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पत्नी पर हुआ शक तो घर में लगा दिया रिकॉर्डर...,फिर जो रिकॉर्ड हुआ, उसे लेकर पति पहुंच गया कोर्ट

अहमदाबाद में 27 साल पुराने वैवाहिक रिश्ते में कथित बेवफाई, धमकी और मानसिक प्रताड़ना का मामला अदालत तक पहुंच गया है. कारोबारी पति का आरोप है कि पत्नी और उसके जिम फ्रेंड ने उसे झूठे मुकदमे में फंसाने और जान से मारने की धमकी दी. कोर्ट ने साइबर क्राइम पुलिस को 30 दिन में जांच रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए हैं.

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पत्नी पर हुआ शक तो घर में लगा दिया रिकॉर्डर, फिर खुला ऐसा राज (Photo: representational image)
पत्नी पर हुआ शक तो घर में लगा दिया रिकॉर्डर, फिर खुला ऐसा राज (Photo: representational image)

गुजरात के अहमदाबाद में 27 साल पुराने वैवाहिक रिश्ते में उस वक्त दरार आ गई, जब कारोबारी पति को अपनी पत्नी के बदले हुए व्यवहार पर शक होने लगा. पति का आरोप है कि पत्नी अक्सर फोन पर व्यस्त रहती थी, उसके तौर-तरीकों में अचानक बदलाव आ गया था और उसकी गतिविधियां भी संदिग्ध लगने लगी थीं. सच्चाई जानने के लिए उसने घर में गुप्त ऑडियो रिकॉर्डिंग सिस्टम लगवा दिया. रिकॉर्डिंग में सामने आई सच्चाई से पति के पांव तले जमीन खिसक गई और वह सीधे पहले पुलिस और फिर अदालत ही पहुंच गया.

रिकॉर्डिंग में मिली कथित बातचीत के आधार पर पति ने पत्नी और उसके जिम फ्रेंड पर लव अफेयर, धमकी और मानसिक प्रताड़ना के आरोप लगाते हुए अदालत का दरवाजा खटखटाया है.

शिकायत के अनुसार, फरवरी 2025 में कारोबारी ने परिवार की बचत और जेवर सुरक्षित रखने के लिए पत्नी के नाम बैंक लॉकर खुलवाया था. इसी दौरान पत्नी ने जिम जाना शुरू किया, जहां उसकी मुलाकात एक व्यक्ति से हुई. पति का आरोप है कि समय के साथ दोनों के बीच नजदीकियां बढ़ती गईं और उसकी गैरमौजूदगी में वह व्यक्ति घर भी आने लगा. दोनों के बीच लंबे समय तक फोन और वीडियो कॉल पर बातचीत होने लगी.

पति का कहना है कि पत्नी के व्यवहार में आए बदलाव के बाद  उसने घर में एक ऑडियो रिकॉर्डिंग सिस्टम लगवाया. कारोबारी का दावा है कि रिकॉर्डिंग में पत्नी और उसके कथित प्रेमी की बातचीत दर्ज हुई, जिससे उनके संबंधों और राजस्थान सीमा पर कार में रोमांस की जानकारियां सामने आईं.

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शिकायत में यह भी कहा गया है कि बैंक लॉकर में रखे गहनों और नकदी को लेकर आशंका पैदा होने पर उसने सिटी सिविल कोर्ट से स्टे ऑर्डर लेकर लॉकर सीज करा दिया. इसके बाद कथित प्रेमी ने फोन कर ऑडियो रिकॉर्डिंग सौंपने, समझौता करने और इनकार करने पर जान से मारने और एक करोड़ रुपये के झूठे कर्ज का मुकदमा दर्ज कराने की धमकी दी.

कारोबारी का कहना है कि इस पूरे घटनाक्रम से उसकी सामाजिक प्रतिष्ठा प्रभावित हुई और वह डिप्रेशन का शिकार हो गया. उसने पहले पुलिस और साइबर क्राइम शाखा में शिकायत दी, लेकिन कार्रवाई नहीं होने पर एडिशनल चीफ ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट कोर्ट का रुख किया.

अदालत ने मामले को प्रथम दृष्टया गंभीर मानते हुए साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन को सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की संबंधित धाराओं और भारतीय न्याय संहिता (BNS) के प्रावधानों के तहत शिकायत की जांच कर 30 दिनों के भीतर रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया है. फिलहाल मामले की जांच जारी है और आरोपों की पुष्टि जांच रिपोर्ट के बाद ही हो सकेगी.
 

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