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Gohpur Election Results 2026 Live: गोहपुर विधानसभा सीट पर BJP ने फहराया जीत का परचम, जानें विजयी उम्मीदवार Utpal Borah को मिली कितनी बड़ी जीत
Gohpur Election Results Live: गोहपुर निर्वाचन क्षेत्र में BJP की जीत, जानिए पूरा रिजल्ट
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गोहपुर एक सामान्य (अनारक्षित) निर्वाचन क्षेत्र है जो पूरी तरह से असम के बिस्वनाथ जिले के अंतर्गत आता है, और यह सोनितपुर लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र के नौ खंडों में से एक है. इस निर्वाचन क्षेत्र में गोहपुर कस्बा शामिल है, जो इसका मुख्य शहरी केंद्र है, साथ ही इसके आसपास बड़ी संख्या में गांव भी हैं, जिससे इस निर्वाचन क्षेत्र का स्वरूप मुख्य रूप से ग्रामीण है. 2023 के परिसीमन अभ्यास के दौरान निर्वाचन क्षेत्र की सीमाओं में कुछ बदलाव किए गए. इसमें कुछ क्षेत्र कम हो गए, जबकि पड़ोसी निर्वाचन क्षेत्रों से कुछ नए क्षेत्र इसमें शामिल हो गए. तेजपुर लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र, जिसका हिस्सा गोहपुर 2023 से पहले हुआ करता था, का पुनर्गठन किया गया और उसका नाम बदलकर सोनितपुर लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र कर दिया गया.
1951 में स्थापित, गोहपुर में अब तक 14 विधानसभा चुनाव हुए हैं. 1983 में गोहपुर निर्वाचन क्षेत्र में कोई चुनाव नहीं हुआ था, जिसका कारण विदेशी घुसपैठियों के मुद्दे पर AAJSU द्वारा किया गया आंदोलन था. इस निर्वाचन क्षेत्र के इतिहास के अधिकांश समय तक कांग्रेस ही प्रमुख पार्टी रही है. उसने कुल 14 चुनावों में से आठ में जीत हासिल की है. इसकी शुरुआत 1952 से 1967 के बीच लगातार चार जीतों के साथ हुई, इसके बाद 1991 में फिर से जीत मिली, और हाल ही में 2001, 2006 और 2011 में लगातार तीन बार जीत दर्ज की गई. 1985 में एक निर्दलीय उम्मीदवार और 1996 में असम गण परिषद के एक उम्मीदवार ने एक-एक बार जीत हासिल की. इसके अलावा, अब भंग हो चुकी संयुक्त सोशलिस्ट पार्टी और जनता पार्टी ने क्रमश- 1972 और 1978 में एक-एक चुनाव जीता. इन दोनों ही चुनावों में जीतने वाला उम्मीदवार एक ही व्यक्ति था. BJP ने यह सीट दो बार जीती है, जिसमें पिछले दो चुनाव शामिल हैं.
हाल के चुनावों की बात करें तो, 2011 में कांग्रेस की उम्मीदवार मोनिका बोरा ने उत्पल बोरा को 36,224 वोटों के भारी अंतर से हराया था. उस वर्ष उत्पल बोरा ने एक निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर चुनाव लड़ा था, जबकि BJP का उम्मीदवार सातवें स्थान पर रहा था. हालांकि, 2016 के चुनावों में, उत्पल बोरा (जो अब BJP में शामिल हो चुके थे) ने यह सीट जीत ली. उन्होंने कांग्रेस की मोनिका बोरा को 28,935 वोटों के अंतर से हराया था. 2021 में, BJP के उत्पल बोराह ने यह सीट बरकरार रखी. उन्होंने कांग्रेस के रिपुन बोराह को 29,294 वोटों के अंतर से हराया. रिपुन बोराह ने 2001 और 2006 में दो बार यह सीट जीती थी. उत्पल बोराह को 93,224 वोट मिले, जबकि रिपुन बोराह को 63,930 वोट मिले. उस साल कुल 161,410 वैध वोट पड़े थे.
