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कमलपुर असम के कामरूप जिले में स्थित एक कस्बा और राजस्व क्षेत्र है, और यह एक सामान्य (अनारक्षित) निर्वाचन क्षेत्र है. यह दरांग-उदलगुरी लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र (जिसे पहले मंगलदोई निर्वाचन क्षेत्र के नाम से जाना जाता था) के 11 विधानसभा क्षेत्रों में से एक है. कमलपुर में कस्बा क्षेत्र और उसके आस-पास के गांवों का एक समूह शामिल है, जिससे इसे पूरी तरह से ग्रामीण स्वरूप मिलता है, कमलपुर राजस्व क्षेत्र के अंतर्गत लगभग 116 गांव आते हैं. यह पूरी तरह से एक ग्रामीण सीट बनी हुई है, जहां मतदाता सूची में कोई शहरी मतदाता शामिल नहीं है. यहां कृषि समुदायों, छोटे व्यापारियों और असमिया भाषी समूहों का वर्चस्व है, जो निचले असम की ब्रह्मपुत्र घाटी के मैदानी इलाकों की विशिष्ट पहचान हैं.
1951 में स्थापित, कमलपुर ने अब तक असम में हुए सभी 15 विधानसभा चुनावों में मतदान किया है. अपनी स्थापना के बाद से, यहां के मतदाताओं का रुझान मिला-जुला रहा है, और उन्होंने किसी भी एक पार्टी को लंबे समय तक सत्ता में बने रहने का मौका नहीं दिया है. कांग्रेस पार्टी ने इस सीट पर सर्वाधिक पांच बार जीत हासिल की है. भाजपा, AGP और निर्दलीय उम्मीदवारों ने दो-दो बार जीत दर्ज की है. प्रजा सोशलिस्ट पार्टी, जनता पार्टी, CPI और अलग हुई 'नतुन असम गण परिषद' ने एक-एक बार इस सीट पर कब्ज़ा जमाया है.
जादब चंद्र डेका ने 2011 में पहली बार भाजपा के लिए यह सीट जीती थी, उन्होंने कांग्रेस के मौजूदा विधायक उत्तरा कलिता को 12,147 वोटों से हराया था. उत्तरा कलिता ने 2001 और 2006 में यह सीट जीती थी 2016 के चुनावों में, भाजपा ने कमलपुर निर्वाचन क्षेत्र अपने सहयोगी दल AGP के लिए छोड़ दिया. AGP के सत्यब्रत कलिता ने कांग्रेस के प्रांजित चौधरी को हराकर, 36,909 वोटों के भारी अंतर से यह सीट जीती. 2021 में भाजपा ने इस सीट पर चुनाव लड़ने का फ़ैसला किया, और उसके उम्मीदवार दिगंत कलिता ने कांग्रेस के किशोर कुमार भट्टाचार्य को 18,114 वोटों से हराया. 2021 में इस सीट पर दोबारा चुनाव लड़ने का मौका न मिलने से नाराज सत्यब्रत कलिता ने AGP छोड़ दी और 2025 में कांग्रेस पार्टी में शामिल हो गए, कांग्रेस ने उन्हें 2026 के विधानसभा चुनावों के लिए कमलपुर निर्वाचन क्षेत्र से अपना उम्मीदवार घोषित किया है. कमलपुर क्षेत्र में BJP की बढ़ती पकड़ लोकसभा चुनावों के दौरान वोटिंग के रुझानों में साफ दिखती है. 2009 से हुए चारों संसदीय चुनावों में पार्टी सबसे आगे रही है. 2009 में यह कांग्रेस से 7,503 वोटों से आगे थी, 2014 में 16,525 वोटों से, 2019 में 38,079 वोटों से और 2024 में 40,250 वोटों से आगे रही.
कमलपुर पर SIR 2025 या 2023 के परिसीमन का कोई असर नहीं पड़ा है, क्योंकि पिछले कुछ सालों में यहां वोटरों की संख्या लगातार बढ़ी है. 2026 के चुनावों के लिए जारी अंतिम वोटर लिस्ट में यहां 184,293 योग्य वोटर थे, जो 2024 में 180,744 थे. इससे पहले, 2021 में यह संख्या 178,848, 2019 में 174,174, 2016 में 157,060 और 2011 में 144,007 थी.
