खार्ग द्वीप (Kharg) फारसी खाड़ी में स्थित ईरान का एक महाद्वीपीय द्वीप है. यह द्वीप ईरान के तट से 25 किलोमीटर (16 मील) दूर और होर्मुज जलडमरूमध्य से 660 किलोमीटर (410 मील) उत्तर-पश्चिम में स्थित है. पास के तटीय बुशेहर प्रांत द्वारा प्रशासित, खार्ग द्वीप ईरान के 90 फीसदी तक तेल उत्पादों के निर्यात के लिए एक समुद्री बंदरगाह प्रदान करता है. साथ ही 30 मिलियन बैरल (5 मिलियन क्यूबिक मीटर) तक तेल के भंडारण की सुविधा भी देता है.
इसे पहली बार 1960 के दशक में मोहम्मद रजा पहलवी के शासनकाल में, अमेरिकी तेल कंपनी अमोको के साथ साझेदारी में एक तेल टर्मिनल के रूप में विकसित किया गया था. मार्च और अप्रैल 2026 में ईरान युद्ध के दौरान, संयुक्त राज्य अमेरिका द्वारा इस द्वीप पर स्थित सैन्य ठिकानों पर बमबारी की गई थी.
यह द्वीप कई अपतटीय तेल क्षेत्रों के करीब स्थित है, जिनमें फरीदुन, डेरियस, साइरस और अर्दाशिर क्षेत्र शामिल हैं. खार्ग शहर और जजारेह-ये खार्क लाइटहाउस इसी द्वीप पर स्थित हैं, जहां ताजे पानी की अपनी आपूर्ति भी मौजूद है. 1960 के दशक में एक प्रमुख तेल टर्मिनल के रूप में विकसित होने से पहले, ईरानी लेखक जलाल अल-ए-अहमद ने इस द्वीप को मशहूर तौर पर "फारसी खाड़ी का अनाथ मोती" (The Orphan Pearl of the Persian Gulf) कहा था.
इस द्वीप पर कई महत्वपूर्ण पुरातात्विक स्थल मौजूद हैं, जिनमें एक ईसाई मठ के खंडहर भी शामिल हैं, जो संभवतः 7वीं शताब्दी जितने पुराने हैं. यहां कब्रें, मंदिर और कीलाक्षर (cuneiform) लिपि में लिखे एकेमेनिड शिलालेख भी हैं, जिनका काल 550 से 330 ईसा पूर्व के बीच का है. यह सदियों से एक महत्वपूर्ण व्यापारिक केंद्र रहा है; 16वीं से 17वीं शताब्दी तक इस पर पुर्तगाली साम्राज्य का और 18वीं शताब्दी में डच औपनिवेशिक साम्राज्य का नियंत्रण रहा. इस द्वीप के पहले चित्रण 16वीं शताब्दी के पुर्तगाली मानचित्रों में मिलते हैं, जिन्हें फर्नाओ वाज दौराडो, लोपो होमेम और डियोगो होमेम ने बनाया था.
ईरान का तेल बाजार अमेरिकी प्रतिबंधों और होर्मुज स्ट्रेट में नाकेबंदी के कारण गंभीर संकट में है. खार्ग द्वीप पर तेल भंडारण क्षमता लगभग पूरी भर चुकी है, जिससे ईरान को उत्पादन रोकने का खतरा है. इस बीच ईरान अपने 30 साल पुराने टैंकर को फ्लोटिंग स्टोरेज के रूप में फिर से एक्टिव कर रहा है.
ईरान का तेल सेक्टर इस समय गंभीर संकट से गुजर रहा है, जहां उत्पादन जारी है लेकिन निर्यात बाधित होने से भंडारण क्षमता तेजी से भर रही है. होर्मुज में तनाव और अमेरिकी प्रतिबंधों ने स्थिति को और जटिल बना दिया है. अब फ्लोटिंग स्टोरेज का सहारा लिया जा रहा है, जो केवल अस्थायी राहत है. यह संकट ईरान की अर्थव्यवस्था और वैश्विक तेल बाजार दोनों पर असर डाल सकता है
अमेरिका ने इसी हफ्ते ईरान के बंदरगाहों की नाकाबंदी की है. लेकिन ईरान पर इस नाकाबंदी का कोई खास असर नहीं दिख रहा है. खबर है कि ईरान के तीन जहाज खार्ग द्वीप से तेल लेकर होर्मुज पार कर गए हैं.
पाकिस्तान में वार्ता फेल होने के बाद डोनाल्ड ट्रंप का रुख और आक्रामक हो गया है. लेकिन उनकी स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को बंद करने की धमकी सिर्फ ईरान ही नहीं, पूरी दुनिया के लिए बड़ा झटका बन सकती है. ट्रंप के इस दांव से मिडिल ईस्ट में तनाव और भड़क सकता है. तेल-गैस के दाम बेकाबू हो सकते हैं.
ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने खार्ग द्वीप पर हमले के बाद चेतावनी देते हुए कहा कि अब संयम खत्म हो चुका है. आईआरजीसी ने चेताते हुए कहा कि अगर हमले ऐसे ही जारी रहे तो अमेरिका और उनके सहयोगी देशों के इन्फ्रास्ट्रक्चर को टारगेट किया जा सकता है.
