INC
AITC
AGP
IND
IND
Nota
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हाजो-सुआलकुची असम के कामरूप जिले में अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित एक विधानसभा क्षेत्र है और यह बारपेटा लोकसभा क्षेत्र के 10 हिस्सों में से एक है. 2023 में परिसीमन आयोग की सिफारिशों के बाद, जिसका मकसद असम की 126 विधानसभा सीटों पर मतदाताओं को ज्यादा समान रूप से बांटना था, इस विधानसभा क्षेत्र का पुनर्गठन किया गया और इसका नाम बदल दिया गया. इससे पहले इसे अनारक्षित हाजो विधानसभा क्षेत्र के तौर पर जाना जाता था, जो गुवाहाटी लोकसभा क्षेत्र का एक हिस्सा था.
नए हाजो-सुआलकुची विधानसभा क्षेत्र में पिछले हाजो क्षेत्र के मुख्य इलाके शामिल हैं, साथ ही पिछले जालुकबारी और अब खत्म हो चुके गुवाहाटी पश्चिम विधानसभा क्षेत्रों के कुछ इलाके भी इसमें जोड़े गए हैं. हाजो-सुआलकुची विधानसभा क्षेत्र में हाजो और सुआलकुची शहर आते हैं, साथ ही इसके आस-पास के कई गांव भी इसमें शामिल हैं. इस क्षेत्र का ज्यादातर हिस्सा ग्रामीण है, जिसमें बड़ी संख्या में गांव आते हैं, और यहां मुख्य रूप से खेती-बाड़ी करने वाले समुदाय रहते हैं, जो मध्य असम की ब्रह्मपुत्र घाटी के मैदानी इलाकों की खासियत है.
हाजो विधानसभा क्षेत्र की स्थापना 1951 में हुई थी और यहां 16 विधानसभा चुनावों में मुकाबला हुआ है, जिसमें एक उपचुनाव भी शामिल है. कांग्रेस ने सबसे ज्यादा चुनाव जीते हैं, कुल सात बार. इसमें 1952 से 1967 के बीच लगातार चार जीतें और 1958 का एक उपचुनाव शामिल है. निर्दलीय नेता 1972 और 1985 में दो बार चुनाव जीतने में कामयाब रहे. जनता पार्टी, नतुन असम गण परिषद और तृणमूल कांग्रेस ने क्रमश- 1978, 1991 और 2011 में एक-एक चुनाव जीता. हाल ही में, BJP की उम्मीदवार सुमन हरिप्रिया ने 2016 और 2021 में लगातार दो चुनाव जीते.
2011 के चुनाव में, तृणमूल कांग्रेस के उम्मीदवार दिपेन पाठक ने कांग्रेस के उम्मीदवार किरिप चालिहा को 5,600 वोटों के अंतर से हराया. इस चुनाव में AGP और BJP क्रमशः तीसरे और चौथे स्थान पर रहीं. 2016 में, BJP उम्मीदवार सुमन हरिप्रिया ने कांग्रेस उम्मीदवार दुलु अहमद को 8,908 वोटों के अंतर से हराया, इसमें AGP फिर से तीसरे स्थान पर रही, और मौजूदा तृणमूल कांग्रेस उम्मीदवार द्विपेन पाठक चौथे स्थान पर रहे. 2021 में, सुमन हरिप्रिया ने अपनी सीट बरकरार रखी और असम जातीय परिषद (AJP) के उम्मीदवार दुलु अहमद को हराया, इस बार तो और भी बड़े अंतर से, यानी 14,368 वोटों से. इसमें कांग्रेस उम्मीदवार तीसरे स्थान पर रहे.
पिछले हाजो विधानसभा क्षेत्र में, लोकसभा चुनावों के दौरान बढ़त बार-बार बदलती रही. 2009 में, कांग्रेस ने BJP पर 97 वोटों की मामूली बढ़त बनाई थी. 2014 में यह बढ़त पलट गई, जब BJP ने कांग्रेस पर 7,131 वोटों की बढ़त बना ली. 2019 में कांग्रेस ने फिर वापसी की और BJP पर 3,594 वोटों की बढ़त हासिल कर ली. हाजो-सुआलकुची क्षेत्र में, 2024 में BJP की सहयोगी AGP ने कांग्रेस के मुकाबले 14,364 वोटों की बढ़त बनाई.
