केंद्रीय मंत्री प्रल्हाद जोशी ने शिक्षा मंत्रालय की जिम्मेदारी संभाल ली है. अधिकारियों के अनुसार, उन्हें शिक्षा मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया है. वह पहले से ही उपभोक्ता मामले, खाद्य और सार्वजनिक वितरण मंत्रालय की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं. शिक्षा मंत्रालय का कार्यभार संभालने के बाद प्रह्लाद जोशी के सामने कई अहम चुनौतियां होंगी. इनमें शिक्षा व्यवस्था में सुधार, परीक्षा प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी बनाना और छात्रों का भरोसा मजबूत करना प्रमुख हैं.
नीट को लेकर चल रहा था विवाद
जोशी का यह दायित्व ऐसे समय में आया है, जब शिक्षा क्षेत्र में परीक्षा व्यवस्था और नीतियों को लेकर कई मुद्दों पर चर्चा चल रही है. अब सभी की नजरें इस बात पर होंगी कि नए शिक्षा मंत्री इन चुनौतियों से किस तरह निपटते हैं. प्रह्लाद जोशी इससे पहले केंद्र सरकार में कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभाल चुके हैं. शिक्षा मंत्रालय की नई जिम्मेदारी के साथ अब वह देश की शिक्षा व्यवस्था से जुड़े बड़े फैसलों में अहम भूमिका निभाएंगे.
पहले ही दिन बुला ली बैठक
उन्होंने आज यानी रविवार को शिक्षा मंत्री का पद संभाल लिया है. इस मौके पर उन्होंने अधिकारियों के साथ बैठक भी की. बता दें कि उनके पास पहले से मौजूद मंत्रालयों की भी जिम्मेदारी बनी रहेगी.
बीजेपी के अनुभवी नेता में शामिल है नाम
बता दें कि जोशी का नाम बीजेपी के अनुभवी नेता के तौर पर लिया जाता है. वह लंबे समय तक RSS से जुड़े रहे हैं. ऐसे में संगठन में उनकी अच्छी पकड़ मानी जाती है. उन्होंने अपनी राजनीति की शुरुआत कर्नाटक के धारवाड़ जिले से की थी.
पांच बार रहे हैं सांसद
साल 2004 में वह पहली बार धारवाड़ से जीतकर लोकसभा पहुंचे थे. इसके बाद उन्होंने कभी हार नहीं मानी और पांच चुनाव में लगातार जीत हासिल की है. वह पिछले 22 साल से लोकसभा सांसद हैं. लेकिन अब उन्हें ऐसी जिम्मेदारी मिली है जिससे लाखों छात्रों का भविष्य जुड़ा है.
बीते दिन मिली थी जिम्मेदारी
बता दें कि राष्ट्रपति की ओर से पूर्व शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा स्वीकार किए जाने के बाद प्रधानमंत्री की सलाह पर प्रह्लाद जोशी को शिक्षा मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार दिया गया है. कार्यभार संभालने के बाद प्रह्लाद जोशी ने तुरंत ही शिक्षा मंत्रालय के कामकाज से जुड़े वरिष्ठ अधिकारियों से बातचीत की.
सोच-समझकर दी जानकारी
बता दें कि जोशी को यह जिम्मेदारी सरकार ने सोच-समझकर दी है. वह साल 2012 में कर्नाटक में बीजेपी के अध्यक्ष के रूप में भी काम कर चुके हैं. फिर साल 2014 के बाद उन्हें लोकसभा में अलग-अलग संसदीय समितियों का अध्यक्ष बनाया गया. इसके बाद साल 2019 में उन्हें संसदीय कार्य, कोयला और खनन मंत्रालय की जिम्मेदारी मिली. जब सरकार को तीसरी बार जीत मिली तो, उन्हें उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक विवरण, नवीव और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय का जिम्मा मिला.