45 लाख रुपये सालाना पैकेज, मनचाही नौकरी और माइक्रोसॉफ्ट में अच्छा पद- कई लोगों के लिए यह करियर की बड़ी सफलता होती है. लेकिन कई लोगों के लिए ये केवल एक ऐसा सपना होता है जिसे वह हासिल करना चाहते हैं. ऐसा ही कुछ हुआ इस युवा इंजीनियर के साथ. उन्होंने यह नौकरी छोड़कर यूपीएससी की तैयारी करने का फैसला किया. इस घटना ने एक बार फिर यह सवाल उठाया है कि क्या सिर्फ पैसा ही करियर की असली संतुष्टि देता है. यह घटना सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बनी हुई है और लोग सफलता की परिभाषा पर अपनी राय दे रहे हैं.
क्यों छोड़ दी नौकरी?
एक यूजर विकास अल्विस की एक्स पोस्ट के मुताबिक, उनकी एक दोस्त ने 12वीं के बाद जेईई मेन की परीक्षा पास की और एनआईटी वारंगल के ईसीई ब्रांच में एडमिशन लिया. उन्होंने 2023 में बीटेक पूरा किया और माइक्रोसॉफ्ट में 45 लाख रुपये सालाना पैकेज पर नौकरी हासिल की. वह पढ़ाई में बहुत अच्छी थीं, लेकिन उन्होंने हाल ही में नौकरी छोड़ दी है ताकि अब वे पूरी तरह यूपीएससी की तैयारी कर सकें.
और किस चीज की उम्मीद?
इस जानकारी को शेयर करते हुए यूजर ने लिखा कि मेरी स्कूल की दोस्त ने जिसने 12वीं के बाद जेईई मेन की परीक्षा पास की और एनआईटी वारंगल में ईसीई सेक्शन में एडमिशन लिया. उसने साल 2023 में बीटेक की डिग्री हासिल की और 45 लाख साल की नौकरी हासिल की. वह हमेशा से ही पढ़ाई में बहुत अच्छी रही है.

लेकिन हाल ही में उसने 45 लाख रुपये के पैकेज और माइक्रोसॉफ्ट के अपने पद से इस्तीफा दे दिया और अब UPSC की तैयारी शुरू कर दी है. पोस्ट के लास्ट में उन्होंने सवाल किया है कि अगर 45 लाख रुपये साल की नौकरी और माइक्रोसॉफ्ट जैसी कंपनी में रुकने के लिए पर्याप्त नहीं है, तो वास्तव में लोगों को शांति और संतुष्टि कहां और किससे मिलती है. यह फैसला एक सुनहरे पिंजरे को छोड़कर खुले आसमान की ओर उड़ने जैसा है. इसने कई लोगों को हैरान किया, लेकिन साथ ही उनके इस साहस की खूब सराहना भी हुई.
क्यों कोई छोड़ेगा 45 लाख की नौकरी?
पोस्ट वायरल होने के बाद कई यूजर्स इसपर अपनी राय दे रहे हैं. एक यूजर ने लिखा कि ऐसे फैसले हर व्यक्ति के लिए अलग-अलग होते हैं और पोस्ट करने वाला भी इस बात से सहमत था कि अच्छी नौकरी छोड़ना साहस का काम है. एक दूसरे यूजर का कहना है कि यह फैसला सिर्फ पैसे से नहीं, बल्कि परवरिश से भी जुड़ा होता है. उनके अनुसार, बचपन से ही माता-पिता और समाज सरकारी नौकरी को ज्यादा महत्व देते हैं जिससे कई लोग अच्छी निजी नौकरी होने के बावजूद सरकारी सेवा की ओर रुख करते हैं.