हाजो-सुआलकुची सीट पर 2026 के विधानसभा चुनावों के लिए अंतिम मतदाता सूची में 194,081 योग्य मतदाता थे, जो 2024 के 192,840 पंजीकृत मतदाताओं की तुलना में थोड़ी बढ़ोतरी दिखाता है. इससे पहले के आंकड़े 2021 में 177,548, 2019 में 169,489, 2016 में 154,394, 2014 में 144,799 और 2011 में 138,141 थे. मतदाताओं की भागीदारी लगातार ऊंची रही है- 2011 में 78.44 प्रतिशत, 2014 में 81.37 प्रतिशत, 2016 में 87.25 प्रतिशत, 2019 में 83.17 प्रतिशत, 2021 में 85.88 प्रतिशत और 2024 में 83.12 प्रतिशत.
उपलब्ध आंकड़ों के आधार पर जनसांख्यिकी, जो मुख्य रूप से 2011 की जनगणना के अनुपातों पर आधारित है और क्षेत्र तथा परिसीमन परिवर्तनों के अनुसार समायोजित की गई है, यह दर्शाती है कि यहां हिंदू बहुमत के साथ-साथ मुसलमानों की भी अच्छी-खासी मौजूदगी है. इसके अलावा यहां अनुसूचित जातियों की भी उल्लेखनीय आबादी है, जबकि अनुसूचित जनजातियों की मौजूदगी बहुत कम है. इस निर्वाचन क्षेत्र में असमिया और बंगाली बोलने वाले समुदायों का मिश्रण है, साथ ही यहां कृषि-आधारित समूह भी रहते हैं, जो इस क्षेत्र के ग्रामीण स्वरूप को बनाए रखने में योगदान देते हैं. ऐसा प्रतीत होता है कि परिसीमन और हालिया बदलावों के कारण, पुनर्गठित सीट में मुस्लिम मतदाताओं का प्रभाव कुछ कम हुआ है.
हाजो-सुआलकुची निर्वाचन क्षेत्र मध्य असम के कामरूप जिले के कुछ हिस्सों को कवर करता है. यह क्षेत्र ब्रह्मपुत्र नदी के उत्तरी तट पर स्थित समतल जलोढ़ मैदानों से बना है, जिसके बीच-बीच में आर्द्रभूमियां, 'बील' (झीलें) और हल्की ऊंची-नीची जमीनें भी मौजूद हैं. यहां की जमीन खेती-बाड़ी, मछली पालन और कुछ हद तक बागवानी के लिए उपयुक्त है, लेकिन ब्रह्मपुत्र नदी और उसकी सहायक नदियों में आने वाली मौसमी बाढ़ का खतरा यहां हमेशा बना रहता है. हाजो-सुआलकुची में लोगों की आजीविका मुख्य रूप से धान की खेती, वेटलैंड्स (नमभूमि) में मछली पकड़ने, छोटे-मोटे व्यापार, कृषि से जुड़ी गतिविधियों और पारंपरिक रेशम बुनाई पर निर्भर करती है, विशेष रूप से सुआलकुची में. यहां के बुनियादी ढांचे में राष्ट्रीय राजमार्ग 27 के माध्यम से सड़क संपर्क शामिल है, साथ ही कई राज्य राजमार्ग भी हैं जो आस-पास के क्षेत्रों को जोड़ते हैं. रेल सुविधा गुवाहाटी या रंगिया जैसे आस-पास के स्टेशनों पर उपलब्ध है (गांव के आधार पर, ये स्टेशन लगभग 20-30 किमी दूर हैं); इसके अलावा, यहां बुनियादी सुविधाएं भी मौजूद हैं और ग्रामीण सड़कों, सिंचाई तथा स्थानीय बाजारों के विकास का काम भी लगातार जारी है.
हाजो और सुआलकुची इस निर्वाचन क्षेत्र के मुख्य कस्बे हैं. गुवाहाटी यहां से दक्षिण की ओर लगभग 25-35 किमी, नलबाड़ी पश्चिम की ओर लगभग 25-30 किमी, और रंगिया उत्तर-पश्चिम की ओर लगभग 20-25 किमी दूर स्थित है. राज्य की राजधानी, दिसपुर, यहां से दक्षिण की ओर लगभग 25-35 किमी की दूरी पर है. यह निर्वाचन क्षेत्र दक्षिण दिशा में मेघालय की सीमा के काफी करीब स्थित है. स्थानीय स्तर पर आवागमन मुख्य रूप से सड़क परिवहन (बसों, ऑटो और निजी वाहनों के माध्यम से) द्वारा होता है, जिसे आस-पास के स्टेशनों से उपलब्ध रेल संपर्कों से भी सहायता मिलती है.
