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यही है ईरान का 'रेड जोन' जहां तबाही मचाने की तैयारी में है अमेरिका, Map से समझें

ईरान के रणनीतिक द्वीप खार्ग, किश, टुंब और केशम इस समय अमेरिका-ईरान युद्ध के 'रेड जोन' बन चुके हैं. तेल निर्यात रोकने और ईरान के अंडरग्राउंड मिसाइल सिटी को नष्ट करने के लिए अमेरिका यहां भीषण हमले कर रहा है.

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इन पांच द्वीपों पर अमेरिका टारगेट करके ईरान की हालत पस्त करना चाहता है. (Photo: ITG- Map not to scale. For representational purposes only.)
इन पांच द्वीपों पर अमेरिका टारगेट करके ईरान की हालत पस्त करना चाहता है. (Photo: ITG- Map not to scale. For representational purposes only.)

फारस की खाड़ी और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज दुनिया के सबसे संवेदनशील और रणनीतिक जलमार्गों में से एक हैं. साल 2026 में अमेरिका और ईरान के बीच शुरू हुए भीषण युद्ध ने इस पूरे क्षेत्र को एक बार फिर बारूद के ढेर पर ला खड़ा किया है. अमेरिकी सेना और विशेष रूप से ट्रंप प्रशासन ने ईरान के इस समुद्री रक्षा कवच को उसका 'रेड जोन' घोषित कर दिया है. 

इस रेड जोन के केंद्र में ईरान के चार सबसे महत्वपूर्ण द्वीप हैं- खार्ग, किश, टुंब और केशम. ये चारों द्वीप केवल भूगोल का हिस्सा नहीं हैं, बल्कि ये ईरान की अर्थव्यवस्था, उसकी सैन्य शक्ति और अमेरिकी नौसेना को रोकने की उसकी पूरी रणनीति की रीढ़ की हड्डी हैं. 

हालिया हफ्तों में हुए हवाई हमलों और अमेरिकी नौसैनिक नाकेबंदी ने इस बात को साबित कर दिया है कि अमेरिका ईरान के इन मजबूत किलों को पूरी तरह तबाह करने की तैयारी कर चुका है, जिससे मध्य पूर्व की भू-राजनीति हमेशा के लिए बदल सकती है.   

खाड़ी का 'रेड जोन' और इसके रणनीतिक मायने

ईरान की लगभग 1800 किलोमीटर लंबी दक्षिणी तटरेखा के सामने फारस की खाड़ी में बिखरे ये द्वीप ईरान की एसिमेट्रिक वॉरफेयर स्ट्रैटेजी का मुख्य आधार हैं. अमेरिका ने इन्हें 'रेड जोन' इसलिए घोषित किया है क्योंकि यहां से ईरान वैश्विक कच्चे तेल के व्यापार को नियंत्रित कर सकता है. 

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स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से होकर दुनिया के कुल तेल और प्राकृतिक गैस निर्यात का लगभग पांचवां हिस्सा गुजरता है. ईरान ने इन द्वीपों पर अपने मिसाइल लॉन्च पैड, रडार सिस्टम, एंटी-शिप मिसाइलें और ड्रोन बेस तैनात कर रखे हैं. यदि अमेरिका इन द्वीपों पर अपनी पकड़ मजबूत कर लेता है या इन्हें पूरी तरह तबाह कर देता है, तो ईरान की पूरी नौसैनिक क्षमता पंगु हो जाएगी. 

यही कारण है कि अमेरिकी सैन्य विश्लेषकों का मानना है कि ईरान के खिलाफ युद्ध जीतने के लिए इस 'रेड जोन' पर नियंत्रण पाना या इसे पूरी तरह से निष्क्रिय करना अमेरिकी पेंटागन की पहली प्राथमिकता है.   

खार्ग द्वीप: ईरान की आर्थिक लाइफलाइन

खार्क द्वीप को ईरान के आर्थिक साम्राज्य का धड़कता हुआ दिल माना जाता है. ईरान के मुख्य भूभाग से लगभग 30 किलोमीटर दूर उत्तर-पश्चिमी खाड़ी में स्थित यह छोटा सा द्वीप ईरान के कुल कच्चे तेल के निर्यात का लगभग 90 प्रतिशत हिस्सा संभालता है. यहां ईरान के पास विशाल तेल स्टोरेज टैंक हैं जिनकी क्षमता 3 करोड़ बैरल से अधिक तेल सुरक्षित रखने की है.

