BJP
INC
SUCI
Nota
NOTA
नगांव-बतद्रोबा, असम के नगांव जिले में एक सामान्य, अनारक्षित विधानसभा क्षेत्र है और यह नगांव लोकसभा क्षेत्र के आठ हिस्सों में से एक है. नगांव-बतद्रोबा विधानसभा क्षेत्र 2023 में हुए परिसीमन के बाद अस्तित्व में आया, इसे नगांव और बतद्रोबा विधानसभा क्षेत्रों को मिलाकर बनाया गया था. इस नए क्षेत्र में नगांव शहर के बाहरी शहरी इलाके और आस-पास के ग्रामीण गांव शामिल हैं. इस वजह से इसका स्वरूप कुछ-कुछ शहरी और ज्यादातर ग्रामीण है, और इसके दायरे में काफी संख्या में गांव आते हैं. यह क्षेत्र मुख्य रूप से ग्रामीण ही बना हुआ है, जहां खेती-बाड़ी करने वाले समुदाय, छोटे व्यापारी और अलग-अलग जातियों के लोग रहते हैं, जो मध्य असम की ब्रह्मपुत्र घाटी के मैदानों की खासियत है.
1957 में बने नगांव विधानसभा क्षेत्र में अब तक 17 विधानसभा चुनाव हो चुके हैं, जिनमें 1959, 1962 और 1996 में हुए तीन उपचुनाव भी शामिल हैं. कांग्रेस पार्टी ने यह सीट आठ बार जीती है, जबकि AGP को पांच बार जीत मिली है. AGP की इन पांच जीतों में 1985 का चुनाव भी शामिल है, जब प्रफुल्ल कुमार महंता, जो उसी साल असम के मुख्यमंत्री बने थ, उन्होंने एक निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर चुनाव लड़ा था. AGP बनने से पहले, 'ऑल असम स्टूडेंट्स यूनियन' के ज्यादातर नेता इसी तरह निर्दलीय चुनाव लड़ा करते थे. CPI और BJP ने नगांव सीट पर दो-दो बार जीत हासिल की है.
दूसरी ओर, बतद्रोबा विधानसभा क्षेत्र 1978 में बना था और इसने 10 विधानसभा चुनावों में हिस्सा लिया है. कांग्रेस पार्टी ने यह सीट छह बार जीती है, जबकि 'रिवोल्यूशनरी कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया', एक निर्दलीय उम्मीदवार, AGP और BJP ने यह सीट एक-एक बार जीती है. जहां BJP ने 2016 और 2021 में नगांव सीट जीती थी, वहीं बतद्रोबा सीट पर 2016 में BJP और 2021 में कांग्रेस ने जीत हासिल की थी.
2026 के विधानसभा चुनावों के लिए जारी अंतिम मतदाता सूची के अनुसार, नगांव-बतद्रोबा विधानसभा क्षेत्र में 197,284 योग्य मतदाता थे. 2025 में हुए 'स्पेशल समरी रिवीजन' (SIR) के बाद, 2024 के मुकाबले मतदाताओं की संख्या में थोड़ी सी कमी आई है, 2024 में यह संख्या 199,688 थी. 2023 के परिसीमन से पहले, 2021 में नगांव में 180,182 वोटर थे और बतद्रोबा में 158,482. 2019 में क्रमशः 174,667 और 153,013; 2016 में 165,180 और 139,316; और 2011 में क्रमशः 158,410 और 128,366 वोटर थे.
इन दोनों निर्वाचन क्षेत्रों में मुस्लिम वोटरों की संख्या बहुत ज्यादा थी. नगांव में 41.30 प्रतिशत मुस्लिम वोटर थे और बटाद्रोबा में 54.60 प्रतिशत. परिसीमन और विलय के बाद, वोटरों की बनावट और जनसांख्यिकी में जबरदस्त बदलाव आया. खास बात यह है कि इसके बावजूद, 2009, 2014 और 2019 के लोकसभा चुनावों में नगांव विधानसभा क्षेत्र में BJP कांग्रेस पार्टी से आगे रही, जबकि बतद्रोबा क्षेत्र में कांग्रेस पार्टी 2009 और 2019 में आगे रही, वहीं 2014 में AIUDF आगे रही. चाहे जान-बूझकर हो या किसी और वजह से, परिसीमन से BJP को फायदा हुआ, क्योंकि 2024 के लोकसभा चुनावों में नगांव-बतद्रोबा विधानसभा क्षेत्र में वह कांग्रेस पार्टी से 11,538 वोटों से आगे रही.
