काम के बढ़ते दबाव से परेशान एक कर्मचारी ने रेडिट पर लोगों से सलाह मांगी है. वह नौकरी छोड़ना चाहता है, लेकिन खुद इस्तीफा देने के बजाय चाहता है कि कंपनी उसे नौकरी से निकाल दे. उसकी इस पोस्ट के बाद सोशल मीडिया पर चर्चा शुरू हो गई है कि आखिर कुछ कर्मचारी इस्तीफा देने के बजाय बर्खास्त होना क्यों पसंद करते हैं. इसके पीछे नौकरी का तनाव, मिलने वाला मुआवजा और मौजूदा जॉब मार्केट में नई नौकरी मिलने की अनिश्चितता जैसे कई कारण हो सकते हैं. कर्मचारी ने रेडिट के r/QuitCorporate फोरम पर अपनी परेशानी बताते हुए पूछा कि वह अपने बॉस से खुद को नौकरी से निकालने के लिए कैसे कहे. उसने बताया कि वह एक बड़ी कंपनी में काम करता है, लेकिन अब वहां खुश नहीं है. हाल ही में उसने नई जिम्मेदारी मिली थी, लेकिन वह अब वह उसके लिए उम्मीद से कहीं ज्यादा मुश्किल होती जा रही है.
नई जिम्मेदारी ने बढ़ाया काम का दबाव
रेडिट पर किए गए पोस्ट में कर्मचारी ने अपनी स्थिति बताई है. उसने पोस्ट में लिखा कि वह एक बड़ी कंपनी में काम करता है, लेकिन काम बढ़ने और नई जिम्मेदारी की वजह से उसे मानसिक शांति नहीं मिल रही है. बॉस की उम्मीदों पर खड़ा उतरना उसके लिए मुश्किल होता जा रहा है. कर्मचारी को डर है कि वह अपने टारगेट और डेडलाइन कैसे पूरी करेगा. मीटिंग को लेकर भी उसके मन में तनाव रहता है. उसे यह चिंता भी है कि मौजूदा हालात का उसके करियर पर बुरा असर पड़ सकता है.

इस्तीफा नहीं, कंपनी से निकालने की उम्मीद
कर्मचारी का कहना है कि वह खुद इस्तीफा नहीं देना चाहता. इसकी एक वजह यह है कि नौकरी छोड़ने के बाद दूसरी नौकरी मिलने की गारंटी नहीं है. ऐसे में वह आर्थिक सुरक्षा को लेकर भी चिंतित है. उसने बताया कि अगर कंपनी उसे खुद नौकरी से निकालती है, तो उसे सेवरेंस पैकेज मिल सकता है. इससे उसे कुछ आर्थिक सहारा मिलेगा और वह तनावपूर्ण नौकरी से बाहर निकल सकेगा. इसी उम्मीद में उसने अपने बॉस से भी नौकरी से हटाए जाने की बात की थी. हालांकि, उसके मुताबिक, बॉस ने बताया कि कंपनी में छंटनी की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है और अब अगली प्रक्रिया के लिए उसे करीब एक साल इंतजार करना पड़ सकता है.
कम सैलरी चलेगी, लेकिन तनाव कम होना चाहिए
कर्मचारी ने अपनी पोस्ट में यह भी बताया कि वह भविष्य में कम सैलरी वाली नौकरी करने के लिए तैयार है, लेकिन उसे पीछे शर्त यही है कि काम का दबाव ज्यादा नहीं होना चाहिए और उसे मानसिक शांति मिले. उसके लिए अब सिर्फ ज्यादा कमाई ही प्राथमिकता नहीं है, बल्कि ऐसा काम भी जरूरी है जिसे वह बिना लगातार तनाव के कर सके.
सोशल मीडिया पर लोगों ने दी अलग-अलग सलाह
पोस्ट सामने आने के बाद लोगों ने इस स्थिति पर अलग-अलग राय दी. कुछ लोगों ने कहा कि कंपनी से निकाले जाने का इंतजार करने के बजाय कर्मचारी को अपने विकल्पों पर विचार करना चाहिए. वहीं, कुछ यूजर्स ने नौकरी और मानसिक शांति के बीच संतुलन बनाने की बात कही. हालांकि, यह मामला एक कर्मचारी की रेडिट पोस्ट पर आधारित है.