विदेश से एमबीबीएस की पढ़ाई करने के बाद फर्जी एफएमजी सर्टिफिकेट के जरिए भारत में डॉक्टर बनने के मामले में राजस्थान स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (एसओजी) ने एक और आरोपी डॉक्टर को गिरफ्तार किया है. एसओजी की जांच में सामने आया है कि आरोपी ने कई बार एफएमजी स्क्रीनिंग परीक्षा में असफल होने के बाद 24 लाख रुपये देकर फर्जी सर्टिफिकेट बनवाया और उसी के आधार पर इंटर्नशिप करने के साथ राजस्थान मेडिकल काउंसिल में पंजीकरण भी करा लिया.
एसओजी के अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक विशाल बंसल ने बताया कि फर्जी एफएमजी स्क्रीनिंग परीक्षा प्रमाणपत्रों के आधार पर राजस्थान मेडिकल काउंसिल में पंजीकरण कराने के मामले में एसओजी थाना जयपुर में 4 फरवरी 2026 को मामला दर्ज किया गया था. इस मामले में धोखाधड़ी, जालसाजी, फर्जी दस्तावेज तैयार करने और आपराधिक साजिश समेत कई धाराओं में जांच की जा रही है.
जांच में खुला बड़ा नेटवर्क
एसओजी की जांच के दौरान सामने आया कि विदेश से एमबीबीएस करने वाले कई छात्र भारत में मेडिकल प्रैक्टिस करने के लिए जरूरी एफएमजी स्क्रीनिंग परीक्षा पास नहीं कर सके थे. इसके बाद उन्होंने भानाराम नाम के व्यक्ति के जरिए फर्जी एफएमजी सर्टिफिकेट बनवाए.
आरोप है कि इन फर्जी प्रमाणपत्रों के आधार पर राजस्थान मेडिकल काउंसिल के कुछ कर्मचारियों और अधिकारियों की मिलीभगत से इन लोगों का पंजीकरण कराया गया. इसके बाद कई लोगों ने राजस्थान के अलग-अलग मेडिकल कॉलेजों में इंटर्नशिप भी पूरी कर ली.
100 से ज्यादा संदिग्धों की पहचान
एसओजी के महानिरीक्षक अजयपाल लाम्बा, उप महानिरीक्षक भुवन भूषण यादव और पुलिस अधीक्षक कुंदन कंवरिया के निर्देशन में चल रही जांच में अब तक विदेश से एमबीबीएस करने वाले 100 से अधिक संदिग्धों की पहचान की जा चुकी है. इस मामले में राजस्थान मेडिकल काउंसिल के तत्कालीन रजिस्ट्रार समेत अब तक कुल 28 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है.
कजाकिस्तान से किया था MBBS
इस मामले में गिरफ्तार आरोपी की पहचान डीग जिले के गोपालगढ़ निवासी 27 वर्षीय चरण सिंह के रूप में हुई है. एसओजी के अनुसार, चरण सिंह ने वर्ष 2017 से 2022 के बीच कजाकिस्तान के अल्माटी विश्वविद्यालय से एमबीबीएस की पढ़ाई की थी. भारत लौटने के बाद उसने राष्ट्रीय परीक्षा बोर्ड (एनबीई) द्वारा आयोजित एफएमजी स्क्रीनिंग परीक्षा कई बार दी, लेकिन वह सफल नहीं हो सका.
जांच में सामने आया कि परीक्षा में सफल नहीं होने के बाद चरण सिंह ने कजाकिस्तान में अपने साथ पढ़ने वाले नफीस खान के माध्यम से 24 लाख रुपये देकर फर्जी एफएमजी सर्टिफिकेट तैयार कराया. आरोप है कि इसी फर्जी प्रमाणपत्र के आधार पर उसने राजकीय मेडिकल कॉलेज धौलपुर में इंटर्नशिप की.
नफीस खान ने भी बनवाया था फर्जी सर्टिफिकेट
एसओजी के अनुसार, आरोपी नफीस खान ने भी अपना फर्जी एफएमजी सर्टिफिकेट तैयार कराया था. उसने जून 2023 की एफएमजी परीक्षा का कूटरचित प्रमाणपत्र बनवाकर इंटर्नशिप पूरी की और मई 2024 में राजस्थान मेडिकल काउंसिल के तत्कालीन रजिस्ट्रार डॉ. राजेश शर्मा की कथित मिलीभगत से अपना प्रोविजनल रजिस्ट्रेशन भी हासिल कर लिया.
पहले भी हो चुकी हैं कई गिरफ्तारियां
एसओजी ने बताया कि इस मामले में पहले ही फर्जी प्रमाणपत्र के आधार पर इंटर्नशिप और पंजीकरण कराने वाले विदेश से एमबीबीएस करने वाले 23 डॉक्टरों को गिरफ्तार किया जा चुका है. इसके अलावा राजस्थान मेडिकल काउंसिल के तत्कालीन रजिस्ट्रार डॉ. राजेश शर्मा, यूडीसी अखिलेश माथुर, एलडीसी फरहान हसन, मुख्य आरोपी भानाराम माली और एक दलाल को भी गिरफ्तार किया जा चुका है.
20 से 30 लाख रुपये में होता था पूरा खेल
जांच एजेंसी के मुताबिक मुख्य आरोपी भानाराम माली, शुभम गुर्जर और इन्द्रराज गुर्जर फर्जी एफएमजी सर्टिफिकेट तैयार कराने और राजस्थान मेडिकल काउंसिल में पंजीकरण कराने के लिए प्रत्येक शख्स से 20 से 30 लाख रुपये तक वसूलते थे.
एसओजी का कहना है कि मामले की जांच अभी जारी है. गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ के आधार पर पूरे नेटवर्क और इसमें शामिल अन्य लोगों की भूमिका की जांच की जा रही है. अधिकारियों का मानना है कि जांच आगे बढ़ने के साथ इस फर्जीवाड़े से जुड़े और भी अहम खुलासे हो सकते हैं.