमन अभ्यास का इस निर्वाचन क्षेत्र पर कहीं अधिक बड़ा प्रभाव पड़ा, क्योंकि इसके मतदाताओं की संख्या 2021 के 179,107 मतदाताओं से बढ़कर 49,769 की भारी वृद्धि के साथ बढ़ गई. इससे पहले, यह संख्या 2019 में 173,847, 2016 में 161,592, 2014 में 152,520 और 2011 में 149,133 थी. मतदाताओं की भागीदारी का प्रतिशत काफी ऊंचा रहा है- 2011 में 72.37 प्रतिशत, 2014 में 77.01 प्रतिशत, 2016 में 83.87 प्रतिशत, 2019 में 79.75 प्रतिशत, 2021 में 80.05 प्रतिशत और 2024 में 78.31 प्रतिशत. 2026 के चुनावों में मतदाताओं की भारी भागीदारी देखी गई, 9 अप्रैल को शाम 5 बजे तक मतदान का प्रतिशत 82.85 था, हालांकि अंतिम आंकड़ा बदल सकता है और इसमें और वृद्धि हो सकती है.
उपलब्ध आंकड़ों के आधार पर जनसांख्यिकी (जो मुख्य रूप से 2011 की जनगणना के अनुपातों पर आधारित है और जिसमें क्षेत्र तथा परिसीमन परिवर्तनों के अनुसार समायोजन किया गया है) यह दर्शाती है कि परिसीमन-पूर्व काल में, बरहमपुर निर्वाचन क्षेत्र में 27.20 प्रतिशत मुस्लिम मतदाता थे, जबकि अनुसूचित जातियों का प्रतिशत 7.79 और अनुसूचित जनजातियों का प्रतिशत 6.07 था. ये आंकड़े निश्चित रूप से बदल गए होंगे, क्योंकि परिसीमन और SIR के संयुक्त प्रभाव के परिणामस्वरूप, 2021 के बाद से बरहमपुर की मतदाता सूची में 53,469 नए मतदाता जोड़े गए हैं. परिसीमन और SIR के बाद बरहमपुर में मुस्लिम वोटों का हिस्सा कम हो गया है. इस निर्वाचन क्षेत्र में नए इलाके और मतदाता शामिल हुए हैं, जिनमें से ज्यादातर गैर-मुस्लिम हैं, जिससे संतुलन बदल गया है. मुस्लिम मतदाताओं का प्रतिशत हिस्सा घटकर 24-25 प्रतिशत रह गया है, जबकि SC मतदाताओं की संख्या बढ़ी है और अब वे 8-9 प्रतिशत के दायरे में हैं. ST मतदाताओं का हिस्सा भी थोड़ा बढ़ा है, और अब यह लगभग 6.5-7 प्रतिशत है. बरहमपुर मुख्य रूप से एक ग्रामीण निर्वाचन क्षेत्र बना हुआ है. परिसीमन से पहले के चरण में इसके लगभग 86.87 प्रतिशत मतदाता ग्रामीण इलाकों में रहते थे, जिसमें ज्यादा बदलाव होने की उम्मीद नहीं है, जबकि इसके 13.13 प्रतिशत मतदाता शहरी के रूप में सूचीबद्ध थे.
बरहमपुर निर्वाचन क्षेत्र मध्य असम के नगांव जिले के कुछ हिस्सों को कवर करता है, जहां ब्रह्मपुत्र नदी और उसकी सहायक नदियों के किनारे समतल जलोढ़ मैदान हैं, जिनके बीच-बीच में आर्द्रभूमि, बील (झीलें) और हल्की ऊंची-नीची जमीनें हैं. यह इलाका धान की खेती, सरसों, जूट और कुछ बागवानी के लिए उपयुक्त है, लेकिन यहां मौसमी बाढ़ का खतरा बना रहता है. लोगों की आजीविका मुख्य रूप से कृषि, छोटे-मोटे व्यापार और उससे जुड़ी गतिविधियों पर निर्भर है. बुनियादी ढांचे में सड़क संपर्क और ग्रामीण सड़कों तथा सिंचाई के क्षेत्र में चल रहे विकास कार्य शामिल हैं.
