इंस्टीट्यूट फॉर इंटेलिजेंस एंड स्पेशल ऑपरेशंस को मोसाद (MOSSAD) के नाम से जाना जाता है. यह इजराइल राज्य की राष्ट्रीय खुफिया एजेंसी है. यह अमन (सैन्य खुफिया) और शिन बेट (आंतरिक सुरक्षा) के साथ, इजरायली खुफिया समुदाय में मुख्य संस्थाओं में से एक है.
मोसाद खुफिया जानकारी एकत्र करने, गुप्त अभियान और आतंकवाद विरोधी कार्रवाई करता है. इसके निदेशक सीधे और सिर्फ प्रधानमंत्री को रिपोर्ट देते हैं. अनुमान है कि इसमें लगभग 7,000 लोग कार्यरत हैं, जो इसे दुनिया की सबसे बड़ी जासूसी एजेंसियों में से एक बनाता है जो दुनिया का सबसे खतरनाक खुफिया एजेंसी है.
मोसाद का गठन 13 दिसंबर 1949 को प्रधानमंत्री डेविड बेन-गुरियन ने केंद्रीय समन्वय संस्थान के रूप में किया था.
ईरान जंग के बीच इजरायल की खुफिया एजेंसी 'मोसाद' का पूरी दुनिया में चर्चा है. ये एजेंसी दुश्मन के देश में घुसकर उसकी सोच, ताकत और भविष्य को खत्म कर देती है. ईरान युद्ध में पहली मिसाइल फायर होने से काफी पहले सी 'मोसाद' ने इसकी तैयारी रच ली थी. आखिर 'मोसाद' कितना अद्भुत, अविश्वसनीय, अकल्पनीय है? देखें ये शो.
ईरान ने सोचा था कि वो सिर्फ अपने जज्बे और कुछ मिसाइलों और ड्रोन के भरोसे जंग जीत लेगा. इसी ओवर-कॉन्फिडेंस वो मात खाता जा रहा है, जब उसके एक के बाद एक बड़े नेता ताबूत में बंद होते दिखाई दे रहे हैं. ईरानी जज्बे का मुकाबला इजरायली इंटेलिजेंस यानी दुनिया के सबसे बड़े खुफिया नेटवर्क से है. वो नेटवर्क जो ईरानी नेताओं के बेडरूम तक घुसा हुआ है.
क्या अमेरिका खार्ग आइलैंड पर सैनिक उतारने जा रहा है? यूएसएस ट्रिपोली युद्धपोत सिंगापुर से ट्रैक हुआ, जिसमें 2200 मरीन्स सवार हैं. ये जंगी जहाज तेजी से मिडिल ईस्ट की ओर बढ़ रहा है. ट्रंप सरकार ईरान में बूट्स ऑन ग्राउंड का विकल्प खुला रखे हुए है. अगर मरीन्स खार्ग पर हमला करें तो स्ट्रेट ऑफ होर्मुज बंद हो सकता है.
ईरान ने मोसाद के लिए जासूसी करने के आरोप में कुरुश कीवानी को फांसी दे दी है. कीवानी पर देश की सुरक्षा से जुड़ी खूफिया जानकारी लीक करने और प्रतिबंधित इलाकों की तस्वीरें भेजने का आरोप था.
मिडिल ईस्ट जंग के 14वें दिन ईरान के नए सुप्रीम लीडर मोजतबा खामेनेई ने अमेरिका-इज़रायल को चेतावनी दी. खाड़ी क्षेत्र में मिसाइल-ड्रोन हमले जारी हैं, जबकि तेल कीमतें और विस्थापन बढ़ते जा रहे हैं.
ईरान में मोसाद और सीआईए के ऑपरेशन और खुफिया एजेंट्स की चर्चा हो रही है. ऐसे में जानते हैं कि आखिर मोसाद और अमेरिका के एजेंट वहां कैसे रहते हैं...
ईरान के सुप्रीम लीडर की मौत के बाद एक बार फिर इजरायल की खुफिया एजेंसी मोसाद की चर्चा हो रही है. ऐसे में जानते हैं कि आखिर मोसाद की पकड़ ईरान में कितने अंदर तक है...
Iran Israel War: ईरान पर इजरायल और अमेरिका के हमले जारी है. इन हमलों में ईरानी सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई की भी मौत हो गई है. तो जानते हैं खामेनेई की मौत में मोसाद का क्या रोल था...
इजरायल का सर्जिकल स्ट्राइक सिस्टम सटीकता के लिए मशहूर है क्योंकि यह मोसाद की गहरी जासूसी, AI-आधारित इंटेलिजेंस, स्टेल्थ फाइटर (F-35आई), प्रेसिजन बम (स्पाइस, GBU-28), टोमाहॉक मिसाइल और सैटेलाइट-ड्रोन सर्विलांस पर टिका है. खामेनेई पर हमला महीनों की प्लानिंग के बाद किया गया, जिसमें जमीन, हवा और अंतरिक्ष से एक साथ सामंजस्य बनाकर सटीक हमला किया गया.