वोटरों में 27 प्रतिशत हिस्सेदारी के साथ मुस्लिम सबसे बड़ा समूह हैं, जबकि अनुसूचित जनजातियों की हिस्सेदारी 5.04 प्रतिशत और अनुसूचित जातियों की हिस्सेदारी 3.63 प्रतिशत है. वोटिंग में लोगों की भागीदारी भी काफी अच्छी रही है. 2011 में 78.39 प्रतिशत, 2014 में 80.08 प्रतिशत, 2016 में 78.39 प्रतिशत, 2019 में 81.49 प्रतिशत, 2021 में 86.64 प्रतिशत, और 2024 के लोकसभा चुनावों में तो वोटरों की भागीदारी 94.99 प्रतिशत तक पहुंच गई, जो कि अविश्वसनीय है.
उपलब्ध आंकड़ों के आधार पर (जो ज्यादातर 2011 की जनगणना के अनुपात पर आधारित हैं और क्षेत्र के हिसाब से समायोजित किए गए हैं), यहां की आबादी के आंकड़े दिखाते हैं कि मुस्लिम सबसे बड़ा एकल समूह हैं, जबकि अनुसूचित जनजातियों और जातियों की संख्या कम है. इस निर्वाचन क्षेत्र में असमिया बोलने वाले हिंदू, बंगाली समूह और खेती-बाड़ी करने वाले समुदायों का मिला-जुला रूप देखने को मिलता है, जो यहां के ग्रामीण मतदाताओं का हिस्सा हैं.
कमलपुर निर्वाचन क्षेत्र ब्रह्मपुत्र घाटी में कामरूप ज़िले के कुछ हिस्सों में फैला हुआ है. यहां समतल, जलोढ़ मैदान हैं और उत्तरी तलहटियों की ओर जमीन में हल्की-फुल्की ऊंच-नीच देखने को मिलती है. यहां की जमीन धान की खेती और दूसरी तरह की खेती के लिए अच्छी है, लेकिन ब्रह्मपुत्र की सहायक नदियों की वजह से यहाँ मौसम के हिसाब से बाढ़ आने का खतरा बना रहता है. कमलपुर में लोगों की रोजी-रोटी मुख्य रूप से धान की खेती, छोटे-मोटे व्यापार और खेती से जुड़े दूसरे कामों पर निर्भर है. यहां की उपजाऊ जलोढ़ मिट्टी और भरपूर बारिश इन कामों को बनाए रखने में मदद करती है. यहां के इंफ्रास्ट्रक्चर में राष्ट्रीय राजमार्गों के ज़रिए आस-पास के इलाकों से सड़क संपर्क, रंगिया या बाईहाटा चारियाली जैसे स्टेशनों पर रेल सुविधा (गांव के हिसाब से लगभग 10-20 km दूर), और ग्रामीण सड़कों व सिंचाई सुविधाओं में चल रहे विकास कार्यों के साथ-साथ बुनियादी सुविधाएं शामिल हैं.
यहां का सबसे नजदीकी बड़ा कस्बा रंगिया है, जो लगभग 10-15 km दूर है, जबकि जिले का मुख्यालय, अमिनगांव, लगभग 30-40 km दूर है. आस-पास के दूसरे इलाकों में पूर्व की ओर बाईहाटा चारियाली शामिल है, जो लगभग 15-20 km दूर है. राज्य की राजधानी, दिसपुर, यहां से लगभग 35-40 km दूर है.
विधानसभा और संसदीय चुनावों में BJP की जीत और बढ़त का शानदार रिकॉर्ड अपने आप ही BJP के नेतृत्व वाले NDA को उसके विरोधियों, खासकर कांग्रेस पार्टी से आगे खड़ा कर देता है. कांग्रेस पार्टी ने कमलपुर सीट जीतने के लिए एक पूर्व AGP नेता पर दांव लगाया है. यह सीट कांग्रेस ने आखिरी बार दो दशक पहले जीती थी. अब कांग्रेस पार्टी पर ही यह बड़ी जिम्मेदारी है कि वह चुनाव में एक मजबूत टक्कर दे, वरना 2026 के विधानसभा चुनावों में कमलपुर निर्वाचन क्षेत्र में उसका वजूद ही खत्म होने का खतरा है.
(अजय झा)
Kishor Kumar Bhattacharyya
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Jitul Deka
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Sisir Kumar Kakati
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Assembly Election Exit Poll 2026: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के दूसरे और अंतिम चरण का मतदान 29 अप्रैल को खत्म होने के बाद सभी की नजरें एग्जिट पोल पर टिक रहेंगी. पांचों चुनावी राज्यों- पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, केरल, असम और पुडुचेरी में रिकॉर्ड मतदान ने मुकाबले को और रोचक बना दिया है, जिस कारण लोग एग्जिट पोल्स का उत्सुकता के साथ इंतजार कर रहे हैं.
