अगस्त का महीने है और त्योहारों का सीजन कुछ ही दिनों में स्टार्ट होने वाला है. तो सीजनल हायरिंग वापस से ट्रेंड में आने वाली है. ऐसे में अगर आप भी नौकरी करने की प्लानिंग कर रहे हैं, तो ये समय आपके लिए बेहद खास हो सकता है. हर त्योहारी सीजन में भारत के रिटेल और लॉजिस्टिक्स सेक्टर में हजारों अस्थायी नौकरियां निकलती है. हालांकि, अलग-अलग क्षेत्रों में मिलने वाली सैलरी में काफी अंतर होता है.
टीमलीज की 2026 की फेस्टिव सीजन वर्कफोर्स रिपोर्ट के अनुसार, ई-कॉमर्स और लॉजिस्टिक्स कंपनियों में काम करने वालों को संगठित रिटेल और एफएमसीजी की तुलना में ज्यादा सैलरी मिलने की संभावना है.
यह रिपोर्ट ऐसे समय आई है जब कंपनियां त्योहारी खरीदारी के व्यस्त सीजन की तैयारी कर रही हैं. ऑनलाइन शॉपिंग, क्विक कॉमर्स और रिटेल कंपनियों के कारण इस दौरान देशभर में बड़ी संख्या में अस्थायी नौकरियां आने की उम्मीद है.
ई-कॉमर्स सैलरी के मामले में सबसे आगे
रिपोर्ट के मुताबिक, प्रमुख त्योहारी भर्ती क्षेत्रों में ई-कॉमर्स, क्विक कॉमर्स और लॉजिस्टिक्स में औसत मासिक सीटीसी (CTC) सबसे अधिक 24,266 रुपये है. ब्यूटी और पर्सनल केयर सेक्टर में औसत मासिक सीटीसी 22,937 रुपये है, जबकि फैशन और ड्रेस के सेक्टर में यह 22,853 रुपये है. कंज्यूमर ड्यूरेबल्स और एफएमसीडी कंपनियां भी 22,664 रुपये के साथ इससे कुछ ही पीछे हैं. रिपोर्ट के मुताबिक, संगठित खुदरा क्षेत्र में औसत मासिक CTC 19,944 रुपये है. वहीं, एफएमसीजी क्षेत्र में औसत मासिक सैलरी करीब 16,811 रुपये है, जो सभी विश्लेषण किए गए क्षेत्रों में सबसे कम है.
क्यों अलग है सैलरी?
सैलरी में यह अंतर बताता है कि ऑनलाइन शॉपिंग और क्विक डिलीवरी के तेजी से बढ़ने से कर्मचारियों की मांग में भी तेजी से इजाफा हुआ है. रिपोर्ट के अनुसार, त्योहारी सीजन में ई-कॉमर्स, क्विक कॉमर्स और लॉजिस्टिक्स कंपनियों को बड़ी संख्या में कर्मचारियों की जरूरत होती है. इसी वजह से इन क्षेत्रों में सैलरी कई पारंपरिक रिटेल सेक्टरों की तुलना में ज्यादा रहता है.
बढ़ सकती है सैलरी लेकिन हो सकती है ये परेशानी
हालांकि, टीमलीज के उम्मीद है कि त्योहारी सीजन में बढ़ती हायरिंग से 2026 की दूसरी छमाही में कुल CTC में 8 से 10 प्रतिशत तक बढ़ोतरी हो सकती है. हालांकि, इसका पूरा फायदा कर्मचारियों की मासिक टेक-होम सैलरी में नहीं दिखेगा. रिपोर्ट के मुताबिक, हालिया श्रम कानूनों में बदलाव के कारण नेट सैलरी में वास्तविक बढ़ोतरी करीब 5 से 8 प्रतिशत तक ही रहने की संभावना है, भले ही कंपनियां सैलरी पैकेज में बदलाव कर दें.
कर्मचारियों की एज भी हुई कम
बता दें कि रिपोर्ट में इस बात का भी खुलासा हुआ है कि त्योहारी सीजन में काम करने वाले कर्मचारियों की औसत उम्र कम हुई है. फ्रंटलाइन कर्मचारियों की औसत उम्र 2024 की दूसरी छमाही में 28.2 साल से घटकर 2025 की दूसरी छमाही में 26.7 साल हो गई. इससे पता चलता है कि कंपनियां मौसमी नौकरियों के लिए अब ज्यादा युवा कर्मचारियों को भर्ती कर रही हैं. वहीं, इसी दौरान औसत मासिक CTC में थोड़ी बढ़ोतरी हुई. यह 20,282 से बढ़कर ₹20,525 रुपये हो गया है.
सैलरी अब भी बड़ा कारण है
हालांकि, सैलरी अभी भी एक बड़ा कारण है, रिपोर्ट बताती है कि त्योहारी सीजन में सबसे ज्यादा नौकरियां ऑनलाइन शॉपिंग से जुड़े क्षेत्रों में मिल रही हैं. गोदामों, डिलीवरी और क्विक कॉमर्स जैसी कंपनियों में मौसमी नौकरियों की संख्या सबसे ज्यादा है और यहां बेहतर सैलरी पैकेज भी मिल रहे हैं.
छात्रों, नए ग्रेजुएट्स और नौकरी की तलाश कर रहे लोगों के लिए 2026 में ज्यादा कमाई के लिहाज से ई-कॉमर्स, क्विक कॉमर्स और लॉजिस्टिक्स प्रमुख क्षेत्र बने रह सकते हैं.