हाल के लोकसभा चुनावों के दौरान गोहपुर विधानसभा क्षेत्र में वोटिंग के पैटर्न से पता चलता है कि BJP ने यहां लगातार अपना दबदबा बनाए रखा है. 2009 में, BJP की सहयोगी पार्टी AGP ने गोहपुर क्षेत्र में 34,507 वोटों के बड़े अंतर से बढ़त बनाई थी. 2014 में, BJP अब AGP की सहयोगी नहीं रही थी. बातचीत विफल होने और AGP से कई बड़े नेताओं के BJP में शामिल होने के बाद, BJP ने कांग्रेस के खिलाफ 15,648 वोटों की बढ़त बनाई. 2019 में यह बढ़त 46,183 वोटों की थी, और 2024 में 59,648 वोटों की हो गई. BJP के सोनितपुर लोकसभा उम्मीदवार रणजीत दत्ता को 92,668 वोट मिले, जबकि उनके कांग्रेस प्रतिद्वंद्वी प्रेमलाल गंजू को 32,841 वोट मिले.
2026 के विधानसभा चुनावों के लिए गोहपुर निर्वाचन क्षेत्र की अंतिम मतदाता सूची में 173,437 पात्र मतदाता थे. 2024 में पंजीकृत मतदाताओं की संख्या 172,085 थी. पूरे राज्य में SIR समायोजन के कारण इस संख्या में थोड़ी वृद्धि हुई है. पहले के आंकड़े 2021 में 204,227, 2019 में 190,897, 2016 में 171,196, 2014 में 164,598, 2011 में 160,187, और 2009 में 158,316 थे.
मतदाताओं की भागीदारी काफी ज्यादा रही है- 2009 में 71.24 प्रतिशत, 2011 में 80.93 प्रतिशत, 2014 में 77.38 प्रतिशत, 2016 में 85.3 प्रतिशत, 2019 में 79.49 प्रतिशत, 2021 में 80.09 प्रतिशत, और 2024 में 78.65 प्रतिशत.
उपलब्ध आंकड़ों के आधार पर जनसांख्यिकी, जो ज्यादातर 2011 की जनगणना के अनुपातों पर आधारित है और जिसमें क्षेत्र तथा परिसीमन में हुए बदलावों को समायोजित किया गया है. यह दर्शाती है कि यहां 80 प्रतिशत से ज्यादा हिंदू बहुसंख्यक हैं, मुसलमानों और अनुसूचित जातियों की उपस्थिति कम है, और अनुसूचित जनजातियों की उपस्थिति काफी ज्यादा (लगभग 15 प्रतिशत) है. इस निर्वाचन क्षेत्र में असमिया और बंगाली बोलने वाले समुदायों के साथ-साथ खेती-बाड़ी करने वाले समूहों का भी मिश्रण है, जो इसके ग्रामीण स्वरूप को बनाए रखने में योगदान देता है.
गोहपुर निर्वाचन क्षेत्र मध्य असम के बिश्वनाथ जिले के कुछ हिस्सों को कवर करता है. यह क्षेत्र ब्रह्मपुत्र नदी के उत्तरी किनारे पर स्थित समतल जलोढ़ मैदानों वाला है, जिसके बीच-बीच में आर्द्रभूमियां, 'बील' (झीलें), और उत्तर की ओर अरुणाचल प्रदेश तथा हिमालय की तलहटियों की तरफ हल्की ऊंची-नीची जमीनें हैं. यहां की जमीन धान की खेती, आर्द्रभूमियों में मछली पकड़ने और कुछ हद तक बागवानी के लिए उपयुक्त है. हालांकि, ब्रह्मपुत्र नदी और उसकी सहायक नदियों, जैसे बुरोई और बरगंग नदियों, में आने वाली मौसमी बाढ़ का खतरा यहां हमेशा बना रहता है. गोहपुर के लोगों की आजीविका मुख्य रूप से धान की खेती, मछली पकड़ने, छोटे-मोटे व्यापार और खेती से जुड़े अन्य कामों पर निर्भर करती है. यहां की उपजाऊ जलोढ़ मिट्टी और भरपूर बारिश इन सभी गतिविधियों को बनाए रखने में सहायक होती है. यहां के बुनियादी ढांचे में राष्ट्रीय राजमार्ग 15 के जरिए सड़क संपर्क शामिल है, जो गोहपुर शहर से होकर गुजरता है, और इसके अलावा कई राज्य राजमार्ग भी हैं जो आस-पास के क्षेत्रों को आपस में जोड़ते हैं. रेल सुविधा गोहपुर रेलवे स्टेशन पर उपलब्ध है, जो इसी निर्वाचन क्षेत्र के अंतर्गत आता है. बुनियादी सुविधाओं में ग्रामीण सड़कों, सिंचाई और स्थानीय बाजारों में चल रहे विकास कार्य शामिल हैं.