बरहमपुर जिला मुख्यालय, नगांव से लगभग 25-30 किमी दूर स्थित है। आस-पास के अन्य कस्बों में कामपुर और होजाई की ओर के इलाके शामिल हैं. बरहमपुर का सबसे नजदीकी रेलवे स्टेशन पुरानिगुदाम है, जो लगभग 6.0 किमी दूर स्थित है. नगांव रेलवे स्टेशन लगभग 8.5 किमी दूर है. राज्य की राजधानी, दिसपुर, लगभग 120-130 किमी दूर स्थित है. स्थानीय कनेक्टिविटी मुख्य रूप से सड़क परिवहन के जरिए होती है, जिसमें बसें, ऑटो और निजी वाहन शामिल हैं.
बरहमपुर और नगांव के आस-पास के इलाकों की एक समृद्ध ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत है, जो ब्रह्मपुत्र घाटी से जुड़ी है. यहां असमिया परंपराओं और सामुदायिक संस्थाओं का मेल देखने को मिलता है. इस क्षेत्र में स्थानीय बाजार, वैष्णव प्रभाव और हिंदू, मुस्लिम तथा अन्य समुदायों का मिश्रण मौजूद है.
अतीत में बरहमपुर से मिले संकेत कुछ विरोधाभासी रहे हैं, क्योंकि BJP लोकसभा चुनावों में मिलने वाले समर्थन को विधानसभा चुनावों में भुनाने में सफल नहीं हो पाई है. 2021 में मिली उसकी मामूली जीत में यह बात साफ झलकती है. BJP ने मौजूदा विधायक जीतू गोस्वामी पर ही अपना भरोसा जताया है, जिनका मुकाबला पांच अन्य उम्मीदवारों से है. कांग्रेस पार्टी ने बरहमपुर सीट अपने सहयोगी दल 'असम जातीय परिषद' (AJP) के लिए छोड़ दी है. AJP के उम्मीदवार राजन गोहेन ही उनके मुख्य प्रतिद्वंद्वी हैं. चुनावी मैदान में अन्य उम्मीदवारों में AIUDF के मुजीबुर रहमान, आम आदमी पार्टी की रानुमाई टेरोनपी और निर्दलीय उम्मीदवार नजरुल इस्लाम शामिल हैं. उम्मीद है कि दो मुस्लिम उम्मीदवार, विशेष रूप से AIUDF के उम्मीदवार मुस्लिम वोटों में सेंध लगा सकते हैं. ये वोट आमतौर पर कांग्रेस के नेतृत्व वाले विपक्षी गठबंधन के AJP उम्मीदवार को मिलते. बरहमपुर सीट के लिए यह मुकाबला काफी दिलचस्प और पेचीदा लग रहा है. इसका नतीजा जानने के लिए हमें 4 मई तक इंतजार करना होगा, जब वोटों की गिनती होगी.
(अजय झा)
Suresh Borah
INC
Dipika Saikia Keot
ASMJTYP
Nota
NOTA
Sonaram Bora
SUCI
Samsheddin Ahmed
IND
Parbin Choudhury
AJM
असम में हिमंता बिस्वा सरमा के दूसरे कार्यकाल की शुरुआत कूटनीतिक नजरिए से भी बेहद अहम रही. गुवाहाटी में हुए भव्य शपथ ग्रहण समारोह में भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर की मौजूदगी ने साफ संकेत दिया कि पूर्वोत्तर भारत अब वैश्विक साझेदारियों और व्यापारिक संभावनाओं के नए केंद्र के तौर पर देखा जा रहा है.
असम चुनाव के बाद आई ADR रिपोर्ट ने चौंकाने वाली तस्वीर पेश की है. जहां एक तरफ आपराधिक मामलों वाले विधायकों की संख्या में कमी आई है, वहीं दूसरी तरफ विधायकों की संपत्ति में तेज उछाल दर्ज हुआ है. हिमंत बिस्वा सरमा 35 करोड़ की संपति के साथ तीसरे नंबर पर हैं.