इस निर्वाचन क्षेत्र में असमिया, बंगाली बोलने वाले समूह, किनारों पर चाय बागान समुदाय, और अन्य मूल निवासी और प्रवासी आबादी का मिला-जुला रूप देखने को मिलता है, जो इसके विविध ग्रामीण मतदाताओं में योगदान देते हैं.
नगांव-बतद्रोबा निर्वाचन क्षेत्र मध्य असम के नगांव जिले के कुछ हिस्सों को कवर करता है, जहां ब्रह्मपुत्र नदी के दक्षिणी किनारे पर समतल, जलोढ़ मैदान और कुछ हल्की ऊंची-नीची जमीनें हैं. यह इलाका धान की खेती, जूट की खेती और अन्य कृषि कार्यों के लिए उपयुक्त है, लेकिन ब्रह्मपुत्र, कोलंग और उसकी सहायक नदियों से आने वाली मौसमी बाढ़ का खतरा बना रहता है. नगांव-बतद्रोबा में लोगों की आजीविका मुख्य रूप से धान की खेती, छोटे-मोटे व्यापार, कृषि से जुड़ी गतिविधियों और नगांव शहर के बाहरी इलाकों में कुछ सेवाओं पर निर्भर है. यहां की उपजाऊ जलोढ़ मिट्टी और भरपूर बारिश इन गतिविधियों को बनाए रखने में मदद करती है. बुनियादी ढांचे में राष्ट्रीय राजमार्गों के जरिए आस-पास के इलाकों से सड़क संपर्क, एक अहम जंक्शन, नगांव स्टेशन पर रेल सुविधा, और ग्रामीण सड़कों व सिंचाई में चल रहे विकास कार्यों के साथ-साथ बुनियादी सुविधाएं शामिल हैं.
सबसे नजदीकी बड़ा शहर जिला मुख्यालय नगांव है, जो निर्वाचन क्षेत्र के इलाके के हिसाब से लगभग 5-20 km दूर है. पूर्व की ओर अन्य नजदीकी शहरों में ढिंग (जो पहले बतद्रोबा के प्रभाव क्षेत्र का हिस्सा था) शामिल है, जो लगभग 20-30 km दूर है. राज्य की राजधानी, दिसपुर, पश्चिम की ओर लगभग 120-130 km दूर है.
2023 के परिसीमन के बाद दो निर्वाचन क्षेत्रों के विलय और एक बिल्कुल नई विधानसभा सीट के गठन के चलते सीमाओं और मतदाताओं की बनावट में आए भारी बदलाव को देखते हुए, 2026 के विधानसभा चुनावों में नगांव-बतद्रोबा विधानसभा क्षेत्र में क्या होने वाला है, इसका अंदाजी लगाने के लिए इतिहास कोई मददगार नहीं हो सकता. 2021 में, पहले के दो निर्वाचन क्षेत्रों के कुल मतदाताओं की संख्या 338,664 थी, जो 2024 में घटकर 199,688 रह गई, इसका मतलब है कि मतदाता सूची से 138,978 नामों को बड़े पैमाने पर हटाया किया गया, और 2025 के SIR के बाद यह संख्या और भी कम हो गई है. उम्मीद की एकमात्र किरण यह है कि 2024 के संसदीय चुनावों में इस क्षेत्र में BJP सबसे आगे रही थी. यह संशोधित निर्वाचन क्षेत्र में हुआ पहला चुनाव था. नगांव-बतद्रोबा निर्वाचन क्षेत्र में यह पहला चुनाव होने जा रहा है, और इसके नतीजों को लेकर बस उम्मीद ही की जा सकती है, क्योंकि मतदाताओं की बनावट से जुड़े ताजी आंकड़े अभी उपलब्ध नहीं हैं. सीधे शब्दों में कहें तो, इस नए बने निर्वाचन क्षेत्र में कांग्रेस और BJP के बीच कड़ा मुकाबला देखने को मिल सकता है.
(अजय झा)
Angoorlata Deka
BJP
Matiur Rahman
IND
Nota
NOTA
Anupam Baruah
JD(U)
Musleha Begum
RUC
Prafulla Rajkhowa
IND
Fakar Uddin
AJM
Assembly Election Exit Poll 2026: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के दूसरे और अंतिम चरण का मतदान 29 अप्रैल को खत्म होने के बाद सभी की नजरें एग्जिट पोल पर टिक रहेंगी. पांचों चुनावी राज्यों- पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, केरल, असम और पुडुचेरी में रिकॉर्ड मतदान ने मुकाबले को और रोचक बना दिया है, जिस कारण लोग एग्जिट पोल्स का उत्सुकता के साथ इंतजार कर रहे हैं.