आस-पास के कस्बों में दक्षिण-पश्चिम में स्थित जिला प्रशासनिक केंद्र, बिस्वनाथ चारियाली (जो लगभग 60-62 किमी दूर है) और पश्चिम में स्थित तेजपुर (जो लगभग 100-105 किमी दूर है) शामिल हैं। राज्य की राजधानी, दिसपुर, दक्षिण-पश्चिम दिशा में लगभग 256-275 किमी की दूरी पर स्थित है. यह निर्वाचन क्षेत्र उत्तर में कुछ हिस्सों में अरुणाचल प्रदेश की सीमा के करीब स्थित है.
गोहपुर की एक समृद्ध ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत है जो ब्रह्मपुत्र घाटी से जुड़ी है. इसमें असमिया परंपराओं का मेल है और औपनिवेशिक काल से चली आ रही चाय बागान समुदायों की मजबूत उपस्थिति है. यह कस्बा विशेष रूप से महान स्वतंत्रता सेनानी कनकलता बरुआ के जन्मस्थान के रूप में प्रसिद्ध है, जो 1942 में 'भारत छोड़ो आंदोलन' के दौरान गोहपुर पुलिस स्टेशन पर तिरंगा फहराने के लिए एक जुलूस का नेतृत्व करते हुए शहीद हो गई थीं. इस निर्वाचन क्षेत्र में 1983 के विधानसभा चुनावों के दौरान भारी हिंसा भी देखी गई थी, जब 'असम आंदोलन' के कारण मतदान ठीक से नहीं हो पाया था. इस क्षेत्र में प्राचीन वैष्णव सत्र (मठ) और जीवंत आदिवासी सांस्कृतिक प्रथाएं देखने को मिलती हैं.
गोहपुर निर्वाचन क्षेत्र 2026 के असम विधानसभा चुनावों में पुराने दिग्गजों के बीच एक चुनावी रणभूमि बनने के लिए तैयार है, क्योंकि यहां के मतदान के रुझान हमेशा से ही प्रतिस्पर्धी रहे हैं. BJP के नेतृत्व वाला NDA और विपक्षी गठबंधन इस सीट पर चुनाव लड़ेंगे. BJP ने अपने मौजूदा विधायक उत्पल बोरा को अपना उम्मीदवार बनाया है, जबकि कांग्रेस पार्टी ने बोरा को चुनौती देने के लिए शंकर ज्योति कुतुम को मैदान में उतारा है. BJP की पूर्व सहयोगी UPPL ने नित्यानंद बसुमतारी को अपना उम्मीदवार बनाया है, जबकि एक निर्दलीय उम्मीदवार हेमंत बिजय महंत, इस चुनावी दौड़ में शामिल उम्मीदवारों की चौकड़ी को पूरा करते हैं.
UPPL, जिसने पहले एक छोटी सहयोगी के रूप में BJP का समर्थन किया था, अब उसके साथ नहीं है और अकेले चुनाव लड़ रही है. इसकी कमी काफी हद तक 'बोडोलैंड पीपुल्स फ्रंट' (BPF) ने पूरी कर दी है, जो अब BJP के नेतृत्व वाले 'नॉर्थ ईस्ट डेमोक्रेटिक अलायंस' में शामिल हो गया है. UPPL और BPF, दोनों ही आदिवासी मतदाताओं के बीच काफी प्रभाव रखते हैं. यदि गोहपुर क्षेत्र में 2024 के संसदीय चुनावों के मतदान रुझान कोई संकेत देते हैं, तो BJP कांग्रेस पार्टी और UPPL पर बढ़त के साथ चुनाव में उतर रही है. हालांकि, 2026 के असम विधानसभा चुनावों में गोहपुर निर्वाचन क्षेत्र में मुकाबला काफी कड़ा होने की उम्मीद है.
(अजय झा)
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Sri Sabir Narzary
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असम में हिमंता बिस्वा सरमा के दूसरे कार्यकाल की शुरुआत कूटनीतिक नजरिए से भी बेहद अहम रही. गुवाहाटी में हुए भव्य शपथ ग्रहण समारोह में भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर की मौजूदगी ने साफ संकेत दिया कि पूर्वोत्तर भारत अब वैश्विक साझेदारियों और व्यापारिक संभावनाओं के नए केंद्र के तौर पर देखा जा रहा है.
