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क्यों इतना सटीक और अचूक है इजरायल का सर्जिकल स्ट्राइक सिस्टम?

इजरायल का सर्जिकल स्ट्राइक सिस्टम सटीकता के लिए मशहूर है क्योंकि यह मोसाद की गहरी जासूसी, AI-आधारित इंटेलिजेंस, स्टेल्थ फाइटर (F-35आई), प्रेसिजन बम (स्पाइस, GBU-28), टोमाहॉक मिसाइल और सैटेलाइट-ड्रोन सर्विलांस पर टिका है. खामेनेई पर हमला महीनों की प्लानिंग के बाद किया गया, जिसमें जमीन, हवा और अंतरिक्ष से एक साथ सामंजस्य बनाकर सटीक हमला किया गया.

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इजरायल ने ईरान पर हमले से पहले बड़ी तैयारी की थी. अमेरिका ने मदद की. (Photo: ITG)
इजरायल ने ईरान पर हमले से पहले बड़ी तैयारी की थी. अमेरिका ने मदद की. (Photo: ITG)

इजरायल का सर्जिकल स्ट्राइक सिस्टम दुनिया में सबसे सटीक माना जाता है क्योंकि यह खुफिया जानकारी, हाई-टेक मशीनें और लंबी प्लानिंग पर टिका है. मोसाद और आईडीएफ की मिलिट्री इंटेलिजेंस ने सालों तक दुश्मन देशों में जासूसी की. एजेंट भेजे हैं. हथियार छिपाए हैं. यह सिस्टम सिर्फ हवाई हमले नहीं करता, बल्कि जमीन से, हवा से और साइबर से एक साथ काम करता है. 

सटीकता की वजह से इजरायल छोटे लक्ष्यों को बिना ज्यादा नुकसान पहुंचाए मार गिराता है. ईरान पर हालिया हमलों में यह साफ दिखा कि महीनों की जासूसी और रीयल-टाइम डेटा से हमला इतना सटीक हुआ कि दुश्मन को जवाब देने का मौका ही नहीं मिला. इजरायल की सफलता का राज है – इंटेलिजेंस, टेक्नोलॉजी और स्पेशल फोर्सेज का परफेक्ट मेल.

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अमेरिका और इजरायल ने इतना सटीक हमला कैसे किया?

अमेरिका और इजरायल ने खामेनेई पर हमला महीनों की ज्वाइंट प्लानिंग से किया. दोनों देशों ने खुफिया जानकारी इकट्ठा की कि ईरान के बड़े नेता एक साथ मीटिंग में बैठेंगे. यह मौका टारगेट ऑफ ऑपर्च्युनिटी था. हमला सुबह 8:15 बजे दिन के उजाले में किया गया क्योंकि रात में ईरान की एयर डिफेंस ज्यादा सतर्क रहती है.

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अमेरिका ने टोमाहॉक क्रूज मिसाइलें और कम लागत वाले कामिकेज ड्रोन इस्तेमाल किए जबकि इजरायल ने F-35 स्टेल्थ फाइटर और GBU-28 जैसे बंकर बस्टर बम गिराए. कुल मिलाकर 200 से ज्यादा लड़ाकू विमानों ने 500+ टारगेट्स पर हमला किया. सटीकता इसलिए थी क्योंकि रीयल-टाइम इंटेलिजेंस से पता था कि मीटिंग कब और कहां हो रही है.

इजरायल और अमेरिका कौन सी तकनीकें इस्तेमाल कर रहे हैं?

दोनों देश हाई-टेक उपकरणों का इस्तेमाल करते हैं. F-35आई अदिर स्टेल्थ फाइटर रडार से बचकर घुसता है. स्पाइस और जेडीएएम जैसे प्रेसिजन गाइडेड बम जीपीएस जाम होने पर भी इमेज गाइडेंस से काम करते हैं. 

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अमेरिका टोमाहॉक क्रूज मिसाइलें इस्तेमाल करता है जो कम ऊंचाई पर उड़कर रडार से बचती हैं. दोनों देश AI-बेस्ड इंटेलिजेंस सिस्टम जैसे गॉस्पेल और लैवेंडर का इस्तेमाल करते हैं जो हजारों टारगेट्स को जल्दी पहचानते हैं. सैटेलाइट्स, ड्रोन और सिग्नल इंटरसेप्ट से रीयल-टाइम डेटा मिलता है.

