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साह‍िल वाकोडे सुसाइड केस के बाद IIT बॉम्बे का फैसला, 30 एड-हॉक काउंसलर्स के पदों पर निकाली भर्ती

बीटेक छात्र की दर्दनाक मौत और छात्रों के भारी आक्रोश के बाद IIT बॉम्बे प्रशासन ने बड़ा कदम उठाया है. संस्थान के स्टूडेंट वैलनेस सेंटर में 30 नए काउंसलर्स (26 स्टूडेंट और 4 सीनियर काउंसलर) की तत्काल भर्ती की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है. इसके साथ ही कैंपस में मेंटल हेल्थ सपोर्ट और छात्र कल्याण से जुड़े कई नए ढांचागत बदलाव किए जा रहे हैं. जान‍िए वो क्या हैं?

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    IIT बॉम्बे ने साहिल की मौत पर पहले के दावे वापस लिया (Photo: ITG)
IIT बॉम्बे ने साहिल की मौत पर पहले के दावे वापस लिया (Photo: ITG)

देश के सबसे प्रतिष्ठित प्रौद्योगिकी संस्थानों में शुमार IIT बॉम्बे के भीतर एक छात्र की दर्दनाक मौत और उसके बाद भड़के छात्र आंदोलन ने आखिरकार संस्थान प्रशासन को नींद से जगा ही दिया. बीटेक सेकेंड ईयर के छात्र साहिल वाकोडे की कथित आत्महत्या और उसके बाद पूरे कैंपस में फूटे छात्रों के आक्रोश के सामने झुकते हुए आईआईटी बॉम्बे प्रशासन ने मेंटल हेल्थ सिस्टम को मजबूत करने के लिए बड़े कदम उठाने का ऐलान किया है.

इसी कड़ी में संस्थान के 'स्टूडेंट वैलनेस सेंटर' (SWC) ने 30 एड-हॉक काउंसलर्स के पदों पर तुरंत भर्ती का नोटिफिकेशन जारी कर दिया है. आइए जानते हैं कि छात्र मौत के बाद आईआईटी कैंपस में क्या कुछ बदला है और प्रशासन का यह कदम कितना कारगर साबित होगा...

14 हजार छात्रों पर नाममात्र के काउंसलर, मौत के बाद टूटा सब्र

इस पूरे बवाल की नींव 18 सितंबर को पड़ी, जब मिड-सेमेस्टर परीक्षा के दौरान फोन इस्तेमाल करने का आरोप लगने के कुछ ही घंटों बाद छात्र साहिल वाकोडे की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई. इस घटना ने पूरे कैंपस को हिलाकर रख दिया. घटना के बाद आक्रोशित छात्रों ने आईआईटी बॉम्बे के डायरेक्टर प्रोफेसर शिरीष केदारे के सामने मांगों की लंबी फेहरिस्त रख दी.

छात्रों ने सीधा आरोप लगाया कि करीब 14,000 छात्र-छात्राओं की भारी-भरकम संख्या के मुकाबले संस्थान का 'स्टूडेंट वैलनेस सेंटर' (SWC) पूरी तरह से बदहाल था और यहाँ बेहद सीमित काउंसलर मौजूद थे, जो छात्रों के मानसिक तनाव को संभालने में नाकाम साबित हो रहे थे.

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15 अक्टूबर से ही जॉइन कर सकेंगे 30 नए काउंसलर

छात्रों के उग्र प्रदर्शन और साल भर में सामने आईं ऐसी ही दुखद घटनाओं के बाद प्रशासन ने भर्ती प्रक्रिया की गति बढ़ा दी है.  यहां कुल 30 पदों में से 26 स्टूडेंट काउंसलर और 4 सीनियर काउंसलर एडहॉक पर नियुक्त किए जाएंगे. चुनिंदा उम्मीदवारों की जॉइनिंग 15 अक्टूबर से ही शुरू हो सकती है. सीनियर काउंसलर्स के लिए न्यूनतम 10 साल और स्टूडेंट काउंसलर्स के लिए 2 साल का अनुभव जरूरी रखा गया है. क्लिनिकल, काउंसलिंग या सोशल साइकोलॉजी में 55% अंकों के साथ एमए/एमएससी की डिग्री अनिवार्य है.

संस्थान ने साफ किया है कि अलग-अलग सामाजिक और भाषाई पृष्ठभूमि से आने वाले छात्रों की सहूलियत के लिए चयन में हिंदी और अंग्रेजी के अलावा अन्य भारतीय भाषाओं में पारंगत अभ्यर्थियों को प्राथमिकता दी जाएगी.

मेंटल हेल्थ ढांचे में और क्या-क्या बदल रहा है?

केवल काउंसलर्स की भर्ती ही नहीं, बल्कि आईआईटी बॉम्बे प्रशासन ने छात्र कल्याण के लिए कई अन्य सुधारात्मक प्रशासनिक बदलावों की भी घोषणा की है. इनमें 'डीन ऑफ स्टूडेंट अफेयर्स' के तहत एक अतिरिक्त एसोसिएट डीन तैनात किया जाएगा, जिनका मुख्य काम सीधे तौर पर छात्र कल्याण की निगरानी करना होगा.

इसके अलावा संकट के समय छात्रों तक तुरंत मदद पहुंचाने के लिए सभी हॉस्टलों में 'स्टूडेंट वैलनेस सेक्रेटरी' नियुक्त किए जाएंगे. अब सवाल यह है कि भले ही काउंसलर्स की संख्या बढ़ाना निश्चित तौर पर एक राहत भरा कदम है, लेकिन क्या केवल नए पदों की घोषणा कर देने भर से हॉस्टल के कमरों में घुटते मानसिक तनाव और कड़े अकादमिक दबाव को खत्म किया जा सकेगा? जब तक देश के शीर्ष इंजीनियरिंग संस्थानों में परीक्षा के दबाव, ग्रेडिंग सिस्टम और छात्रों की काउंसलिंग को लेकर सोच में बुनियादी बदलाव नहीं आएगा, तब तक यह लड़ाई अधूरी ही रहेगी.

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