ईरान के खाड़ी में मौजूद आईलैंड अब सिर्फ जमीन के टुकड़े नहीं, बल्कि उसके लिए रणनीतिक हथियार बन चुके हैं. होर्मुज, खार्ग, अबू मूसा जैसे द्वीप तेल सप्लाई, सैन्य ताकत और समुद्री नियंत्रण के केंद्र हैं. जंग के बीच इन आईलैंड्स की अहमियत और बढ़ गई है, जो वैश्विक शक्ति संतुलन को प्रभावित कर रहे हैं.
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चेतावनी दी है कि अगर ईरान युद्ध खत्म करने के लिए डील नहीं करता तो खार्ग द्वीप को पूरी तरह नष्ट कर देंगे. यह छोटा द्वीप ईरान का सबसे बड़ा तेल निर्यात केंद्र है, जहां से 90% तेल बाहर जाता है. ट्रंप इसे कब्जे में लेने या तबाह करने की धमकी दे रहे हैं.
डोनाल्ड ट्रंप कह रहे हैं कि यदि ईरान ने उनकी शर्तें नहीं मानीं, तो वे खार्ग आइलैंड और उसके ऑयल फील्डस को तबाह कर देंगे. इसे ट्रंप की कोरी धमकी नहीं माना जाना चाहिये. क्योंकि, उनके करीब दस हजार मरीन्स ईरान के खार्ग आइलैंड और आसपास के तटीय इलाकों पर कब्जे के लिए तैनात कर दिए गए हैं.
अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा कि समंदर के खारे पानी को पीने लायक बनाने के लिए ईरान के जो डिसेलिनेशन प्लांट हैं. हम उन्हें भी निशाना बनाएंगे. ट्रंप ने कहा कि अभी तक इन संयंत्रों को हमने जानबूझकर टारगेट नहीं किया है लेकिन जल्द ही इन्हें भी निशाना बनाया जाएगा.
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि वह ईरान का तेल हासिल करना चाहते हैं. इसके साथ ही ट्रंप ने खार्ग द्वीप पर कब्ज़े का भी इशारा किया है. बढ़ते तनाव के बीच ईरान-पाकिस्तान टैंकरों और होर्मुज़ स्ट्रेट से तेल आपूर्ति पर बातचीत जारी है.
मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच मोहम्मद बाकिर कालिबफ ने अमेरिका को चेतावनी दी कि ईरान झुकेगा नहीं और जंग जीत के बिना खत्म नहीं होगी. उन्होंने अमेरिका पर बातचीत की आड़ में हमले की तैयारी का आरोप लगाया. इस बीच पेंटागन ईरान में संभावित सैन्य कार्रवाई की योजना बना रहा है. ईरान ने साफ कहा है कि किसी भी हमले का कड़ा जवाब दिया जाएगा, जिससे बड़े युद्ध का खतरा बढ़ गया है.
ईरान- अमेरिका में चले रही जंग के बीच तेजी से बदलते हालात बड़े टकराव की ओर इशारा कर रहे हैं. सामरिक ठिकानों, ऊर्जा मार्गों और परमाणु ढांचे को लेकर तनाव चरम पर है. कूटनीति और सैन्य दबाव साथ-साथ चल रहे हैं, जिससे क्षेत्रीय स्थिरता, वैश्विक बाजार और सुरक्षा समीकरण पर दूरगामी प्रभाव पड़ सकता है.
Donald Trump ने खार्ग द्वीप पर किए गए पिछले हमले के बाद कहा था कि अमेरिका ने जानबूझकर वहां मौजूद तेल पाइपलाइनों को निशाना नहीं बनाया था, लेकिन इसके बाद ये चेतावनी भी दी थी कि आगे ऐसा किया जा सकता है.
ईरान ने खार्ग आइलैंड की सुरक्षा को लेकर बड़े कदम उठाए हैं, जहां से उसके करीब 90 फीसदी तेल निर्यात होता है. रिपोर्ट्स के मुताबिक अमेरिका के संभावित ग्राउंड ऑपरेशन की आशंका में ईरान ने द्वीप पर एक्स्ट्रा सैनिक, एयर डिफेंस सिस्टम और माइंस तैनात कर दी हैं. यह कदम होर्मुज संकट के बीच उठाया गया है.
ट्रंप का वॉर प्लान होर्मुज की संकरे रास्ते में आकर फंस गया है. ये एक ऐसी स्थिति है जहां अभी जंग में ईरान खड़ा दिखता है. क्या ईरान को कमजोर करने के लिए ट्रंप होर्मुज, खार्ग और चाबहार में से किसी एक 'कमजोर नस' को दबाएंगे.
पेंटागन 82nd एयरबोर्न डिविजन के हजारों पैराट्रूपर्स को मिडिल ईस्ट भेज सकता है. मिडिल ईस्ट में 4500 मरीन्स पहले से तैनात हैं. रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यह तैनाती ईरान पर जमीनी हमले की तैयारी का संकेत है. सबसे संभावित लॉन्च पॉइंट चाबहार पोर्ट है. पाकिस्तान का रोल बहुत सीमित रहेगा.