खामेनेई को मारने के लिए किस तरह की तकनीक इस्तेमाल हुई?

खामेनेई को मारने के लिए प्रेसिजन गाइडेड बम और क्रूज मिसाइलों का इस्तेमाल हुआ. रिपोर्ट्स बताती हैं कि इजरायल ने खामेनेई के कॉम्प्लेक्स पर 30 बम गिराए, जिनमें GBU-28 जैसे लेजर गाइडेड पेनेट्रेटर बम शामिल थे. ये बम मजबूत इमारतों और अंडरग्राउंड कमरों को भेदते हैं. 

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Israel surgical strike system

अमेरिका ने कामिकेज ड्रोन से सपोर्ट दिया ताकि एयर डिफेंस को ओवरव्हेल्म किया जाए. हमला एक मीटिंग रूम पर फोकस था जहां खामेनेई और दूसरे नेता बैठे थे. महीनों की जासूसी से पता चला कि मीटिंग कब हो रही है. सटीक लोकेशन के लिए सैटेलाइट इमेजरी, ड्रोन सर्विलांस और ह्यूमन इंटेलिजेंस का इस्तेमाल हुआ.

इस हमले में कितना समय लगा?

पूरी प्लानिंग में कई महीने लगे हैं. अमेरिका और इजरायल ने महीनों से जॉइंट प्लानिंग की थी. लेकिन असली हमला बहुत तेज था – खुफिया जानकारी मिलते ही समय बदला गया. सुबह 8:15 बजे हमला किया गया. हमले की तैयारी में हजारों घंटे की सर्विलांस और सिग्नल इंटरसेप्ट शामिल थे. हमला खुद कुछ मिनटों में पूरा हुआ क्योंकि 200+ जेट्स और मिसाइलें एक साथ एक्टिवेट हुईं. खामेनेई की मीटिंग का मौका जानने के लिए लंबा इंतजार करना पड़ा था लेकिन हमला तेज और सटीक था.

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जमीन, आसमान और अंतरिक्ष से इस्तेमाल की गई तकनीक और सामंजस्य 

जमीन से (ग्राउंड लेवल): मोसाद के एजेंट्स ईरान में घुसकर ड्रोन, प्रेसिजन मिसाइलें और एक्सप्लोसिव सिस्टम छिपाकर रखते हैं. ये रिमोट से एक्टिवेट होते हैं. एयर डिफेंस या मिसाइल लॉन्चर को पहले मारते हैं. स्पेशल फोर्सेज और लोकल एजेंट्स रीयल-टाइम इंटेलिजेंस देते हैं.

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आसमान से (एयर लेवल): F-35 स्टेल्थ फाइटर और F-15आई जेट्स स्टेल्थ टेक्नोलॉजी से एयरस्पेस में घुसते हैं. ये प्रेसिजन बम जैसे स्पाइस, JDAM और GBU-28 गिराते हैं. कामिकेज ड्रोन और लॉन्ग-रेंज ड्रोन जैसे हेरॉन सर्विलांस और स्ट्राइक करते हैं. सब कुछ एक साथ सिंक्रोनाइज्ड होता है.

Israel surgical strike system

अंतरिक्ष से (स्पेस लेवल): इजरायल के ओफेक सीरीज के स्पाई सैटेलाइट्स हाई-रेजोल्यूशन इमेजरी देते हैं. ये दिन-रात मॉनिटरिंग करते हैं. बम डैमेज असेसमेंट भी देते हैं. अमेरिका के सैटेलाइट्स भी मदद करते हैं. सैटेलाइट डेटा से रीयल-टाइम लोकेशन पता चलती है और हमले की प्लानिंग होती है.

सभी लेवल का सामंजस्य कैसे होता है?

सब कुछ एक साथ काम करता है – जमीन के एजेंट्स लोकेशन देते हैं. सैटेलाइट्स इमेज भेजते हैं. ड्रोन कन्फर्म करते हैं और फिर एयरक्राफ्ट हमला करते हैं. AI सिस्टम डेटा एनालाइज करता है. यह मल्टी-डोमेन ऑपरेशन है जहां ग्राउंड, एयर और स्पेस का परफेक्ट कोऑर्डिनेशन होता है. इससे इजरायल और अमेरिका ने ईरान जैसे मजबूत देश पर सर्जिकल स्ट्राइक को इतना सफल बनाया.

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