असम चुनाव के बीच सियासी पारा और भी गरमा गया है. सवाल यह है कि इस बार असम में किसकी सरकार बनेगी? मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा या कांग्रेस नेता गौरव गोगोई?
Assembly Election Updates: असम, केरल और पुडुचेरी में चुनाव के बाद अब पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु में विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक सरगर्मी तेज हैं. पश्चिम बंगाल की 294 सदस्यीय विधानसभा के लिए 23 अप्रैल और 29 अप्रैल को वोट डाले जाएंगे. जबकि तमिलनाडु की सभी 234 विधानसभा सीटों पर 23 अप्रैल को वोटिंग होगी. बंगाल में चुनावी पारा चढ़ने के बीच ममता बनर्जी की अगुवाई वाली तृणमूल कांग्रेस (TMC) को झटका लगा है. बंगाल के अल्पसंख्यक बहुल मुर्शिदाबाद जिले की जलांगी विधानसभा सीट से TMC विधायक अब्दुर रज्जाक ने गुरुवार को पार्टी छोड़ने का ऐलान किया है.
देश के चार राज्य और एक केंद्र शासित प्रदेश में हो रहे चुनावों में हर मुख्यमंत्री सत्ता में वापसी चाहता है. चुनौती तो केरलम में पी. विजयन के सामने भी है, लेकिन ममता बनर्जी की चुनौती सबसे बड़ी नजर आ रही है - हिमंता बिस्वा सरमा हों या एमके स्टालिन वे दोनों भी मुख्यमंत्री आगे भी बने रहना चाहते हैं.
असम के करीमगंज (नॉर्थ) विधानसभा क्षेत्र के एक बूथ पर झड़प के बाद चुनाव आयोग ने शनिवार को दोबारा मतदान कराने का आदेश दिया है. यह फैसला चुनावी गड़बड़ी के चलते लिया गया है. हिंसा के दौरान दर्जन भर से ज्यादा लोग घायल हो गए थे.
असम के सियासी इतिहास में पहली बार रिकॉर्ड वोटिंग हुई है. असम में इस बार 85.89 फीसदी मतदान हुआ है, जो पिछले चुनाव से करीब साढ़े तीन फीसदी ज्यादा है. असम में सत्ता का खेल सात से 8 फीसदी वोट बढ़ने या फिर घटने पर होता रहा है. इस बार का वोटिंग पैटर्न क्या संकेत दे रहा है?
असम, केरलम और पुडुचेरी में विधानसभा चुनाव के लिए मतदान समाप्त हो गया. पुडुचेरी में 89.87 फीसदी, असम में 85.91 फीसदी और केरलम में 78.27 फीसदी मतदान दर्ज किया गया. तीनों जगह बंपर वोटिंग हुई.
दक्षिण से लेकर पूरब तक 3 राज्यों में आज जनादेश का दिन है...और तीनों राज्यों में जबरदस्त वोटिंग हो रही है..असम में दोपहर 3 बजे तक 75.91 फीसदी मतदान हो चुका है..आप समझ सकते हैं कि यही ट्रेंड रहा तो वहां पोलिंग कितनी फीसदी तक हो सकती है..पुडुचेरी में भी 72.40 फीसदी मतदान दोपहर 3 बजे तक हुआ..केरल में दोपहर 3 बजे तक 62.71 फीसदी वोटिंग हुई है.
भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन ने अपने ताजा इंटरव्यू में चुनावी राज्यों बंगाल, असम, केरलम, तमिलनाडु और वहां के मुद्दों पर खुलकर चर्चा की. नबीन ने कहा कि बीजेपी शुरू से एक पॉलिसी पर काम करती आई है कि हम ‘राष्ट्र प्रथम’ की बात करते हैं. बीजेपी अध्यक्ष ने साथ ही कहा कि हम सांस्कृतिक विरासत को बढ़ाने वाले लोग हैं. देखें बातचीत.
Assam Assembly Election Voting: असम में आज विधानसभा चुनाव के लिए वोटिंग हो रही है. इस बीच मुख्यमंत्री और जालुकबारी से उम्मीदवार हिमंत बिस्वा सरमा ने गुवाहाटी के मां कामाख्या मंदिर में पूजा-अर्चना की. इस दौरान उनकी पत्नी भी उनके साथ मौजूद रहीं और दोनों ने मंदिर में विधिवत पूजा की.