असम चुनाव के बीच सियासी पारा और भी गरमा गया है. सवाल यह है कि इस बार असम में किसकी सरकार बनेगी? मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा या कांग्रेस नेता गौरव गोगोई?
Assembly Election Updates: असम, केरल और पुडुचेरी में चुनाव के बाद अब पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु में विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक सरगर्मी तेज हैं. पश्चिम बंगाल की 294 सदस्यीय विधानसभा के लिए 23 अप्रैल और 29 अप्रैल को वोट डाले जाएंगे. जबकि तमिलनाडु की सभी 234 विधानसभा सीटों पर 23 अप्रैल को वोटिंग होगी. बंगाल में चुनावी पारा चढ़ने के बीच ममता बनर्जी की अगुवाई वाली तृणमूल कांग्रेस (TMC) को झटका लगा है. बंगाल के अल्पसंख्यक बहुल मुर्शिदाबाद जिले की जलांगी विधानसभा सीट से TMC विधायक अब्दुर रज्जाक ने गुरुवार को पार्टी छोड़ने का ऐलान किया है.
देश के चार राज्य और एक केंद्र शासित प्रदेश में हो रहे चुनावों में हर मुख्यमंत्री सत्ता में वापसी चाहता है. चुनौती तो केरलम में पी. विजयन के सामने भी है, लेकिन ममता बनर्जी की चुनौती सबसे बड़ी नजर आ रही है - हिमंता बिस्वा सरमा हों या एमके स्टालिन वे दोनों भी मुख्यमंत्री आगे भी बने रहना चाहते हैं.
असम के करीमगंज (नॉर्थ) विधानसभा क्षेत्र के एक बूथ पर झड़प के बाद चुनाव आयोग ने शनिवार को दोबारा मतदान कराने का आदेश दिया है. यह फैसला चुनावी गड़बड़ी के चलते लिया गया है. हिंसा के दौरान दर्जन भर से ज्यादा लोग घायल हो गए थे.
असम के सियासी इतिहास में पहली बार रिकॉर्ड वोटिंग हुई है. असम में इस बार 85.89 फीसदी मतदान हुआ है, जो पिछले चुनाव से करीब साढ़े तीन फीसदी ज्यादा है. असम में सत्ता का खेल सात से 8 फीसदी वोट बढ़ने या फिर घटने पर होता रहा है. इस बार का वोटिंग पैटर्न क्या संकेत दे रहा है?
असम, केरलम और पुडुचेरी में विधानसभा चुनाव के लिए मतदान समाप्त हो गया. पुडुचेरी में 89.87 फीसदी, असम में 85.91 फीसदी और केरलम में 78.27 फीसदी मतदान दर्ज किया गया. तीनों जगह बंपर वोटिंग हुई.
दक्षिण से लेकर पूरब तक 3 राज्यों में आज जनादेश का दिन है...और तीनों राज्यों में जबरदस्त वोटिंग हो रही है..असम में दोपहर 3 बजे तक 75.91 फीसदी मतदान हो चुका है..आप समझ सकते हैं कि यही ट्रेंड रहा तो वहां पोलिंग कितनी फीसदी तक हो सकती है..पुडुचेरी में भी 72.40 फीसदी मतदान दोपहर 3 बजे तक हुआ..केरल में दोपहर 3 बजे तक 62.71 फीसदी वोटिंग हुई है.
भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन ने अपने ताजा इंटरव्यू में चुनावी राज्यों बंगाल, असम, केरलम, तमिलनाडु और वहां के मुद्दों पर खुलकर चर्चा की. नबीन ने कहा कि बीजेपी शुरू से एक पॉलिसी पर काम करती आई है कि हम ‘राष्ट्र प्रथम’ की बात करते हैं. बीजेपी अध्यक्ष ने साथ ही कहा कि हम सांस्कृतिक विरासत को बढ़ाने वाले लोग हैं. देखें बातचीत.
Assam Assembly Election Voting: असम में आज विधानसभा चुनाव के लिए वोटिंग हो रही है. इस बीच मुख्यमंत्री और जालुकबारी से उम्मीदवार हिमंत बिस्वा सरमा ने गुवाहाटी के मां कामाख्या मंदिर में पूजा-अर्चना की. इस दौरान उनकी पत्नी भी उनके साथ मौजूद रहीं और दोनों ने मंदिर में विधिवत पूजा की.