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रिटायर्ड नहीं, सिटिंग जजों से हो जांच! 26वें दिन भी सुलग रहा रांची में छात्रों का गुस्सा, रखी नई मांग

आंदोलनकारी अभ्यर्थियों की सबसे प्रमुख मांग परीक्षाओं में हुई धांधली की CBI जांच कराने की है. छात्रों का आरोप है कि हेमंत सोरेन सरकार मामले की निष्पक्ष जांच से पीछे हट रही है और सीबीआई को मामला सौंपने से बच रही है. अब अभ्यर्थियों ने सरकार की मंशा परखने के लिए एक नया और कड़ा विकल्प सामने रख दिया है. पढ़‍िए- अनशनकार‍ियों से पूरी बातचीत...

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बेमियादी भूख हड़ताल पर बैठे सविता और रूपेश से हुई खास बातचीत
बेमियादी भूख हड़ताल पर बैठे सविता और रूपेश से हुई खास बातचीत

रांची के जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में JPSC और JSSC भर्ती धांधली के खिलाफ छात्रों का महाआंदोलन आज 26वें दिन भी जारी है. वहीं, अन्न-जल त्यागकर बेमियादी भूख हड़ताल पर बैठे सविता और रूपेश के आमरण अनशन का आज 16वां दिन है. गिरते स्वास्थ्य और बिगड़ती स्थिति के बीच आजतक की टीम ने अनशन स्थल पर पहुंचकर अभ्यर्थियों से सीधी बातचीत की.

छात्रों का साफ कहना है कि जब तक उनकी मांगों पर सरकार कोई ठोस और लिखित फैसला नहीं लेती, तब तक यह आंदोलन किसी भी सूरत में खत्म नहीं होगा.

CBI जांच का विकल्प: 5 सिटिंग जजों से हो न्यायिक जांच
आंदोलनकारी अभ्यर्थियों की सबसे प्रमुख मांग परीक्षाओं में हुई धांधली की CBI जांच कराने की है. छात्रों का आरोप है कि हेमंत सोरेन सरकार मामले की निष्पक्ष जांच से पीछे हट रही है और सीबीआई को मामला सौंपने से बच रही है. अब अभ्यर्थियों ने सरकार की मंशा परखने के लिए एक नया और कड़ा विकल्प सामने रख दिया है.

अनशन पर बैठे रूपेश ने साफ शब्दों में कहा कि अगर सरकार को सीबीआई जांच कराने में कोई परहेज है, तो हमें हाईकोर्ट के 5 सिटिंग जजों की निगरानी में न्यायिक जांच भी मंजूर है. लेकिन हमारी शर्त साफ है कि जांच रिटायर्ड जजों की कमेटी से नहीं, बल्कि वर्तमान में कार्यरत (Sitting) जजों से होनी चाहिए ताकि दूध का दूध और पानी का पानी हो सके.

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'सिर्फ नियुक्तियां रद्द करना काफी नहीं, पूरी अधिसूचना वापस ले सरकार'
धरने पर बैठे अभ्यर्थियों ने सरकार के हालिया फैसलों पर भी गंभीर सवाल उठाए हैं. अभ्यर्थी सव‍िता का कहना है कि सरकार ने केवल 2,000 के करीब चयनित लोगों की नियुक्ति रद्द कर पल्ला झाड़ने की कोशिश की है. वे अभ्यर्थी अब संगठित होकर हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट जाने की तैयारी में हैं.

छात्रों को डर है कि अगर अदालत से उन नियुक्तियों पर स्टे (Stay) या कोई अंतरिम राहत मिल जाती है, तो मामला फिर पुरानी स्थिति में जाकर अटक जाएगा और 26 दिनों के इस आंदोलन का कोई नतीजा नहीं निकलेगा.

इसीलिए छात्रों की मांग है कि सरकार सिर्फ नियुक्तियां रद्द करने तक सीमित न रहे. विवादित परीक्षाओं की पूरी मूल अधिसूचना (Original Notification) को ही औपचारिक रूप से वापस लिया जाए. साथ ही पूरी भर्ती प्रक्रिया को सिरे से रद्द कर नए सिरे से पारदर्शी परीक्षा कराई जाए.

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