पश्चिम बंगाल में चुनावी जीत के साथ ही, भारतीय जनता पार्टी ने 2024 के लोकसभा चुनाव में मिली अधूरी सफलता का चक्र पूरा कर लिया है. ब्रांड मोदी के जरिए तेजी से रफ्तार भर रही बीजेपी के लिए केरल और तमिलनाडु के नतीजों ने भी रास्ता आसान कर दिया है.
Election Results 2026 Updates: देश के चार राज्यों बंगाल, तमिलनाडु, केरल, असम और केंद्र शासित प्रदेश पुडुचेरी में हुए विधानसभा चुनाव के नतीजे सोमवार को घोषित हो गए. पश्चिम बंगाल और असम के साथ ही पुडुचेरी में बीजेपी एनडीए की जीत हुई है. तमिलनाडु में विजय की टीवीके ने डीएमके को सत्ता से बाहर का रास्ता दिखाया, वहीं केरलम में कांग्रेस ने लेफ्ट गठबंधन को हराकर 10 साल का सत्ता का वनवास खत्म किया.
भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने 90 सीटों पर चुनाव लड़ा और 82 सीटों पर जीत दर्ज की. उसके सहयोगी दलों में बोडोलैंड पीपुल्स फ्रंट (BPF), जिसने 11 सीटों पर चुनाव लड़ा, और असम गण परिषद (AGP), जिसने 26 सीटों पर उम्मीदवार उतारे, दोनों ने 10-10 सीटें जीतीं.
ममता बनर्जी ने कहा कि बीजेपी ने 100 से अधिक सीटों पर लूट की है. बीजेपी ने वोटों की चोरी की है. उन्होंने मेरा घेराव किया. यह बीजेपी की अनैतिक जीत है. मैंने बंगाल चुनाव आयुक्त से शिकायत की है.
Vidhan Sabha Chunav Parinam 2026 Live Updates: पश्चिम बंगाल, असम, तमिलनाडु, केरलम और पुडुचेरी में हुए विधानसभा चुनाव के नतीजे सोमवार को घोषित हो गए. पश्चिम बंगाल में जहां बीजेपी ने टीएमसी को पटखनी दे दी, तो वहीं असम में जीत की हैट्रिक लगाई. तमिलनाडु में अभिनेता से राजनेता बने विजय की पार्टी टीवीके ने डीएमके को सत्ता से उखाड़ फेंका, केरल में कांग्रेस ने 10 साल का सत्ता का वनवास खत्म किया और लेफ्ट को हराकर जीत दर्ज की.
असम विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को बड़ा झटका लगा है. राज्य के तीन पूर्व मुख्यमंत्रियों के बेटे अपनी-अपनी सीट बचाने में असफल रहे और उन्हें बीजेपी उम्मीदवारों के हाथों हार का सामना करना पड़ा. जनता ने वंशवादी राजनीति को साफ नकार दिया है.
हिमंता बिस्वा सरमा ने असम में BJP की प्रचंड जीत के बाद पवन खेड़ा पर तंज कसते हुए कहा कि जनता ने उनका पेड़ा बना दिया. उन्होंने कहा कि कांग्रेस के बयानों से लोग भावनात्मक रूप से आहत हुए और इसका असर नतीजों में दिखा. BJP गठबंधन ने 100 से अधिक सीटें जीतीं, जबकि पार्टी ने अपने दम पर बहुमत हासिल किया.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ऊपरी असम के चाय बागान इलाकों में विशेष जनसंपर्क और योजनाओं का असर चुनाव नतीजों में साफ दिख रहा है. चाय बागान वाले छह विधानसभा सीटों पर बीजेपी ने जीत हासिल कर ली है. पीएम मोदी के सीधे संपर्क और विकास योजनाओं ने कांग्रेस के परंपरागत गढ़ को बीजेपी के मजबूत किले में बदल दिया है.