American Target Iran Red Zone

प्रमुख तेल क्षेत्रों से पाइपलाइनों का एक विशाल नेटवर्क सीधे खार्क द्वीप के जेटी और लोडिंग टर्मिनलों से जुड़ा हुआ है, जहां से चीनी और अन्य एशियाई देशों के बड़े टैंकरों में तेल भरा जाता है. अमेरिका इस बात को अच्छी तरह जानता है कि अगर खार्ग द्वीप के बुनियादी ढांचे को नष्ट कर दिया जाए, तो ईरान की अर्थव्यवस्था चरमरा जाएगी. 1980 के दशक में ईरान-इराक युद्ध के दौरान भी द्वीप पर इराकी वायु सेना द्वारा भारी बमबारी की गई थी.

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अब 2026 के इस ताजा संघर्ष में अमेरिकी सेना ने इस द्वीप पर मौजूद सैन्य और रडार ठिकानों को अपना मुख्य निशाना बनाया है. हाल ही में अमेरिकी राष्ट्रपति ने इस द्वीप पर कब्जा करने या इसकी तेल निर्यात क्षमता को पूरी तरह से बंद करने की धमकी दी है, जिससे दुनिया भर में कच्चे तेल की कीमतें तेजी से बढ़ रही हैं.

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केशम द्वीप: ईरान का 'मिसाइल शहर' और सैन्य गढ़

केशम फारस की खाड़ी का सबसे बड़ा द्वीप है. यह सीधे स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के मुहाने पर स्थित है. भौगोलिक रूप से यह द्वीप बहरीन से भी लगभग दोगुना बड़ा है. ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने इस द्वीप को एक अभेद्य सैन्य किले में बदल दिया है.

खुफिया रिपोर्टों के अनुसार, केशम द्वीप के नीचे ईरान ने एक विशाल अंडरग्राउंड मिसाइल सिटी बनाई है. इस भूमिगत सुरंग नेटवर्क के भीतर सैकड़ों एंटी-शिप मिसाइलें, कम दूरी की बैलिस्टिक मिसाइलें, समुद्री बारूदी सुरंगें और रिमोट से चलने वाले आत्मघाती ड्रोन छिपे हुए हैं.   

American Target Iran Red Zone

IRGC ने यहां एक समर्पित यूएवी (ड्रोन) बेस और रनवे भी स्थापित किया है. केशम द्वीप की इसी रणनीतिक ताकत के कारण अमेरिकी सेना ने हाल ही में इस पर मिसाइलें दागी हैं. अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) का मानना है कि जब तक केशम द्वीप पर ईरान का कब्जा है, तब तक वह खाड़ी से गुजरने वाले किसी भी अमेरिकी या पश्चिमी व्यापारिक जहाज को मिनटों में नष्ट कर सकता है. हाल ही में अमेरिकी हमलों में केशम के रडार नेटवर्क और तटीय रक्षा प्रणालियों को निशाना बनाया गया है ताकि इस द्वीप की आक्रामक क्षमता को कम किया जा सके.   

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टुंब और किश द्वीप: स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के प्रहरी

ग्रेटर टुंब, लेसर टुंब और किश द्वीप इस 'रेड जोन' के अन्य महत्वपूर्ण हिस्से हैं. टुंब द्वीप समूह ऐतिहासिक रूप से संयुक्त अरब अमीरात (UAE) और ईरान के बीच विवादित रहे हैं, लेकिन वर्तमान में इन पर ईरान का वास्तविक प्रशासनिक और सैन्य नियंत्रण है.