असम चुनाव के बाद आई ADR रिपोर्ट ने चौंकाने वाली तस्वीर पेश की है. जहां एक तरफ आपराधिक मामलों वाले विधायकों की संख्या में कमी आई है, वहीं दूसरी तरफ विधायकों की संपत्ति में तेज उछाल दर्ज हुआ है. हिमंत बिस्वा सरमा 35 करोड़ की संपति के साथ तीसरे नंबर पर हैं.
पश्चिम बंगाल में चुनावी जीत के साथ ही, भारतीय जनता पार्टी ने 2024 के लोकसभा चुनाव में मिली अधूरी सफलता का चक्र पूरा कर लिया है. ब्रांड मोदी के जरिए तेजी से रफ्तार भर रही बीजेपी के लिए केरल और तमिलनाडु के नतीजों ने भी रास्ता आसान कर दिया है.
Election Results 2026 Updates: देश के चार राज्यों बंगाल, तमिलनाडु, केरल, असम और केंद्र शासित प्रदेश पुडुचेरी में हुए विधानसभा चुनाव के नतीजे सोमवार को घोषित हो गए. पश्चिम बंगाल और असम के साथ ही पुडुचेरी में बीजेपी एनडीए की जीत हुई है. तमिलनाडु में विजय की टीवीके ने डीएमके को सत्ता से बाहर का रास्ता दिखाया, वहीं केरलम में कांग्रेस ने लेफ्ट गठबंधन को हराकर 10 साल का सत्ता का वनवास खत्म किया.
भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने 90 सीटों पर चुनाव लड़ा और 82 सीटों पर जीत दर्ज की. उसके सहयोगी दलों में बोडोलैंड पीपुल्स फ्रंट (BPF), जिसने 11 सीटों पर चुनाव लड़ा, और असम गण परिषद (AGP), जिसने 26 सीटों पर उम्मीदवार उतारे, दोनों ने 10-10 सीटें जीतीं.
ममता बनर्जी ने कहा कि बीजेपी ने 100 से अधिक सीटों पर लूट की है. बीजेपी ने वोटों की चोरी की है. उन्होंने मेरा घेराव किया. यह बीजेपी की अनैतिक जीत है. मैंने बंगाल चुनाव आयुक्त से शिकायत की है.
Vidhan Sabha Chunav Parinam 2026 Live Updates: पश्चिम बंगाल, असम, तमिलनाडु, केरलम और पुडुचेरी में हुए विधानसभा चुनाव के नतीजे सोमवार को घोषित हो गए. पश्चिम बंगाल में जहां बीजेपी ने टीएमसी को पटखनी दे दी, तो वहीं असम में जीत की हैट्रिक लगाई. तमिलनाडु में अभिनेता से राजनेता बने विजय की पार्टी टीवीके ने डीएमके को सत्ता से उखाड़ फेंका, केरल में कांग्रेस ने 10 साल का सत्ता का वनवास खत्म किया और लेफ्ट को हराकर जीत दर्ज की.
असम विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को बड़ा झटका लगा है. राज्य के तीन पूर्व मुख्यमंत्रियों के बेटे अपनी-अपनी सीट बचाने में असफल रहे और उन्हें बीजेपी उम्मीदवारों के हाथों हार का सामना करना पड़ा. जनता ने वंशवादी राजनीति को साफ नकार दिया है.
हिमंता बिस्वा सरमा ने असम में BJP की प्रचंड जीत के बाद पवन खेड़ा पर तंज कसते हुए कहा कि जनता ने उनका पेड़ा बना दिया. उन्होंने कहा कि कांग्रेस के बयानों से लोग भावनात्मक रूप से आहत हुए और इसका असर नतीजों में दिखा. BJP गठबंधन ने 100 से अधिक सीटें जीतीं, जबकि पार्टी ने अपने दम पर बहुमत हासिल किया.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ऊपरी असम के चाय बागान इलाकों में विशेष जनसंपर्क और योजनाओं का असर चुनाव नतीजों में साफ दिख रहा है. चाय बागान वाले छह विधानसभा सीटों पर बीजेपी ने जीत हासिल कर ली है. पीएम मोदी के सीधे संपर्क और विकास योजनाओं ने कांग्रेस के परंपरागत गढ़ को बीजेपी के मजबूत किले में बदल दिया है.