हाजो-सुआलकुची की एक समृद्ध ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत है जो ब्रह्मपुत्र घाटी से जुड़ी है, जिसमें असमिया परंपराओं और हिंदू तथा मुस्लिम विरासत का मेल है. हाजो शहर 'हाजो पोवा मक्का' के लिए प्रसिद्ध है, जो एक अनोखा तीर्थ स्थल है और जिसे हिंदू तथा मुस्लिम दोनों ही पूजते हैं, यह अपने प्राचीन मंदिरों और वैष्णव सत्रों (मठों) के लिए भी जाना जाता है. सुआलकुची अपनी पारंपरिक मूगा और एरी रेशम बुनाई के कारण "भारत के रेशम गांव" (Silk Village of India) के रूप में विख्यात है. यह क्षेत्र ब्रह्मपुत्र नदी प्रणाली और बाढ़-संभावित 'बीलों' (झीलों) के निकट होने के लिए भी जाना जाता है, जो यहां के स्थानीय जीवन और आजीविका को प्रभावित करते हैं.
हालांकि हाल के चुनावों में BJP ने अच्छा प्रदर्शन किया है, लेकिन उसकी कोई स्पष्ट बढ़त या दबदबा देखने को नहीं मिला है. ऐसा लगता है कि मुस्लिम वोटों ने उसे ऐसा करने से रोक रखा था. दुलु अहमद ने कांग्रेस और AJP, दोनों के ही हिस्से के तौर पर अच्छा प्रदर्शन किया था, वे 2016 और 2021 में दूसरे स्थान पर रहे थे, लेकिन 2024 में, इस पुनर्गठित निर्वाचन क्षेत्र में, वे केवल 2,956 वोट ही हासिल कर पाए. उस वर्ष कोई अन्य मुस्लिम उम्मीदवार मैदान में न होने के कारण, ऐसा प्रतीत होता है कि अब इस क्षेत्र में मुस्लिम वोट कोई खास मायने नहीं रखते. 2024 में AGP ने कांग्रेस के मुकाबले आसानी से बढ़त बना ली थी, और 2026 में भी मुकाबला AGP बनाम कांग्रेस के बीच ही है. AGP ने BJP के नेतृत्व वाले सत्ताधारी गठबंधन की ओर से प्रकाश चंद्र दास को अपना उम्मीदवार बनाया है, जबकि कांग्रेस की ओर से उन्हें चुनौती देने के लिए नंदिता दास मैदान में हैं. तृणमूल कांग्रेस की ओर से रोजी अहमद चुनावी दौड़ में शामिल हैं, जबकि दो निर्दलीय उम्मीदवार, राजू पटवारी और सिद्धार्थ दास, भी इस मुकाबले को और भी दिलचस्प बनाने के लिए मैदान में उतरे हैं. यह मुकाबला मुख्य रूप से AGP बनाम कांग्रेस के बीच ही होने की उम्मीद है, जो काफी कड़ा और रोमांचक हो सकता है.
(अजय झा)
Dulu Ahmed
ASMJTYP
Anowar Hussain(ganesh)
INC
Md Intajor Rahaman
AIMF
Nota
NOTA
Jaideep Talukdar
IND
Mon Kashyap
IND
Prabhat Kalita
IND
Md Safiqul Hoque S K
IND
Assembly Election Exit Poll 2026: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के दूसरे और अंतिम चरण का मतदान 29 अप्रैल को खत्म होने के बाद सभी की नजरें एग्जिट पोल पर टिक रहेंगी. पांचों चुनावी राज्यों- पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, केरल, असम और पुडुचेरी में रिकॉर्ड मतदान ने मुकाबले को और रोचक बना दिया है, जिस कारण लोग एग्जिट पोल्स का उत्सुकता के साथ इंतजार कर रहे हैं.