ग्रेटर टुंब द्वीप केवल दो मील चौड़ा है, लेकिन स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के ठीक मुहाने पर होने के कारण इसकी स्ट्रैटजिक वैल्यू बहुत ज्यादा है. हाल ही में अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने ग्रेटर टुंब पर 90 मिनट तक लगातार हवाई हमले किए हैं, जिसमें ईरान के क्रूज मिसाइल बंकरों और तटीय तोपखानों को भारी नुकसान पहुंचाया गया है.   

American Target Iran Red Zone
(Map not to scale. For representational purposes only)

वहीं दूसरी ओर, किश द्वीप अपनी खूबसूरत वास्तुकला, पर्यटन और मुक्त व्यापार क्षेत्र के लिए जाना जाता रहा है, लेकिन युद्ध के इस दौर में इसे भी ईरान ने अपने सैन्य अभियानों के लिए एक अग्रिम रसद डिपो में बदल दिया है. किश और टुंब द्वीपों से चलने वाली ईरान की छोटी लेकिन बेहद तेज गति वाली मिसाइल नावें अमेरिकी नौसेना के बड़े युद्धपोतों के लिए हमेशा से एक बड़ा सिरदर्द रही हैं.

अमेरिका का इरादा इन द्वीपों पर मौजूद छोटे नौसैनिक ठिकानों को पूरी तरह ध्वस्त करना है ताकि खाड़ी में जहाजों की आवाजाही को पूरी तरह से सुरक्षित बनाया जा सके.

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अमेरिका और ईरान का टकराव: 2026 का युद्ध और वैश्विक संकट

2026 में अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच का यह संघर्ष ऑपरेशन एपिक फ्यूरी के शुरू होने के बाद से एक नए और बेहद हिंसक दौर में पहुंच गया है. जून 2026 में हुए एक अस्थायी संघर्ष विराम समझौते के बावजूद दोनों देशों के बीच अविश्वास की खाई इतनी गहरी थी कि यह समझौता कुछ ही हफ्तों में टूट गया.

ईरान द्वारा स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में अमेरिकी और पश्चिमी व्यापारिक जहाजों पर लगातार किए गए ड्रोन हमलों के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने युद्ध विराम की समाप्ति की घोषणा कर दी. इसके जवाब में अमेरिकी नौसेना ने ईरान के बंदरगाहों की पूर्ण नाकेबंदी कर दी है. अमेरिकी अधिकारियों का आरोप है कि ईरान इस 'रेड जोन' के द्वीपों से अंतरराष्ट्रीय शिपिंग लेन को बाधित कर रहा है. जहाजों से टैक्स वसूलने की कोशिश कर रहा है.

American Target Iran Red Zone

वर्तमान में स्थिति इतनी खराब हो चुकी है कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से जहाजों की आवाजाही लगभग 94% तक गिर चुकी है. कच्चे तेल की कीमतें आसमान छू रही हैं, जिससे वैश्विक स्तर पर महंगाई का एक नया दौर शुरू होने का खतरा पैदा हो गया है. इस महायुद्ध में रूस और चीन की भूमिका भी महत्वपूर्ण है, जो प्रतिबंधों के बावजूद ईरान को महत्वपूर्ण सैन्य कलपुर्जे और ईंधन तकनीक की गुप्त रूप से आपूर्ति कर रहे हैं.   

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इस तबाही के वैश्विक परिणाम

ईरान का यह 'रेड जोन'— खार्ग, किश, टुंब और केशम द्वीप इस समय दुनिया का सबसे बड़ा फ्लैशपॉइंट (तनाव का केंद्र) बन चुका है. अमेरिका इन द्वीपों को पूरी तरह से नष्ट करके ईरान की स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को बंद करने की क्षमता को समाप्त करना चाहता है. लेकिन ईरान के लिए ये द्वीप उसके अस्तित्व की अंतिम रक्षा पंक्ति हैं. 

यदि अमेरिका इन द्वीपों पर पूरी तरह हावी हो जाता है, तो ईरान का तेल निर्यात और उसकी सैन्य धमक दोनों इतिहास का हिस्सा बनकर रह जाएंगे. हालांकि, इस 'रेड जोन' में होने वाली कोई भी बड़ी तबाही केवल ईरान तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि इसके वैश्विक आर्थिक परिणाम पूरी दुनिया को भुगतने होंगे.

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