पूर्व केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद शनिवार को जयपुर में छात्रों में खुशी का माहौल देखने को मिला. छात्रों ने इसे अपने आंदोलन की 'नैतिक' जीत बताया. 20 जुलाई को छात्रों के 'संसद चलो' मार्च के दौरान दिल्ली में पुलिस की बर्बरता और ज़रूरत से ज़्यादा बल प्रयोग के आरोप लगे, जिसकी जयपुर सहित कई जगहों पर बहुत निंदा हुई. सोशल मीडिया, खासकर इंस्टाग्राम पर जो वीडियो आए उसने राजस्थान सहित देश के कई हिस्सों में विरोध के स्वर को और तेज़ कर दिया.
जयपुर के मशहूर पत्रिका गेट, शहीद स्मारक और राजस्थान यूनिवर्सिटी सहित कई जगहों पर भी पेपर लीक मामले को लेकर विरोध प्रदर्शन हुए थे. केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर कई दिनों तक लोग पत्रिका गेट के बाहर जुटे रहे. प्रधान के इस्तीफ़े से पहले, दिन भर 'जेन ज़ी' प्रदर्शनकारियों ने कई नारे लगाए.
इनमें से कुछ नारे बहुत ही रचनात्मक और ज़मीनी थे, जिनमें शिक्षा मंत्री की तीखी आलोचना की गई थी. प्रदर्शनकारियों ने धर्मेंद्र प्रधान पर प्रतियोगी परीक्षाओं को सही ढंग से आयोजित न कराने का आरोप लगाया. प्रदर्शनकारियों ने प्रधान को अक्षम और युवा छात्रों के जीवन और करियर के साथ खिलवाड़ करने वाला बताया.
जमकर मना जश्न
रात के समय नाचने-गाने के दृश्य भी देखने को मिलते थे, जहां प्रदर्शनकारी अपना और अलग-अलग जगहों से जुड़ने वाले लोगों का मनोरंजन करते थे. विरोध प्रदर्शन अक्सर रात 2-3 बजे तक चलते थे और यही माहौल रहता था. बिना अनुमति के विरोध प्रदर्शन होने के कारण पुलिस ने पत्रिका गेट के बाहर की जगह खाली करने को कई बार कहा लेकिन प्रदर्शनकारियों ने इस पर ध्यान नहीं दिया.
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राजधानी दिल्ली में पुलिस की बर्बरता के दृश्यों को देखकर लोगों में गहरा आक्रोश था, जिससे युवा और बुजुर्ग सभी इस प्रदर्शन में शामिल हो गए. इसमें जयपुर के आम लोग, छोटे बच्चे, उनके माता-पिता, 'जेन ज़ी' और सामाजिक अधिकार समूहों के सदस्य बड़ी संख्या में शामिल हुए.
दिल्ली के जंतर-मंतर जैसा ही एक तरह का बेबाक अंदाज़ यहां भी साफ़ दिख रहा था. प्रधान के इस्तीफ़े की घोषणा वाले सोशल मीडिया पोस्ट से पहले जब इंडिया टुडे ग्रुप की टीम ने शनिवार को राजस्थान यूनिवर्सिटी का दौरा किया तो यूनिवर्सिटी के युवा छात्रों की एक भीड़ विरोध प्रदर्शन करती दिखी. वे तब तक प्रदर्शन जारी रखने पर अड़े थे जब तक धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा नहीं हो जाता. तीन दिन से अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठे छात्र नेता शुभम ने इंडिया टुडे से कहा, "जब तक शिक्षा मंत्री इस्तीफ़ा नहीं देते, मैं अपनी भूख हड़ताल जारी रखूंगा."
छात्रों में बंटी मिठाइयां
एक युवा छात्रा प्रदर्शनकारी ने कहा, "शिक्षा व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है. मैं महारानी कॉलेज से हूं. कॉलेज इंफ्रास्ट्रक्चर पर ध्यान नहीं देता, कई दिनों से क्लास नहीं हुई हैं, कॉलेज के वॉशरूम इतने गंदे और अस्वच्छ हैं कि छात्राएं उनका इस्तेमाल नहीं कर सकतीं. हम शिक्षा व्यवस्था में सुधारों के लिए प्रदर्शन कर रहे हैं, ताकि शिक्षा मंत्रालय को उस बुरी हालत के लिए जवाबदेह ठहराया जा सके जिसमें शिक्षा व्यवस्था अभी है."
शनिवार को मंत्री के इस्तीफ़े की घोषणा के बाद जयपुर में ज़बरदस्त जश्न मनाया गया; छात्रों ने मिठाइयां बांटीं और अपना आंदोलन इस उम्मीद के साथ खत्म किया कि प्रधान का पद छोड़ना शिक्षा के क्षेत्र में एक नए युग की शुरुआत होगी और दशकों से सुधार की मांग कर रहे इस सेक्टर में क्रांति लाएगी.