असम चुनाव के बीच सियासी पारा और भी गरमा गया है. सवाल यह है कि इस बार असम में किसकी सरकार बनेगी? मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा या कांग्रेस नेता गौरव गोगोई?
Assembly Election Updates: असम, केरल और पुडुचेरी में चुनाव के बाद अब पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु में विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक सरगर्मी तेज हैं. पश्चिम बंगाल की 294 सदस्यीय विधानसभा के लिए 23 अप्रैल और 29 अप्रैल को वोट डाले जाएंगे. जबकि तमिलनाडु की सभी 234 विधानसभा सीटों पर 23 अप्रैल को वोटिंग होगी. बंगाल में चुनावी पारा चढ़ने के बीच ममता बनर्जी की अगुवाई वाली तृणमूल कांग्रेस (TMC) को झटका लगा है. बंगाल के अल्पसंख्यक बहुल मुर्शिदाबाद जिले की जलांगी विधानसभा सीट से TMC विधायक अब्दुर रज्जाक ने गुरुवार को पार्टी छोड़ने का ऐलान किया है.
देश के चार राज्य और एक केंद्र शासित प्रदेश में हो रहे चुनावों में हर मुख्यमंत्री सत्ता में वापसी चाहता है. चुनौती तो केरलम में पी. विजयन के सामने भी है, लेकिन ममता बनर्जी की चुनौती सबसे बड़ी नजर आ रही है - हिमंता बिस्वा सरमा हों या एमके स्टालिन वे दोनों भी मुख्यमंत्री आगे भी बने रहना चाहते हैं.
असम के करीमगंज (नॉर्थ) विधानसभा क्षेत्र के एक बूथ पर झड़प के बाद चुनाव आयोग ने शनिवार को दोबारा मतदान कराने का आदेश दिया है. यह फैसला चुनावी गड़बड़ी के चलते लिया गया है. हिंसा के दौरान दर्जन भर से ज्यादा लोग घायल हो गए थे.
असम के सियासी इतिहास में पहली बार रिकॉर्ड वोटिंग हुई है. असम में इस बार 85.89 फीसदी मतदान हुआ है, जो पिछले चुनाव से करीब साढ़े तीन फीसदी ज्यादा है. असम में सत्ता का खेल सात से 8 फीसदी वोट बढ़ने या फिर घटने पर होता रहा है. इस बार का वोटिंग पैटर्न क्या संकेत दे रहा है?
असम, केरलम और पुडुचेरी में विधानसभा चुनाव के लिए मतदान समाप्त हो गया. पुडुचेरी में 89.87 फीसदी, असम में 85.91 फीसदी और केरलम में 78.27 फीसदी मतदान दर्ज किया गया. तीनों जगह बंपर वोटिंग हुई.
दक्षिण से लेकर पूरब तक 3 राज्यों में आज जनादेश का दिन है...और तीनों राज्यों में जबरदस्त वोटिंग हो रही है..असम में दोपहर 3 बजे तक 75.91 फीसदी मतदान हो चुका है..आप समझ सकते हैं कि यही ट्रेंड रहा तो वहां पोलिंग कितनी फीसदी तक हो सकती है..पुडुचेरी में भी 72.40 फीसदी मतदान दोपहर 3 बजे तक हुआ..केरल में दोपहर 3 बजे तक 62.71 फीसदी वोटिंग हुई है.
भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन ने अपने ताजा इंटरव्यू में चुनावी राज्यों बंगाल, असम, केरलम, तमिलनाडु और वहां के मुद्दों पर खुलकर चर्चा की. नबीन ने कहा कि बीजेपी शुरू से एक पॉलिसी पर काम करती आई है कि हम ‘राष्ट्र प्रथम’ की बात करते हैं. बीजेपी अध्यक्ष ने साथ ही कहा कि हम सांस्कृतिक विरासत को बढ़ाने वाले लोग हैं. देखें बातचीत.
Assam Assembly Election Voting: असम में आज विधानसभा चुनाव के लिए वोटिंग हो रही है. इस बीच मुख्यमंत्री और जालुकबारी से उम्मीदवार हिमंत बिस्वा सरमा ने गुवाहाटी के मां कामाख्या मंदिर में पूजा-अर्चना की. इस दौरान उनकी पत्नी भी उनके साथ मौजूद रहीं और दोनों ने मंदिर में विधिवत पूजा की.