मोसाद का गठन इजरायल के पहले प्रधानमंत्री डेविड बेन गुरियोन के आदेश पर 13 दिसंबर 1949 में हुआ था. मोसाद खुफिया जानकारियों को इकट्ठा कर अपने ऑपरेशंस को अंजाम देता है. इसके अधिकतर ऑपरेशंस देशहित में होते हैं.
कांग्रेस के पूर्व सांसद कुमार केतकर ने आरोप लगाया कि अमेरिका की खुफिया एजेंसी CIA और इजरायल की मोसाद ने 2014 लोकसभा चुनाव में कांग्रेस की हार में भूमिका निभाई थी. कुमार केतकर के इन बयानों ने राजनीतिक हलचल तेज कर दी है.
UNGA Summit में Palestine की चर्चा होते ही बंद हुआ 4 वर्ल्ड लीडर्स का माइक, ये तकनीकी खराबी थी या मोसाद का हाथ?
UNGA में फिलिस्तीन के समर्थन में जब-जब किसी नेता ने आवाज उठाई, उनका माइक ऑफ हो गया. यह सिलसिला इंडोनेशिया, तुर्किए, कनाडा और दक्षिण अफ्रीका जैसे देशों के नेताओं के साथ हुआ. सवाल उठने लगे कि क्या यह महज तकनीकी खराबी थी या इसके पीछे इजरायल की खुफिया एजेंसी मोसाद का हाथ है?
ईरान ने आज सुबह तीन लोगों को इजरायल के लिए जासूसी करने और हत्या की साजिश रचने के आरोप में फांसी दे दी. ईरान की ओर से जारी बयान के मुताबिक इदरीस अली, आज़ाद शोजाई और रसूल अहमद रसूल ने हत्या के लिए उपयोग में लिए जाने वाले उपकरण ईरान में लाने की कोशिश की थी. वहीं, ईरान ने 12 दिन की ईरान-इजरायल जंग के दौरान 700 लोगों को इजरायल से संबंधों के आरोप में गिरफ्तार किया है.
दुनिया के पांच देशों में गोला बारूद बरस रहा है, जिसमें ईरान और इजराइल के बीच युद्ध सबसे भीषण होता जा रहा है; ईरान ने 16 जून को इजराइल पर बड़ा हमला किया. इजराइली प्रधानमंत्री ने कहा है कि 'ईरान के परमाणु ठिकाने ध्वस्त होकर रहेंगे', जबकि अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा कि 'अब वो ईरान से बातचीत करने के मूड में बिल्कुल नहीं हैं'.
ईरान ने इस बार इजरायली खुफिया एजेंसियों अमान (Aman) और मोसाद (Mossad) के मुख्यालय को निशाना बनाया. रिपोर्ट में दावा किया गया है रविवार की आधी रात (स्थानीय समयानुसार) के करीब शुरू हुए पहले हमले के बाद जब एक फॉल्स अलार्म ने इजरायली इलाकों में घबराहट फैलाई, तब सोमवार की सुबह ईरान ने एक दूसरी मिसाइल वेव लॉन्च की. रिपोर्ट के मुताबिक, यह हमला सीधे इजरायल द्वारा कब्जा किए गए क्षेत्रों पर केंद्रित था.
ईरान की न्यूज एजेंसी के मुताबिक, मोसाद के लिए जासूसी करने के आरोपी की पहचान इस्माइल फेकरी के रूप में की गई है. बता दें कि ईरान ने इस हफ्ते जासूसी के आरोप में नौ लोगों को पकड़ा है.
मोसाद के खुफिया, ऑपरेशनल और तकनीकी विशेषज्ञों की कई साल की मेहनत के बाद यह सब सामान इजरायल लाया जा सका है. मोसाद ने वर्षों से इस मिशन के लिए इजरायल और अन्य देशों की खुफिया एजेंसियों के साथ मिलकर कई अभियान और ऑपरेशन चलाए, जिनमें कुछ दुश्मन देशों में भी किए गए.
इजरायल तख्तापलट के बाद सीरिया में मोसाद के फेमस एजेंट एली कोहेन की कब्र खोज रहा है. एली कोहेन को 1965 में सीरिया में फांसी पर लटका दिया गया था.
ईरान के कुछ और न्यूक्लियर साइंटिस्ट, हिज्बुल्लाह और हमास के कुछ और कमांडर को छोड़ दें तो पिछले चार सालों में हुई इन छह मौतों ने ईरान को हिला कर रख दिया है. वजह ये है कि ये छह की छह मौतें मामूली नहीं हैं. बल्कि ये वो छह लोग थे जिनका रुटीन, जिनकी मीटिंग, जिनके ठिकाने, जिनकी मूवमेंट इतने गुप्त रखे जाते थे.
इजरायली खुफिया एजेंसी मोसाद को लेकर तमाम दिलचस्प किस्से मौजूद हैं. ईरान के पूर्व राष्ट्रपति महमूद अहमदीनेजाद ने एक इंटरव्यू में बताया था कि कैसे मोसाद का एक एजेंट ईरान की ही एक यूनिट का प्रमुख बन गया और कई बड़े खुफिया ऑपरेशन को अंजाम दिए.