राजस्थान का जोधपुर शहर सितंबर के अंत में विश्व का ध्यान खींचने वाला है. भारतीय वायुसेना (IAF) यहां अपना सबसे बड़ा बहुराष्ट्रीय वायु युद्ध अभ्यास तरंग शक्ति-2026 आयोजित करने जा रही है. यह अभ्यास 28 सितंबर से 10 अक्टूबर तक चलेगा. पाकिस्तान की सीमा के बेहद करीब होने के कारण यह अभ्यास खास महत्व रखता है. यह ऑपरेशन सिंदूर के बाद भारत द्वारा आयोजित पहला बड़ा वायु अभ्यास होगा.
तरंग शक्ति भारतीय वायुसेना का प्रमुख बहुराष्ट्रीय अभ्यास है. इसका पहला संस्करण 2024 में दो चरणों में हुआ था – पहले तमिलनाडु के सुलूर एयरबेस पर और फिर राजस्थान में. उस समय 30 देशों की वायुसेनाएं शामिल हुई थीं. अमेरिका, जर्मनी, फ्रांस, ऑस्ट्रेलिया, UAE और सिंगापुर जैसे महत्वपूर्ण देशों ने भाग लिया. इस अभ्यास में राफेल, तेजस, मिराज-2000 जैसे आधुनिक लड़ाकू विमान शामिल हुए. अब दूसरा संस्करण और बड़ा और जटिल होगा. इसमें 30 से अधिक देशों के शामिल होने की उम्मीद है.

जोधपुर एयरबेस रणनीतिक रूप से बेहद मजबूत जगह पर है. यहां विशाल रनवे, एडवांस ट्रेनिंग फैसिलिटी और रेगिस्तानी इलाका युद्ध अभ्यास के लिए आदर्श है. राजस्थान का रेगिस्तानी इलाका वास्तविक युद्ध जैसे माहौल देता है. पाकिस्तान सीमा के निकट होने से यह अभ्यास संदेश भी देता है कि भारत अपनी सीमाओं की सुरक्षा में पूरी तरह तैयार है. ऑपरेशन सिंदूर के बाद यह अभ्यास भारत की आक्रामक क्षमता और सहयोगी देशों के साथ समन्वय को और मजबूत करेगा.
अभ्यास में क्या होगा? वैज्ञानिक और रणनीतिक पहलू
इस अभ्यास में जटिल वायु युद्ध अभ्यास होंगे. इसमें हवा में ईंधन भरना, इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर, सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइलों का इस्तेमाल और बहु-देशीय समन्वय शामिल होगा. भारतीय वायुसेना अपने विमान – राफेल, तेजस, मिराज-2000, Su-30MKI और AWACS जैसे फोर्स मल्टीप्लायर्स तैनात करेगी.
अन्य देश भी अपने आधुनिक विमान लाएंगे. इससे ‘इंटरऑपरेबिलिटी’ यानी अलग-अलग देशों की सेनाओं के बीच समन्वय बढ़ेगा. वैज्ञानिक रूप से यह अभ्यास रडार, सेंसर, संचार प्रणालियों और AI आधारित टारगेटिंग पर काम करेगा. आज के युद्ध में ड्रोन, हाइपरसोनिक मिसाइलें और साइबर हमले आम हो गए हैं. तरंग शक्ति इन नई चुनौतियों से निपटने की तैयारी भी करेगी.
2024 के तरंग शक्ति का वीडियो नीचे देखिए...
यह अभ्यास भारत की विश्व मित्र नीति को मजबूत करता है. क्वाड, इंडो-पैसिफिक और अन्य रणनीतिक साझेदारियों में भारत की भूमिका बढ़ रही है. अमेरिका, फ्रांस, ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों के साथ नियमित अभ्यास से भारत की वायुसेना विश्व स्तर की बन रही है. यह अभ्यास सिर्फ प्रशिक्षण नहीं, बल्कि रणनीतिक साझेदारी का प्रतीक भी है. चीन और पाकिस्तान जैसे देशों को साफ संदेश जाएगा कि भारत अकेला नहीं लड़ रहा है.
पहले संस्करण से सीख और उम्मीदें
2024 के पहले संस्करण में कई नई तकनीकें आजमाई गईं. पायलटों ने एक-दूसरे की रणनीतियां सीखीं. इस बार पैमाना बड़ा होगा. ज्यादा देश, ज्यादा विमान और ज्यादा जटिल कंडिशन रखी जाएगी. इससे भारतीय पायलटों को अंतरराष्ट्रीय स्तर का अनुभव मिलेगा. साथ ही, भारत अपनी मेक इन इंडिया क्षमताएं जैसे तेजस विमान को दुनिया के सामने प्रदर्शित कर सकेगा.
तरंग शक्ति भारत को रक्षा निर्यात बढ़ाने में भी मदद करेगी. जब दूसरे देश भारतीय उपकरणों को करीब से देखेंगे तो खरीदने की संभावना बढ़ेगी. अभ्यास के दौरान पेशेवर चर्चाएं, कार्यशालाएं और सांस्कृतिक कार्यक्रम भी होंगे, जो सेनाओं के बीच विश्वास बढ़ाएंगे. इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में बढ़ते तनाव के बीच यह अभ्यास शांति और स्थिरता बनाए रखने का संदेश भी देगा.

इतने बड़े अभ्यास में सुरक्षा, लॉजिस्टिक्स और मौसम की चुनौतियां रहती हैं. जोधपुर में सितंबर-अक्टूबर का मौसम आमतौर पर साफ रहता है, जो उड़ानों के लिए अच्छा है. भारतीय वायुसेना पूरी तैयारी में जुटी है. देशों की अंतिम संख्या और भाग लेने वाले विमानों की पुष्टि जल्द हो जाएगी.
जोधपुर में तरंग शक्ति-2026 भारत की बढ़ती वायुसेना क्षमता, अंतरराष्ट्रीय सहयोग और रणनीतिक परिपक्वता को दिखाएगा. ऑपरेशन सिंदूर के बाद यह अभ्यास पूरे विश्व को संदेश देगा कि भारत सीमाओं की रक्षा करने के साथ-साथ वैश्विक सुरक्षा में भी अपनी भूमिका निभाने को तैयार है. यह अभ्यास न सिर्फ पायलटों को तैयार करेगा, बल्कि भारत को दुनिया के सबसे मजबूत वायु शक्ति केंद्रों में से एक के रूप में स्थापित करेगा.